Consumer Rights

CCPA ने Zepto और BookMyShow पर डार्क पैटर्न को लेकर कार्रवाई की
Zepto और BookMyShow पर CCPA की बड़ी कार्रवाई, डार्क पैटर्न को लेकर लगा जुर्माना

नई दिल्ली, एजेंसियां। ऑनलाइन खरीदारी और टिकट बुकिंग के दौरान ग्राहकों को प्रभावित करने वाली भ्रामक डिजिटल प्रक्रियाओं के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Zepto, BookMyShow समेत नौ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कुल करीब 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कार्रवाई में कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए गए कथित ‘डार्क पैटर्न’ को लेकर उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन का मामला सामने आया है।   Zepto पर ₹7 लाख की पेनल्टी     त्वरित डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zepto पर CCPA ने ₹7 लाख का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण की कार्रवाई में ड्रिप प्राइसिंग और यूजर्स को उनकी स्पष्ट सहमति के बिना सदस्यता से जोड़ने जैसे मामलों को लेकर आपत्ति जताई गई।   ड्रिप प्राइसिंग में ग्राहक को शुरुआत में एक कीमत दिखाई जाती है, लेकिन खरीदारी की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर अतिरिक्त शुल्क जुड़ते जाते हैं। इससे ग्राहक को शुरुआत में दिखाई गई कीमत और अंतिम भुगतान राशि के बीच अंतर का सामना करना पड़ सकता है।   BookMyShow पर ₹2 लाख का जुर्माना     ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म BookMyShow पर CCPA ने ₹2 लाख की पेनल्टी लगाई है। कंपनी के मामले में प्राधिकरण ने ‘बास्केट स्नीकिंग’ (Basket Sneaking) से जुड़े व्यवहार को लेकर कार्रवाई की।   इस तरह के डार्क पैटर्न में ग्राहक की खरीदारी के दौरान कोई अतिरिक्त उत्पाद, सेवा या योगदान विकल्प पहले से चयनित स्थिति में दिख सकता है। ग्राहक यदि ध्यान नहीं देता है तो वह अनजाने में उस अतिरिक्त विकल्प के लिए भुगतान कर सकता है।   कुल नौ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई     CCPA की कार्रवाई केवल Zepto और BookMyShow तक सीमित नहीं है। IndiGo, FirstCry, Physics Wallah समेत कुल नौ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई की गई है। इन मामलों में अलग-अलग प्रकार के डार्क पैटर्न और भ्रामक ऑनलाइन प्रक्रियाओं को लेकर उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने कदम उठाया है।   सरकार की यह कार्रवाई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ताओं को ऐसी डिजाइन या प्रक्रियाओं से बचाने की कोशिश का हिस्सा है, जिनके जरिए उन्हें किसी सेवा, शुल्क या खरीदारी के लिए अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया जा सकता है।   क्या होते हैं डार्क पैटर्न?     डार्क पैटर्न ऐसे डिजाइन या डिजिटल तरीके हैं जिनका इस्तेमाल वेबसाइट या ऐप पर ग्राहक के निर्णय को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। इनमें अतिरिक्त शुल्क को देर से दिखाना, अनचाही सेवा को पहले से चुन देना या ग्राहक को किसी विकल्प की ओर धकेलना जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।   भारत में Prevention and Regulation of Dark Patterns Guidelines, 2023 के तहत ऐसे कई भ्रामक डिजिटल व्यवहारों की पहचान की गई है। CCPA की ताजा कार्रवाई से साफ है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ता अधिकारों और पारदर्शी कीमतों को लेकर निगरानी बढ़ रही है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
Jharkhand Assembly protest
रांची में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकने की कोशिश, विधानसभा घेराव मार्च के दौरान हंगामा

रांची। 14वीं जेपीएससी (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी के विरोध में छात्रों के समर्थन में निकाले गए विधानसभा घेराव मार्च के दौरान शुक्रवार को हंगामे की स्थिति बन गई। मार्च का नेतृत्व कर रहीं AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर एक युवक ने स्याही फेंकने की कोशिश की। हालांकि, मौके पर मौजूद छात्रों ने युवक को पकड़ लिया, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।   विधानसभा घेराव के दौरान हुई घटना   14वीं JPSC पीटी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में वामदलों और जनवादी संगठनों से जुड़े छात्र संगठनों ने झारखंड विधानसभा की ओर मार्च निकाला। पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान एक युवक ने नेहा बोरा पर स्याही फेंकने का प्रयास किया।   छात्रों ने युवक को पकड़ा, पुलिस ने लिया हिरासत में   घटना के तुरंत बाद मार्च में शामिल छात्रों ने युवक को पकड़ लिया और उसके साथ धक्का-मुक्की की। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और युवक को भीड़ से निकालकर हिरासत में ले लिया। पुलिस को युवक को सुरक्षित बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।   JPSC परीक्षा को लेकर जारी है आंदोलन   झारखंड में 14वीं JPSC पीटी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में विभिन्न छात्र संगठनों, वामपंथी दलों और जनवादी संगठनों ने छात्रों के समर्थन में विधानसभा घेराव कार्यक्रम आयोजित किया। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हिरासत में लिए गए युवक से पूछताछ की जा रही है।

anjali kumari अगस्त 7, 2026 0
FSSAI takes action against Dabur products over misleading '100% Pure' claims on food labels.
FSSAI का बड़ा एक्शन: '100% शुद्ध' दावे वाले डाबर के शहद और घी की बिक्री पर रोक

FSSAI Action on Dabur Products: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डाबर के कुछ शहद और घी उत्पादों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी बिक्री पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई उन उत्पादों पर की गई है, जिनके लेबल पर '100% शुद्ध' (100% Pure) होने का दावा किया गया था। प्राधिकरण का कहना है कि ऐसे दावों के समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक और नियामकीय आधार नहीं मिलने के कारण यह कदम उठाया गया है। '100% शुद्ध' दावे पर उठे सवाल एफएसएसएआई के अनुसार, खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित नहीं करने चाहिए। जांच के दौरान पाया गया कि डाबर के कुछ शहद और घी उत्पादों पर किए गए '100% शुद्ध' जैसे दावे निर्धारित मानकों और विज्ञापन नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए। इसके बाद संबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया गया। उपभोक्ताओं के हित में कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियामक का कहना है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और लेबलिंग को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि कोई कंपनी ऐसा दावा करती है, जिसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता, तो वह उपभोक्ता संरक्षण नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। कंपनी को नियमों का पालन करने के निर्देश एफएसएसएआई ने कंपनी को संबंधित उत्पादों की लेबलिंग और दावों को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप संशोधित करने के निर्देश दिए हैं। जब तक नियामकीय आवश्यकताओं का पालन नहीं किया जाता, तब तक इन उत्पादों की बिक्री पर रोक जारी रहेगी। खाद्य उत्पादों के दावों पर बढ़ी सख्ती हाल के वर्षों में एफएसएसएआई खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले 'नेचुरल', 'ऑर्गेनिक', '100% शुद्ध' और अन्य प्रचारात्मक दावों की सख्ती से जांच कर रहा है। नियामक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां केवल वही दावे करें, जिनका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हो और जिनसे उपभोक्ता गुमराह न हों।  

kalpana अगस्त 4, 2026 0
SBI customer wins consumer court relief after ₹1.64 lakh unauthorized online banking fraud
SBI ग्राहक के खाते से उड़ गए ₹1.64 लाख, कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक को दिया झटका; लौटानी होगी पूरी रकम, मुआवजा भी

नई दिल्ली: ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड का शिकार हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक ग्राहक को उपभोक्ता आयोग से बड़ी राहत मिली है। पंजाब के एक कंज्यूमर आयोग ने बैंक को ग्राहक के खाते से अनधिकृत तरीके से निकाले गए ₹1.64 लाख वापस करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही ग्राहक को मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹15,000 मुआवजा और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में ₹10,000 देने का भी निर्देश दिया गया है। यानी बैंक को कुल ₹1.89 लाख का भुगतान करना होगा। यह फैसला ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर फ्रॉड के मामले भी लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। मामले में आयोग ने खास तौर पर इस बात पर गौर किया कि SBI ग्राहक की कथित लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त तकनीकी सबूत पेश नहीं कर सका। खाते से बिना अनुमति निकल गए ₹1.64 लाख मामला पंजाब के एक SBI ग्राहक से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसके सेविंग अकाउंट से ₹1.64 लाख की अनधिकृत ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजेक्शन हुई। ग्राहक ने दावा किया कि उसने इस लेन-देन की अनुमति नहीं दी थी। उसका यह भी कहना था कि उसने अपना ATM PIN, OTP, इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल या कोई अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा नहीं की थी। फ्रॉड का पता चलते ही ग्राहक ने बैंक, SBI हेल्पलाइन, पुलिस और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल को इसकी सूचना दी। इसके बावजूद रकम वापस नहीं मिलने पर उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। SBI ने ग्राहक पर ही उठाए सवाल बैंक ने मामले में ग्राहक की संभावित लापरवाही का तर्क दिया। SBI की दलील थी कि विवादित ऑनलाइन ट्रांजेक्शन यूजरनेम, पासवर्ड और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP जैसी सुरक्षा प्रक्रिया के बिना पूरा होना संभव नहीं था। बैंक ने यह संभावना जताई कि ग्राहक किसी तरह धोखेबाजों के प्रभाव में आया हो सकता है और उसकी लापरवाही के कारण ट्रांजेक्शन हुआ हो। लेकिन उपभोक्ता आयोग इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने पूछा: बैंक के पास सबूत कहां हैं? आयोग ने पाया कि SBI ग्राहक की कथित लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त तकनीकी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत पेश नहीं कर सका। रिपोर्ट के मुताबिक बैंक ने सर्वर लॉग, IP एड्रेस का विवरण, फोरेंसिक रिपोर्ट, तकनीकी जांच रिकॉर्ड या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश नहीं किए, जिनसे यह साबित हो सके कि ग्राहक ने खुद ट्रांजेक्शन को अधिकृत किया था। आयोग ने माना कि केवल यह अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं है कि ग्राहक ने अपनी जानकारी साझा की होगी। बैंक को अपनी दलील के समर्थन में ठोस प्रमाण पेश करना जरूरी था। RBI के नियमों का भी आया हवाला मामले में ग्राहक ने RBI के 6 जुलाई 2017 के 'Customer Protection – Limiting Liability of Customers in Unauthorised Electronic Banking Transactions' सर्कुलर का हवाला दिया था। RBI के नियमों के मुताबिक, कुछ परिस्थितियों में यदि अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन की सूचना ग्राहक समय पर बैंक को देता है और उसकी ओर से लापरवाही नहीं हुई है, तो ग्राहक की देनदारी सीमित या शून्य हो सकती है। खास तौर पर, यदि मामला किसी थर्ड-पार्टी सिक्योरिटी ब्रीच से जुड़ा है और ग्राहक बैंक को निर्धारित समय के भीतर सूचना देता है, तो नियम ग्राहक को सुरक्षा प्रदान करते हैं। वहीं यदि ग्राहक ने खुद अपने पेमेंट क्रेडेंशियल साझा किए हैं, तो स्थिति अलग हो सकती है। SBI को लौटानी होगी रकम, मुआवजा भी देना होगा 28 जुलाई को सुनाए गए फैसले में पंजाब के उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक की शिकायत स्वीकार कर ली। आयोग ने SBI को तीन तरह का भुगतान करने का आदेश दिया: ₹1.64 लाख — अनधिकृत ट्रांजेक्शन की पूरी रकम वापस करने के लिए ₹15,000 — मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न के मुआवजे के तौर पर ₹10,000 — मुकदमेबाजी के खर्च के लिए इस तरह ग्राहक को कुल ₹1.89 लाख मिलने का रास्ता साफ हुआ। इस फैसले से बैंक ग्राहकों को क्या सीख मिलती है? यह फैसला केवल SBI ग्राहक के लिए राहत नहीं है, बल्कि डिजिटल बैंकिंग इस्तेमाल करने वाले दूसरे ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देता है। सबसे अहम बात यह है कि किसी भी अनधिकृत ट्रांजेक्शन की जानकारी मिलते ही बैंक को तुरंत सूचना देना बेहद जरूरी है। RBI भी ग्राहकों को अनधिकृत ट्रांजेक्शन की जानकारी तुरंत बैंक को देने की सलाह देता है। देरी होने पर ग्राहक की सुरक्षा और रकम वापस पाने की स्थिति प्रभावित हो सकती है। ग्राहकों को कभी भी OTP, PIN, पासवर्ड, CVV या इंटरनेट बैंकिंग लॉगिन जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। फ्रॉड होने पर बैंक के साथ-साथ संबंधित साइबर क्राइम चैनल पर भी तुरंत शिकायत दर्ज करना महत्वपूर्ण है। क्या हर ऑनलाइन फ्रॉड में बैंक पैसा लौटाएगा? नहीं। इस फैसले को इस तरह नहीं समझना चाहिए कि हर साइबर फ्रॉड में बैंक को स्वतः पूरी रकम लौटानी ही होगी। अनधिकृत ट्रांजेक्शन में ग्राहक की जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर करती है कि फ्रॉड कैसे हुआ, ग्राहक ने अपनी जानकारी साझा की या नहीं, बैंक की सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी या नहीं और ग्राहक ने घटना की जानकारी कितनी जल्दी दी। इस मामले में आयोग का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि SBI ग्राहक की लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण पेश करने में विफल रहा। इसलिए इस फैसले को मामले के तथ्यों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर दिया गया आदेश समझना चाहिए।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
Packaged food products with health claims under scrutiny by FSSAI in India.
Food Notice: नाम के कारण FSSAI के निशाने पर आईं 8 कंपनियां, 'Healthy' और 'Vegan' जैसे दावों पर उठे सवाल

नई दिल्ली: अक्सर कहा जाता है कि "नाम में क्या रखा है", लेकिन कई बार यही नाम किसी उत्पाद की सबसे बड़ी पहचान और बिक्री का आधार बन जाता है। यही वजह है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कुछ कंपनियों के ब्रांड नाम और उनके उत्पादों पर किए गए दावों को लेकर आपत्ति जताई है। खाद्य नियामक FSSAI ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के कथित उल्लंघन के आरोप में आठ कंपनियों को नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि इन कंपनियों के ब्रांड नाम, टैगलाइन या उत्पाद संबंधी दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। इन कंपनियों को भेजा गया नोटिस FSSAI की ओर से नोटिस पाने वाली कंपनियों में शामिल हैं— Emami Healthy & Tasty Health Aid TruVy The Healthy Factory Healthy Master Healthy Choice Plan B Newherbs नियामक का मानना है कि इन कंपनियों के कुछ नाम और दावे उत्पादों की वास्तविक प्रकृति से अलग संदेश दे सकते हैं। Emami Healthy & Tasty पर क्या है आपत्ति? कोलकाता स्थित इमामी समूह की एडिबल ऑयल यूनिट Emami Healthy & Tasty के नाम पर FSSAI ने सवाल उठाया है। प्राधिकरण का कहना है कि "Healthy & Tasty" जैसा ट्रेड नाम उपभोक्ताओं में यह धारणा बना सकता है कि उत्पाद स्वाभाविक रूप से स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, जबकि ऐसे दावों को नियमों के अनुरूप साबित करना आवश्यक होता है। 'Plant Based Vegan' दावे पर Plan B को नोटिस Plan B अपने उत्पादों को "Plant Based Vegan" के रूप में प्रचारित करती है। FSSAI के अनुसार, कंपनी ने आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना अपने उत्पादों को वीगन के रूप में पेश किया, जिससे ग्राहकों के बीच गलत धारणा बन सकती है। The Healthy Factory के उत्पाद भी जांच के दायरे में The Healthy Factory के— Zero Maida Whole Wheat Bread Zero Maida Pizza Base जैसे उत्पादों पर किए गए दावों को भी FSSAI ने जांच के दायरे में रखा है। नियामक का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। TruVy और Newherbs पर भी सवाल TruVy के— Healthy Mix Veggie Chips Healthy Ragi Chips Healthy Moong Dal Chips जैसे उत्पादों में कई अन्य सामग्री शामिल होने के बावजूद "Healthy" शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई है। वहीं Newherbs की "True Vitamin" श्रृंखला को लेकर FSSAI का कहना है कि यह नाम उसके निर्धारित मानकों में परिभाषित नहीं है और इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। टैगलाइन और ब्रांडिंग पर भी आपत्ति FSSAI ने Healthy Master की टैगलाइन "Vision to Serve Healthy", Healthy Choice के "Healthy Food for Healthy Life Poha" और Health Aid के ब्रांड नाम पर भी सवाल उठाए हैं। प्राधिकरण का मानना है कि केवल नाम या टैगलाइन देखकर ग्राहक उत्पाद को अधिक स्वास्थ्यवर्धक मान सकते हैं, जबकि वास्तविक पोषण मूल्य अलग हो सकता है। उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद को खरीदते समय केवल उसके नाम या पैकेजिंग पर भरोसा करने के बजाय— न्यूट्रिशन लेबल पढ़ें, सामग्री (Ingredients) की सूची देखें, और प्रमाणित दावों पर ही भरोसा करें।

surbhi जून 15, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Security personnel conduct a search operation after a terror attack in Jammu and Kashmir's Kulgam district.
राष्ट्रीय

जम्मू-कश्मीर में 10 दिन में दूसरा आतंकी हमला, तीन की मौत; सुरक्षा व्यवस्था और सख्त

kalpana अगस्त 1, 2026 0