रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच के बीच मुख्य आरोपी अभय तिवारी से पूछताछ में बड़ा खुलासा होने का दावा किया गया है। आज सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, अभय तिवारी ने CID की पूछताछ में 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा के इंटरव्यू में पैसे लेकर अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाने की बात बताई है। हालांकि, ये फिलहाल आरोपी के पूछताछ के दौरान दिए गए कथित बयान हैं; जांच एजेंसी द्वारा इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के लिए 15 लाख तक का दावा रिपोर्टों के अनुसार, 11वीं और 13वीं JPSC के इंटरव्यू में कथित तौर पर अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए 15-15 लाख रुपये तक लेने की बात सामने आई है। जांच में यह भी दावा किया गया है कि परीक्षा के अलग-अलग चरणों के लिए अलग-अलग रकम तय होने की बात अभय तिवारी ने बताई। FRO और ACF भर्ती को लेकर भी बड़ा दावा पूछताछ में फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) पदों की भर्ती को लेकर भी कथित पैसों के लेन-देन की जानकारी सामने आने का दावा है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 20 अभ्यर्थियों से कुल 5.80 करोड़ रुपये लिए जाने की बात कही गई है। इन दावों की जांच CID कर रही है। JPSC की पुरानी परीक्षाएं भी जांच के दायरे में अभय तिवारी के कथित खुलासे के बाद जांच का दायरा 14वीं JPSC परीक्षा से आगे बढ़कर 11वीं और 13वीं JPSC तक पहुंच गया है। जांच एजेंसी अब कथित लेन-देन, अभ्यर्थियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच में सामने आए दावों का सत्यापन बाकी मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभय तिवारी के कथित बयान को अभी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। CID की जांच, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य आरोपियों से पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच आगे बढ़ने के साथ JPSC की पुरानी परीक्षाओं को लेकर और खुलासे होने की संभावना है।
रांची: JSSC CGL परीक्षा में कथित धांधली के मामले में जांच के दौरान TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के बयान से नया मोड़ आ गया है. अभय तिवारी ने CID को दिए बयान में दावा किया है कि उसे परीक्षा से पहले ही JSSC CGL के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध करा दिए गए थे. हालांकि, CID ने अभय तिवारी के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले में तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है. अभय तिवारी के बयान के मुताबिक, कथित तौर पर पहले से प्रश्न-उत्तर उपलब्ध होने की वजह से उसका और कुछ अन्य अभ्यर्थियों का चयन हुआ. इस बयान के बाद जांच एजेंसी परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों, लोगों और अभ्यर्थियों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है. परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर मिलने का दावा CID की पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर बताया कि TDPL को पहले JSSC की परीक्षाओं के संचालन का काम मिलता था. उसके अनुसार, कंपनी ने कम दर पर परीक्षा संचालन करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद TDPL को काम से हटा दिया गया और परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबल नामक एजेंसी को दी गयी. अभय ने आरोप लगाया कि वेबल एजेंसी से जुड़े लोगों के माध्यम से उसे JSSC CGL परीक्षा के प्रश्न और उत्तर पहले ही उपलब्ध कराये गये थे. 15 अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब रटवाने का आरोप अभय तिवारी ने अपने बयान में दावा किया कि वेबल एजेंसी से जुड़े लोगों ने बोकारो स्थित एक आवास में करीब 15 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्न और उत्तर तैयार कराये थे. उसने आरोप लगाया कि इन अभ्यर्थियों को करीब 65 प्रश्नों के प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराये गये और इसके बदले प्रत्येक अभ्यर्थी से 12-12 लाख रुपये लिये गये. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और CID पूरे मामले में साक्ष्यों का सत्यापन कर रही है. अपने, भाई और पत्नी के चयन का भी किया जिक्र अभय तिवारी ने कथित तौर पर CID को बताया कि इसी व्यवस्था के कारण उसका, उसके भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी का चयन हुआ. जानकारी के अनुसार, अभय तिवारी की नियुक्ति प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में पोडैयाहाट में हुई थी. वहीं उसके भाई और पत्नी के सरकारी विभागों में कार्यरत होने की बात सामने आयी है. CID अब इन दावों से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है. TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह भी गिरफ्तार इसी मामले में TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह के खिलाफ भी CID ने कार्रवाई की है. उसे छह अगस्त को गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि TDPL में कर्मचारी रहते हुए उसने कथित तौर पर JPSC PT परीक्षा दी और उसमें सफल हुआ. CID ने रक्षक सिंह को रिमांड पर लेकर पूछताछ की. रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. CID बोली- केवल बयान से निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता अभय तिवारी के बयान के बाद जांच में कई नए सवाल सामने आये हैं, लेकिन CID ने फिलहाल उसके आरोपों को प्रमाणित नहीं माना है. जांच एजेंसी का कहना है कि सिर्फ किसी व्यक्ति के बयान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. सभी आरोपों और दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन किया जा रहा है. अब जांच एजेंसी की नजर परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों, उनके कर्मचारियों, अभ्यर्थियों और कथित वित्तीय लेन-देन पर है. यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो JSSC CGL परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर मामला और गंभीर हो सकता है.
रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में आरोपी रिटायर्ड IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक करना हत्या से भी अधिक गंभीर अपराध है, क्योंकि इससे लाखों मेहनती युवाओं का भविष्य और पूरे भर्ती तंत्र पर लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। पूर्व IAS अधिकारी को नहीं मिली राहत 62 वर्षीय जीवन किशोर ध्रुव वर्ष 2020 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में सचिव के पद पर तैनात थे। इसी दौरान हुई कथित भर्ती अनियमितताओं के मामले में CBI ने सितंबर 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भर्ती परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। बेटे पर भी लगे हैं आरोप CBI जांच में जीवन किशोर ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव को भी आरोपी बनाया गया है। जांच के अनुसार, जिस CGPSC भर्ती परीक्षा की जांच चल रही है, उसमें सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था। इसी कारण उन्हें भी मामले में आरोपी बनाया गया है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी जमानत याचिका खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और समाज के भरोसे पर सीधा हमला है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि: "प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक कराने वाला व्यक्ति लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करता है। हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य और पूरे समाज का विश्वास प्रभावित होता है।" कोर्ट को मिले प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मामले की सुनवाई जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की एकल पीठ ने की। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक जांच में ऐसे पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जिनसे प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि जीवन किशोर ध्रुव ने CGPSC के सचिव रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने 2021 की मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने पास रखे और उन्हें अपने बेटे तक पहुंचाया। 31 जुलाई को पूरी हुई थी सुनवाई हाईकोर्ट ने 31 जुलाई को जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 5 अगस्त को अदालत ने फैसला सुनाते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को इस स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती। युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला CGPSC पेपर लीक मामला छत्तीसगढ़ की सबसे चर्चित भर्ती अनियमितताओं में से एक है। इस मामले की जांच CBI कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से ही भर्ती प्रणाली पर लोगों का विश्वास कायम रखा जा सकता है।
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। एक ओर सरकार ने चार मंत्रियों की समिति बनाकर बातचीत के जरिए समाधान निकालने का भरोसा दिया है, वहीं आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। गुरुवार को कई मंत्रियों ने इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आंदोलनरत छात्रों से फोन पर बातचीत कर उनका पक्ष जाना। 'पेपर लीक पूरे देश की चुनौती' : चमरा लिंडा झारखंड के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि पेपर लीक केवल झारखंड की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। उनके मुताबिक, संगठित परीक्षा माफिया का नेटवर्क प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल सरकार को दोष देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है। सरकार गंभीर, चार मंत्रियों की समिति गठित : इरफान अंसारी स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार युवाओं की समस्याओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है। छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई जा चुकी है, जो प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता कर समाधान तलाशेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित चेयरमैन से इस्तीफा लिया और अब तक 12 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। योग्य अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहेंगे : दीपिका पांडेय सिंह ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन अभ्यर्थियों ने पूरी ईमानदारी और योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की है, उनके हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। छात्रों की चार प्रमुख मांगें आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं— टीडीपीएल द्वारा आयोजित JPSC की सभी विवादित परीक्षाएं तत्काल रद्द की जाएं, जिनमें 14वीं JPSC, JPSC बैकलॉग-2023 और FRO परीक्षा शामिल हैं। जिन परीक्षाओं में अभय तिवारी की भूमिका या संलिप्तता रही है, उन्हें भी रद्द किया जाए। इनमें JSSC CGL और झारखंड PGT भर्ती-2025 जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। पूरे मामले की CBI और ED से जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कड़ा कानून बनाया जाए। वार्ता पर अभी भी संशय गुरुवार देर शाम रांची सदर एसडीओ कुमार रजत और एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) धनंजय कुमार आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की। प्रशासन का कहना है कि वार्ता को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है क्योंकि प्रतिनिधिमंडल की अंतिम सूची नहीं मिली है। वहीं आंदोलनकारी छात्रों का दावा है कि उन्होंने अपनी डेलिगेशन लिस्ट पहले ही प्रशासन को भेज दी है। ऐसे में वार्ता की तारीख को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। राहुल गांधी ने छात्रों से की बातचीत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी आंदोलनरत छात्रों से फोन पर बातचीत की। उन्होंने छात्र पीयूष और रविंद्र से कांग्रेस नेता कुमार राजा के फोन के माध्यम से बात कर उनकी मांगों और आंदोलन की स्थिति की जानकारी ली। राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो, राज्य सरकार हो या कांग्रेस, सभी को युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी निभानी चाहिए। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने भी झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन की पूरी जानकारी ली है। क्या आगे होगा? अब सबकी नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर है। यदि बातचीत सफल होती है तो आंदोलन को नया मोड़ मिल सकता है, लेकिन यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो छात्रों के आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सामने आई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ी पोस्ट साझा करते हुए उनकी स्थिति पर चिंता जताई और सवाल किया कि ‘यह सब कब रुकेगा?’ छात्रों के समर्थन में सोनाक्षी की पोस्ट सोनाक्षी सिन्हा ने सोशल मीडिया पर झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन से जुड़ी सामग्री साझा की। उन्होंने छात्रों की परेशानी और लगातार विरोध प्रदर्शन को लेकर दुख जताया। अभिनेत्री का यह पोस्ट सामने आने के बाद झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। सोनाक्षी का समर्थन ऐसे समय आया है जब JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसे आरोपों को लेकर छात्र निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। 29 जुलाई से धरने पर बैठे हैं छात्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शनकारी छात्र 29 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित परीक्षा अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। रिपोर्टों के मुताबिक आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं और प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। आंदोलन को मिल रहा सेलिब्रिटी समर्थन सोनाक्षी सिन्हा के समर्थन के बाद छात्र आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा बढ़ गई है। अभिनेत्री पहले भी छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देती रही हैं। हालांकि, सोनाक्षी ने किसी राजनीतिक दल का समर्थन करने के बजाय प्रदर्शन कर रहे छात्रों की स्थिति और उनकी मांगों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनके पोस्ट के बाद अब इस आंदोलन पर सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
रांची/हजारीबाग। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित धांधली की जांच के तहत आपराधिक अनुसंधान विभाग (CID) ने हजारीबाग जिले में बड़ी कार्रवाई की है। विशेष टीम ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पौता गांव में छापेमारी कर दो सगे भाइयों, लालू यादव और प्रदीप यादव, को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों में से एक भाई का चयन JPSC परीक्षा के माध्यम से हुआ था, जबकि दूसरे पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित सेटिंग और फर्जीवाड़ा कराने वाले नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है। सोमवार सुबह शुरू हुई कार्रवाई के दौरान सीआईडी ने करीब पांच घंटे तक घर की तलाशी ली और दोनों से पूछताछ की। बरामद दस्तावेजों से बड़े सिंडिकेट की आशंका छापेमारी के दौरान सीआईडी को करोड़ों रुपये के बैंक चेक, उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े कई अभ्यर्थियों के मूल एडमिट कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज मिले हैं। जांच एजेंसी को आशंका है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल प्रतियोगी परीक्षाओं में अवैध तरीके से सफलता दिलाने और बड़े पैमाने पर धन के लेन-देन के लिए किया गया। कार्रवाई के बाद टीम ने बड़कागांव क्षेत्र के अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी जांच की। फिलहाल दोनों भाइयों से एक गोपनीय स्थान पर पूछताछ की जा रही है। सीआईडी बरामद दस्तावेजों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित सिंडिकेट से जुड़े अन्य बिचौलियों, अभ्यर्थियों और प्रभावशाली लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, उसने अपने साथी सोनू सिंह के साथ मिलकर प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों को लालच देकर प्रश्नपत्र हासिल किया था। जांच में सामने आया है कि लीक हुआ प्रश्नपत्र जूते में छिपाकर प्रिंटिंग हाउस से बाहर निकाला गया। आरोप है कि इसे करीब ₹8 हजार में हासिल किया गया और बाद में भिवंडी व पुणे समेत कई जगहों पर ऊंची कीमत पर बेचा गया। पुलिस के अनुसार, पूरे रैकेट से करीब ₹1.5 करोड़ की कमाई होने की आशंका है। भिवंडी पुलिस ने ग्राहक बनकर जाल बिछाया और कोंगांव के एक होटल से आरोपियों को पेपर बेचने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया। मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। बिहार से गिरफ्तारी, जल्द भिवंडी लाया जाएगा आरोपी भिवंडी पुलिस ने बिजेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर पुणे एयरपोर्ट पहुंचाया है। वहां से उसे भिवंडी लाकर अदालत में पेश किया जाएगा। कपिल दहिया समेत अन्य आरोपी भी गिरफ्तार एसआईटी ने इस मामले में वांछित आरोपी कपिल दहिया को पंजाब के पठानकोट से गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। इसके अलावा सोनू सिंह और मिथुन सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, सोनू ने फर्जी पहचान पत्र तैयार किए और अपनी फोटोकॉपी दुकान से लीक प्रश्नपत्रों की प्रतियां निकालीं, जबकि मिथुन सिंह कथित तौर पर संभावित खरीदारों की तलाश में शामिल था। पत्नी पर भी जांच की आंच पुलिस ने बिजेंद्र गुप्ता की पत्नी सुमन कुमारी को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने फरार आरोपी के संपर्क में रहते हुए जांच में सहयोग नहीं किया और मैसेजिंग ऐप के जरिए उससे लगातार संपर्क बनाए रखा। कैसे हुआ खुलासा? भिवंडी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि TET का प्रश्नपत्र बेचा जा रहा है। इसके बाद एक पुलिस अधिकारी खरीदार बनकर आरोपियों के संपर्क में पहुंचा। जैसे ही सौदा तय हुआ, पुलिस ने कोंगांव के होटल में छापा मारकर आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने जांच में पता चला है कि बिजेंद्र कुमार गुप्ता पहले भी कई राज्यों के पेपर लीक मामलों में शामिल रह चुका है। उसके खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज है। पुलिस का दावा है कि वह पहले भी कई बार गिरफ्तार हुआ, लेकिन जमानत मिलने के बाद फर्जी पहचान के साथ दूसरे राज्यों में सक्रिय हो जाता था।
देशभर में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी छात्र आंदोलनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। प्रमुख बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों पर पहली बड़ी प्रतिक्रिया दी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान। कहा- "युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।" संबंधित विभागों और अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई के निर्देश। देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन जारी। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, "हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।" उन्होंने बताया कि सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, ताकि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को जल्द सजा मिल सके। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पेपर लीक मामलों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करेगी। उनका कहना है कि इससे दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में तेजी आएगी और छात्रों का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा। छात्र आंदोलन के बीच आया बयान प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित विभिन्न शहरों में प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता युवाओं का भविष्य प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए फैसले ले रही है। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना सरकार की प्राथमिकता है और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। विपक्ष और आंदोलनकारी क्या मांग रहे हैं? NEET पेपर लीक विवाद के बाद विपक्ष और छात्र संगठनों ने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग की है। इसी बीच प्रधानमंत्री का यह बयान पूरे विवाद पर सरकार की पहली बड़ी सार्वजनिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
अहिल्यानगर, एजेंसियां। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन, पेपर लीक के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच जवाबदेही तय करना आवश्यक है। हजारे का कहना है कि मंत्री का इस्तीफा सरकार की कमजोरी नहीं, बल्कि सुशासन और जवाबदेही का संदेश होगा। छात्रों की नाराजगी को गंभीरता से लेने की अपील अपने पत्र में अन्ना हजारे ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और हालिया हिंसा व पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई। उन्होंने लिखा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा और अत्यधिक बल प्रयोग किसी के हित में नहीं है। उनके अनुसार, देशभर के लाखों युवा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से परेशान हैं, इसलिए उनकी नाराजगी को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। पेपर लीक और जवाबदेही पर उठाए सवाल हजारे ने अपने पत्र में नीट परीक्षा से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रही अनियमितताएं गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक विफलताओं की जिम्मेदारी तय करने के बजाय उसका दोष अधीनस्थ अधिकारियों पर डाल दिया जाता है, जबकि सफलता का श्रेय सरकार लेती है। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उचित कदम होगा। 'सरकार की ताकत नहीं घटेगी, व्यवस्था मजबूत होगी' अन्ना हजारे ने कहा कि पिछले कई दिनों से छात्र और अभिभावक शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, जवाबदेही के आधार पर मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार की शक्ति कम नहीं होगी, बल्कि अन्य मंत्रियों को भी अपने विभागों के बेहतर संचालन का संदेश मिलेगा और शासन व्यवस्था में सुधार आएगा। संवाद को बताया लोकतंत्र का सबसे बेहतर रास्ता हजारे ने पत्र में यह भी कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बावजूद सरकार की ओर से कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि बातचीत के लिए आगे नहीं आया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर विकल्प होता है और नागरिकों की आवाज को सम्मानपूर्वक सुनना ही लोकतांत्रिक मूल्यों की असली परीक्षा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर बढ़ती चिंता और पेपर लीक के मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है और पेपर लीक जैसी घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पेपर लीक को बताया गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को प्रधानमंत्री के संदेश की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने पेपर लीक को देश के भविष्य और युवाओं के विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीति से बचने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और उनकी मेहनत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह बयान हाल ही में पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों और राजनीतिक विवादों के बीच सामने आया है। संसद में दूसरे दिन भी जारी रहा हंगामा मानसून सत्र के दूसरे दिन भी लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण बार-बार बाधित रही। पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष ने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा, जबकि सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखा। किसानों के हितों पर भी दिया भरोसा बैठक में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर किसानों की चिंताओं पर भी चर्चा हुई। किरेन रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने एनडीए सांसदों को भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापारिक समझौते में किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। सरकार ने संकेत दिए कि युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों पर वह संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ आगे बढ़ेगी।
नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई ने विशेष अदालत में बड़ा दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, महाराष्ट्र के लातूर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे ने एक छात्र के परिवार से 5 लाख रुपये लेकर परीक्षा से पहले ही उसे लीक हुआ केमिस्ट्री का प्रश्नपत्र दिखाया था। यह जानकारी सीबीआई ने आरोपी डॉक्टर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने रखी। दो अन्य डॉक्टरों को भी नेटवर्क से जोड़ने का आरोप सीबीआई का कहना है कि डॉ. शिरुरे ने इस कथित पेपर लीक नेटवर्क में दो अन्य डॉक्टरों की मुलाकात सह-आरोपी पी.वी. कुलकर्णी से कराई थी। जांच के अनुसार, इन दोनों डॉक्टरों के बच्चों को भी लीक हुए प्रश्नपत्र का लाभ मिला और परीक्षा से पहले उन्हें पेपर उपलब्ध कराया गया था। अप्रैल में ही दिखाया गया था प्रश्नपत्र जांच एजेंसी के मुताबिक, डॉ. शिरुरे ने सह-आरोपी शिवराज मोटेगांवकर के बेटे आदित्य मोटेगांवकर को मई में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा से पहले, अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही केमिस्ट्री का मूल प्रश्नपत्र दिखाया था। सीबीआई का आरोप है कि छात्रों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर परीक्षा की तैयारी कराई गई, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिल सके। जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
Rahul Gandhi on UGC-NET: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने UGC-NET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा से पहले एक पीडीएफ वायरल हुई थी, जिसमें शामिल कई प्रश्न वास्तविक परीक्षा से मेल खाते थे। सरकार या राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से राहुल गांधी के इन दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। UGC-NET को लेकर राहुल गांधी का दावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि हाल ही में आयोजित UGC-NET परीक्षा को लेकर सामने आए आरोप बेहद गंभीर हैं। उनका दावा है कि परीक्षा से पहले करीब 100 पन्नों की एक पीडीएफ प्रसारित हुई थी, जिसमें ऐसे प्रश्न थे जो बाद में परीक्षा में पूछे गए सवालों से काफी हद तक मेल खाते थे। राहुल गांधी के मुताबिक, यह पीडीएफ प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी थी और इसकी जानकारी केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के पास होनी चाहिए थी। '90 सवाल असली पेपर से मेल खाते थे' राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वायरल पीडीएफ में मौजूद लगभग 90 प्रश्न UGC-NET के समाजशास्त्र (Sociology) विषय के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि यही प्रश्नपत्र बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों में करीब 2.25 लाख रुपये में बेचे जाने की बात सामने आई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अन्य परीक्षाओं को लेकर भी लगाए आरोप कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर इसी नेटवर्क ने CSIR-NET, HTET और ADA जैसी आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भी दावा किया था। उन्होंने कहा कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। केंद्र सरकार पर साधा निशाना राहुल गांधी ने कहा कि NEET और UGC-NET जैसी परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आने के बावजूद सरकार प्रभावी कदम उठाती नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोप उनकी मेहनत और भविष्य दोनों पर असर डालते हैं। छात्रों से एकजुट होने की अपील अपने संदेश के अंत में राहुल गांधी ने छात्रों से एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए छात्रों और युवाओं की सामूहिक आवाज सबसे महत्वपूर्ण है। आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल राहुल गांधी के लगाए गए आरोपों पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), शिक्षा मंत्रालय या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि इस मामले में कोई नई जानकारी या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, तो उसके बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
सीबीएसई और नीट परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए हैं और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाये हैं। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है, जबकि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी को चुनावी हार से हताश बताया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा- राहुल गांधी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं लगती केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि CBSE ने पहले ही इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है और सभी प्रक्रियाएं भारत सरकार की खरीद नीति के अनुसार पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। राहुल गांधी पर हमला करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “लगातार चुनावी हार के कारण राहुल गांधी हताश नजर आते हैं। उन्होंने SIR का विरोध किया, EVM का विरोध किया और डिजिटल इंडिया का भी विरोध किया। ऐसा लगता है कि वे भारत की वैज्ञानिक प्रगति के साथ खड़े नहीं हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी की बयानबाजी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित लगती है। ‘यह राजनीति करने का समय नहीं’, शिक्षा मंत्री की अपील धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा से जुड़े विवाद के कारण छात्रों और अभिभावकों में पहले से ही तनाव है और इस समय राजनीति करने से स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा, “सरकार की ओर से यदि किसी प्रकार की असुविधा हुई है, तो मैं स्वयं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं। लेकिन अभी सबसे जरूरी बात यह है कि छात्रों का मानसिक तनाव और न बढ़े।” केंद्रीय मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे ऐसे बयान देने से बचें, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़े। राहुल गांधी ने उठाये CBSE कॉन्ट्रैक्ट और कंपनी चयन पर सवाल राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शिक्षा मंत्री पर पलटवार करते हुए कहा कि व्यक्तिगत हमला करने से सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उन्होंने लिखा, “धर्मेंद्र प्रधान जी, आप मुझ पर जितना चाहें हमला कर सकते हैं, लेकिन इससे आप अपने अपराधों से बरी नहीं होंगे और न ही यह मुझे 18.5 लाख बच्चों के लिए जवाब मांगने से रोक पाएगा।” राहुल गांधी ने CBSE के OSM कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी सवाल उठाये। उन्होंने पूछा कि यह कॉन्ट्रैक्ट COEMPT नाम की कंपनी को क्यों दिया गया, जबकि उसी कंपनी का पुराना नाम Globarena पहले से विवादों में रहा है। उन्होंने सवाल किया कि इस कंपनी का चयन किसके आदेश पर किया गया, बैकग्राउंड जांच क्यों नहीं हुई और कंपनी के प्रबंधन तथा केंद्र सरकार के बीच क्या संबंध हैं। राहुल गांधी बोले- दोनों ही स्थिति में सरकार जिम्मेदार राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार ने बैकग्राउंड जांच की थी और फिर भी कंपनी को काम दिया गया, तो यह गंभीर लापरवाही है। वहीं अगर जांच नहीं की गई, तो यह और भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही परिस्थितियों में सरकार जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार को वास्तव में छात्रों की चिंता होती, तो इतने बड़े विवाद के बाद शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही पद से हटा दिया गया होता। परीक्षा विवाद पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी CBSE और NEET से जुड़े विवाद पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में राहुल गांधी और धर्मेंद्र प्रधान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने इस मुद्दे को और राजनीतिक बना दिया है। एक तरफ विपक्ष परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि वह किसी भी अनियमितता को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Central Bureau of Investigation (CBI) ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे की एक महिला एक्सपर्ट को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक आरोपी महिला Manisha Sanjay Havaldar ने फिजिक्स के प्रश्नपत्र लीक कर चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए थे। CBI का दावा है कि आरोपी महिला National Testing Agency (NTA) की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त थीं और उन्हें भौतिकी प्रश्नपत्र तक पूरी पहुंच हासिल थी। अप्रैल में शेयर किए गए थे प्रश्न CBI के अनुसार, मनीषा हवलदार पुणे के Seth Hiralal Sarraf Prashala में कार्यरत हैं। जांच में सामने आया है कि उन्होंने अप्रैल महीने में कुछ प्रश्न सह-आरोपी Manisha Mandhare के साथ साझा किए थे। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान यह पाया गया कि शेयर किए गए सवाल वास्तविक NEET-UG 2026 फिजिक्स प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। इससे पहले CBI ने 16 मई को मनीषा मंधारे को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया था। कई शहरों में छापेमारी पेपर लीक नेटवर्क की जांच के तहत CBI ने New Delhi, Jaipur, Gurugram, Nashik, Pune, Latur और अहिल्यानगर समेत कई जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक स्टेटमेंट और कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार CBI प्रवक्ता के मुताबिक इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में पेपर लीक के मूल स्रोत का भी पता चल गया है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ बिचौलिये छात्रों से लाखों रुपये लेकर उन्हें विशेष कोचिंग क्लासों में भेजते थे, जहां कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र साझा किए जाते थे। 21 जून को होगी दोबारा परीक्षा NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। हालांकि पेपर लीक के आरोपों के बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी। अब NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।
NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच में बड़े खुलासे सामने आए हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के मुताबिक, पेपर लीक गिरोह छात्रों के परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर 5 लाख से 50 लाख रुपये तक वसूलता था। बाकी रकम की गारंटी के लिए ब्लैंक चेक और छात्रों के दस्तावेज अपने पास रखे जाते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र के एक कोचिंग संचालक की 8 एकड़ जमीन पर स्कूल और कॉलेज खोलने की योजना थी। आर्थिक स्थिति देखकर तय होती थी कीमत CBI जांच के अनुसार, पेपर की कोई तय कीमत नहीं थी। गिरोह हर परिवार की आर्थिक क्षमता के हिसाब से रकम तय करता था। शुरुआत में केवल टोकन मनी ली जाती थी और पूरी रकम बाद में वसूली जाती थी। डील का तरीका यह था कि परीक्षा के बाद जब आंसर-की जारी हो जाए और यह साबित हो जाए कि दिया गया “क्वेश्चन बैंक” असली पेपर से मेल खाता है, तब बाकी रकम ली जाती थी। हालांकि परीक्षा के बाद कई अभिभावकों ने पैसे देने से इनकार भी किया। उनका कहना था कि फिजिक्स के कुछ सवाल मेल नहीं खा रहे थे। कुछ लोगों ने आधी रकम दी और बाकी रिजल्ट आने के बाद देने की बात कही। खुलासे के वक्त भी जारी थी वसूली जांच एजेंसियों के अनुसार, 8 मई की रात राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने कार्रवाई शुरू की थी। उस दौरान भी गिरोह खरीदारों से पैसे वसूलने में लगा हुआ था। सीकर में एक छात्र से पूछताछ के दौरान उसके मोबाइल पर दलाल का फोन आया, जिसमें बाकी पैसे मांगे जा रहे थे। बाद में CBI ने कई छात्रों और आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की, जहां इसी तरह के लेनदेन के सबूत मिले। 8 एकड़ जमीन पर बन रहा था स्कूल-कॉलेज मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र के लातूर स्थित RCC कोचिंग के संचालक शिवराज मोटेगांवकर उर्फ ‘एम सर’ के बारे में जांच में पता चला है कि वह लातूर के खोपेगांव इलाके में 8 एकड़ जमीन पर बड़ा स्कूल और कॉलेज खोलने की तैयारी कर रहा था। वहां बहुमंजिला इमारत का निर्माण तेजी से चल रहा था। CBI अब उसकी फंडिंग, जमीन खरीद और आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर रही है। एजेंसी ने उसकी पत्नी और बेटे से भी पूछताछ की है। 5 आरोपी न्यायिक हिरासत में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी मांगीलाल खटीक, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, यश यादव और धनंजय लोखंडे को 2 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं आरोपी शुभम खैरनार की CBI रिमांड पांच दिन बढ़ा दी गई है। कोर्ट ने मनीषा मांढरे और मोटेगांवकर के हस्ताक्षर के नमूने लेने की भी अनुमति दी है। 21 जून को होगा री-एग्जाम धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को NEET री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने फर्जी टेलीग्राम चैनलों और सोशल मीडिया पर पेपर लीक को लेकर गलत जानकारी फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। 7 मई को गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया और 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। अब दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।
NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने माना कि परीक्षा व्यवस्था में चूक हुई है और सरकार इसकी जिम्मेदारी लेती है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। 21 जून को होगा NEET री-एग्जाम शिक्षा मंत्री ने बताया कि NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बार परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ कराया जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा, “हम सभी छात्रों की चिंता और परेशानी को समझते हैं, लेकिन देशहित और ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा।” ‘गेस पेपर’ की आड़ में लीक हुआ असली पेपर धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि 3 मई को परीक्षा होने के बाद 7 मई को National Testing Agency यानी NTA को शिकायत मिली थी कि कुछ ‘गेस पेपर’ में वही सवाल मौजूद थे, जो असली परीक्षा में पूछे गए। इसके बाद हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने तुरंत जांच शुरू की और मामला सरकारी एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई तक जांच में यह पुष्टि हो गई कि ‘गेस पेपर’ के नाम पर असली प्रश्नपत्र लीक हुआ था। इसी के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। ‘काबिल छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे’ शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि कोई मेहनती और योग्य छात्र एग्जाम माफिया या फर्जी अभ्यर्थियों की वजह से नुकसान उठाए। उन्होंने कहा कि पिछली गड़बड़ियों के बाद बनाई गई राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों को लागू किया गया था, इसके बावजूद यह घटना हुई। उन्होंने कहा, “जो भी गलतियां हुई हैं, उसकी जिम्मेदारी सरकार लेती है। हमारी नीति गलत कामों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की है।” CBI कर रही जांच मामले की जांच अब Central Bureau of Investigation यानी CBI को सौंप दी गई है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कई सोशल मीडिया हैंडल्स गलत जानकारी फैलाकर सिस्टम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच जरूरी थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि CBI जल्द दोषियों को सामने लाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगले साल से CBT मोड में होगी परीक्षा शिक्षा मंत्री ने यह भी ऐलान किया कि अगले साल से NEET परीक्षा CBT यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड में आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। री-एग्जाम के लिए नहीं लगेगी फीस NTA ने साफ किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों से कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी। छात्रों को परीक्षा केंद्र चुनने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। इसके अलावा अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा की अवधि भी 15 मिनट बढ़ा दी गई है। अब परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी।
जांच में सामने आया सीकर कोचिंग नेटवर्क NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच में अब राजस्थान का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। जांच एजेंसियों को पता चला है कि सीकर जिले में कुछ लोगों और कोचिंग संस्थानों के जरिए कथित तौर पर प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचाया गया। सूत्रों के अनुसार, यश यादव नाम के युवक को इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। उसका संबंध विकास बिवाल नामक व्यक्ति से बताया जा रहा है, जिसका नाम भी जांच में सामने आया है। हार्ड कॉपी को PDF बनाकर फैलाने का आरोप जांच में यह भी पता चला है कि विकास बिवाल के पिता दिनेश बिवाल ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र की हार्ड कॉपी स्कैन कर उसे PDF फाइल में बदला। इसके बाद यह डिजिटल कॉपी सीकर के कई कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों तक पहुंचाई गई। छात्रों ने 3 से 10 लाख रुपये देने की बात कबूली पूछताछ के दौरान कई छात्रों ने जांच एजेंसियों को बताया कि उन्होंने कथित तौर पर लीक पेपर पाने के लिए 3 लाख से 10 लाख रुपये तक का भुगतान किया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर पेपर सबसे पहले कहां से लीक हुआ और किस चैन के जरिए छात्रों तक पहुंचा। एक आरोपी ने खुद को बताया बेगुनाह मामले में सामने आए शुभम नामक व्यक्ति ने आरोपों से इनकार किया है। उसने कहा कि वह इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड नहीं है। हालांकि जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी सबूतों की मदद से पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं। सीबीआई की पूछताछ तेज Central Bureau of Investigation ने इस मामले में कई कोचिंग संस्थानों के मालिकों और कर्मचारियों से पूछताछ की है। गिरफ्तार आरोपियों और छात्रों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। मनी ट्रेल पर एजेंसियों की नजर अब जांच का फोकस आर्थिक लेन-देन पर भी पहुंच गया है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पैसे किन खातों में जमा हुए और किसने ट्रांजैक्शन को संभाला। जांच अधिकारियों के मुताबिक यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में से एक हो सकता है, इसलिए हर डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है।
रांची। अमूल दूध गुरुवार 14 मई से झारखंड समेत पूरे देश में महंगा हो गया है। इसकी कीमत में प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अमूल ब्रांड के तहत उत्पाद बेचने वाली गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF) ने बढ़ती इनपुट लागत के कारण पूरे भारत में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। 14 मई से बढ़े हुए दामों में अमूल के दूध मिल रहे हैं। दूध की कीमतों में वृद्धि से खाद्य मुद्रास्फीति पर असर पड़ने की संभावना है और इससे मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव पड़ेगा। पिछली बार कीमतों में बढ़ोतरी 1 मई, 2025 को की गई थी। जीसीएमएमएफ ने एक बयान में कहा कि उसने भारत भर में प्रमुख दूध विक्रय प्रकारों/पैकेटों में ताजे पाउच दूध की कीमतों में 14 मई से 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। कंपनी का तर्क कंपनी की ओर से कहा गया है कि यह बढ़ोतरी प्रति लीटर लगभग 2.5-3.5 प्रतिशत के बराबर है, जो औसत खाद्य मुद्रास्फीति से कम है। कहा गया कि दूध के संचालन और उत्पादन की कुल लागत में वृद्धि के कारण कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है। इस दौरान पशुओं के चारे, दूध की पैकेजिंग फिल्म और ईंधन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। सहकारी समिति ने कहा कि उसके सदस्य संघों ने किसानों के खरीद मूल्य में 30 रुपये प्रति किलोग्राम वसा की वृद्धि की है, जो मई 2025 की तुलना में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि है। भैंस के दूध की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के लिए 500 मिलीलीटर पैक की संशोधित दरों के अनुसार, स्लिम एन वेरिएंट की कीमत 27 रुपये, ताजा की कीमत 30 रुपये, गाय के दूध की कीमत 31 रुपये और गोल्ड की कीमत 36 रुपये होगी। भैंस के दूध की कीमत में 4 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है और अब यह 80 रुपये प्रति लीटर हो गया है। 20 प्रतिशत दुग्ध उत्पादकों को देती है कंपनी जीसीएमएमएफ ने कहा कि अमूल की नीति के तहत, दूध और दूध उत्पादों के लिए उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान किए गए प्रत्येक रुपये में से लगभग 80 पैसे दूध उत्पादकों को दिए जाते हैं। जीसीएमएमएफ ने आगे कहा कि मूल्य संशोधन से दूध उत्पादकों को लाभकारी दूध मूल्य बनाए रखने में मदद मिलेगी और उन्हें अधिक दूध उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। एक लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते, वित्त वर्ष 2025-26 में अमूल ब्रांड का कुल कारोबार 11 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। पिछले वित्त वर्ष में जीसीएमएमएफ का कारोबार 11.4 प्रतिशत बढ़कर 73,450 करोड़ रुपये हो गया, जबकि उससे पिछले वित्त वर्ष में यह 65,911 करोड़ रुपये था। जीसीएमएमएफ दुनिया की सबसे बड़ी किसान-स्वामित्व वाली डेयरी सहकारी संस्था है, जिसमें 36 लाख किसान शामिल हैं। यह प्रतिदिन 31 मिलियन लीटर दूध एकत्र करता है और सालाना 24 बिलियन से अधिक अमूल उत्पादों के पैकेट वितरित करता है, जिनमें दूध, मक्खन, पनीर, घी और आइसक्रीम आदि शामिल हैं।
पेपर लीक विवाद पर NTA और सरकार पर उठाए सवाल देशभर में NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर अब मशहूर शिक्षक और यूट्यूबर Khan Sir ने भी सरकार और National Testing Agency (NTA) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही अनियमितताओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए और सुधार के लिए सरकार को पांच बड़े सुझाव दिए। “NTA को भंग कर देना चाहिए” Khan Sir ने कहा कि सिर्फ परीक्षा रद्द कर देना समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक NTA लगातार परीक्षा प्रबंधन में असफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है, इसलिए सरकार को इस एजेंसी को भंग करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पेपर लीक करने वालों को मिले कड़ी सजा Khan Sir ने पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की वजह से मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न करे। रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में हो जांच Khan Sir ने मामले की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच सिर्फ Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपना काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में कराई जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके। CBI जांच जल्द पूरी करने की मांग Khan Sir ने कहा कि CBI जांच प्रक्रियाएं अक्सर काफी लंबी चलती हैं। उन्होंने मांग की कि जांच तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि अगर जांच में बहुत ज्यादा समय लगेगा तो प्रभावित छात्र लंबे समय तक असमंजस में रहेंगे। उनका बयान था कि “रिपोर्ट आते-आते कई बच्चे डॉक्टर भी बन जाएंगे।” सुरक्षित और पारदर्शी एजेंसी को मिले जिम्मेदारी उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं केवल ऐसी एजेंसियों को करानी चाहिए, जो पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें। उनके अनुसार बार-बार पेपर लीक और परीक्षा विवादों के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर होता जा रहा है। NTA को बताया “Never Trustable Agency” Khan Sir ने NTA की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए इसे “Never Trustable Agency” तक कह दिया। उनका कहना है कि जिस संस्था पर देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की जिम्मेदारी है, वही लगातार विवादों में घिरी हुई है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में बड़े स्तर पर सुधार करने की अपील की, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा पहले ही रद्द की जा चुकी है, वहीं अब राजस्थान से सामने आए एक नए खुलासे ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। जांच में एक ऐसा “गेस पेपर” सामने आया है, जिसके करीब 120 सवाल असली परीक्षा से मेल खाते बताए जा रहे हैं। इस खुलासे के बाद पूरे मामले को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। राजस्थान SOG को छात्रों के मोबाइल में मिला PDF Rajasthan Special Operations Group (SOG) की जांच के दौरान कुछ छात्रों के मोबाइल फोन से एक PDF दस्तावेज बरामद किया गया। बताया जा रहा है कि यह करीब 150 पेज का दस्तावेज था, जिसमें 400 से ज्यादा सवाल शामिल थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस PDF में कुल करीब 410 सवाल थे और इनमें से लगभग 120 सवाल सीधे NEET UG 2026 परीक्षा में देखने को मिले। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह PDF परीक्षा से कई हफ्ते पहले ही WhatsApp के जरिए शेयर किया जा रहा था। आखिर इतने सवाल कैसे हुए मैच? आमतौर पर किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में गेस पेपर से कुछ सवाल मिल जाना सामान्य माना जाता है, लेकिन यहां मामला अलग बताया जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर सवालों का मेल होना संदेह पैदा करता है। इसी वजह से अब यह जांच की जा रही है कि क्या यह सिर्फ गेस पेपर था या फिर किसी संगठित नेटवर्क के जरिए असली प्रश्नपत्र से जुड़े इनपुट पहले ही लीक किए गए थे। ADGP विशाल बंसल ने क्या कहा? Vishal Bansal ने कहा कि मामला सामान्य पेपर लीक जैसा नहीं दिख रहा है। उनके मुताबिक आमतौर पर पेपर लीक करने वाले लोग प्रश्नों को सीमित लोगों तक रखते हैं ताकि आर्थिक फायदा उठाया जा सके, लेकिन इस मामले में सवालों वाला PDF बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुका था। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। NTA ने रद्द की परीक्षा विवाद बढ़ने के बाद National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। साथ ही दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा भी कर दी गई है। केंद्र सरकार ने मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी है। सुरक्षा के बावजूद कैसे हुआ लीक? NTA का दावा है कि परीक्षा के दौरान हाई-लेवल सिक्योरिटी का इस्तेमाल किया गया था। इसमें GPS ट्रैकिंग, AI आधारित CCTV निगरानी और बायोमेट्रिक जांच जैसी तकनीकों को शामिल किया गया था। इसके बावजूद सवालों के कथित लीक और गेस पेपर से बड़े स्तर पर मैच होने के बाद एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा में चूक आखिर कहां हुई।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।