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CBI Arrests Expert in NEET Leak Case

NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा एक्शन, फिजिक्स प्रश्नपत्र लीक करने की आरोपी महिला गिरफ्तार

surbhi मई 23, 2026 0
CBI officials investigating NEET-UG 2026 paper leak case after key arrest in Pune
CBI Arrest in NEET UG 2026 Paper Leak Case

Central Bureau of Investigation (CBI) ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे की एक महिला एक्सपर्ट को गिरफ्तार किया है।

एजेंसी के मुताबिक आरोपी महिला Manisha Sanjay Havaldar ने फिजिक्स के प्रश्नपत्र लीक कर चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए थे।

CBI का दावा है कि आरोपी महिला National Testing Agency (NTA) की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त थीं और उन्हें भौतिकी प्रश्नपत्र तक पूरी पहुंच हासिल थी।

अप्रैल में शेयर किए गए थे प्रश्न

CBI के अनुसार, मनीषा हवलदार पुणे के Seth Hiralal Sarraf Prashala में कार्यरत हैं। जांच में सामने आया है कि उन्होंने अप्रैल महीने में कुछ प्रश्न सह-आरोपी Manisha Mandhare के साथ साझा किए थे।

एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान यह पाया गया कि शेयर किए गए सवाल वास्तविक NEET-UG 2026 फिजिक्स प्रश्नपत्र से मेल खाते थे।

इससे पहले CBI ने 16 मई को मनीषा मंधारे को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया था।

कई शहरों में छापेमारी

पेपर लीक नेटवर्क की जांच के तहत CBI ने New Delhi, Jaipur, Gurugram, Nashik, Pune, Latur और अहिल्यानगर समेत कई जगहों पर छापेमारी की।

इस दौरान एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक स्टेटमेंट और कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।

अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार

CBI प्रवक्ता के मुताबिक इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में पेपर लीक के मूल स्रोत का भी पता चल गया है।

एजेंसी का आरोप है कि कुछ बिचौलिये छात्रों से लाखों रुपये लेकर उन्हें विशेष कोचिंग क्लासों में भेजते थे, जहां कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र साझा किए जाते थे।

21 जून को होगी दोबारा परीक्षा

NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। हालांकि पेपर लीक के आरोपों के बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी।

अब NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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CJP Delhi High Court
दिल्ली हाई कोर्ट से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को राहत, X अकाउंट बहाल करने का आदेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को बड़ी राहत देते हुए उसके X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को बहाल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत अकाउंट को ब्लॉक किया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध कानून द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ही लगाया जा सकता है और उसकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।   NEET परीक्षा के संदर्भ में ब्लॉक किया गया था अकाउंट सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि NEET परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की अफवाह, भ्रम या अशांति फैलने से रोकने के उद्देश्य से अकाउंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक किया गया था। सरकार का तर्क था कि दोबारा परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं को नियंत्रित करना जरूरी था।   हालांकि अदालत ने माना कि NEET परीक्षा से जुड़ी परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं और जिस आधार पर अकाउंट ब्लॉक किया गया था, वह अब प्रासंगिक नहीं रहा। इसी आधार पर कोर्ट ने ब्लॉक आदेश निरस्त कर अकाउंट बहाल करने का निर्देश दिया।   जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 18 दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। संगठन की मांग है कि NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय की जाए तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पूरी की जाए। इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हैं, जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।   राजनीतिक दल बनने की अटकलें तेज सोशल मीडिया पर चर्चा के बीच संगठन के भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि CJP के संस्थापक ने फिलहाल इसे युवाओं का एक दबाव समूह बताया है और कहा है कि अभी राजनीतिक दल बनाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं, यदि भविष्य में संगठन चुनाव आयोग में पंजीकरण कराता है, तो चुनाव चिह्न का फैसला आयोग के नियमों और उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले के बाद संगठन का X अकाउंट फिर से सक्रिय होगा, जबकि उसका आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।

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पीएम मोदी 8-10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर, रक्षा से ग्रीन एनर्जी तक कई अहम समझौतों की उम्मीद

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 10 जुलाई 2026 तक ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया के भारत स्थित हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को नई मजबूती देगा। तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया जाएंगे पीएम मोदी एएनआई के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान मेलबर्न में भारतीय समुदाय के विशेष कार्यक्रम 'मेलबर्न मीट्स मोदी' में भी शामिल होंगे। फिलिप ग्रीन ने बताया कि प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा होगा। चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस फिलिप ग्रीन ने बताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है— शिक्षा कृषि एवं खाद्य क्षेत्र पर्यटन ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन उन्होंने कहा कि दोनों देश इन क्षेत्रों में निवेश, तकनीकी सहयोग और व्यापार को बढ़ाने के लिए नए रोडमैप पर काम कर रहे हैं। व्यापारिक संबंधों में तेज़ी हाई कमिश्नर के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत के कुल वैश्विक निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात करीब 200 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से मजबूत सहयोग है। कोयला, डीजल, एविएशन फ्यूल और एलएनजी जैसे ऊर्जा संसाधनों के व्यापार के अलावा अब स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन सप्लाई चेन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। रक्षा सहयोग को मिलेगी नई दिशा फिलिप ग्रीन ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने का अवसर होगा। व्यापक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा ऑस्ट्रेलियाई हाई कमिश्नर ने विश्वास जताया कि यह दौरा केवल रक्षा और सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और लोगों के बीच संपर्क को भी नई दिशा देगा। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।  

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