fuel price

Petrol pump display showing fuel prices as global crude oil rises due to Strait of Hormuz tensions on July 23, 2026.
Petrol Diesel Price Today: होर्मुज संकट से 3% उछला क्रूड ऑयल, जानिए 23 जुलाई 2026 को पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today, 23 July 2026: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। जियोपॉलिटिकल जोखिम बढ़ने से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 3% से अधिक उछल गई, लेकिन राहत की बात यह है कि भारत में 23 जुलाई 2026 को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार 58वें दिन ईंधन के दाम स्थिर रखे हैं। होर्मुज संकट से क्यों बढ़ी कच्चे तेल की कीमत? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल पर फिर से Geopolitical Risk Premium जुड़ गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। गुरुवार सुबह: Brent Crude: 3.36% की बढ़त के साथ 94.07 डॉलर प्रति बैरल WTI Crude: 1.15% की तेजी के साथ 87.83 डॉलर प्रति बैरल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं जारी रहती हैं, तो वर्ष की चौथी तिमाही तक ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकता है। 58 दिनों से नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम सरकारी तेल कंपनियों ने 25 मई 2026 के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले मई में सिर्फ 11 दिनों के भीतर चार बार कीमतें बढ़ाई गई थीं: 15 मई: पेट्रोल ₹3.00 और डीजल ₹3.29 प्रति लीटर महंगा 19 मई: पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 महंगा 23 मई: पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 महंगा 25 मई: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 महंगा 23 जुलाई 2026: प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट शहर पेट्रोल (₹/लीटर) डीजल (₹/लीटर) दिल्ली 102.12 95.20 मुंबई 111.21 97.83 कोलकाता 113.51 99.82 चेन्नई 107.77 99.55 नोएडा 102.12 97.56 चंडीगढ़ 101.51 89.47 लखनऊ 101.89 95.36 पटना 113.37 99.36 रांची 105.26 100.49 भोपाल 114.57 99.64 ऐसे चेक करें अपने शहर का पेट्रोल-डीजल रेट अगर आप अपने शहर का ताजा ईंधन मूल्य जानना चाहते हैं, तो SMS के जरिए भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। Indian Oil: RSP <City Code> लिखकर 9224992249 पर भेजें। BPCL: RSP <City Code> लिखकर 9223112222 पर भेजें। HPCL: HPPRICE <City Code> लिखकर 9222201122 पर भेजें। क्या आगे बढ़ सकते हैं दाम? अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ते कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बनाए हुए हैं।  

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Fuel station displaying petrol, diesel, and LPG prices as rising crude oil costs impact Indian state-run oil companies.
Petrol-Diesel Price: पश्चिम एशिया संकट से सरकारी तेल कंपनियों को बड़ा झटका, पेट्रोल-डीजल और LPG पर बढ़ा घाटा

Petrol-Diesel News: पश्चिम एशिया में युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल का असर अब सरकारी तेल कंपनियों के वित्तीय नतीजों में साफ दिखाई दे रहा है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारी घाटा दर्ज किया है। इसकी सबसे बड़ी वजह लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में बदलाव नहीं करना रही। कच्चे तेल की कीमतों में 70% तक उछाल पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 70% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इस दौरान देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम तुरंत नहीं बढ़ाए गए, जिससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर लागत का दबाव बढ़ गया। HPCL और BPCL को कितना हुआ नुकसान? HPCL अप्रैल-जून तिमाही में 12,265 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड घाटा। पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। घरेलू एलपीजी पर 3,607 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई। BPCL पहली तिमाही में 1,873 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड घाटा। पिछले वर्ष इसी अवधि में 6,839 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। एलपीजी बिक्री पर 3,485 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी हुई। घाटे की मुख्य वजह क्या रही? विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, तब सरकारी कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी नहीं की। बाद में सरकार ने: पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए। 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 89 रुपये की बढ़ोतरी की। लेकिन यह बढ़ोतरी बढ़ी हुई लागत की पूरी भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं थी। राजस्व में बढ़ोतरी के बावजूद घाटा दिलचस्प बात यह है कि दोनों कंपनियों का कारोबार बढ़ा, लेकिन बढ़ी हुई लागत ने मुनाफे को नुकसान पहुंचाया। HPCL ऑपरेशन से राजस्व 1.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये (करीब 21% वृद्धि) पहुंच गया। BPCL राजस्व 1.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। HPCL ने अपने बयान में कहा कि पश्चिम एशिया संकट का असर वित्तीय नतीजों पर पड़ा, हालांकि कंपनी के रिफाइनिंग और मार्केटिंग ऑपरेशन मजबूत बने रहे। आगे क्या हो सकता है? यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में ईंधन की कीमतों और सरकारी नीतियों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।  

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Commercial LPG cylinders and a 5kg LPG cylinder displayed after a price cut announced for July 1, 2026.
LPG Price Update: जुलाई के पहले दिन मिली राहत, कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹183.50 और 5 किलो 'छोटू' सिलेंडर ₹13 हुआ सस्ता

जुलाई महीने की शुरुआत आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भारत में भी ईंधन की कीमतों पर इसका असर दिखने लगा है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलो के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और 5 किलो के 'छोटू' एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती की है। इसके अलावा, निजी ईंधन विक्रेता नयारा एनर्जी ने भी पेट्रोल और डीजल के दाम घटाए हैं। वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 तक की कटौती की है। राजधानी दिल्ली में अब इस सिलेंडर की नई कीमत ₹2,930 हो गई है। इस कटौती से होटल, रेस्तरां, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को राहत मिलने की उम्मीद है। 5 किलो का 'छोटू' सिलेंडर भी हुआ सस्ता इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के अनुसार, 5 किलो वाले एलपीजी 'छोटू' सिलेंडर की कीमत में ₹13 की कमी की गई है। दिल्ली में इसकी नई कीमत अब ₹808.50 हो गई है। गौरतलब है कि 1 जून को इसी सिलेंडर की कीमत में ₹11 की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद इसका दाम ₹821.50 हो गया था। अब नई कटौती से उपभोक्ताओं को राहत मिली है। पेट्रोल, डीजल और ATF भी हुए सस्ते कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर अन्य ईंधनों पर भी दिखाई दिया है। नयारा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत ₹5 प्रति लीटर घटाकर लगभग ₹110 प्रति लीटर कर दी गई है। किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा? 5 किलो का 'छोटू' सिलेंडर विशेष रूप से उन लोगों के बीच लोकप्रिय है जो किराए पर रहते हैं या बार-बार स्थान बदलते हैं। इस कटौती का सबसे अधिक लाभ मिलेगा— प्रवासी मजदूरों को दूसरे शहरों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को अकेले रहने वाले नौकरीपेशा लोगों को छोटे परिवारों और अस्थायी उपभोक्ताओं को छोटू सिलेंडर की खास बातें यह फ्री ट्रेड एलपीजी श्रेणी में आता है। इसे खरीदने के लिए केवल पहचान पत्र (ID Proof) की आवश्यकता होती है। पते का प्रमाण (Address Proof) देना जरूरी नहीं होता। इसे किसी भी अधिकृत एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर, किराना स्टोर या ऑथराइज्ड आउटलेट से आसानी से रिफिल कराया जा सकता है। रिफिल के लिए एक ही डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़े रहना आवश्यक नहीं है। राहत की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बाद घरेलू बाजार में एलपीजी और अन्य ईंधनों की कीमतों में आई यह कटौती आम उपभोक्ताओं और व्यवसायों दोनों के लिए राहतभरी मानी जा रही है। अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में घरेलू एलपीजी और अन्य ईंधनों की कीमतों में भी क्या और राहत मिलती है।  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Commercial LPG gas cylinders stacked with price hike impact on businesses and restaurants
महंगाई का बड़ा झटका: कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹195 तक महंगा, जानिए नए रेट और असर

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत आम लोगों के लिए महंगाई की खबर लेकर आई है। कारोबारियों पर भी इसका असर पड़ेगा। 1 अप्रैल से कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। कितनी बढ़ी कीमत? सरकार द्वारा जारी नए रेट के मुताबिक, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹195.50 और कोलकाता में ₹218 की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2078.50 हो गई है, जो पहले ₹1884.50 थी। वहीं कोलकाता में यह कीमत बढ़कर 2208 रुपये पहुंच गई है। अलग-अलग शहरों में नए रेट देश के प्रमुख शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की नई कीमत इस प्रकार है: दिल्ली – ₹2078.50 कोलकाता – ₹2208 मुंबई – ₹2031 चेन्नई – ₹2246.50 पटना – ₹2365 जयपुर – ₹2031 रांची – ₹2120 छोटे सिलेंडर पर भी असर 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर की कीमत में भी ₹51 की बढ़ोतरी की गई है। अब इसकी कीमत ₹549 प्रति रिफिल हो गई है। कारोबारियों पर सीधा असर कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा। इससे खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। पहले भी बढ़ चुके हैं दाम गौरतलब है कि 1 मार्च 2026 को भी कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹114.50 महंगा हुआ था। वहीं 7 मार्च को घरेलू गैस सिलेंडर ₹60 बढ़ा था। यानी पिछले एक महीने में ही कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब ₹300 तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। क्यों बढ़ रही है कीमत? विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर LPG के दामों पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के चलते आने वाले समय में भी कीमतों में बदलाव संभव है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0