Har Ghar Tiranga

Bihar Cabinet meeting chaired by Samrat Choudhary approving 17 major decisions including PPP medical colleges and Har Ghar Tiranga funding.
बिहार कैबिनेट के 17 बड़े फैसले: 16 मेडिकल कॉलेज PPP मॉडल पर चलेंगे, 'हर घर तिरंगा' अभियान के लिए ₹6.12 करोड़ मंजूर

पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में कुल 17 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, पर्यटन, न्यायिक व्यवस्था, जलापूर्ति, उद्योग और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए। सरकार का कहना है कि इन निर्णयों का उद्देश्य राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है। 16 मेडिकल कॉलेज और अस्पताल PPP मॉडल पर संचालित होंगे कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला 'सात निश्चय-3' के तहत राज्य के 16 ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों (डेंटल कॉलेज सहित) को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित और संचालित करने का है। इसके लिए PricewaterhouseCoopers (PwC) को ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया है और ₹8.27 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। राजगीर में बनेगा स्पोर्ट्स साइंस सेंटर खेल प्रतिभाओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राजगीर स्थित राज्य खेल अकादमी में स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी गई। इस परियोजना पर करीब ₹25 करोड़ खर्च किए जाएंगे। वहीं ज्ञान भारतम मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और मेटाडाटा निर्माण के लिए ₹6.23 करोड़ की स्वीकृति भी दी गई। जलापूर्ति और MSME को बढ़ावा कैबिनेट ने अमृत 2.0 योजना के तहत जमालपुर जलापूर्ति परियोजना के लिए ₹102.22 करोड़ और मुंगेर जलापूर्ति परियोजना (फेज-1) के लिए ₹177.72 करोड़ मंजूर किए। साथ ही MSME निदेशालय के पुनर्गठन और पुरातत्व निदेशालय में तकनीकी पदों पर संविदा नियुक्तियों को भी मंजूरी दी गई। न्यायिक व्यवस्था होगी मजबूत राज्य सरकार ने पूर्णिया, भागलपुर और गया में NDPS मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन हेतु 27 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी। इसके अलावा SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 19 अतिरिक्त विशेष न्यायालय स्थापित किए जाएंगे, जिनके लिए 171 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। 330 गृह रक्षकों की होगी तैनाती बाल गृह, बालिका गृह और अन्य संरक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 330 गृह रक्षकों की तैनाती को मंजूरी दी गई। इस पर सरकार का वार्षिक खर्च करीब ₹14.53 करोड़ होगा। स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्र में भी अहम फैसले कैबिनेट ने बिहार आयुष चिकित्सा सेवा नियमावली-2026 में संशोधन को मंजूरी दी। इसके साथ ही बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के लिए 6 नए प्रशासनिक पद और राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, पटना में 2 सुपरन्यूमरेरी पद सृजित किए गए। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना-2026 को भी मंजूरी दी गई। 'हर घर तिरंगा' अभियान के लिए ₹6.12 करोड़ मंजूर कैबिनेट ने 'हर घर तिरंगा अभियान-2026' के सफल आयोजन के लिए ₹6.12 करोड़ की स्वीकृति दी। इसके अलावा पूर्वी चंपारण में केंद्रीय विद्यालय के लिए राज्य सरकार की भूमि 30 वर्ष की लीज पर उपलब्ध कराने और नवादा में बिहार औद्योगिक सुरक्षा बल (BISF) की स्थापना हेतु करीब 44 एकड़ सरकारी भूमि नि:शुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
BJP leaders and party workers attend a review meeting in Patna after the Bankipur Assembly bypoll defeat.
BJP की समीक्षा बैठक में बांकीपुर हार पर मंथन, कार्यकर्ताओं ने बताया हार का बड़ा कारण

पटना: बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की। बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री, सांसद, विधायक, प्रदेश पदाधिकारी और चुनावी जिम्मेदारी संभालने वाले कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य हार के कारणों का विश्लेषण करना और भविष्य की रणनीति तय करना था। बैठक में कार्यकर्ताओं ने फीडबैक देते हुए कहा कि जन सुराज की ओर से यूट्यूब, फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बीजेपी को लेकर कई तरह की गलतफहमियां और कथित भ्रामक बातें फैलाई गईं। उनका कहना था कि पार्टी की ओर से इन दावों का समय पर और प्रभावी जवाब नहीं दिया गया, जिससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी। युवाओं से दूरी भी बनी चिंता का विषय सूत्रों के अनुसार, समीक्षा बैठक में यह भी माना गया कि उपचुनाव में युवाओं का एक वर्ग बीजेपी से दूर होता नजर आया। पार्टी नेतृत्व ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए आने वाले समय में युवाओं से सीधे संवाद बढ़ाने, संगठन से जोड़ने और सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय रहने की रणनीति पर जोर दिया। संजय सरावगी ने लगाया गलत नैरेटिव फैलाने का आरोप बैठक के बाद बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि प्रशांत किशोर और जन सुराज ने सोशल मीडिया के जरिए झूठे नैरेटिव को बढ़ावा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं के बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और गलत सूचनाओं के माध्यम से जनता को भ्रमित करने की कोशिश की गई। सरावगी ने कहा कि पार्टी अब ऐसे प्रचार का मजबूती से जवाब देने की तैयारी करेगी। 7 अगस्त से शुरू होगा समरसता संकल्प अभियान संजय सरावगी ने बताया कि 7 अगस्त को पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन में श्री गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर समरसता संकल्प अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस अभियान के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। 10 से 15 अगस्त तक निकलेगी तिरंगा यात्रा बीजेपी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 10 से 15 अगस्त तक पूरे बिहार में तिरंगा यात्रा निकालने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत 10 अगस्त को पटना के जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक होगी। इस यात्रा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। 13 से 15 अगस्त तक चलेगा 'हर घर तिरंगा' अभियान इसके अलावा 13 से 15 अगस्त तक 'हर घर तिरंगा' अभियान भी चलाया जाएगा। इस दौरान सभी जिलों में तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी और जिला कार्यालयों, जनप्रतिनिधियों के आवास, पार्टी कार्यालयों तथा मंडल और पंचायत स्तर तक तिरंगा फहराने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Iran-US Conflict: ईरानी मीडिया के 3 दावों को अमेरिका ने बताया गलत, CENTCOM ने जारी किया फैक्ट चेक

kalpana जुलाई 31, 2026 0