Important Events July 24

Important Events
Important Events: 24 जुलाई की महत्त्वपूर्ण  घटनाएं

1132 – एलीफ के रानफुल द्वितीय और सिसिली के रोजर द्वितीय के बीच नोसेरा की लड़ाई। 1148 – फ्रांस के लुई VII दूसरे क्रूसेड के दौरान दमिश्क में घेराबंदी । 1701 -  किले पोन्ट्छार्ट्रेन नामक एक फ्रांसीसी ने एम्पोरियम को स्थापित किया। 1715 - जनरल डॉन जुआन यूबीला के तहत 10 जहाजों पर एक स्पेनिश खजाना स्पेन से हवाना, क्यूबा गया, सात दिनों बाद, उनमें से नौ फ्लोरिडा के तट पर एक तूफान में डूब गया और कुछ खजाना बाद में पाया गया। 1758 – अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन उत्तरी अमेरिका की पहली असेंबली वर्जीनिया हाउस ऑफ बर्जेसेज में शामिल हुए। 1783 -  जॉर्जिया को रूस का संरक्षक बनाया गया। 1793 – फ्रांस ने कॉपीराइट कानून बनाया।  1797 -  होराटियो नेल्सन सांता क्रूज़ की लड़ाई में घायल हो गया, जिसमे उसने अपना एक हाथ खो दिया । 1823 – चिली में दास प्रथा को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया। 1830 -  चिली में दास प्रथा समाप्त कर दी गई। 1834 -  पुर्तगाल में लिबरल युद्ध समाप्त हुआ। 1860 - भारत में आयकर सर जेम्स विल्सन द्वारा आरंभ किया गया। 1870 – अमेरिका में पहली अंतरदेशीय रेल सेवा की शुरुआत हुई। 1915 -  सेंट्रल शिकागो में एक स्टीमर ईस्टलैंड की वजह से 844 लोगों की जान गयी। 1929 -  फ्रांसीसी प्रधान मंत्री रेमंड पोंकारे ने इस्तीफा देने के बाद अरिस्तैड ब्रेंड को इसका उत्तराधिकारी बनाया गया। 1932 – रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान की स्थापना की गई। 1935 – ब्रिटेन में पहला बधाई टेलीग्राम भेजा गया। 1938 – इंस्टेट कॉफी की खोज हुई। 1941 – उत्तर यूरोपीय देश लिथुनिया में सम्पूर्ण यहूदी आबादी की नाजियों ने हत्या की। 1944 – 300 लड़ाकू विमानों ने जर्मनी पर बम गिराए। 1969 – अपोलो 11 अंतरिक्ष यान पृथ्वी पर लौटा। 1982 – जापान के नागासाकी में भारी बारिश से पुल ढहने से 299 लोगों की मौत हुई। 1989 – भारत में लोकसभा में 73 विपक्षी सदस्यों ने बोफर्स तोप के मुद्दे पर सदन से इस्तीफा दे दिया और जिसे स्वीकार कर लिया गया। 1991 – तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में बजट पेश किया जिसने भारत के लिए आर्थिक उदारीकरण के रास्ते खोल दिये। 1994 – असम के बसबारी में बोडो उग्रवादियों ने 37 मुस्लिमों की हत्या की। 1999 – अमेरिकी अंतरिक्ष यान कोलंबिया का सफल प्रक्षेपण हुआ। 1999 - ब्रिटेन के लिवरपुल में प्रथम 'सार्वभौमिक महिला धर्मसभा' का आयोजन। 1999 - अमेरिकी अंतरिक्ष यान कोलंबिया का सफल प्रक्षेपण। 2000 – एस. विजयलक्ष्मी शतरंज की पहली महिला ग्रैंडमास्टर बनीं। 2002 - यूरोपियन यूनियन ने संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष में 3.20 करोड़ यूरो अतिरिक्त देने का निर्णय लिया। 2004 - इटली ने भारतीय पर्यटकों के लिए सात वीजा काल सेंटर शुरू करने का निर्णय लिया। 2005 - कोरियाई क्षेत्र को परमाणु हथियारों से मुक्त करने हेतु उत्तर और कोरिया के बीच आम सहमति बनी। 2006 - प्यूर्टो रिको की सुन्दरी जुलेखा रिवेरा मेंडोजा गिस यूनिवर्स, 2006 चुनी गईं। 2008 - फ़्रांस के ट्रिकेस्टिन परमाणु संयंत्र में हुए रिसाव से लगभग 100 व्यक्ति प्रभावित हुए। 2019 - वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास में गुट निरपेक्ष आंदोलन की मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व संयुक्त राष्ट्र में भारत के दूत सैय्यद अकबरुद्दीन द्वारा किया गया।  2019 - भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के रूप में विरल आचार्य का कार्यकाल समाप्त हुआ, उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया । 2019 - केंद्र सरकार ने कुछ सांसदों की सुरक्षा घटाने का निर्णय लिया जिसके बाद 1300 से अधिक कमांडो इस ड्यूटी से मुक्त हुए। 2020 - गुजरात के आणंद में विश्व स्तरीय अत्याधुनिक शहद परीक्षण प्रयोगशाला का शुभारंभ हुआ। 2020 - केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 160वां आयकर दिवस मनाया। 2021 - चीन के जिलिन प्रांत में शनिवार को एक वेयरहाउस में आग लगने से 14 लोगों की मौत हो गई और 26 लोग घायल हो गए। 2021 - मीराबाई चानू ने 49 किग्रा भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का 21 साल का इंतजार खत्म किया व तोक्यो ओलंपिक में देश का खाता भी खोला। 2022 - बिहार के सारण जिले में पटाखा कारोबारी के घर विस्फोट में 6 लोगों की मौत हो गई व कई घायल हुए। 2022 - महाराष्‍ट्र में सोलापुर जिले में एक सड़क दुर्घटना में 20 से अधिक यात्री घायल हुए। 2022 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा शासित 18 राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग 4 घंटे तक मीटिंग की , खेलों से लेकर कारोबार तक हर मुद्दे पर बात हुई। 2023 - राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार - 2022 प्रदान किए। 2023 - भारत की जी-20 अध्यक्षता के तहत आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह की तीसरी और अंतिम बैठक चेन्नई में शुरू हुई। 2023 - जगजीवन आरपीएफ अकादमी लखनऊ में श्री संजय चंदर ने नवनिर्मित राष्ट्रीय शहीद स्मारक का अनावरण किया। 2023 - सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को नया ‘लोगो' ‘एक्स X ' मिला। 2024 - नेपाल में काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर क्रैश हुए प्लेन में सवार 19 में से 18 की मौत हुई व पायलट की हालत गंभीर रही। 2024 - DRDO ने दूसरे चरण की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। 2024 - भारत-रूस अंतर-सरकारी सैन्य और सैन्य तकनीकी सहयोग आयोग के कार्यकारी उप-समूह ने नई दिल्ली में अपनी तीसरी बैठक आयोजित की। 2025 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंदन यात्रा के दौरान भारत व यूनाइटेड किंगडम ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए।   24 जुलाई को जन्मे व्यक्ति   1802 – फ्रांसीसी लेखक एलेक्जेन्डर डयूमा का जन्म हुआ। वह ड्रामा लिखने में बहुत दक्ष थे। 1853 - शंकर बालकृष्ण दीक्षित - भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी व मराठी में लिखित अमूल्य ग्रंथ "भारतीय ज्योतिषशास्त्र" के रचयिता। 1897 - अमीलिया मैरी एरहार्ट प्रसिद्ध अमेरिकी विमानचालक व लेखिका थीं। 1911 - पन्नालाल घोष - भारत के प्रसिद्ध बाँसुरी वादक। 1924 - नाजिश प्रतापगढ़ी - उर्दू के सुप्रसिद्द शायर व कवि। 1928 - केशुभाई पटेल मार्च 1995 से अक्टूबर 1995 तक भारत के गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे।  1935 - रामपाल उपाध्याय - बारहवीं लोकसभा के सदस्य।  1936 - तीजनबाई को सन 2093 में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। 1937 - मनोज कुमार- प्रसिद्ध भारतीय देशभक्त अभिनेता। 1943 - श्री जीसी मल्होत्रा - 12वीं - 13वीं लोकसभा और भारतीय संसद में लोक सभा (निचला सदन) के पूर्व महासचिव। 1945 - अज़ीम प्रेमजी - बंगलोर स्थित 'विप्रो कॉर्पोरेशन' के अध्यक्ष, जो कम्प्यूटर सॉफ़्टवेयर प्रोग्राम का विकास और उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन करती है। 1946 - सत्यपाल मलिक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा मेघालय के १९वें राज्यपाल। 1947 – पाकिस्तान के दिग्गज बल्लेबाज जहीर अब्बास का जन्म हुआ। इन्होंने 78 टेस्ट में, 5,062 रन और 62 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में 2,572 रन बनाये। 1985 - पंकज आडवाणी- प्रसिद्ध भारतीय बिलियर्ड्स और स्नूकर खिलाड़ी ।   24 जुलाई को हुए निधन   1939 - तरुण राम फुकन, असम के सामाजिक कार्यकर्ता। 1980 - उत्तम कुमार - भारतीय सिनेमा में हिन्दी और बांग्ला फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता। 2017 - यशपाल (वैज्ञानिक) - भारत के मशहूर वैज्ञानिक और शिक्षाविद थे। 2017 - उडिपी रामचंद्र राव भारत के एक अन्तरिक्ष वैज्ञानिक व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के भूतपूर्व अध्यक्ष थे। 2020 - प्रख्यात नृत्यांगना अमला शंकर का 101 वर्ष की उम्र में निधन। 2020 - अफ्रीका के देश तंजानिया के पूर्व राष्ट्रपति बेंजामिन उम्कापा (81) का निधन।  2021 - बांग्लादेश के मशहूर लोक गायक फकीर आलमगीर (71) का कोविड-19 से निधन हुआ। 2023 - RSS के वरिष्ठ नेता व प्रचारक मदन दास देवी (81) का निधन हुआ। 2023 - ब्राज़ीलियाई सांबा, बोसा नोवा और जैज़ गायक लेनी एंड्रेड (80) का निधन हुआ। 2024 - इंडोनेशियाई राजनीतिज्ञ और इंडोनेशिया के उपराष्ट्रपति हमजा हज़ (84) का निधन हुआ। 2025 - भारतीय थिएटर जगत के दिग्गज व श्री राम सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (SRC) के पहले निदेशक राजिंदर नाथ (91) का निधन हुआ। 2025 - भारत की अग्रणी जलवायु वैज्ञानिक और मानसून मौसम विज्ञान के दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञों में से एक प्रोफेसर सुलोचना गाडगिल (81) का निधन हुआ।   24 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   दिगंबर महाराज श्री पितळे पुण्यतिथि - मेहकर (बुलढाणा)। देशभक्ति फिल्मों के सरताज पं. श्री मनोज कुमार जी जयन्ती। आयकर दिवस भारत (167वां)।   कृपया ध्यान दें   यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
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ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0