infrastructure

JCB machines repair the damaged Dhanbad-Bokaro road in Kendua after land subsidence
केंदुआ भू-धंसान: साढ़े तीन महीने से बंद धनबाद-बोकारो सड़क की मरम्मत शुरू, जल्द आवागमन बहाल होने की उम्मीद

धनबाद: केंदुआ क्षेत्र में भू-धंसान और गैस रिसाव के बाद करीब साढ़े तीन महीने से बंद धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग को फिर से खोलने की कवायद शुरू हो गयी है. जिला प्रशासन के निर्देश पर बीसीसीएल प्रबंधन की देखरेख में शुक्रवार, 7 अगस्त से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया. सड़क की खुदाई और मरम्मत का काम सीआइएसएफ जवानों की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से कराया जा रहा है. मरम्मत कार्य शुरू होने के बाद लंबे समय से सड़क बंद रहने से परेशान स्थानीय लोगों और दुकानदारों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन बहाल हो सकेगा. छह फीट हिस्से की करायी गयी खुदाई शुक्रवार को जेसीबी मशीन की मदद से भू-धंसान प्रभावित हिस्से की जांच और मरम्मत के लिए सड़क की ऊपरी सतह की खुदाई शुरू की गयी. प्रबंधन की ओर से करीब छह फीट लंबाई वाले हिस्से में दो से तीन फीट तक खुदाई करायी गयी है. इसके बाद सड़क की स्थिति का आकलन करते हुए आगे की मरम्मत की प्रक्रिया पूरी की जायेगी. काम के दौरान पीबी एरिया के जीएम जयंतो दास, पीओ एन राय, एरिया सेफ्टी अधिकारी जीके सिंह, मैनेजर अजीत कुमार समेत सीआइएसएफ के जवान मौजूद रहे. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे कार्य की निगरानी की जा रही है. 15 अप्रैल से बंद है मुख्य मार्ग गौरतलब है कि 15 अप्रैल को केंदुआ क्षेत्र में भू-धंसान और गैस रिसाव की घटना के बाद सुरक्षा कारणों से धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गयी थी. यह मार्ग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके बंद होने से पिछले कई महीनों से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. मुख्य सड़क बंद होने के कारण लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा था. इससे आवागमन का समय बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ा. दुकानदारों को भी सड़क खुलने का इंतजार सड़क बंद रहने का असर केंदुआ और आसपास के बाजारों पर भी पड़ा है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि मुख्य मार्ग पर आवाजाही बंद होने से ग्राहकों की संख्या कम हुई और व्यापार प्रभावित हुआ. अब मरम्मत का काम शुरू होने से लोगों को उम्मीद है कि सड़क खुलने के बाद क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी सामान्य हो जायेंगी. सुरक्षा जांच के बाद बहाल होगा आवागमन प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन की कोशिश है कि प्रभावित हिस्से की स्थिति का आकलन कर आवश्यक मरम्मत जल्द पूरी की जाये. हालांकि, सड़क पर आवागमन तभी बहाल किया जायेगा जब प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किया जायेगा. सड़क की मजबूती और भू-धंसान के संभावित खतरे का आकलन करने के बाद ही वाहनों की आवाजाही शुरू करने का निर्णय लिया जायेगा. सड़क की मरम्मत शुरू होने से स्थानीय लोगों में राहत है, लेकिन सभी की नजर अब इस बात पर है कि धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह कब बहाल होता है.  

kalpana अगस्त 8, 2026 0
Kolkata Metro's tunnel boring machine 'Durga' completes a major underground tunnel section between Khidirpur and Victoria Station for the Joka-Esplanade Purple Line project.
कोलकाता मेट्रो की बड़ी उपलब्धि, TBM 'दुर्गा' विक्टोरिया स्टेशन पहुंची; 1.7 किमी सुरंग की खुदाई पूरी

कोलकाता: कोलकाता मेट्रो की जोका-एस्प्लेनेड (पर्पल लाइन) परियोजना में बड़ी सफलता मिली है। टनल बोरिंग मशीन (TBM) 'दुर्गा' ने खिदिरपुर से विक्टोरिया मेट्रो स्टेशन तक 1.7 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इसे परियोजना का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। एक साल पहले शुरू हुआ था अभियान मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, टीबीएम 'दुर्गा' ने 10 जुलाई 2025 को खिदिरपुर स्थित सेंट थॉमस स्कूल परिसर में बने शाफ्ट से सुरंग खोदने का काम शुरू किया था। लगभग एक वर्ष की लगातार मेहनत के बाद मशीन अब विक्टोरिया मेट्रो स्टेशन तक पहुंच गई है। अधिकारियों ने बताया कि मशीन निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद सुरंग से बाहर निकलेगी और अगले चरण के लिए तैयार की जाएगी। अब पार्क स्ट्रीट की ओर बढ़ेगी खुदाई विक्टोरिया स्टेशन तक सुरंग पूरी करने के बाद टीबीएम 'दुर्गा' और दूसरी मशीन 'दिव्या' अब पार्क स्ट्रीट की दिशा में सुरंग निर्माण का कार्य आगे बढ़ाएंगी। खिदिरपुर से पार्क स्ट्रीट तक लगभग 2.65 किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंग तैयार की जा रही है, जो पर्पल लाइन परियोजना का अहम हिस्सा है। दिसंबर 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, टीबीएम 'दुर्गा' से सुरंग निर्माण का कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि दूसरी मशीन 'दिव्या' मार्च 2027 तक अपना काम पूरा कर सकती है। अत्याधुनिक तकनीक से हो रही खुदाई टीबीएम 'दुर्गा' एक अर्थ प्रेशर बैलेंस (EPB) तकनीक वाली आधुनिक टनल बोरिंग मशीन है। यह करीब 95 मीटर लंबी, 600 टन वजनी है और इसका बाहरी व्यास 6.63 मीटर है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, यह नई पीढ़ी की मशीन अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस है और लगभग 80 मिलीमीटर प्रति मिनट की गति से सुरंग की खुदाई करने में सक्षम है। पर्पल लाइन से मिलेगा बेहतर कनेक्टिविटी जोका-एस्प्लेनेड पर्पल लाइन कोलकाता मेट्रो की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने के बाद दक्षिण कोलकाता के क्षेत्रों को शहर के प्रमुख व्यावसायिक और प्रशासनिक इलाकों से बेहतर और तेज़ कनेक्टिविटी मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि परियोजना पूरी होने पर लाखों यात्रियों को यातायात में बड़ी राहत मिलेगी।  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi inaugurates major infrastructure projects in Rajasthan, including the Pachpadra Greenfield Refinery, Jaipur Metro Phase-2, and the new Jodhpur Airport terminal.
राजस्थान को ₹1 लाख करोड़ की विकास सौगात देंगे पीएम मोदी, पचपदरा रिफाइनरी से मेट्रो और एयरपोर्ट तक बदलेंगे कई आयाम

बालोतरा/जोधपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (4 जुलाई) को राजस्थान दौरे पर राज्य को ₹1 लाख करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इस दौरान वे बालोतरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा जयपुर मेट्रो फेज-2 का शिलान्यास और जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का लोकार्पण भी करेंगे। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से राजस्थान के औद्योगिक विकास, रोजगार, परिवहन और बुनियादी ढांचे को नई गति मिलेगी। 13 साल बाद तैयार हुई पचपदरा रिफाइनरी पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा स्थित पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को किया गया था। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत करीब 37 हजार करोड़ रुपये थी, लेकिन वित्तीय मॉडल में बदलाव और अन्य कारणों से परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 79,459 करोड़ रुपये हो गई। रिफाइनरी में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की 74 प्रतिशत और राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिफाइनरी की प्रमुख विशेषताएं 9 एमएमटीपीए क्षमता वाली देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी 2.4 एमएमटीपीए पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता निर्माण में 16 लाख घन मीटर कंक्रीट और लगभग 3 लाख मीट्रिक टन स्टील का उपयोग निर्माण के दौरान लगभग 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार 1 लाख से अधिक लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर राजस्थान पेट्रो जोन, प्लास्टिक पार्क और डाउनस्ट्रीम उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा जयपुर मेट्रो फेज-2 का होगा शिलान्यास प्रधानमंत्री जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के फेज-2 का भी वर्चुअल शिलान्यास करेंगे। इस परियोजना की अनुमानित लागत 13,037 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके तहत प्रहलादपुरा से टोड़ी मोड़ तक लगभग 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर से शहर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों सीतापुरा और वीकेआईए को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। एयरपोर्ट के पास भूमिगत मेट्रो स्टेशन भी बनाए जाएंगे, जिससे जयपुर का सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क और मजबूत होगा। जोधपुर एयरपोर्ट को मिलेगा नया टर्मिनल प्रधानमंत्री मोदी जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का भी उद्घाटन करेंगे। वे सुबह लगभग 10:30 बजे जोधपुर वायुसेना एयरपोर्ट पहुंचेंगे और पुराने टर्मिनल से ई-कार्ट के माध्यम से नए टर्मिनल भवन तक जाएंगे। नए टर्मिनल के शुरू होने से यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और जोधपुर की हवाई संपर्क क्षमता में भी विस्तार होगा। राजस्थान के विकास को मिलेगी नई रफ्तार सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से राजस्थान में औद्योगिक निवेश, रोजगार, परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। विशेष रूप से पचपदरा रिफाइनरी के संचालन से पश्चिमी राजस्थान को पेट्रोकेमिकल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Residents and members of the Rail Line Construction Struggle Committee gather at a public meeting in Garhwa, demanding restoration of the original Barwadih–Chirmiri–Ambikapur railway route.
झारखंड-छत्तीसगढ़ रेल परियोजना पर विवाद, पुराने रूट में बदलाव का ग्रामीणों ने किया विरोध

गढ़वा: झारखंड के बरवाडीह को छत्तीसगढ़ के चिरमिरी और अंबिकापुर से जोड़ने वाली प्रस्तावित रेल लाइन के रूट में बदलाव को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध तेज हो गया है। बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल लाइन निर्माण संघर्ष समिति ने मांग की है कि परियोजना का निर्माण पुराने प्रस्तावित मार्ग से ही किया जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि रूट बदला गया तो क्षेत्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। बड़गड़ में हुई संघर्ष समिति की बैठक संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को गढ़वा जिले के बड़गड़ स्थित राजकीय मध्य विद्यालय परिसर में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें बड़गड़, भंडरिया और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में प्रस्तावित रेल परियोजना का मार्ग बदलने के निर्णय का सर्वसम्मति से विरोध किया गया। 'रूट बदला तो पिछड़ जाएगा पूरा इलाका' बैठक को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि पुराने सर्वेक्षण वाले मार्ग को छोड़कर नई रेल लाइन किसी अन्य रूट से बनाई गई तो बड़गड़ और भंडरिया जैसे क्षेत्र रेल संपर्क से वंचित रह जाएंगे, जिससे विकास पर गंभीर असर पड़ेगा। समिति के पदाधिकारी जयप्रकाश मिंज ने कहा कि बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल परियोजना इस आदिवासी और पिछड़े इलाके के विकास की आधारशिला है। रूट बदलने से स्थानीय लोगों के रोजगार, शिक्षा और व्यापार के अवसर प्रभावित होंगे। 'वर्षों की तैयारी को नजरअंदाज किया जा रहा' समिति के सदस्य आनंद सोनी ने कहा कि पुराने रेल मार्ग के लिए वर्षों पहले सर्वेक्षण सहित कई तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी थीं। ऐसे में अचानक नया रूट तय करना क्षेत्र की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरकार से पुराने प्रस्तावित मार्ग को बहाल करने की मांग की। 65 एकड़ रेलवे जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप बैठक में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से पहुंचे प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि परियोजना के तहत प्रस्तावित रेलवे जंक्शन पहले सरनाडीह गांव में बनाया जाना था। उनका दावा है कि रेलवे की करीब 65 एकड़ भूमि आज भी सरकारी रिकॉर्ड में रेलवे के नाम दर्ज है, लेकिन उस पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने कथित रूप से अवैध कब्जा कर रखा है। इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की जा चुकी है और मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी लंबित बताया गया। जनजागरण अभियान और आंदोलन की चेतावनी बैठक में निर्णय लिया गया कि पुराने प्रस्तावित रेल मार्ग को बहाल कराने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। साथ ही रेल मंत्रालय, जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद बैठक में जिला परिषद प्रतिनिधि राधेश्याम जायसवाल, मुखिया प्रतिनिधि दिनेश लकड़ा, सत्यानंद बाखला, विधायक प्रतिनिधि ओमप्रकाश, भाजपा मंडल अध्यक्ष बजरंग प्रसाद, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष अर्जुन मिंज सहित विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रेल परियोजना क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके मूल रूट में किसी भी बदलाव का वे पुरजोर विरोध करेंगे।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
An illustration of the proposed six-lane tunnel linking Dwarka Expressway with Nelson Mandela Road in South Delhi, aimed at easing traffic across Delhi-NCR.
दिल्ली-NCR को बड़ी सौगात: द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज तक बनेगी 6-लेन टनल, कैबिनेट ने दी मंजूरी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ी आधारभूत संरचना परियोजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने वाली 6-लेन सुरंग परियोजना को स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना पर 6,969.67 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग NH-148AE के तहत बनने वाली यह 8.1 किलोमीटर लंबी परियोजना दिल्ली के लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच सफर होगा आसान इस परियोजना के पूरा होने के बाद द्वारका, गुरुग्राम, पश्चिम दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के बीच यात्रा अधिक तेज और जाम-मुक्त हो जाएगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और राजधानी के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा। सदर्न रिज के नीचे बनेगी आधुनिक ट्विन-ट्यूब टनल परियोजना की मुख्य सड़क लगभग 6.3 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें 1.98 किलोमीटर हिस्सा Southern Ridge Forest के नीचे से गुजरेगा। यहां अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) की मदद से ट्विन-ट्यूब सुरंग बनाई जाएगी, जिससे सतह पर पर्यावरण और यातायात पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। यह सुरंग शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर नेल्सन मंडेला मार्ग और महिपालपुर-छतरपुर रोड के जंक्शन के पास समाप्त होगी। एलिवेटेड कॉरिडोर से नोएडा और गाजियाबाद की कनेक्टिविटी बेहतर परियोजना के तहत AIIMS New Delhi से महिपालपुर तक एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की भी योजना है। यह कॉरिडोर बारापुला एलिवेटेड रोड से जुड़ेगा, जिससे पश्चिम और दक्षिण दिल्ली से पूर्वी दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद तक बिना रेड लाइट के यात्रा संभव हो सकेगी। इसके अलावा: महिपालपुर-छतरपुर जंक्शन पर 1.8 किमी लंबी एलिवेटेड सड़क बनेगी। छतरपुर-महिपालपुर मार्ग पर अतिरिक्त फ्लाईओवर तैयार होगा। छतरपुर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए एलिवेटेड यू-टर्न बनाया जाएगा। इन सभी हिस्सों को मिलाकर परियोजना की कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर होगी। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे सरकार के अनुसार, इस परियोजना के निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। अनुमान है कि निर्माण कार्य से लगभग: 7.54 लाख प्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार, 9.80 लाख अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार उत्पन्न होंगे। यानी कुल मिलाकर 17 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना है। यह परियोजना राजधानी में यातायात को सुगम बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
A heritage Kolkata tram on city streets, representing West Bengal's plan to introduce modern air-conditioned trams and expand the network for tourism and public transport.
कोलकाता में फिर दौड़ेगी आधुनिक ट्राम, कालीघाट-दक्षिणेश्वर के बीच शुरू होगी AC सेवा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार शहर की 150 वर्ष पुरानी ट्राम विरासत को आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी में है। इस पहल के तहत कोलकाता में जल्द ही वातानुकूलित (AC) ट्राम सेवा शुरू की जाएगी। सरकार का लक्ष्य ट्राम को केवल सार्वजनिक परिवहन ही नहीं, बल्कि धार्मिक और पर्यटन सर्किट का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है। राज्य के परिवहन मंत्री Arjun Singh ने बुधवार को Merchants' Chamber of Commerce & Industry द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि सरकार ट्राम नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में काम कर रही है। कालीघाट-दक्षिणेश्वर कॉरिडोर पर होगा फोकस सरकार की योजना के अनुसार नया ट्राम कॉरिडोर दक्षिणेश्वर और कालीघाट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा न्यू टाउन क्षेत्र में भी नए ट्राम रूट विकसित किए जाएंगे, जिससे शहर के आधुनिक और पारंपरिक हिस्सों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित हो सके। राइट्स को सौंपी गई सर्वे की जिम्मेदारी परिवहन मंत्री ने बताया कि इस परियोजना की व्यवहार्यता और नए ट्राम मार्गों के विकास के लिए RITES Limited को विस्तृत सर्वे का कार्य सौंपा गया है। सर्वे के आधार पर नए ट्रैक, आधुनिक ट्राम कोच और आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। सरकार विदेशी शहरों के आधुनिक ट्राम मॉडल का भी अध्ययन कर रही है ताकि कोलकाता की विरासत को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जा सके। सरकारी बसों का भी होगा आधुनिकीकरण परिवहन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नई AC बसों को भी बेड़े में शामिल करेगी। इनमें इलेक्ट्रिक और CNG दोनों प्रकार की बसें होंगी। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए राज्यभर में व्यापक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिससे स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। जलमार्ग और पोर्ट विकास पर भी जोर सरकार अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रही है। गंगा नदी के किनारे आधुनिक बंदरगाह विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है, जिससे माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स को नई गति मिल सके। निवेशकों को दिया भरोसा कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वस्त किया कि निवेश संबंधी प्रस्ताव नौकरशाही में लंबित नहीं रहने दिए जाएंगे और आवश्यक फैसले तेजी से लिए जाएंगे। सरकार जल्द ही एक परिणामोन्मुखी बिजनेस समिट आयोजित करने की भी योजना बना रही है, जिसमें निवेशकों को पश्चिम बंगाल में उपलब्ध अवसरों से अवगत कराया जाएगा। 'ट्रांसपोर्ट अर्थव्यवस्था की रीढ़' कार्यक्रम में MCCI के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा कि मजबूत सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और अंतर्देशीय जलमार्ग किसी भी प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था की आधारशिला होते हैं। उनका मानना है कि आधुनिक परिवहन नेटवर्क राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देगा।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
NITI Aayog
नीति आयोग की बैठक में सीएम हेमंत ने जल जीवन मिशन का 6,000 करोड़ और कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये की मांग की

रांची। नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास का विजन प्रस्तुत करते हुए केंद्र सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, सिंचाई, खनन और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में विशेष सहयोग की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा का स्रोत नहीं, बल्कि विकसित भारत-2047 का महत्वपूर्ण साझेदार बनना चाहता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने देश की औद्योगिक प्रगति में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिजों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन राज्य ने विस्थापन और नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का भी सामना किया है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जोड़कर ही वास्तविक विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की 6,000 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करने तथा झारखंड में उद्योग, खेल, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए अधिक केंद्रीय मदद की मांग की। राज्य की चुनौतियां सामने रखीं।  उन्होंने बताया कि राज्य में 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 हजार के पास अपना भवन नहीं है, फिर भी पोषण अभियान और सरकार की ‘सामार’ योजना के जरिए कुपोषण और स्टंटिंग में उल्लेखनीय कमी आई है। सभी बच्चों को प्रतिदिन एक अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है और राज्य अपने संसाधनों से 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कर रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से अब आईआईटी, मेडिकल और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन होने लगे हैं। उन्होंने केंद्र से पीएमश्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं को एकीकृत करने का आग्रह किया। कौशल विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड हर वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि बिरसा कौशल विकास कार्यक्रम के तहत राज्य के अधिकांश प्रखंडों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं।  स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी स्वास्थ्य सेवाओं पर मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायत स्तरीय दवा दुकान योजना के तहत राज्य में 1,276 दवा दुकानें संचालित हो रही हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में सीट वृद्धि और नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति में तेजी लाने का आग्रह किया। साथ ही राज्य में एआई आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल विकसित करने की योजना की भी जानकारी दी। खेलों में झारखंड एक्सीलेंट और बेहतरी की संभावना खेल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स और तीरंदाजी में झारखंड की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है। उन्होंने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, हॉकी एवं फुटबॉल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और खेल संघों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।  सिंचाई में सहयोग की जरूरत कृषि और जल संसाधन के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं तथा बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 1.5 लाख एकड़ में फलदार पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने जल जीवन मिशन की लंबित राशि जल्द उपलब्ध कराने और सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग की मांग की। सीएम हेमंत सोरेन के संबोधन की 5 मुख्य बाते मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक झारखंड को केवल खनिज आधारित राज्य नहीं, बल्कि Manufacturing Hub, Green Economy और Knowledge Economy के रूप में विकसित किया जाएगा।   शिक्षा और आंगनबाड़ी पर जोर राज्य में 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 हजार के पास भवन नहीं है, फिर भी कुपोषण में कमी आई है। सरकार 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवन बना रही है और 80 CM Schools of Excellence के अच्छे परिणाम सामने आए हैं।   युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार झारखंड हर साल 1 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है और AI, EV, Robotics जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर विशेष फोकस है।   स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की पहल पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए 1,276 दवा दुकानें संचालित की जा रही हैं। राज्य AI-enabled Digital State Health Profile बनाने की दिशा में काम कर रहा है ताकि गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार हो सके। केंद्र से वित्तीय और विकास संबंधी मांगे मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की 6,000 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करने तथा झारखंड में उद्योग, खेल, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए अधिक केंद्रीय सहयोग की मांग की।

anjali kumari जून 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0