रांची: झारखंड में पिछले कुछ दिनों से कमजोर पड़े मॉनसून के बाद अब मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने गहरे निम्न दबाव (डिप्रेशन) के प्रभाव से राज्य में अगले पांच दिनों तक बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। 27 से 30 जुलाई के बीच अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, मेघ गर्जन, वज्रपात और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। वहीं दक्षिणी और मध्य झारखंड के कई जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया गया है। बंगाल की खाड़ी में बने डिप्रेशन का दिखेगा असर मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तर ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना निम्न दबाव क्षेत्र अब डिप्रेशन में बदल चुका है। अगले 24 घंटों में इसके और मजबूत होकर डीप डिप्रेशन बनने तथा 27 जुलाई को ओडिशा और पश्चिम बंगाल तट के बीच प्रवेश करने की संभावना है। इसी मौसम प्रणाली के कारण झारखंड में मॉनसून दोबारा सक्रिय होगा और कई जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिलेगी। अगले पांच दिनों तक बारिश और वज्रपात की संभावना मौसम विभाग ने बताया है कि 30 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान कई इलाकों में मेघ गर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट 27 जुलाई: गुमला, खूंटी, रांची और लोहरदगा जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। 28 जुलाई: पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला, खूंटी और लोहरदगा जिलों में भारी वर्षा हो सकती है। झारखंड में अब भी 29 प्रतिशत कम बारिश इस मानसून सीजन में झारखंड में अब तक सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। 1 जून से 26 जुलाई तक राज्य में केवल 325 मिमी वर्षा हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 455.9 मिमी होनी चाहिए थी। यानी अब तक राज्य में लगभग 29 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। किसानों के लिए राहत की उम्मीद कम बारिश के कारण राज्य में खरीफ फसलों, खासकर धान की रोपाई प्रभावित हुई है। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में होने वाली व्यापक बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचेगी, जिससे किसानों को धान की रोपाई और अन्य कृषि कार्यों में राहत मिलेगी। हालांकि भारी बारिश और वज्रपात के दौरान खेतों या खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह भी दी गई है।
रांची। लगातार हो रही बारिश के बाद राजधानी रांची की सड़कों की हालत बेहद खराब हो गई है। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ी सड़कें और नालों के गायब ढक्कन आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। रोजाना हजारों वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को इन रास्तों से गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के कारण गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना का खतरा और बढ़ गया है। सबसे खराब स्थिति सबसे खराब स्थिति कोकर से रिम्स जाने वाली व्यस्त सड़क की है। करीब एक वर्ष पहले बनी इस सड़क पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। बारिश के दौरान इनमें पानी भर जाने से वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता और अक्सर वाहन फंस जाते हैं। यह सड़क शहर के प्रमुख अस्पताल तक पहुंचने का मुख्य मार्ग होने के कारण यहां चौबीसों घंटे यातायात बना रहता है। खोरहाटोली से डॉन बॉस्को आईटीआई जाने वाली सड़क और रांची विश्वविद्यालय मुख्यालय के सामने की सड़क भी जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह बने गड्ढों के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। बारिश के समय सड़क और गड्ढों में अंतर करना कठिन हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। आलू गोदाम के पास हालात और भी गंभीर हैं चेशायर होम रोड स्थित आलू गोदाम के पास हालात और भी गंभीर हैं। यहां बड़े नाले के कई ढक्कन गायब हैं, जिससे चारपहिया वाहनों के पहिए अक्सर नाले में फंस जाते हैं। छह महीने पहले बनी सड़क भी किनारों से उखड़ चुकी है। इसी क्षेत्र से मुख्य सड़क की ओर जाने वाले मार्ग पर भी नालों के ढक्कन नहीं हैं। बारिश के दौरान सड़क और नाला एक समान दिखाई देते हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के नाले में गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत और सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।
बिहार में मानसून सक्रिय है, लेकिन पूरे राज्य में बारिश का वितरण समान नहीं है। जहां सीमांचल और उत्तर बिहार के कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है, वहीं दक्षिण बिहार के कई हिस्सों में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों के लिए भारी बारिश, तेज हवाओं और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, आज कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा, गरज-चमक और भारी बारिश की संभावना है। लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है। इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने सीमांचल और उत्तर बिहार के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना वाले जिले: कटिहार किशनगंज अररिया मधेपुरा ऑरेंज अलर्ट जारी: पूर्णिया सहरसा सुपौल मधेपुरा मौसम विभाग का कहना है कि 16 और 17 जुलाई को भी राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। पटना का मौसम राजधानी पटना में दिनभर बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। पिछले कुछ दिनों से पटना के लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह धूप निकलने के बाद दोपहर तक बादल छाने की संभावना बनी हुई है। आसपास के जिलों में भी मौसम का यही रुख देखने को मिल सकता है। मानसून सक्रिय, लेकिन बारिश असमान मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बिहार में मानसून सक्रिय है, लेकिन इसकी गति अपेक्षाकृत धीमी है। यही कारण है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का पैटर्न अलग दिखाई दे रहा है। उत्तर बिहार और सीमांचल में लगातार वर्षा से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। कई नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर, दक्षिण बिहार में कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती प्रभावित हो रही है। पिछले 24 घंटे का मौसम बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। प्रमुख जिले: बेगूसराय बगहा समस्तीपुर पूर्वी चंपारण पटना के कुछ हिस्से वहीं, बुधवार को राज्य का अधिकतम तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। कैमूर सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लोगों के लिए सलाह भारी बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों से खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी है। तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर बनाए रखें।
झारखंड में एक बार फिर मानसून सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) और उससे जुड़े साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल गया है। बुधवार को कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में भी गिरावट आई। अब मौसम विभाग ने 16 से 18 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। बुधवार को कई जिलों में हुई बारिश बुधवार को राज्य के लगभग सभी हिस्सों में बादल छाए रहे और कई स्थानों पर बारिश हुई। मुख्य वर्षा रिकॉर्ड: सिमडेगा: 34 मिमी (सबसे अधिक) मेदिनीनगर: 21 मिमी रांची: 14 मिमी बारिश के कारण राजधानी रांची के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 30.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। 16 जुलाई: इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार, 16 जुलाई को निम्न जिलों में भारी बारिश की संभावना है— रामगढ़ बोकारो धनबाद सरायकेला-खरसावां पूर्वी सिंहभूम पश्चिमी सिंहभूम वहीं, रांची सहित अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। 17 जुलाई: इन इलाकों में बरसेंगे बादल 17 जुलाई को इन जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है— गोड्डा साहिबगंज दुमका पाकुड़ खूंटी सरायकेला-खरसावां पूर्वी सिंहभूम पश्चिमी सिंहभूम राजधानी रांची में दिनभर बादल छाए रहने और कई स्थानों पर मध्यम बारिश होने का अनुमान है। 18 जुलाई: दक्षिण और पूर्वी झारखंड में ज्यादा असर 18 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी इन जिलों के लिए जारी की गई है— गोड्डा साहिबगंज दुमका पाकुड़ गुमला खूंटी सिमडेगा पूर्वी सिंहभूम पश्चिमी सिंहभूम सरायकेला-खरसावां राज्य के अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। लोगों के लिए सलाह मौसम विभाग ने भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचें, मौसम संबंधी ताजा अपडेट पर नजर रखें और तेज बारिश के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें। लगातार सक्रिय मानसून के कारण अगले कुछ दिनों तक झारखंड के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है और इसके असर से राज्य के कई हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई है। बारिश के चलते लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है, वहीं मौसम विभाग ने 1 और 2 जुलाई के लिए कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले दो दिनों तक राज्य के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ बिजली गिरने की आशंका है। इसे देखते हुए लोगों से सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 1 और 2 जुलाई को निम्न जिलों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है— देवघर दुमका गोड्डा जामताड़ा पाकुड़ साहिबगंज बोकारो धनबाद लोहरदगा गुमला रामगढ़ रांची खूंटी सिमडेगा पूर्वी सिंहभूम पश्चिमी सिंहभूम इन जिलों के लिए वज्रपात को लेकर ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचने की सलाह दी है। बारिश से तापमान में आई बड़ी गिरावट मानसून की बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया है। राजधानी रांची में सोमवार की तुलना में मंगलवार को अधिकतम तापमान में करीब 5.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। रांची का अधिकतम तापमान: 28.4°C अनुमानित न्यूनतम तापमान: 21°C मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान: 36.6°C तापमान में आई इस गिरावट से लोगों को लंबे समय बाद गर्मी से राहत मिली है। सबसे ज्यादा बारिश मेदिनीनगर में मंगलवार को राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं— मेदिनीनगर: 67.4 मिमी रांची: 20 मिमी चाईबासा: 14 मिमी बारिश के कारण कई इलाकों का मौसम सुहावना हो गया। 3 से 5 जुलाई तक क्या रहेगा मौसम? मौसम विभाग के अनुसार, 3 से 5 जुलाई के बीच भारी बारिश में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि इस दौरान कई स्थानों पर मेघ गर्जन और वज्रपात की संभावना बनी रहेगी। वहीं 6 जुलाई से एक बार फिर मानसून सक्रिय होने के आसार हैं और राज्य के कई हिस्सों में दोबारा भारी बारिश हो सकती है। अब भी सामान्य से काफी कम बारिश हालांकि मानसून ने अब रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन जून महीने में झारखंड में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई। 1 जून से 30 जून तक के आंकड़े: पूरे झारखंड में सामान्य से 54% कम बारिश रांची में सामान्य से 26% कम बारिश रांची में जहां सामान्य तौर पर इस अवधि में 197.6 मिमी बारिश होती है, वहीं इस बार केवल 146.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। सबसे चिंताजनक स्थिति दुमका की रही, जहां पूरे जून महीने में बारिश लगभग नहीं के बराबर दर्ज की गई। लोगों के लिए सलाह मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। तेज बारिश और वज्रपात के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और मौसम से जुड़े आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखें।
पटना: बिहार में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार राज्य में फिलहाल दो तरह की परिस्थितियां देखने को मिलेंगी। एक ओर दक्षिण और मध्य बिहार के कई जिलों में हीट वेव जैसी स्थिति बनी रहेगी, वहीं उत्तर और मध्य बिहार के कई इलाकों में बारिश, तेज हवा और वज्रपात की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम से जुड़ी सलाहों का पालन करने की अपील की है। इन 14 जिलों में लू का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, पटना, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, बेगूसराय, लखीसराय, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया में आज हीट वेव जैसी स्थिति बनी रह सकती है। इन जिलों में लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी गई है। इन जिलों में बारिश और तेज हवा की संभावना उत्तर और मध्य बिहार के कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इनमें शामिल जिले हैं: पूर्वी चंपारण पश्चिम चंपारण शिवहर सीतामढ़ी मधुबनी सुपौल अररिया किशनगंज गोपालगंज सारण सीवान मुजफ्फरपुर वैशाली दरभंगा समस्तीपुर सहरसा मधेपुरा पूर्णिया कटिहार इन इलाकों में गरज के साथ बारिश, बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। अगले 24 घंटे बाद बदलेगा मौसम मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटे में राज्य के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 25 जून से कई जिलों में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 30 जून तक उत्तर बिहार, सीमांचल और कोसी क्षेत्र में आंधी और बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। तापमान में 2 से 4 डिग्री तक गिरावट के आसार लगातार बारिश के कारण अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे भीषण गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने किसानों को खराब मौसम के दौरान खुले खेतों में काम नहीं करने और बिजली चमकने के समय सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। पटना में देर रात हुई झमाझम बारिश राजधानी पटना और आसपास के इलाकों में बुधवार देर रात मौसम ने अचानक करवट ली। करीब 20 मिनट तक तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश हुई, जिससे लंबे समय से पड़ रही उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली। बारिश के बाद शहर के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई।
Jharkhand Weather Update: झारखंड में मौसम का मिजाज इन दिनों पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। एक ओर कई जिलों में रुक-रुक कर हो रही बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, तो दूसरी ओर पलामू, गढ़वा और चतरा जैसे जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के अधिकांश हिस्सों में 28 जून तक मेघ गर्जन, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है। बारिश से तापमान में आई गिरावट मॉनसून की सक्रियता के कारण राजधानी रांची और मेदिनीनगर के अधिकतम तापमान में 4.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि चाईबासा का तापमान करीब 4 डिग्री सेल्सियस कम हुआ है। इससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है। हालांकि, पलामू, गढ़वा और चतरा जिलों में 23, 24 और 25 जून को लू चलने की संभावना जताई गई है। वज्रपात से तीन लोगों की मौत सोमवार को राज्य के अलग-अलग जिलों में वज्रपात की घटनाओं में तीन लोगों की जान चली गई। हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ क्षेत्र के नावाडीह टोला में बकरियां चराने गए 68 वर्षीय गोवर्धन महतो की वज्रपात से मौत हो गई। गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र के विकताम गांव में 53 वर्षीय ममता कुंवर की जान चली गई। सिमडेगा जिले के केरसई थाना क्षेत्र के भंडारटोली गांव में वज्रपात की चपेट में आने से 15 वर्षीय किशोरी की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे घायल हो गए। कई जिलों में हुई हल्की से मध्यम बारिश सोमवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की और मध्यम बारिश दर्ज की गई। चाईबासा (जगन्नाथपुर) – 14 मिमी सिमडेगा – 10 मिमी खूंटी – 4 मिमी देवघर – 2 मिमी सरायकेला – 2 मिमी बहरागोड़ा – 2.5 मिमी लोहरदगा – 1 मिमी रांची में भी छिटपुट बारिश दर्ज की गई। प्रमुख शहरों का अधिकतम तापमान रांची – 28.4°C जमशेदपुर – 31.8°C मेदिनीनगर – 37.1°C बोकारो – 36.1°C चाईबासा – 30.8°C झारखंड में अब तक 60 प्रतिशत कम बारिश मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 1 जून से 22 जून 2026 के बीच राज्य में सामान्य रूप से 112.1 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में केवल 44.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम है। राजधानी रांची में सामान्य से थोड़ा अधिक वर्षापात हुआ है। यहां 115.6 मिमी के मुकाबले 118.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है। वहीं राज्य के 23 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। सबसे खराब स्थिति गढ़वा जिले की रही, जहां सामान्य से 99 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों में मॉनसून के और सक्रिय होने से राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है।
झारखंड में मॉनसून के सक्रिय होने के साथ मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, वहीं वज्रपात और एक हादसे में दीवार गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए 25 जून तक येलो अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में बारिश, बहरागोड़ा में सबसे ज्यादा वर्षा शुक्रवार को राज्य के विभिन्न इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 18 मिमी बारिश पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा में रिकॉर्ड की गई। राजधानी रांची में सुबह और शाम के दौरान लगभग 3 मिमी बारिश हुई, जबकि मेदिनीनगर में करीब 2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। वज्रपात और हादसों में चार लोगों की मौत मौसम की मार सबसे ज्यादा गढ़वा, गुमला, लातेहार और कोडरमा जिलों में देखने को मिली। गढ़वा के धुरकी थाना क्षेत्र के तेतमा गांव में वज्रपात की चपेट में आने से 18 वर्षीय चंदा कुमारी की मौत हो गई। टेढ़ी हरैया गांव के तौहीद अंसारी घायल हो गए। कोडरमा के डोमचांच क्षेत्र के फुलवरिया गांव में ईंट की दीवार गिरने से 40 वर्षीय आरती देवी की जान चली गई। लातेहार के मारी गांव में वज्रपात से 35 वर्षीय सरोज गंझू की मौत हो गई। गुमला जिले के चिरोडीह गांव में वृद्ध सैबू भोगता की भी आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई। वहीं पलामू के पाटन साप्ताहिक बाजार में वज्रपात से पांच लोग घायल हो गए। 25 जून तक येलो अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 25 जून तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में: मेघ गर्जन वज्रपात हल्की से मध्यम बारिश तेज हवाएं चलने की संभावना है। गढ़वा, पलामू और चतरा जिलों में तापमान बढ़ सकता है, जबकि बाकी इलाकों में बादल छाए रहने और बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। सामान्य से 56 प्रतिशत कम हुई बारिश 1 जून से 19 जून तक झारखंड में केवल 37.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 83.7 मिमी होनी चाहिए थी। यानी राज्य में अब तक करीब 56 प्रतिशत कम बारिश हुई है। तापमान में भी आई गिरावट मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे में 1.8 डिग्री कम हुआ। रांची का अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जिसमें 3.5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। मानसून का मौसम राहत के साथ-साथ कई मौसमी बीमारियां भी लेकर आता है। इस दौरान खांसी, जुकाम, वायरल संक्रमण, फूड पॉइजनिंग और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) मजबूत रखना बेहद जरूरी है। आयुर्वेद में काढ़े को प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर माना गया है, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने की क्षमता देने में सहायक हो सकता है। घर में उपलब्ध कुछ सामान्य जड़ी-बूटियों और मसालों से आसानी से पौष्टिक काढ़ा तैयार किया जा सकता है। तुलसी-अदरक का काढ़ा सबसे सरल और लोकप्रिय काढ़ा तुलसी और अदरक से बनता है। इसके लिए दो कप पानी में 10-12 तुलसी की पत्तियां और एक इंच अदरक डालकर करीब 10 मिनट तक उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो हल्का ठंडा होने पर एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें। आंवला, तुलसी और अदरक का मिश्रण अगर शरीर में कमजोरी या थकान महसूस हो रही हो, तो आंवला, तुलसी और अदरक का काढ़ा लाभदायक माना जाता है। दो कप पानी में एक आंवला, अदरक और तुलसी डालकर 15 मिनट तक उबालें। अंत में शहद मिलाकर सुबह या शाम इसका सेवन किया जा सकता है। मुलेठी और तुलसी का काढ़ा गले की खराश, खांसी और जुकाम से राहत पाने के लिए मुलेठी और तुलसी का काढ़ा उपयोगी माना जाता है। मुलेठी, तुलसी और पानी को 10-15 मिनट तक उबालें और बाद में शहद मिलाकर पीएं। दालचीनी, लौंग और अदरक का काढ़ा दालचीनी, लौंग और अदरक से तैयार काढ़ा श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखने और संक्रमण से बचाव में सहायक माना जाता है। तीन कप पानी में इन सभी सामग्री को 10 मिनट तक उबालें और स्वाद के लिए गुड़ या शहद मिलाएं। हालांकि, आयुर्वेदिक काढ़े स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं, लेकिन इनका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को कोई पुरानी बीमारी है, गर्भावस्था है या नियमित दवाएं चल रही हैं, तो काढ़े का नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।
रांची: झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब तेजी से सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं, जिसके कारण कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। अनुमान है कि अगले चार से पांच दिनों के भीतर मॉनसून राज्य के शेष हिस्सों में भी पूरी तरह फैल जाएगा। इन इलाकों में हुई सबसे ज्यादा बारिश पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में सबसे अधिक 46.4 मिमी बारिश तिलैया डीवीसी (कोडरमा) में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा चंदवा में 45.2 मिमी और कांके (रांची) में 42.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहा। सक्रिय मौसम प्रणाली का दिख रहा असर मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार समुद्र तल पर बना मौसमी टर्फ पश्चिम राजस्थान से गंगेटिक पश्चिम बंगाल तक झारखंड से होकर गुजर रहा है। इसी वजह से राज्य में एक मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय है, जिसका प्रभाव आने वाले कुछ दिनों तक बना रह सकता है। रविवार शाम अचानक बदला मौसम रविवार को दिनभर राजधानी रांची में तेज धूप रही और तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। हालांकि शाम करीब छह बजे के बाद मौसम ने अचानक करवट ली और शहर के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश शुरू हो गई। देर रात तक कई क्षेत्रों में गरज और चमक के साथ बारिश होती रही। सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए बंद रही बिजली भारी बारिश के दौरान रांची के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आधे घंटे से एक घंटे तक बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद रखी गई, ताकि किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। कई इलाकों में हुआ जलभराव तेज बारिश के कारण राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में पानी भर गया। सेवा सदन पथ, जयपाल सिंह स्टेडियम के आसपास का क्षेत्र, हलधर प्रेस गली, मेन रोड, लालजी हिरजी रोड और स्टेशन रोड सहित कई जगहों पर जलजमाव की स्थिति देखने को मिली, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। 15 से 17 जून तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार: 15 जून: आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या मेघ गर्जन की संभावना है। 16 जून: राज्य के कई हिस्सों में इसी तरह का मौसम बना रहेगा और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 17 जून: उत्तर-पश्चिमी हिस्से को छोड़कर राज्य के अन्य क्षेत्रों में कहीं-कहीं बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून की सक्रियता बढ़ने से आने वाले दिनों में झारखंड के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दायरा और व्यापक हो सकता है।
MP-राजस्थान समेत 24 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दावा किया है कि मानसून की केरलम में एंट्री हो गई है। इसके असर से केरलम के अलावा तमिलनाडु और कर्नाटक में कुछ जगहों पर अगले 7 दिन भारी बारिश हो सकती है। इस बार मानसून 3 दिन लेट है। आमतौर पर यह 1 जून को केरलम पहुंचता है। इसके बाद डेढ़ महीने में पूरे देश को कवर कर लेता है। मौसम विभाग ने पहले अनुमान लगाया था कि मानसून 26 मई को केरलम पहुंचेगा। इन राज्यों में प्री मानसून का असर इधर, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में प्री-मानसून एक्टिव है। क्यूम्युलोनिम्बस क्लाउड्स यहां 50 से 70kmph की रफ्तार से आंधी-बारिश करवा सकते हैं। क्यूम्युलोनिम्बस क्लाउड या CB क्लाउड (बादल) मौसम के पावरहाउस माने जाते हैं। तेज आंधी, बिजली और गरज वाले तूफान इन्हीं बादलों के कारण बनते हैं। गर्मी से झुलस रहे ये राज्य हालांकि, देश के कई राज्यों में अभी भी गर्मी कम नहीं हुई है। गुजरात, पश्चिमी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में तापमान 40°C से ऊपर बना हुआ है।
रांची। झारखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। राज्य के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, जबकि कई जिलों में गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम केंद्र रांची ने 2 जून से 5 जून तक के लिए चेतावनी जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सक्रिय मौसमी प्रणालियों का असर मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, झारखंड में मौसम के बदलाव के पीछे कई सक्रिय मौसमी तंत्र काम कर रहे हैं। पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ क्षेत्र में बने चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) के साथ-साथ तमिलनाडु तक फैली ट्रफ लाइन और पाकिस्तान से पश्चिम बंगाल तक गुजर रही दूसरी ट्रफ लाइन का प्रभाव राज्य पर पड़ रहा है। इसके कारण वातावरण में नमी बढ़ी है और बारिश तथा गरज-चमक की स्थिति बन रही है। 5 जून तक जारी रहेगा असर 2 और 3 जून को राज्य के अधिकांश हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने मेघ गर्जन, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की है। 4 और 5 जून को भी पूर्वी और मध्य भागों में इसी तरह का मौसम बने रहने का अनुमान है। रांची, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, खूंटी, लोहरदगा, धनबाद, देवघर, दुमका, गिरीडीह, गोड्डा और जामताड़ा समेत कई जिलों में इसका असर देखने को मिल सकता है। तापमान में भी रहेगा उतार-चढ़ाव मौसम में बदलाव के बावजूद गर्मी से पूरी राहत मिलने की संभावना नहीं है। रांची में 2 जून को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है, जो 6 जून तक बढ़कर 37 डिग्री तक पहुंच सकता है। वहीं न्यूनतम तापमान 24 से 25 डिग्री के बीच रहेगा। पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला, धनबाद, दुमका और पाकुड़ में अधिकतम तापमान 39 से 40 डिग्री तक पहुंच सकता है। चाईबासा और पलामू सबसे गर्म क्षेत्रों में शामिल रहेंगे, जहां तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक जाने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों से वज्रपात और तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।