झारखंड

Jharkhand Under Orange Alert for Heavy Rain and Lightning

झारखंड में मानसून हुआ पूरी तरह सक्रिय, 1-2 जुलाई को कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का ऑरेंज अलर्ट जारी

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Dark monsoon clouds over Jharkhand as heavy rainfall and lightning trigger orange alert across multiple districts.
Jharkhand Heavy Rain Orange Alert July 2026

झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है और इसके असर से राज्य के कई हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई है। बारिश के चलते लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है, वहीं मौसम विभाग ने 1 और 2 जुलाई के लिए कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले दो दिनों तक राज्य के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ बिजली गिरने की आशंका है। इसे देखते हुए लोगों से सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।

इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 1 और 2 जुलाई को निम्न जिलों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है—

  • देवघर
  • दुमका
  • गोड्डा
  • जामताड़ा
  • पाकुड़
  • साहिबगंज
  • बोकारो
  • धनबाद
  • लोहरदगा
  • गुमला
  • रामगढ़
  • रांची
  • खूंटी
  • सिमडेगा
  • पूर्वी सिंहभूम
  • पश्चिमी सिंहभूम

इन जिलों के लिए वज्रपात को लेकर ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचने की सलाह दी है।

बारिश से तापमान में आई बड़ी गिरावट

मानसून की बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया है। राजधानी रांची में सोमवार की तुलना में मंगलवार को अधिकतम तापमान में करीब 5.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।

  • रांची का अधिकतम तापमान: 28.4°C
  • अनुमानित न्यूनतम तापमान: 21°C
  • मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान: 36.6°C

तापमान में आई इस गिरावट से लोगों को लंबे समय बाद गर्मी से राहत मिली है।

सबसे ज्यादा बारिश मेदिनीनगर में

मंगलवार को राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई।

प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं—

  • मेदिनीनगर: 67.4 मिमी
  • रांची: 20 मिमी
  • चाईबासा: 14 मिमी

बारिश के कारण कई इलाकों का मौसम सुहावना हो गया।

3 से 5 जुलाई तक क्या रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के अनुसार, 3 से 5 जुलाई के बीच भारी बारिश में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि इस दौरान कई स्थानों पर मेघ गर्जन और वज्रपात की संभावना बनी रहेगी।

वहीं 6 जुलाई से एक बार फिर मानसून सक्रिय होने के आसार हैं और राज्य के कई हिस्सों में दोबारा भारी बारिश हो सकती है।

अब भी सामान्य से काफी कम बारिश

हालांकि मानसून ने अब रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन जून महीने में झारखंड में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई।

1 जून से 30 जून तक के आंकड़े:

  • पूरे झारखंड में सामान्य से 54% कम बारिश
  • रांची में सामान्य से 26% कम बारिश

रांची में जहां सामान्य तौर पर इस अवधि में 197.6 मिमी बारिश होती है, वहीं इस बार केवल 146.9 मिमी बारिश दर्ज की गई।

सबसे चिंताजनक स्थिति दुमका की रही, जहां पूरे जून महीने में बारिश लगभग नहीं के बराबर दर्ज की गई।

लोगों के लिए सलाह

मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। तेज बारिश और वज्रपात के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और मौसम से जुड़े आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखें।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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साहेबगंज, एजेंसियां। झारखंड के साहेबगंज जिले के भोगनाडीह में 171वें हूल दिवस समारोह से पहले प्रशासन की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एसडीएम कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/135 के तहत सिदो-कान्हू मुर्मू के वंशजों समेत 53 लोगों को नोटिस जारी किया है। सभी को कोर्ट में उपस्थित होकर 10 हजार रुपये का शांति बॉन्ड और दो प्रतिभूतियां जमा करने का निर्देश दिया गया है।   कानून-व्यवस्था का हवाला प्रशासन के अनुसार, बरहेट थाना प्रभारी की 25 जून की रिपोर्ट में हूल दिवस समारोह के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। इसी आधार पर एहतियाती कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किए गए। सूची में भोगनाडीह के ग्राम प्रधान बबलू हांसदा सहित कई ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और आसपास के गांवों के निवासी शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि समारोह को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से की गई है।   चंपाई सोरेन का सरकार पर हमला इस कार्रवाई को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि हूल दिवस के अवसर पर वीर भूमि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। उनके मुताबिक पूरे इलाके में भारी पुलिस बल और बड़ी संख्या में मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं।   चंपाई सोरेन ने कहा कि जिन वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ हूल आंदोलन की शुरुआत की थी, उनके वंशजों और स्थानीय लोगों से श्रद्धांजलि देने के लिए शांति बॉन्ड भरवाना आदिवासी समाज और उनकी विरासत का अपमान है। उन्होंने सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी का आरोप लगाया।   क्या है BNSS की धारा 126? भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत यदि कार्यकारी मजिस्ट्रेट को किसी व्यक्ति से सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका होती है, तो वह उससे भविष्य में शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने को कह सकता है। यह दंडात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि एहतियाती कानूनी प्रक्रिया है। यदि संबंधित व्यक्ति शर्तों का पालन करता है, तो उसके खिलाफ कोई सजा या अन्य कार्रवाई नहीं की जाती।

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Hul Diwas
मुख्यमंत्री हेमंत ने हूल दिवस पर संथाल विद्रोह के नायकों को दी श्रद्धांजलि

रांची। हूल दिवस के अवसर पर राजधानी रांची के सिद्धो-कान्हू पार्क में श्रद्धा और सम्मान के साथ अमर क्रांतिकारी सिद्धो-कान्हू को नमन किया गया। सुबह से ही विभिन्न आदिवासी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और हूल क्रांति के अमर शहीदों के बलिदान को याद किया।   राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने  पुष्पांजलि अर्पित की राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सिद्धो-कान्हू पार्क पहुंचकर सिद्धो-कान्हू की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि हूल क्रांति जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के संघर्ष का प्रतीक है। सिद्धो-कान्हू सहित हूल आंदोलन के सभी अमर बलिदानियों का त्याग और संघर्ष आज भी समाज को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने तथा अपने अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रेरित करता है। हूल दिवस के मौके पर उपस्थित लोगों ने सिद्धो-कान्हू के संघर्ष को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान जनजातीय गौरव, सामाजिक न्याय और स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी वीरों के योगदान को भी याद किया गया।

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