Odisha

पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए यूनेस्को मान्यता की पहल
पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची की दौड़ में, नामांकन प्रक्रिया तेज

पुरी, एजेंसियां। ओडिशा की विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने की कोशिश तेज हो गई है। पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने रथ यात्रा के लिए यूनेस्को मान्यता की दिशा में नामांकन दस्तावेज जमा किए हैं। अब इस प्रक्रिया में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।   यूनेस्को मान्यता के लिए आगे बढ़ी प्रक्रिया     श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से रथ यात्रा को यूनेस्को की विरासत सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से आगे बढ़ाई जा रही है। वर्ष 2025 में नामांकन दस्तावेज जमा किए जाने की जानकारी सामने आई थी। रथ यात्रा को इससे पहले केंद्र संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संगीत नाटक अकादमी की राष्ट्रीय विरासत सूची में भी शामिल किया जा चुका है।   ओडिशा सरकार अब इस अभियान में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और सहयोग की मांग कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रथ यात्रा की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया जा सके।   करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी है रथ यात्रा     पुरी की रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की वार्षिक यात्रा से जुड़ा प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचते हैं। 2026 की रथ यात्रा के दौरान पुरी रेलवे स्टेशन ने करीब 13 लाख श्रद्धालुओं की आवाजाही संभाली।   यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सदियों पुरानी परंपराएं, अनुष्ठान, संगीत, शिल्प और सामुदायिक भागीदारी भी शामिल हैं। इसी सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।   मान्यता मिलने से पर्यटन और विरासत संरक्षण को बढ़ावा     यूनेस्को की मान्यता मिलने से पुरी रथ यात्रा को वैश्विक सांस्कृतिक पहचान मिलने की उम्मीद है। इससे ओडिशा में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रथ यात्रा से जुड़ी पारंपरिक कला, शिल्प और रीति-रिवाजों के संरक्षण को भी मजबूती मिल सकती है।   हालांकि, अभी रथ यात्रा को यूनेस्को की सूची में शामिल नहीं किया गया है। नामांकन और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय होगा। इसलिए फिलहाल इसे यूनेस्को मान्यता की दौड़ में शामिल सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखा जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
Devotees pull Lord Jagannath's chariot during the world-famous Rath Yatra in Puri
जय जगन्नाथ के जयघोष के बीच शुरू हुई विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा, मौसी घर के लिए निकले भगवान जगन्नाथ

ओडिशा के पुरी में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के बीच शुरू हो गई। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर आयोजित इस ऐतिहासिक यात्रा में देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने "जय जगन्नाथ" के जयघोष के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के दर्शन किए। पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद तीनों देव विग्रह अपने-अपने भव्य रथों पर विराजमान होकर गुंडिचा मंदिर, जिसे भगवान की मौसी का घर माना जाता है, के लिए रवाना हुए। सुबह से पूरे हुए सभी धार्मिक अनुष्ठान मंदिर प्रशासन के अनुसार, सुबह मंगला आरती, स्नान पूजा और विशेष श्रृंगार के बाद भगवान को गोपाल वल्लभ भोग और राजभोग अर्पित किया गया। इसके बाद पारंपरिक 'पाहांडी बिजे' अनुष्ठान के तहत देव विग्रहों को गर्भगृह से बाहर लाया गया। सबसे पहले सुदर्शन चक्र, फिर भगवान बलभद्र, माता सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ को उनके निर्धारित रथों पर विराजमान कराया गया। हल्की बारिश को माना गया शुभ संकेत रथ यात्रा की शुरुआत के दौरान पुरी में हल्की बारिश भी हुई। श्रद्धालु इसे भगवान जगन्नाथ की कृपा और शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि रथ यात्रा के दिन वर्षा होना समृद्धि और भगवान की प्रसन्नता का प्रतीक माना जाता है। गजपति महाराज ने निभाई 'चेरा पहरा' की परंपरा रथों पर भगवान के विराजमान होने के बाद रथ यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक 'चेरा पहरा' का आयोजन किया गया। इस रस्म के तहत पुरी के गजपति महाराज ने स्वयं सेवक का रूप धारण कर सोने की झाड़ू से तीनों रथों की प्रतीकात्मक सफाई की। यह परंपरा समाज में समानता और सेवा भाव का संदेश देती है। श्रद्धालुओं ने खींचे तीनों रथ सभी धार्मिक अनुष्ठानों के पूरा होने के बाद भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष, भगवान बलभद्र के तालध्वज और देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ को खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई। हजारों श्रद्धालुओं ने मोटी रस्सियों को थामकर पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रथों को आगे बढ़ाया। महाप्रभु का यह दिव्य कारवां धीरे-धीरे गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ रहा है, जहां पहुंचने के बाद विशेष पूजा और संध्या आरती का आयोजन किया जाएगा। सुरक्षा के बीच भक्ति का महासंगम रथ यात्रा को लेकर पुरी में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। प्रशासन की निगरानी में लाखों श्रद्धालु शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा में शामिल हो रहे हैं। हर ओर भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिल रहा है, जिससे पुरी पूरी तरह जगन्नाथमय हो गया है।  

kalpana जुलाई 16, 2026 0
Odisha CM launches Samarpan online donation service for Jagannath Temple before Rath Yatra
रथ यात्रा से पहले श्रद्धालुओं को बड़ी सौगात, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने शुरू की 'समर्पण' डिजिटल दान सेवा

अब देश-विदेश से घर बैठे कर सकेंगे ऑनलाइन दान, तकनीक से जुड़ेगी आस्था विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले ओडिशा सरकार ने करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक नई डिजिटल सुविधा शुरू की है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के लिए 'समर्पण' नामक ऑनलाइन दान सेवा का शुभारंभ किया। इस पहल के जरिए अब देश और विदेश में रहने वाले श्रद्धालु घर बैठे सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से मंदिर में दान कर सकेंगे। 'समर्पण' डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्घाटन श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के कार्यालय में किया गया। इस सेवा का उद्देश्य दान प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित और अधिक पारदर्शी बनाना है। भक्तों और भगवान के बीच बनेगा डिजिटल सेतु मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि 'समर्पण' केवल एक ऑनलाइन सुविधा नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ और श्रद्धालुओं के बीच आस्था का मजबूत डिजिटल सेतु है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक भक्त मंदिर की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में आसानी से अपनी भागीदारी निभा सकेंगे। उनके अनुसार, डिजिटल माध्यम से दान करने की सुविधा मिलने से प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक भरोसेमंद और सुविधाजनक होगी। आधुनिक तकनीक से तैयार हुआ प्लेटफॉर्म इस ऑनलाइन दान प्रणाली को ओडिशा कंप्यूटर एप्लीकेशन सेंटर (ओसीएसी) ने विकसित किया है। सरकार का कहना है कि नई प्रणाली से मंदिर प्रशासन को दान का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। साथ ही श्रद्धालुओं को किसी बिचौलिए या जटिल प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस सुविधा के माध्यम से देश-विदेश में रहने वाले जगन्नाथ भक्त भी आसानी से मंदिर से जुड़ सकेंगे। रथ यात्रा से पहले श्रद्धालुओं में उत्साह हर वर्ष आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। ऐसे में रथ यात्रा से पहले शुरू की गई 'समर्पण' सेवा को श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस डिजिटल पहल से मंदिर में मिलने वाले दान में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त करने का आसान माध्यम मिलेगा। सरकार का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को डिजिटल सुविधाओं से जोड़कर श्रद्धालुओं को बेहतर और सहज अनुभव उपलब्ध कराना है।  

kalpana जुलाई 16, 2026 0
Devotees pull the grand chariots of Lord Jagannath, Balabhadra, and Subhadra during the Jagannath Rath Yatra in Puri.
Jagannath Rath Yatra 2026: 16 जुलाई से शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा, जानें 10 खास और रोचक बातें

पुरी: विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) से होने जा रहा है। यह भव्य धार्मिक उत्सव 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) तक चलेगा। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र (बलराम) और बहन देवी सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की यात्रा करेंगे। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं और रथ की रस्सियां खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम भी है। आइए जानते हैं जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण और रोचक बातें। जगन्नाथ रथ यात्रा की 10 खास बातें 1. आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से होती है शुरुआत जगन्नाथ रथ यात्रा हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से प्रारंभ होती है। इसकी शुरुआत ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से होती है। 2. तीन देवता, तीन अलग-अलग रथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन अलग-अलग रथों में विराजमान होकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा भगवान के अपनी बुआ के घर जाने का प्रतीक मानी जाती है। 3. विशेष लकड़ी से बनते हैं रथ रथ निर्माण के लिए विशेष प्रकार की पवित्र नीम की लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसे 'दारु' कहा जाता है। शुभ वृक्षों का चयन परंपरागत विधि से किया जाता है। 4. हर रथ का अलग नाम और पहचान भगवान जगन्नाथ का रथ – नंदीघोष (गरुड़ध्वज) भगवान बलभद्र का रथ – तालध्वज देवी सुभद्रा का रथ – दर्पदलन (पद्म रथ) 5. बिना लोहे की कीलों के बनता है रथ मान्यता है कि रथ निर्माण में लोहे की कीलों का उपयोग नहीं किया जाता। रथ निर्माण की प्रक्रिया वसंत पंचमी से शुरू होती है और अक्षय तृतीया से निर्माण कार्य औपचारिक रूप से आरंभ होता है। 6. हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा रथ यात्रा के पांचवें दिन 'हेरा पंचमी' मनाई जाती है। मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी नाराज होकर गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं और भगवान जगन्नाथ के रथ के पहिये को सांकेतिक रूप से क्षति पहुंचाती हैं। यह भगवान के बिना उन्हें साथ लिए चले जाने का प्रतीक है। 7. बहुड़ा यात्रा से होती है वापसी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा लगभग एक सप्ताह गुंडिचा मंदिर में प्रवास करते हैं। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी को उनकी वापसी यात्रा होती है, जिसे बहुड़ा यात्रा कहा जाता है। 8. नीलाद्रि विजय की परंपरा वापसी के बाद भी भगवान जगन्नाथ को माता लक्ष्मी की नाराजगी दूर करनी पड़ती है। जब देवी प्रसन्न होती हैं, तभी भगवान को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश मिलता है। इस रस्म को नीलाद्रि विजय कहा जाता है। 9. सालबेग की मजार पर रुकता है रथ लोकमान्यता के अनुसार रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का रथ मुस्लिम भक्त सालबेग की मजार के पास कुछ समय के लिए रुकता है। यह भगवान की समभाव और सर्वधर्म सम्मान की परंपरा का प्रतीक माना जाता है। 10. रथ की रस्सी खींचना माना जाता है पुण्य धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी खींचते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति और भगवान विष्णु के धाम में स्थान प्राप्त होता है। यही वजह है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस सेवा का हिस्सा बनने के लिए पुरी पहुंचते हैं। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का महापर्व पुरी की यह विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा लगभग तीन किलोमीटर लंबी होती है। भीड़ और श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण कई बार रथों को गुंडिचा मंदिर तक पहुंचने में पूरा दिन या उससे अधिक समय भी लग जाता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति, भक्ति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक माना जाता है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
Droupadi Murmu Documentary
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जीवन पर बनेगी डॉक्यूमेंट्री, आमिर खान करेंगे प्रोड्यूस

मुंबई, एजेंसियां।  भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रेरणादायी जीवन पर जल्द ही एक डॉक्यूमेंट्री बनाई जाएगी। इस परियोजना का निर्माण आमिर खान प्रोडक्शंस कर रहा है। डॉक्यूमेंट्री में राष्ट्रपति मुर्मू के ओडिशा के एक छोटे से गांव से देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति बनने तक के संघर्ष, चुनौतियों और उपलब्धियों को विस्तार से प्रस्तुत किया जाएगा।   स्वाति चक्रवर्ती भटकल करेंगी निर्देशन इस डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन फिल्म निर्माता और लेखिका स्वाति चक्रवर्ती भटकल करेंगी। इससे पहले वह आमिर खान और किरण राव द्वारा निर्मित चर्चित डॉक्यूमेंट्री एंथोलॉजी 'रूबरू रोशनी' का निर्देशन कर चुकी हैं। माना जा रहा है कि नई डॉक्यूमेंट्री राष्ट्रपति मुर्मू के सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ उनके निजी संघर्षों और प्रेरणादायी सफर को भी करीब से दिखाएगी।   गांव में हुई शूटिंग, आदिवासी जीवन की मिलेगी झलक रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग राष्ट्रपति मुर्मू के पैतृक गांव में भी की गई है। इससे दर्शकों को उनके शुरुआती जीवन, आदिवासी संस्कृति और सामाजिक परिवेश को समझने का अवसर मिलेगा। फिल्म में उनके जीवन के उन पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा, जिन्होंने उन्हें विपरीत परिस्थितियों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचाया।   आमिर खान के आगामी प्रोजेक्ट्स भी चर्चा में आमिर खान इन दिनों अभिनय के साथ-साथ अपने प्रोडक्शन हाउस के जरिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। उनकी पिछली प्रोडक्शन फिल्म 'एक दिन' बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। वहीं अब वह सनी देओल और प्रीति जिंटा अभिनीत फिल्म 'बंटवारा 1947' को रिलीज करने की तैयारी में हैं। हाल ही में इस फिल्म का पोस्टर और टीजर जारी किया गया, जिसे दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इसके अलावा आमिर खान ने हाल में अपनी चर्चित फिल्म 'लगान' के 25 वर्ष पूरे होने पर पूरी स्टारकास्ट के साथ इसका जश्न भी मनाया।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Rewarded woman Maoist leader Shakuntala Mahato surrenders at Kolkata Police Headquarters with a firearm and ammunition.
कोलकाता में 10 लाख की इनामी महिला नक्सली शकुंतला महतो का सरेंडर, हथियार और कारतूस किए जमा

  कोलकाता: झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लंबे समय से सक्रिय रही 10 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली शकुंतला महतो ने कोलकाता में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। महिला माओवादी ने लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में एक हथियार और 46 कारतूस के साथ सरेंडर किया। लालबाजार में किया आत्मसमर्पण, पुलिस ने दी जानकारी कोलकाता के पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने जानकारी दी कि शकुंतला महतो भाकपा (माओवादी) की जोनल कमेटी की सदस्य रही है और लंबे समय से पूर्वी भारत के नक्सल प्रभावित इलाकों में सक्रिय थी। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण के बाद सरकार की नीति के अनुसार उसके पुनर्वास और कानूनी औपचारिकताओं की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 2001 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी शकुंतला महतो जानकारी के अनुसार, झारग्राम जिले के बेलपहाड़ी की रहने वाली शकुंतला महतो वर्ष 2001 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी। इसके बाद वह झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रही। हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने की अपील आत्मसमर्पण के बाद शकुंतला महतो ने कहा कि उसने सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में हिंसा का रास्ता छोड़ा है। उन्होंने अन्य माओवादियों से भी अपील की कि वे मुख्यधारा में लौट आएं और विकास की प्रक्रिया में शामिल हों। शकुंतला महतो ने कहा, “जो लोग अभी भी संगठन में हैं, वे हिंसा छोड़कर समाज में वापस आएं। सरकार पुनर्वास और बेहतर जीवन के अवसर दे रही है।” नक्सली नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका का दावा पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शकुंतला महतो माओवादी संगठन के भीतर कई गतिविधियों और रणनीतिक योजनाओं में शामिल रही थी। उसे झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई नक्सल गढ़ों में सक्रिय नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। बेलपहाड़ी, घाटशिला और सारंडा में रही सक्रिय अधिकारियों ने बताया कि वह बेलपहाड़ी, दलमा, घाटशिला, पारसनाथ, बुंडू-तमाड़ और सारंडा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रही। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते कई माओवादी या तो मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण करने को मजबूर हुए हैं। नक्सल आंदोलन पर प्रभाव, सरेंडर बढ़ने के संकेत पुलिस का मानना है कि लगातार हो रहे सरेंडर और गिरफ्तारियों से नक्सली नेटवर्क कमजोर हो रहा है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में और भी माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट सकते हैं।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Bokaro Child Missing
बोकारो से लापता मासूम पुरी में मिला, पुलिस ने पांच दिन में किया सकुशल बरामद

बोकारो। बोकारो जिले के बालीडीह थाना क्षेत्र के कुर्मीडीह से 6 जून को लापता हुए एक बच्चे को पुलिस ने ओडिशा के पुरी से सकुशल बरामद कर लिया है। त्वरित कार्रवाई, तकनीकी जांच और लगातार निगरानी के दम पर पुलिस ने महज पांच दिनों के भीतर बच्चे का पता लगाकर उसे सुरक्षित बरामद कर लिया। बरामदगी के समय बच्चे की मां भी मौके पर मौजूद थीं।   तीन विशेष टीमों ने चलाया सर्च अभियान बच्चे के लापता होने की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना के निर्देश पर तीन विशेष टीमों का गठन किया गया। टीमों ने बच्चे की तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। पुलिस ने बोकारो रेलवे स्टेशन सहित कुल आठ रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।   जांच के दौरान फुटेज में बच्चा पहले बोकारो रेलवे स्टेशन और फिर मुरी स्टेशन पर ट्रेन में सवार होता दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने उसके संभावित यात्रा मार्ग का पता लगाते हुए ओडिशा के पुरी तक तलाश अभियान चलाया, जहां से उसे सुरक्षित बरामद कर लिया गया।   हाईकोर्ट की गंभीरता को देखते हुए हुई त्वरित कार्रवाई मुख्यालय डीएसपी पवन कुमार ने बताया कि नाबालिग बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट भी गंभीर है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की और कम समय में बच्चे को सुरक्षित खोज निकाला।   पारिवारिक परिस्थितियों के कारण भटका बच्चा प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चे के पिता अमित गुप्ता एक आपराधिक मामले में जेल में बंद हैं, जबकि उसकी मां दिल्ली में नौकरी करती हैं। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चा मानसिक रूप से परेशान होकर घर छोड़कर चला गया था।   पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बरामद कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों पर नियमित ध्यान दें और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसी घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।

abhishek singh जून 12, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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