देवर्षि नारद को भारतीय परंपरा में केवल भगवान विष्णु के परम भक्त और देवदूत के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्योतिष शास्त्र के महान विद्वानों में भी गिना जाता है। उन्हें ज्योतिष के 18 प्रमुख प्रवर्तकों में स्थान प्राप्त है और उनके नाम से प्रसिद्ध 'नारद संहिता' (नारदीय ज्योतिष) को एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय ग्रंथ माना जाता है। भारतीय लोकजीवन में नारद जी और ज्योतिष से जुड़ी अनेक कथाएं प्रचलित हैं, जो केवल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का भी संदेश देती हैं। ऐसी ही एक प्रसिद्ध लोककथा भगवान विष्णु और देवर्षि नारद से जुड़ी हुई है, जिसमें पंचांग, वर्षा और ईश्वर की इच्छा का गहरा संबंध बताया गया है। भगवान विष्णु ने नारद जी से पूछा वर्षा का योग कथा के अनुसार, एक दिन देवर्षि नारद भगवान विष्णु के दर्शन के लिए वैकुण्ठ पहुंचे। दोनों के बीच धर्म, नीति और लोककल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। जब नारद जी वापस जाने लगे, तब भगवान विष्णु ने मुस्कुराते हुए उनसे कहा, "नारद! अपना पंचांग देखकर बताओ कि वर्षा का क्या योग बनता है?" नारद जी ज्योतिष शास्त्र के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने अपनी पोथी-पत्री और पंचांग का गहन अध्ययन किया। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का सूक्ष्म विश्लेषण करने के बाद उन्होंने भगवान विष्णु से कहा, "प्रभु! पंचांग के अनुसार दूर-दूर तक वर्षा का कोई योग नहीं बनता।" इतना कहकर नारद जी वहां से विदा हो गए। भविष्यवाणी के तुरंत बाद शुरू हो गई मूसलाधार वर्षा कुछ ही दूरी पर पहुंचे थे कि अचानक मौसम बदल गया। घने बादल छा गए और देखते ही देखते तेज वर्षा शुरू हो गई। नारद जी पूरी तरह भीग गए और आश्चर्यचकित होकर वापस भगवान विष्णु के पास पहुंचे। भगवान विष्णु ने मुस्कुराते हुए पूछा, "नारद! अभी तो तुम कह रहे थे कि वर्षा का कोई योग नहीं है, फिर यह वर्षा कैसे हो गई?" नारद जी ने विनम्रता से भगवान को प्रणाम किया और उत्तर दिया, "प्रभु! मैंने पंचांग की बात कही थी, आपके मन की नहीं। अंततः होता वही है जो आपकी इच्छा होती है।" लोककथा क्या संदेश देती है? यह कथा भारतीय लोकपरंपरा में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि गहरा आध्यात्मिक संदेश भी देती है। इसका उद्देश्य यह बताना है कि ज्योतिष शास्त्र ग्रहों और समय के आधार पर संभावनाओं का संकेत देता है, लेकिन अंतिम निर्णय ईश्वर की इच्छा और कर्मों के व्यापक सिद्धांतों पर निर्भर माना जाता है। भारतीय समाज में ज्योतिष का प्रभाव केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रहा। लोककथाओं, जनश्रुतियों और पारंपरिक आख्यानों में भी इसकी व्यापक चर्चा मिलती है। कई कथाएं ज्योतिष की सटीकता और प्रमाणिकता को दर्शाती हैं, जबकि कुछ कथाएं यह भी बताती हैं कि भविष्यवाणियों की अपनी सीमाएं होती हैं और उनकी व्याख्या करने वाले व्यक्ति की समझ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मन की शक्ति और ज्योतिष का संबंध ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि व्यक्ति का मन अत्यंत शक्तिशाली होता है। अधिकांश लोग वही स्वीकार करते हैं, जो उनका मन सुनना चाहता है। इसी कारण आधुनिक ज्योतिर्विद केवल ग्रहों की स्थिति बताने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सबसे पहले मन को सकारात्मक, शांत और संतुलित रखने की सलाह देते हैं। जब मन निर्मल और स्थिर होता है, तब व्यक्ति अपनी जन्मकुंडली में मौजूद शुभ योगों का बेहतर लाभ उठा सकता है। इसके विपरीत यदि मन भय, भ्रम या नकारात्मक विचारों से भर जाए, तो अनुकूल ग्रह स्थिति होने पर भी व्यक्ति अवसरों का पूरा लाभ नहीं उठा पाता।
दिनांक - 23 जून 2026 दिन - मंगलवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - दक्षिणायन ऋतु - वर्षा ॠतु मास - ज्येष्ठ पक्ष - शुक्ल तिथि - नवमी शाम 04:39 तक तत्पश्चात दशमी नक्षत्र - हस्त सुबह 11:54 तक तत्पश्चात चित्रा योग - वरीयान सुबह 10:13 तक तत्पश्चात परिघ *राहुकाल - शाम 04:02 से शाम 05:43 तक* सूर्योदय - 05:09 सूर्यास्त - 06:22 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे *व्रत पर्व विवरण- विशेष- नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
दिनांक - 22 जून 2026 दिन - सोमवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - दक्षिणायन ऋतु - वर्षा ॠतु मास - ज्येष्ठ पक्ष - शुक्ल तिथि - अष्टमी शाम 03:39 तक तत्पश्चात नवमी नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी सुबह 10:22 तक तत्पश्चात हस्त योग - व्यतीपात सुबह 10:31 तक तत्पश्चात वरीयान *राहुकाल - सुबह 07:39 से सुबह 09:19 तक* सूर्योदय - 05:09 सूर्यास्त - 06:22 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे *व्रत पर्व विवरण- विशेष- *अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है (ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्म खण्ड: 27,29,34)
🌤️ दिनांक - 17 जून 2026 🌤️ दिन - बुधवार 🌤️ विक्रम संवत 2083 🌤️ शक संवत -1948 🌤️ अयन - उत्तरायण 🌤️ ऋतु - ग्रीष्म ॠतु 🌤️ मास - ज्येष्ठ 🌤️ पक्ष - शुक्ल 🌤️ तिथि - तृतीया रात्रि 09:38 तक तत्पश्चात चतुर्थी 🌤️ नक्षत्र - पुनर्वसु रात्रि 01:37 तक तत्पश्चात पुष्य 🌤️ योग - ध्रुव रात्रि 08:51 तक तत्पश्चात व्याघात 🌤️*राहुकाल - दोपहर 12:40 से दोपहर 02:20 तक* 🌤️ सूर्योदय - 05:08 🌤️ सूर्यास्त - 06:21 👉 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे 🚩 व्रत पर्व विवरण- रंभा तृतीया 💥विशेष- *तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
दिनांक - 13 जून 2026 दिन - शनिवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - उत्तरायण ऋतु - ग्रीष्म ॠतु मास - अधिक ज्येष्ठ पक्ष - कृष्ण तिथि - त्रयोदशी शाम 04:07 तक तत्पश्चात चतुर्दशी नक्षत्र - कृत्तिका 14 जून रात्रि 01:16 तक तत्पश्चात रोहिणी योग - सुकर्मा शाम 05:28 तक तत्पश्चात धृति राहुकाल - सुबह 09:18 से सुबह 10:58 तक सूर्योदय - 05:07 सूर्यास्त - 06:19 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे व्रत पर्व विवरण- मासिक शिवरात्रि विशेष- त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌤️ दिनांक - 12 जून 2026 🌤️ दिन - शुक्रवार 🌤️ विक्रम संवत 2083 🌤️ शक संवत -1948 🌤️ अयन - उत्तरायण 🌤️ ऋतु - ग्रीष्म ॠतु 🌤️ मास - अधिक ज्येष्ठ 🌤️ पक्ष - कृष्ण 🌤️ तिथि - द्वादशी शाम 7:36 तक तत्पश्चात त्रयोदशी 🌤️ नक्षत्र - अश्विनी सुबह 06:28 तक तत्पश्चात भरणी 🌤️ योग - अतिगण्ड रात्रि 09:26 तक तत्पश्चात सुकर्मा 🌤️*राहुकाल - सुबह 10:58 से दोपहर 12:39 तक* 🌤️ सूर्योदय - 05:07 🌤️ सूर्यास्त - 06:19 👉 दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे व्रत पर्व विवरण- प्रदोष व्रत विशेष- द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌤️ दिनांक - 11 जून 2026 🌤️ दिन - गुरूवार 🌤️ विक्रम संवत 2083 🌤️ शक संवत -1948 🌤️ अयन - उत्तरायण 🌤️ ऋतु - ग्रीष्म ॠतु 🌤️ मास - अधिक ज्येष्ठ 🌤️ पक्ष - कृष्ण 🌤️ तिथि - एकादशी रात्रि 10:36 तक तत्पश्चात द्वादशी 🌤️ नक्षत्र - रेवती सुबह 08:16 तक तत्पश्चात अश्विनी 🌤️ योग - शोभन 12 जून रात्रि 01:00 तक तत्पश्चात अतिगण्ड 🌤️*राहुकाल - दोपहर 02:19 से शाम 03:59 तक* 🌤️ सूर्योदय - 05:07 🌤️ सूर्यास्त - 06:19 👉 दिशाशूल - दक्षिण दिशा मे व्रत पर्व विवरण- परमा (कामदा)एकादशी,पंचक (समाप्त: सुबह 08:16 ) विशेष- *हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।। एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l
🌤️ दिनांक - 10 जून 2026 🌤️ दिन - बुधवार 🌤️ विक्रम संवत 2083 🌤️ शक संवत -1948 🌤️ अयन - उत्तरायण 🌤️ ऋतु - ग्रीष्म ॠतु 🌤️ मास - अधिक ज्येष्ठ 🌤️ पक्ष - कृष्ण 🌤️ तिथि - दशमी रात्रि 12:57 तक तत्पश्चात एकादशी 🌤️ नक्षत्र - उत्तरभाद्रपद सुबह 09:21 तक तत्पश्चात रेवती 🌤️ योग - आयुष्मान सुबह 06:30 तक तत्पश्चात सौभाग्य 🌤️*राहुकाल - दोपहर 12:38 से दोपहर 02:19 तक* 🌤️ सूर्योदय - 05:07 🌤️ सूर्यास्त - 06:18 👉 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे 🚩 *व्रत पर्व विवरण- 💥*विशेष- 👉🏻 परमा (कमला) एकादशी व्रत कथा: इस व्रत से दरिद्रता होती है समूल नष्ट, चमक जाती है किस्मत⤵️
दिनांक - 09 जून 2026 दिन - मंगलवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - उत्तरायण ऋतु - ग्रीष्म ॠतु मास - अधिक ज्येष्ठ पक्ष - कृष्ण तिथि - नवमी 10 जून रात्रि 02:34 तक तत्पश्चात दशमी नक्षत्र - पूर्वभाद्रपद सुबह 09:39 तक तत्पश्चात उत्तरभाद्रपद योग - प्रीति सुबह 08:19 तक तत्पश्चात आयुष्मान* राहुकाल - शाम 03:59 से शाम 05:39 तक सूर्योदय - 05:07 सूर्यास्त - 06:18 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे व्रत पर्व विवरण- विशेष- नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
वार: रविवार पक्ष: कृष्ण पक्ष माह: ज्येष्ठ मास तिथि: सप्तमी तिथि (रात 3:24 AM तक), इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ नक्षत्र: धनिष्ठा (सुबह 7:55 AM तक), फिर शतभिषा नक्षत्र योग: वैधृति योग (सुबह 10:02 AM तक), इसके बाद विष्कुम्भ योग करण: बव, फिर बालव चंद्र राशि: कुंभ राशि सूर्योदय: सुबह लगभग 5:08 बजे सूर्यास्त: शाम लगभग 6:32 बजे शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:54 AM – 12:49 PM ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 3:58 AM – 4:39 AM अमृत काल: सुबह 10:18 AM – 11:49 AM अशुभ समय: राहुकाल: शाम 5:30 PM – 7:00 PM यमगंड: दोपहर 12:45 PM – 2:25 PM गुलिक काल: 3:55 PM – 5:30 PM आज का विशेष महत्व: आज अधिक भानु सप्तमी का विशेष महत्व माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य उपासना, दान-पुण्य और पूजा-पाठ के लिए दिन शुभ माना जाता है।
🌤️ दिनांक - 05 जून 2026 🌤️ दिन - शुक्रवार 🌤️ विक्रम संवत 2083 🌤️ शक संवत -1948 🌤️ अयन - उत्तरायण 🌤️ ऋतु - ग्रीष्म ॠतु 🌤️ मास - अधिक ज्येष्ठ 🌤️ पक्ष - कृष्ण 🌤️ तिथि - पंचमी 06 जून रात्रि 01:20 तक तत्पश्चात षष्ठी 🌤️ नक्षत्र - श्रवण पूर्ण रात्रि तक 🌤️ योग - ब्रह्म सुबह 09:43 तक तत्पश्चात इन्द्र 🌤️*राहुकाल - सुबह 10:57 से दोपहर 12:37 तक* 🌤️ सूर्योदय - 05:07 🌤️ सूर्यास्त - 06:19 👉 दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे 🚩 व्रत पर्व विवरण- विश्व पर्यावरण दिवस 💥विशेष- पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌤️ दिनांक - 04 जून 2026 🌤️ दिन - गुरूवार 🌤️ विक्रम संवत 2083 🌤️ शक संवत -1948 🌤️ अयन - उत्तरायण 🌤️ ऋतु - ग्रीष्म ॠतु 🌤️ मास - अधिक ज्येष्ठ 🌤️ पक्ष - कृष्ण 🌤️ तिथि - चतुर्थी रात्रि 11:30 तक तत्पश्चात पंचमी 🌤️ नक्षत्र - उत्तराषाढा 05 जून रात्रि 03:41 तक तत्पश्चात श्रवण 🌤️ योग - शुक्ल सुबह 09:03 तक तत्पश्चात ब्रह्म 🌤️*राहुकाल - दोपहर 02:17 से शाम 03:58 तक* 🌤️ सूर्योदय - 05:07 🌤️ सूर्यास्त - 06:26 👉 दिशाशूल - दक्षिण दिशा मे 🚩 *व्रत पर्व विवरण- 💥विशेष- चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
दिनांक - 01 जून 2026 दिन - सोमवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - उत्तरायण ऋतु - ग्रीष्म ॠतु मास - अधिक ज्येष्ठ पक्ष - कृष्ण तिथि - प्रतिपदा शाम 04:37 तक तत्पश्चात द्वितीया नक्षत्र - ज्येष्ठा शाम 07:08 तक तत्पश्चात मूल योग - सिद्ध सुबह 06:19 तक तत्पश्चात साध्य राहुकाल - सुबह 07:37 से सुबह 09:17 तक सूर्योदय - 05:07 सूर्यास्त - 06:25 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे व्रत पर्व विवरण- विशेष- प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
दिनांक - 23 मई 2026 दिन - शनिवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - उत्तरायण ऋतु - ग्रीष्म ॠतु मास - अधिक ज्येष्ठ पक्ष - शुक्ल तिथि - अष्टमी 24 मई प्रातः 04:27 तक तत्पश्चात नवमी नक्षत्र - मघा 24 मई रात्रि 02:09 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी योग - ध्रुव सुबह 06:14 तक तत्पश्चात व्याघात राहुकाल - सुबह 09:17 से सुबह 10:56 तक सूर्योदय - 06:19 सूर्यास्त - 05:11 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे व्रत पर्व विवरण- विशेष - *अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है (ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्म खण्ड: 27,29,34)
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।