Reliance Jio

JioHome 3-in-1 plans combining high-speed Wi-Fi, Live TV channels and OTT subscriptions for home entertainment
JioHome Plans: Wi-Fi, TV और OTT का एक ही पैक, 400 रुपये से शुरू प्लान; जानें 3-in-1 पैक्स में क्या मिलेगा

नई दिल्ली: घर के इंटरनेट, टीवी और OTT सब्सक्रिप्शन को अलग-अलग मैनेज करने की परेशानी कम करने के लिए रिलायंस जियो ने JioHome के तहत कई पैकेज पेश किए हैं। इनका उद्देश्य एक ही कनेक्शन के जरिए हाई-स्पीड Wi-Fi, Live TV और OTT मनोरंजन को एक साथ उपलब्ध कराना है। JioHome में 1,000 से ज्यादा डिजिटल टीवी चैनल और कई OTT ऐप्स का एक्सेस मिलता है। कंपनी के मुताबिक, JioHome के जरिए इंटरनेट, टीवी और OTT को एक ही होम एंटरटेनमेंट सिस्टम में जोड़ा जा सकता है। इन पैक्स को मुख्य रूप से 3-in-1 सर्विस पैक्स, TV-only पैक्स और Wi-Fi-only पैक्स में बांटा गया है। यानी ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से सिर्फ टीवी, सिर्फ इंटरनेट या फिर तीनों सुविधाओं वाला पैकेज चुन सकते हैं। 3-in-1 JioHome पैक में क्या मिलेगा? 3-in-1 पैक उन ग्राहकों के लिए है जिन्हें घर पर इंटरनेट के साथ लाइव टीवी और OTT प्लेटफॉर्म भी चाहिए। इसमें हाई-स्पीड Wi-Fi, 1,000+ डिजिटल टीवी चैनल और कई मनोरंजन ऐप्स को एक साथ इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है। Jio की आधिकारिक वेबसाइट पर JioHome के साथ 15+ OTT ऐप्स तक के विकल्प भी बताए गए हैं। दिए गए ऑफर विवरण के अनुसार: 100 Mbps पैक: 2,122 रुपये के पैक में 2 महीने के साथ 1 महीने की अतिरिक्त वैलिडिटी बताई गई है। 30 Mbps पैक: 2,222 रुपये के पैक में 3 महीने के साथ 1 महीना अतिरिक्त मिलने की जानकारी दी गई है। इन पैक्स में 1,000+ Live TV चैनल और OTT ऐप्स का कॉम्बिनेशन उपलब्ध है। Netflix, Prime Video, JioHotstar, Sony LIV और ZEE5 जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म Jio के OTT इकोसिस्टम में शामिल हैं, हालांकि किसी विशेष पैक में कौन-से ऐप मिलेंगे, यह प्लान के अनुसार बदल सकता है। JioHome में 1,000+ टीवी चैनल और OTT का विकल्प JioHome का सबसे बड़ा आकर्षण इसका टीवी और OTT इंटीग्रेशन है। कंपनी के अनुसार, JioHome के जरिए 1,000 से ज्यादा डिजिटल टीवी चैनल 15 भाषाओं में उपलब्ध हैं। इसके अलावा Jio Set-Top Box के जरिए OTT कंटेंट को भी एक ही स्क्रीन पर एक्सेस किया जा सकता है। इससे यूजर्स को टीवी, मूवी, वेब सीरीज, स्पोर्ट्स और दूसरे मनोरंजन कंटेंट के लिए अलग-अलग कनेक्शन और सब्सक्रिप्शन मैनेज करने की जरूरत कम हो सकती है। TV-only पैक: सिर्फ टीवी चाहिए तो यह विकल्प जिन ग्राहकों को इंटरनेट की जरूरत नहीं है और वे सिर्फ टीवी चैनल देखना चाहते हैं, उनके लिए TV-only विकल्प भी दिए गए हैं। दिए गए पैक विवरण के मुताबिक: 2,000 रुपये का पैक: 5 महीने की वैलिडिटी के साथ 1,000+ Live TV चैनल का विकल्प। इसमें 200+ HD चैनल और 15 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। 1,000 रुपये का पैक: 2 महीने की वैलिडिटी वाला विकल्प। इस छोटे पैक पर सेट-अप फीस और वैल्यू बैक से जुड़े नियम लागू हो सकते हैं। टीवी चैनलों की वास्तविक उपलब्धता क्षेत्र और ब्रॉडकास्टर अधिकारों के आधार पर अलग हो सकती है। Wi-Fi-only पैक: सिर्फ इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों के लिए अगर आपकी प्राथमिकता सिर्फ हाई-स्पीड इंटरनेट है, तो JioHome के Wi-Fi-only पैक भी उपलब्ध हैं। दिए गए ऑफर के अनुसार: 100 Mbps: 5 महीने के लिए 3,000 रुपये का पैक। 30 Mbps: 5 महीने के लिए 2,200 रुपये का पैक। कुछ छोटे वैलिडिटी विकल्पों में सेट-अप फीस और वैल्यू बैक का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, ध्यान रखें कि Jio की वेबसाइट पर सामान्य broadband plans की कीमतें और उपलब्धता अलग-अलग हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, JioFiber के कुछ मौजूदा प्लान 30 Mbps के लिए 399 रुपये + GST और 100 Mbps के लिए 699 रुपये + GST से शुरू होते हैं। इसलिए ग्राहक को रिचार्ज से पहले अपने क्षेत्र में उपलब्ध मौजूदा ऑफर जरूर जांचना चाहिए। JioHome में इंस्टॉलेशन और सेट-टॉप बॉक्स की सुविधा JioHome सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन तक सीमित नहीं है। कंपनी के मुताबिक, इसके इकोसिस्टम में Wi-Fi राउटर, 4K Set-Top Box और JioTV+ जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। Jio Set-Top Box के जरिए Live TV, OTT कंटेंट, ऐप्स और दूसरे मनोरंजन विकल्पों को एक ही डिवाइस पर इस्तेमाल किया जा सकता है। Jio की वेबसाइट के मुताबिक, वार्षिक प्लान पर फ्री इंस्टॉलेशन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकती हैं, जबकि अन्य ऑफर में अलग शर्तें लागू हो सकती हैं। किसके लिए बेहतर है JioHome 3-in-1? अगर घर में कई लोग इंटरनेट के साथ टीवी और OTT का इस्तेमाल करते हैं, तो 3-in-1 पैक सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। इससे अलग-अलग इंटरनेट, टीवी और OTT सेवाओं को मैनेज करने की जरूरत कम होती है। वहीं, सिर्फ टीवी देखने वाले ग्राहक TV-only पैक और केवल इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोग Wi-Fi-only पैक चुन सकते हैं। ध्यान देने वाली बात: JioHome के प्लान, कीमत, OTT ऐप्स, चैनल और ऑफर समय के साथ बदल सकते हैं। इसलिए बुकिंग या रिचार्ज से पहले अपने क्षेत्र में उपलब्ध प्लान और उसकी शर्तें आधिकारिक Jio वेबसाइट या MyJio पर जरूर जांचें।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
Jio 5G Growth
Jio ने 12 महीनों में जोड़े 7.3 करोड़ नए 5G ग्राहक, आकाश अंबानी बोले- अब AI और डीप-टेक पर रहेगा फोकस

मुंबई, एजेंसियां। रिलायंस जियो ने पिछले 12 महीनों में 7.3 करोड़ (73 मिलियन) नए True 5G ग्राहकों को अपने नेटवर्क से जोड़ा है। कंपनी ने अपने ताज़ा वित्तीय नतीजों के साथ यह जानकारी साझा की। इसके साथ ही जियो का 5G नेटवर्क देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला नेटवर्क बन गया है।   तीन महीने में जुड़े 89 लाख नए ग्राहक   कंपनी के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के बीच ही जियो ने 89 लाख नए मोबाइल सब्सक्राइबर जोड़े। बढ़ते ग्राहक आधार के साथ कंपनी का कुल मोबाइल ग्राहक आधार 53.3 करोड़ के पार पहुंच गया है।   4G से आगे निकला 5G डेटा ट्रैफिक   जियो ने बताया कि उसके नेटवर्क पर 5G डेटा ट्रैफिक अब 4G की तुलना में करीब डेढ़ गुना हो चुका है। कंपनी का कहना है कि हाई-स्पीड इंटरनेट और बढ़ते 5G उपयोग के कारण डेटा खपत में लगातार रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।   आकाश अंबानी बोले- जियो बनेगी डीप-टेक कंपनी   रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कहा कि कंपनी अब केवल टेलीकॉम ऑपरेटर नहीं रहना चाहती, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई डिजिटल तकनीकों पर आधारित एक मजबूत डीप-टेक कंपनी बनने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।   5G, ब्रॉडबैंड और AI पर रहेगा अगला दांव   जियो का कहना है कि आने वाले समय में उसका फोकस 5G सेवाओं के विस्तार, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड, AI आधारित डिजिटल सेवाओं और अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी तकनीकों पर रहेगा। कंपनी का लक्ष्य देशभर में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाना है।

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
JIO LEO Satellite
अंबानी के 'देसी स्टारलिंक' को मिली तकनीकी मंजूरी, 1,600 सैटेलाइट वाले प्रोजेक्ट को IN-SPACe से हरी झंडी

नई दिल्ली, एजेंसियां। मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो को अपने स्वदेशी लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क प्रोजेक्ट के लिए बड़ी सफलता मिली है। भारतीय अंतरिक्ष नियामक IN-SPACe ने जियो के करीब 1,600 LEO सैटेलाइट तैनात करने के प्रस्ताव को तकनीकी रूप से उपयुक्त करार दिया है। इसके साथ ही भारत के पहले स्वदेशी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नेटवर्क की दिशा में एक अहम कदम बढ़ गया है।   स्टारलिंक को देगा टक्कर   जियो का यह प्रोजेक्ट एलन मस्क की Starlink सेवा की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश के दूरदराज़ और दुर्गम इलाकों तक हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट पहुंचाना है, जहां फाइबर या मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी मानकों के लिहाज से जियो की योजना वैश्विक LEO सैटेलाइट नेटवर्क के बराबर है।   अब किन मंजूरियों का इंतजार   तकनीकी मंजूरी मिलने के बाद भी परियोजना को व्यावसायिक रूप से शुरू करने से पहले स्पेक्ट्रम आवंटन, अंतिम नियामकीय मंजूरियां और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इनके पूरा होने के बाद ही कंपनी सैटेलाइट प्रक्षेपण और सेवा शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकेगी।   2028 तक शुरू हो सकती है सेवा   रिपोर्टों के मुताबिक रिलायंस जियो की योजना 2028 तक भारतीय निर्मित सैटेलाइट्स के जरिए अपनी ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने की है। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी अरबों डॉलर का निवेश कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और डिजिटल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलेगी।   डिजिटल इंडिया मिशन को मिलेगा बल   विशेषज्ञों के अनुसार जियो का यह प्रोजेक्ट ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं का विस्तार होगा, साथ ही भारत वैश्विक सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाएगा।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Samantha Ruth Prabhu Maa Inti Bangaaram
OTT पर आज बड़ा रिलीज़ डे, Samantha Ruth Prabhu की 'Maa Inti Bangaaram' समेत कई नई फिल्में और वेब सीरीज हुईं रिलीज़

मुंबई, एजेंसियां। इस सप्ताह का शुक्रवार OTT दर्शकों के लिए मनोरंजन से भरपूर साबित होने वाला है। 17 जुलाई को अलग-अलग OTT प्लेटफॉर्म्स पर कई बड़ी फिल्में और वेब सीरीज रिलीज़ हुई हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा Samantha Ruth Prabhu की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'Maa Inti Bangaaram' की है, जिसने सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन के बाद अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दस्तक दे दी है।   JioHotstar पर स्ट्रीम हुई 'Maa Inti Bangaaram   तेलुगु एक्शन-थ्रिलर 'Maa Inti Bangaaram' आज से JioHotstar पर स्ट्रीम हो रही है। यह फिल्म सिनेमाघरों में 19 जून को रिलीज़ हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर ₹100 करोड़ से अधिक की कमाई कर समांथा रुथ प्रभु के करियर की सबसे सफल सोलो फिल्मों में शामिल हो गई। डिजिटल रिलीज़ के बाद अब फिल्म के और बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने की उम्मीद है।   इन नई फिल्मों और सीरीज ने भी दी दस्तक   आज OTT पर 'Heartstopper Forever', कोरियन फैंटेसी ड्रामा 'The East Palace', 'Desire', '23,000 Lives' और कई अन्य नई फिल्में एवं वेब सीरीज भी रिलीज़ हुई हैं। रोमांस, एक्शन, थ्रिलर और फैंटेसी जैसे अलग-अलग जॉनर के कंटेंट के चलते दर्शकों के पास इस वीकेंड कई नए विकल्प मौजूद हैं।   वीकेंड पर OTT प्लेटफॉर्म्स के बीच कड़ी टक्कर   Netflix, JioHotstar, Prime Video और ZEE5 जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म इस वीकेंड नए कंटेंट के दम पर दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। फिल्म और वेब सीरीज की यह लंबी सूची OTT प्लेटफॉर्म्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को भी दिखाती है।   दर्शकों की नजर डिजिटल प्रीमियर पर   सिनेमाघरों में सफल प्रदर्शन के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि 'Maa Inti Bangaaram' डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कैसा प्रदर्शन करती है। वहीं, नई वेब सीरीज और फिल्मों के कारण OTT दर्शकों के लिए यह वीकेंड पूरी तरह मनोरंजन से भरपूर रहने की उम्मीद है।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
Reliance Jio SIM card with smartphone showing recharge plans and deactivation alert notification
Jio SIM डिएक्टिवेशन अलर्ट: रिचार्ज नहीं किया तो बंद हो सकता है नंबर, ये सस्ते प्लान बनेंगे लाइफसेवर

देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी Reliance Jio ने लंबे समय से इनएक्टिव पड़े सिम कार्ड्स को डिएक्टिवेट करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। ऐसे यूजर्स, जो अपने नंबर का इस्तेमाल सिर्फ इनकमिंग कॉल्स के लिए कर रहे हैं और महीनों से कोई रिचार्ज नहीं किया है, उन्हें सबसे ज्यादा जोखिम है। कई यूजर्स ने शिकायत की है कि उनका नंबर बिना किसी पूर्व सूचना के बंद हो गया। ऐसे में अगर आप अपना Jio नंबर सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो समय-समय पर छोटा रिचार्ज करना जरूरी हो गया है। क्यों हो रहा है SIM डिएक्टिवेशन रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन सिम कार्ड्स पर करीब एक साल तक कोई रिचार्ज नहीं किया गया, उन्हें कंपनी धीरे-धीरे बंद कर रही है। खासकर वे नंबर, जो सिर्फ इनकमिंग के लिए इस्तेमाल होते हैं, इस कार्रवाई की जद में हैं। सबसे सस्ते रिचार्ज प्लान अगर आप कम खर्च में अपना नंबर एक्टिव रखना चाहते हैं, तो ये प्लान आपके काम आ सकते हैं— ₹11 डेटा पैक: 10GB हाई-स्पीड डेटा, 1 घंटे की वैलिडिटी (कॉलिंग/SMS नहीं) ₹103 फ्लेक्सी पैक: 5GB डेटा, 28 दिन की वैलिडिटी बैलेंस्ड प्लान्स ₹189 प्लान: 28 दिन की वैलिडिटी, अनलिमिटेड कॉलिंग, 2GB डेटा, SMS शामिल ₹209 प्लान: 22 दिन की वैलिडिटी, रोज 1GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और 100 SMS/दिन, साथ में ऐप बेनिफिट्स क्या करें यूजर्स? अगर आपका Jio नंबर लंबे समय से इनएक्टिव है, तो तुरंत कोई छोटा रिचार्ज कर लें। इससे आपका नंबर सुरक्षित रहेगा और डिएक्टिवेशन का खतरा टल जाएगा। ध्यान रखें कि अलग-अलग सर्किल में प्लान की कीमत और फायदे अलग हो सकते हैं, इसलिए रिचार्ज से पहले ऑफिशियल वेबसाइट या ऐप पर डिटेल्स जरूर चेक करें।  

surbhi अप्रैल 27, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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