Solar energy

Transparent ultra-thin solar panel installed on a window, generating electricity while allowing natural light to pass through.
Window Solar Panel: अब छत नहीं, खिड़कियां भी बनाएंगी बिजली! वैज्ञानिकों ने तैयार किया बाल से 10,000 गुना पतला सोलर पैनल

बिजली की बढ़ती कीमतों और सीमित जगह की समस्या के बीच सोलर एनर्जी को लेकर एक बड़ी तकनीकी सफलता सामने आई है। सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU Singapore) के वैज्ञानिकों ने ऐसा अल्ट्रा-थिन और पारदर्शी सोलर पैनल विकसित किया है, जिसे सिर्फ छतों पर ही नहीं बल्कि घरों की खिड़कियों, कारों और वियरेबल डिवाइसों पर भी लगाया जा सकेगा। इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सोलर सेल इंसानी बाल से लगभग 10,000 गुना पतला है। इसकी पारदर्शिता के कारण यह कांच पर लगाने के बाद भी बाहर का दृश्य लगभग सामान्य बनाए रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक शहरी इलाकों में सोलर एनर्जी के उपयोग का तरीका पूरी तरह बदल सकती है। बाल से 10,000 गुना पतला है नया सोलर सेल NTU Singapore के शोधकर्ताओं ने इस नए सोलर सेल को पेरोव्स्काइट (Perovskite) नामक क्रिस्टलाइन मैटेरियल से तैयार किया है। यह मैटेरियल सूर्य की रोशनी को बिजली में बदलने की क्षमता रखता है। हालांकि पारंपरिक सिलिकॉन सोलर पैनलों की तुलना में इसकी बिजली उत्पादन क्षमता कुछ कम है, लेकिन इसकी बेहद पतली बनावट, हल्का वजन और पारदर्शिता इसे कई नई जगहों पर इस्तेमाल करने योग्य बनाती है, जहां सामान्य सोलर पैनल लगाना संभव नहीं होता। खिड़कियों, कारों और स्मार्ट गैजेट्स पर होगा इस्तेमाल ACS Energy Letters में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, यह पारदर्शी सोलर पैनल इमारतों की कांच की खिड़कियों पर आसानी से लगाया जा सकता है। इससे बाहर का दृश्य पूरी तरह बंद नहीं होता, जबकि खिड़की खुद बिजली उत्पादन का माध्यम बन जाती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक कारों, बसों, स्मार्ट ग्लास, स्मार्टवॉच और अन्य वियरेबल डिवाइसों में भी किया जा सकता है। इससे डिवाइसों को अतिरिक्त ऊर्जा मिल सकेगी और बिजली की खपत कम होगी। कम धूप में भी बना सकता है बिजली इस तकनीक की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल तेज धूप पर निर्भर नहीं रहती। पारंपरिक सिलिकॉन सोलर पैनलों के विपरीत, पेरोव्स्काइट सोलर सेल बिखरी हुई (Diffuse) और अप्रत्यक्ष (Indirect) धूप से भी बिजली बनाने में सक्षम हैं। यही वजह है कि यह तकनीक उन शहरों और देशों के लिए भी उपयोगी मानी जा रही है, जहां सालभर सीधी धूप कम मिलती है। कमरे में रोशनी बनी रहेगी वैज्ञानिकों के अनुसार, इन पैनलों को खिड़कियों पर लगाने से अंदर आने वाली रोशनी कुछ कम हो जाती है। सामान्य कांच जहां 70 से 80 प्रतिशत तक रोशनी अंदर आने देता है, वहीं इस पैनल के साथ यह लगभग 41 प्रतिशत रह जाती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह कमी व्यावहारिक उपयोग में बड़ी समस्या नहीं बनती और कमरे में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी बनी रहती है। अभी शुरुआती चरण में है तकनीक फिलहाल यह तकनीक विकास के शुरुआती चरण में है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि बड़े स्तर पर इसका व्यावसायिक उत्पादन सफल रहा, तो भविष्य में ऑफिस बिल्डिंग्स, घरों और कमर्शियल इमारतों की खिड़कियां भी बिजली उत्पादन का स्रोत बन सकती हैं। रिसर्च टीम ने इस तकनीक के लिए पेटेंट भी दाखिल कर दिया है। यदि आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में पारदर्शी सोलर पैनल बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं।  

surbhi जुलाई 24, 2026 0
Solar panels and battery storage systems illustrating China's dominance in the global clean energy supply chain.
Clean Energy में चीन की बढ़ती ताकत, वैश्विक सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़; भारत के लिए क्यों बढ़ रही चुनौती?

नई दिल्ली: दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार के साथ बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए देश बड़े पैमाने पर क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि, इस वैश्विक बदलाव में चीन ने सोलर उपकरणों, बैटरियों और ऊर्जा भंडारण तकनीक की सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ बना ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ता दबदबा भारत जैसे देशों के लिए अवसर के साथ-साथ रणनीतिक चुनौती भी बन सकता है। क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन में चीन की मजबूत स्थिति चीन आज वैश्विक स्तर पर कई प्रमुख क्लीन एनर्जी उत्पादों के निर्माण में अग्रणी है, जिनमें शामिल हैं— सोलर पैनल और फोटोवोल्टिक (PV) सेल लिथियम-आयन बैटरियां ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम इलेक्ट्रिक वाहनों के बैटरी कंपोनेंट्स इसी वजह से दुनिया के कई देश अपने ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए चीनी उपकरणों पर निर्भर हैं। अमेरिका को भी बढ़ा निर्यात हालिया व्यापार आंकड़ों के अनुसार, चीन से अमेरिका को क्लीन एनर्जी उत्पादों का निर्यात बढ़ा है। मुख्य आंकड़े: सोलर सेल्स का निर्यात: 346% की वार्षिक वृद्धि लिथियम-आयन बैटरी निर्यात: 20.8% की बढ़ोतरी लेड-एसिड बैटरी निर्यात: 151% की वृद्धि यह दर्शाता है कि वैश्विक बाजार में चीनी उत्पादों की मांग बनी हुई है। क्यों बढ़ रही है क्लीन एनर्जी की मांग? विश्लेषकों के अनुसार इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं— AI और डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली खपत ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ता फोकस जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की कोशिश सौर और बैटरी तकनीक की घटती लागत कुछ विश्लेषणों में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंताओं को भी क्लीन एनर्जी की मांग बढ़ने का एक कारण माना गया है। भारत के लिए क्या है चुनौती? भारत तेजी से सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़ा रहा है। सरकार ने घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें— PLI (Production Linked Incentive) योजना सोलर उपकरणों पर Basic Customs Duty (BCD) 'मेक इन इंडिया' अभियान शामिल हैं। इसके बावजूद, कई परियोजनाओं में अब भी चीनी सोलर सेल, मॉड्यूल और बैटरी कंपोनेंट्स का उपयोग किया जा रहा है, क्योंकि वे अक्सर लागत के लिहाज से अधिक प्रतिस्पर्धी माने जाते हैं। बढ़ती बिजली मांग से बढ़ेगा दबाव भारत में AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और नए डेटा सेंटरों के विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में बिजली की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में— अधिक सोलर क्षमता स्थापित करनी होगी। बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने होंगे। घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना होगा। आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत स्थानीय उत्पादन, अनुसंधान और सप्लाई चेन को मजबूत करने में सफल रहता है, तो वह इस चुनौती को अवसर में बदल सकता है।  

surbhi जून 29, 2026 0
Solar energy
Solar energy: सरकार दे रही सब्सिडी, फिर भी लोग क्यों नहीं अपना रहे सोलर एनर्जी?

रांची। बिजली के बढ़ते बिल, ऊर्जा संकट और पर्यावरण संरक्षण के बीच सोलर एनर्जी आज तेजी से लोकप्रिय विकल्प बन गई है। सूरज की रोशनी से बनने वाली यह ऊर्जा स्वच्छ, सुरक्षित और किफायती मानी जाती है। इसके बावजूद भारत में अब भी बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की छत पर सोलर पैनल नहीं लगवा रहे हैं। यही वजह है कि सरकार लगातार लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने 13 फरवरी 2024 को पीएम सूर्य घर   मुफ्त बिजली योजना शुरू की थी। इस योजना का मकसद आम लोगों की छतों को छोटे रूफटॉप सोलर पावर प्लांट में बदलना है, ताकि घरों को सस्ती और स्वच्छ बिजली मिल सके। सरकार ने इसके तहत 1 करोड़ घरों पर सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा है। योजना के जरिए पात्र परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ देने की बात कही गई है। इससे लाखों परिवारों के बिजली बिल में बड़ी राहत मिली है।   कितनी मिलती है सब्सिडी? इस योजना के तहत सरकार सोलर सिस्टम लगवाने पर सीधी आर्थिक मदद देती है।1 किलोवाट के सिस्टम पर 30,000 रुपये, 2 किलोवाट पर 60,000 रुपये, और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर अधिकतम 78,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। इसके अलावा, सरकार करीब 7% ब्याज दर पर बिना गारंटी के आसान लोन की सुविधा भी दे रही है, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब लोगों के लिए सोलर लगवाना आसान हो गया है। पीएम सूर्य घर योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है। आधिकारिक वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाएं. राज्य, बिजली कंपनी और कंज्यूमर नंबर जैसी जानकारियां भरें। सोलर प्लांट का साइज चुनें और आवेदन सबमिट करें। आपके द्वारा चुनी कंपनी का प्रतिनिधि आपके घर आकर छत का निरीक्षण करेगा। उपयुक्‍त पाए जाने पर आवेदन अप्रूव हो जाएगा। आवेदन के बाद अधिकृत विक्रेता छत का निरीक्षण करते हैं और उपयुक्त पाए जाने पर सोलर सिस्टम लगाया जाता है।   सोलर पावर के फायदे क्या हैं? सोलर सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा है बिजली बिल में भारी कटौती। इसकी उम्र लगभग 25 साल होती है और इसकी लागत आमतौर पर 4 से 5 साल में निकल आती है। इसके बाद लंबे समय तक बिजली पर खर्च लगभग खत्म हो सकता है। जरूरत से ज्यादा बिजली बनने पर उपभोक्ता उसे ग्रिड में बेचकर कमाई भी कर सकते हैं।   फिर लोग क्यों नहीं लगा रहे सोलर पैनल? इतने फायदों के बावजूद कई लोग सोलर अपनाने से बचते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है छत पर पर्याप्त जगह का न होना। दूसरी वजह है शुरुआती खर्च, क्योंकि सब्सिडी के बाद भी इंस्टॉलेशन पर अच्छी-खासी रकम लगती है। इसके अलावा, कई लोगों को सब्सिडी प्रक्रिया और तकनीकी जानकारी की सही समझ नहीं होती। कुछ लोग रखरखाव और बैटरी खर्च को लेकर भी हिचकते हैं।

Unknown मार्च 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0