stock market decline

Gold Price
Gold Price: सोने-चांदी के दामों में उछाल, सोना ₹1.55 लाख के पार; चांदी में भी तेजी

मुंबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के बीच भारत में सोने और चांदी के भाव में जोरदार उछाल देखने को मिला है। मंगलवार, 11 अगस्त को MCX पर सोना ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर के ऊपर पहुंच गया था। चांदी में भी मजबूत तेजी दर्ज हुई।   सोने की कीमत में तेजी   MCX पर सोने की कीमत में तेजी के पीछे वैश्विक बाजार में बुलियन की मजबूत मांग और निवेशकों का सुरक्षित निवेश की ओर रुख प्रमुख वजहों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना 4,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।   सोने में तेजी से घरेलू बाजार में ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों और निवेशकों की लागत बढ़ गई है। शादी और त्योहारों के सीजन से पहले कीमतों पर बाजार की नजर बनी हुई है।   चांदी में भी जोरदार तेजी   सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। चांदी में औद्योगिक मांग के साथ निवेश मांग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालिया कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 65 डॉलर प्रति औंस के आसपास रही। भारत में MCX चांदी की कीमत पहले ही ₹2 लाख प्रति किलोग्राम से ऊपर के ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रही है।   क्यों बढ़ रहे हैं सोने-चांदी के भाव?   कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, डॉलर की चाल, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग शामिल हैं। बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक अक्सर सोने की ओर रुख करते हैं।   हालांकि, इतनी तेज तेजी के बाद मुनाफावसूली से कीमतों में अचानक गिरावट भी आ सकती है। इसलिए केवल तेजी देखकर निवेश करने के बजाय कीमत और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है।

anjali kumari अगस्त 12, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव; कच्चे तेल की तेजी से बढ़ी चिंता

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में आज 12 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में कमजोरी देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 0.34% गिरकर 77,888 के आसपास, जबकि निफ्टी 50 करीब 0.31% टूटकर 24,396 के स्तर पर आ गया। बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और निवेशकों की सतर्कता को प्रमुख वजह माना जा रहा है।   कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता   अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। मध्य-पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए महंगा क्रूड भारतीय कंपनियों की लागत और देश के आयात बिल पर दबाव डाल सकता है।   16 में से 11 सेक्टर इंडेक्स लाल   आज शुरुआती कारोबार में बाजार की कमजोरी व्यापक रही। 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से 11 गिरावट में कारोबार करते दिखे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव रहा।   वहीं Godrej Consumer Products के शेयर में करीब 8% की तेज गिरावट देखने को मिली। कंपनी के CEO सुधीर सीतापति के दोबारा नियुक्ति के कुछ ही समय बाद इस्तीफा देने से निवेशकों की चिंता बढ़ी।   निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों पर   बाजार की दिशा पर अब घरेलू और अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का भी असर पड़ सकता है। निवेशक ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।  

anjali kumari अगस्त 12, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 900 अंक टूटा; निफ्टी 24 हजार से नीचे

मुंबई, एजेंसियां। BSE Sensex और Nifty 50 में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 900 अंक टूटकर 76,400 के नीचे पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24 हजार के अहम स्तर से फिसलकर 23,950 के नीचे कारोबार करता दिखा।   विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए लोगों से किफायत बरतने की अपील, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 845 अंकों से अधिक गिरकर 76,482 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी करीब 238 अंक टूटकर 23,936 पर कारोबार करता दिखा।   ज्वैलरी सेक्टर में भारी बिकवाली   प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की सलाह के बाद ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। Senco Gold का शेयर करीब 9 प्रतिशत तक टूट गया। वहीं Kalyan Jewellers, Titan Company और PC Jeweller के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।   रुपये में कमजोरी और महंगाई की चिंता   डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ और शुरुआती कारोबार में 94.90 के स्तर तक पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है।   विशेषज्ञों के मुताबिक, इस्राइल-ईरान तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अभी मजबूत मानी जा रही है, लेकिन बढ़ती तेल कीमतें और विदेशी मुद्रा पर दबाव आने वाले समय में बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

Unknown मई 11, 2026 0
Stock Market
Stock Market: गिरावट के साथ खुला शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां।  हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में बाजार लाल निशान पर खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई।   सेंसेक्स 330 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 330 अंक गिरकर 77,334 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 93 अंक फिसलकर 24,079.75 पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले गुरुवार को भी बाजार में भारी गिरावट रही थी, जब सेंसेक्स 852 अंक टूटकर 77,664 पर और निफ्टी 205 अंक गिरकर 24,173 पर बंद हुआ था।   विदेशी निवेश और तेल कीमतों का दबाव बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। गुरुवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 3,254 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट का खतरा बढ़ रहा है।   रुपया भी दबाव में, लगातार कमजोरी जारी डॉलर के मुकाबले रुपये में भी गिरावट देखी जा रही है। शुरुआती कारोबार में रुपया 24 पैसे कमजोर होकर 94.25 के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी पूंजी निकासी इसके प्रमुख कारण हैं।   वैश्विक तनाव से बढ़ी चिंता विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिर स्थिति ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका असर सीधे शेयर बाजार और मुद्रा पर पड़ रहा है।   आगे क्या रहेगा रुख विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते और विदेशी निवेश की बिकवाली रुकती नहीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

Unknown अप्रैल 24, 2026 0
Stock Market
Stock Market: गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में Middle East के बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन BSE Sensex 702 अंकों की गिरावट के साथ 76,847.57 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 23,842.65 पर बंद हुआ, जो करीब 208 अंकों की गिरावट दर्शाता है।   ऑटो और बैंकिंग शेयरों में दबाव बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक रहा। Eicher Motors और Maruti Suzuki जैसे प्रमुख ऑटो शेयरों में करीब 5% तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की सतर्कता के चलते कई सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।   रुपये पर भी दबाव डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 56 पैसे कमजोर होकर 93.39 के स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर मुद्रा बाजार पर भी पड़ा।

Unknown अप्रैल 13, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0