खेल में जीत और हार दोनों ही एक खिलाड़ी के सफर का हिस्सा होती हैं, लेकिन कई बार हार का दर्द भावनाओं पर इतना भारी पड़ता है कि उसे छिपा पाना मुश्किल हो जाता है। महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में स्कॉटलैंड और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए मुकाबले के बाद ऐसा ही एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। डगआउट में रोती नजर आईं डार्सी कार्टर 18 जून को खेले गए मुकाबले में वेस्टइंडीज ने स्कॉटलैंड को 7 रन से हराया। मैच के अंतिम क्षणों में कैमरा स्कॉटलैंड की बल्लेबाज डार्सी कार्टर की ओर गया, जहां वह डगआउट में बैठकर आंसू पोंछती हुई नजर आईं। उस समय स्कॉटलैंड को जीत के लिए 8 गेंदों में 17 रन की जरूरत थी, लेकिन टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। हार करीब देखकर डार्सी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाईं और फूट-फूट कर रोने लगीं। करीब 14 सेकंड का यह वीडियो क्रिकेट प्रशंसकों को भावुक कर रहा है। शानदार पारी के बावजूद नहीं दिला सकीं जीत डार्सी कार्टर का दर्द इसलिए भी ज्यादा था क्योंकि उन्होंने अपनी टीम को जीत दिलाने के लिए पूरा प्रयास किया था। 154 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने शानदार 59 रन की अर्धशतकीय पारी खेली, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका। स्कॉटलैंड की टीम निर्धारित 20 ओवर में 146 रन ही बना सकी और मुकाबला 7 रन से हार गई। टूर्नामेंट में स्कॉटलैंड की पहली हार महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में स्कॉटलैंड की यह पहली हार रही। टीम ने अपने पहले मैच में आयरलैंड को 40 रन से हराकर शानदार शुरुआत की थी। ग्रुप-2 की पॉइंट्स टेबल में स्थिति ग्रुप-2 में इंग्लैंड दो मैचों में दो जीत के साथ शीर्ष पर बना हुआ है। वेस्टइंडीज भी दो जीत के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि स्कॉटलैंड तीसरे स्थान पर मौजूद है। पहला स्थान – इंग्लैंड दूसरा स्थान – वेस्टइंडीज तीसरा स्थान – स्कॉटलैंड चौथा स्थान – श्रीलंका पांचवां स्थान – न्यूजीलैंड छठा स्थान – आयरलैंड हालांकि हार के बावजूद स्कॉटलैंड की टीम के पास सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने का मौका अभी भी बरकरार है।
कोलकाता: 21 जून को कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि कार्यक्रम की तैयारियों के चलते रेड रोड बंद रहने की अवधि में आम लोगों और यात्रियों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए प्रभावी वैकल्पिक यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस कार्यक्रम के मद्देनजर 14 जून से रेड रोड के कुछ हिस्सों को बंद किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कार्यक्रम समाप्त होते ही रेड रोड खोलने का निर्देश मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि योग दिवस कार्यक्रम समाप्त होने के तुरंत बाद रेड रोड को आम जनता के उपयोग के लिए फिर से खोलने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं। अदालत ने कहा कि जब तक सड़क बंद रहती है, तब तक आम नागरिकों और याचिकाकर्ताओं के लिए वैकल्पिक मार्गों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। वकीलों ने उठाया आवाजाही में परेशानी का मुद्दा याचिकाकर्ता संगठन की ओर से कहा गया कि रेड रोड बंद होने के कारण वकीलों और अन्य लोगों को अदालत आने-जाने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने तर्क दिया कि सड़क को इतने लंबे समय तक बंद रखना उचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने दलील दी कि कोलकाता पुलिस आयुक्त के पास किसी सड़क को इतने लंबे समय तक बंद रखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने सड़क बंद करने संबंधी अधिसूचना को रद्द करने की मांग की। तीन सप्ताह में राज्य सरकार से हलफनामा मांगा मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सड़क बंद करने के आदेश की वैधता को चुनौती दिए जाने का संज्ञान लिया और राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं को भी सरकार के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। रक्षा मंत्रालय को भी बनाया जाएगा पक्षकार जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने याचिकाकर्ताओं को रक्षा मंत्रालय को भी मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि रेड रोड भारतीय सेना की पूर्वी कमान की भूमि पर स्थित है, इसलिए इस मामले में रक्षा मंत्रालय का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। सरकार का पक्ष: कोलकाता से दुनिया को जाएगा योग का संदेश राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) बिल्वदल भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम पश्चिम बंगाल सरकार और आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से "कोलकाता से पूरी दुनिया को योग और भारत की सांस्कृतिक विरासत का संदेश जाएगा।" ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजन क्यों नहीं? कोर्ट ने पूछा सवाल सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने से बचाने के लिए कार्यक्रम रेड रोड की बजाय ब्रिगेड परेड ग्राउंड में क्यों नहीं आयोजित किया गया। इस पर राज्य सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि इलाके में कई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं और प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी न हो। सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि याचिकाकर्ता संगठन के सदस्यों सहित आम नागरिकों की आवाजाही को यथासंभव सुगम बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
कोलकाता: झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लंबे समय से सक्रिय रही 10 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली शकुंतला महतो ने कोलकाता में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। महिला माओवादी ने लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में एक हथियार और 46 कारतूस के साथ सरेंडर किया। लालबाजार में किया आत्मसमर्पण, पुलिस ने दी जानकारी कोलकाता के पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने जानकारी दी कि शकुंतला महतो भाकपा (माओवादी) की जोनल कमेटी की सदस्य रही है और लंबे समय से पूर्वी भारत के नक्सल प्रभावित इलाकों में सक्रिय थी। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण के बाद सरकार की नीति के अनुसार उसके पुनर्वास और कानूनी औपचारिकताओं की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 2001 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी शकुंतला महतो जानकारी के अनुसार, झारग्राम जिले के बेलपहाड़ी की रहने वाली शकुंतला महतो वर्ष 2001 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी। इसके बाद वह झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रही। हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने की अपील आत्मसमर्पण के बाद शकुंतला महतो ने कहा कि उसने सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में हिंसा का रास्ता छोड़ा है। उन्होंने अन्य माओवादियों से भी अपील की कि वे मुख्यधारा में लौट आएं और विकास की प्रक्रिया में शामिल हों। शकुंतला महतो ने कहा, “जो लोग अभी भी संगठन में हैं, वे हिंसा छोड़कर समाज में वापस आएं। सरकार पुनर्वास और बेहतर जीवन के अवसर दे रही है।” नक्सली नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका का दावा पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शकुंतला महतो माओवादी संगठन के भीतर कई गतिविधियों और रणनीतिक योजनाओं में शामिल रही थी। उसे झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई नक्सल गढ़ों में सक्रिय नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। बेलपहाड़ी, घाटशिला और सारंडा में रही सक्रिय अधिकारियों ने बताया कि वह बेलपहाड़ी, दलमा, घाटशिला, पारसनाथ, बुंडू-तमाड़ और सारंडा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रही। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते कई माओवादी या तो मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण करने को मजबूर हुए हैं। नक्सल आंदोलन पर प्रभाव, सरेंडर बढ़ने के संकेत पुलिस का मानना है कि लगातार हो रहे सरेंडर और गिरफ्तारियों से नक्सली नेटवर्क कमजोर हो रहा है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में और भी माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट सकते हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कोलकाता में अचानक सड़कों पर उतरकर हॉकर्स हटाओ अभियान के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। यह विरोध मार्च बिना किसी पूर्व सूचना के कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके से शुरू हुआ, जिससे प्रशासन और स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया। 1.2 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों के साथ एस्प्लेनेड से सुबोध मलिक चौक तक लगभग 1.2 किलोमीटर लंबा शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला। इस दौरान उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष और डोला सेन मौजूद रहे। अचानक हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय हॉकर्स और आम लोग भी शामिल हो गए, जिससे इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई। हॉकर्स हटाओ अभियान पर तीखा विरोध तृणमूल कांग्रेस ने राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे हॉकर्स हटाओ अभियान को गैर-कानूनी, अन्यायपूर्ण और अमानवीय करार दिया। पार्टी का कहना है कि बिना पुनर्वास के रेहड़ी-पटरी वालों को हटाना पूरी तरह गलत है और इससे गरीबों की आजीविका पर सीधा असर पड़ता है। प्रशासन को नहीं लगी भनक इस पूरे प्रदर्शन की खास बात यह रही कि प्रशासन को इसकी कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। मुख्यमंत्री अचानक एस्प्लेनेड पहुंचीं और वहां से पैदल मार्च शुरू किया, जिसके चलते मौके पर अफरा-तफरी और कौतूहल का माहौल बन गया। पहले भी हो चुका है विरोध इससे पहले भी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने सियालदह स्टेशन के पास हॉकर्स के समर्थन में धरना प्रदर्शन किया था। उस समय भी मांग की गई थी कि किसी भी हटाने की कार्रवाई से पहले पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। पार्टी के भीतर हलचल की चर्चा इस विरोध मार्च के दौरान तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक अस्थिरता की चर्चाएं भी तेज रहीं। हाल के दिनों में पार्टी के कुछ सांसदों और विधायकों के अलग-अलग रुख को लेकर संगठनात्मक एकता पर सवाल उठे हैं। राजनीतिक संदेश साफ विश्लेषकों के अनुसार यह मार्च केवल हॉकर्स के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों के खिलाफ ममता बनर्जी के सख्त रुख को भी दर्शाता है। कोलकाता की सड़कों पर उनका यह अचानक उतरना एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस और चर्चाओं को जन्म दे गया है।
पश्चिम बंगाल इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। राज्य सरकार 20 जून को पश्चिम बंगाल दिवस के मौके पर कोलकाता में गंगा (हुगली नदी) के बीच 500 नौकाओं पर एक साथ योगाभ्यास का भव्य आयोजन करने जा रही है। यदि यह आयोजन सफल रहता है, तो इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो सकता है। राज्य सचिवालय नबान्न से मिली जानकारी के अनुसार, यह आयोजन हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी में आयोजित बड़े योग कार्यक्रमों से भी अधिक भव्य और ऐतिहासिक होने की उम्मीद है। सरकार इसे बंगाल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में देख रही है। इन स्थानों पर होगा योग महोत्सव का आयोजन गंगा योग कार्निवाल के मुख्य केंद्रों में मिलेनियम पार्क, बेलूड़, दक्षिणेश्वर, बाबूघाट और प्रिंसेप घाट शामिल होंगे। इस अवसर पर गंगा के दोनों किनारों को विशेष रूप से सजाया जाएगा। हावड़ा ब्रिज से लेकर विद्यासागर सेतु तक के क्षेत्र और बीच में स्थित 42 इमारतों को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा। शाम के समय ड्रोन शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया जा सकता है, जिससे यह कार्यक्रम केवल योग तक सीमित न रहकर एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले लेगा। 21 जून को रेड रोड पर होगा मुख्य योग दिवस समारोह 20 जून को गंगा योग कार्निवाल के बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शामिल होने की संभावना है। राज्य सरकार के अनुसार, गंगा योग कार्निवाल को योग दिवस समारोह की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है और इसे देश के सबसे बड़े नदी-आधारित योग आयोजनों में शामिल करने की योजना है। बंगाल की आध्यात्मिक विरासत को मिलेगी नई पहचान पश्चिम बंगाल की आध्यात्मिक और योग परंपरा काफी समृद्ध रही है। रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, योगीराज श्यामाचरण लाहिड़ी, स्वामी युक्तेश्वर गिरि और स्वामी योगानंद जैसी महान विभूतियों ने इस भूमि को विश्व स्तर पर विशेष पहचान दिलाई है। पिछले कुछ वर्षों में योग के क्षेत्र में बंगाल अपेक्षाकृत पीछे माना जाने लगा था। राज्य सरकार इस आयोजन के माध्यम से बंगाल की खोई हुई योग और आध्यात्मिक प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने का प्रयास कर रही है। दिव्या लोगनाथन को मिली जिम्मेदारी पूरे आयोजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। नौसेना और श्याम प्रसाद मुखर्जी पोर्ट से नौकाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा राज्य सरकार की अपनी नौकाओं को भी कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी आयोजन के लिए दिव्या लोगनाथन को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का कार्य संभालेंगी। हावड़ा फेरी घाट और विक्टोरिया मेमोरियल में भी होंगे विशेष योग सत्र पर्यटन विभाग सोमवार को हावड़ा फेरी घाट पर विशेष योग अभ्यास सत्र आयोजित करेगा। इसके अलावा विक्टोरिया मेमोरियल के सामने भी योग कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यदि योजना सफल होती है, तो यह संभवतः दुनिया का पहला ऐसा आयोजन होगा, जिसमें गंगा नदी के बीच 500 से अधिक नौकाओं पर हजारों लोग एक साथ योगाभ्यास करते नजर आएंगे। आयुष मंत्रालय और राज्य प्रशासन के संयुक्त प्रयास से यह कार्यक्रम भारत की संस्कृति, अध्यात्म और विरासत का वैश्विक प्रदर्शन बन सकता है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सिलीगुड़ी के साइबर पुलिस थाने में देशद्रोह और संवैधानिक संस्थाओं के अपमान से जुड़ी शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके हालिया बयान से भारत की संवैधानिक व्यवस्था की छवि प्रभावित हुई है और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कोलकाता के प्रदर्शन में दिया था विवादित बयान यह मामला 2 जून 2026 को कोलकाता के धर्मतला क्षेत्र में आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान दिए गए बयान से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया था कि उन्हें बांग्लादेश में चर्चित उस्मान हादी हत्याकांड से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है, लेकिन वह इसका खुलासा नहीं करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की एसटीएफ ने एक संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद बांग्लादेश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। गृह मंत्रालय का नाम लेने पर बढ़ा विवाद अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह मंत्री के संदर्भ का भी उल्लेख किया। इसी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनके बयान से राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर अनावश्यक सवाल खड़े हुए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस तरह की टिप्पणियां संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामलों में भ्रम पैदा कर सकती हैं। कानूनी और राजनीतिक हलकों में चर्चा शिकायत दर्ज होने के बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि अभी तक पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने या आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी या उनकी पार्टी की ओर से भी इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे क्या? अब सभी की नजर पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया पर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत के आधार पर कोई औपचारिक मामला दर्ज किया जाता है या नहीं। यह विवाद आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मुद्दा बन सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।