नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद से पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों की रोकथाम) अमेंडमेंट बिल, 2026 पारित होने का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने देश के युवाओं से किया अपना वादा पूरा किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वाले पेपर माफियाओं और पेपर लीक गिरोहों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
राज्यसभा से बिल पारित होने के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि सरकार लगातार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, मजबूत और विश्वसनीय बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की समस्या कई दशकों से राज्यों और केंद्र सरकारों के सामने चुनौती रही है, जिससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्यों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
पीएम मोदी ने दोहराया कि देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधों पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता थी और संसद ने व्यापक चर्चा के बाद इस विधेयक को मंजूरी देकर एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई है।
पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों की रोकथाम) अमेंडमेंट बिल, 2026 में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों के लिए कड़े दंड, समयबद्ध जांच और विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान किया गया है। कानून के तहत जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी, जबकि आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के अंदर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।
लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह कानून करोड़ों विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करेगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के साथ मिलकर देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Bangladesh Travel Advisory: अमेरिका ने बांग्लादेश के लिए अपनी यात्रा सलाह (Travel Advisory) में अहम बदलाव करते हुए इसे Level-3 (यात्रा पर पुनर्विचार करें) से घटाकर Level-2 (अधिक सावधानी बरतें) कर दिया है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के विशेष दूत सर्जियो गोर की ढाका यात्रा के दौरान लिया गया। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि बांग्लादेश में सुरक्षा स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है, हालांकि कुछ संवेदनशील इलाकों में अब भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। Level-2 एडवाइजरी का क्या मतलब है? अमेरिकी विदेश विभाग की ट्रैवल एडवाइजरी चार स्तरों में जारी की जाती है। Level-2 का अर्थ है कि यात्री सामान्य यात्रा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। इससे पहले बांग्लादेश Level-3 श्रेणी में था, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को यात्रा करने से पहले दोबारा विचार करने की सलाह दी जाती थी। नई एडवाइजरी को बांग्लादेश के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ढाका बैठक के बाद हुआ फैसला बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ढाका में विदेश मामलों के सलाहकार खलीलुर रहमान और अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर के बीच हुई बैठक सकारात्मक रही। बैठक के बाद गोर ने विदेश मंत्रालय को ट्रैवल एडवाइजरी में बदलाव की जानकारी दी। इस दौरान प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर भी मौजूद रहे। सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी लिखा कि बांग्लादेश में सुरक्षा हालात स्थिर हुए हैं, इसलिए यात्रा सलाह को Level-2 तक कम किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ क्षेत्रों में अब भी अतिरिक्त प्रतिबंध लागू हैं और वहां यात्रा से बचने की सलाह बरकरार है। बांग्लादेश सरकार ने किया फैसले का स्वागत बांग्लादेश सरकार ने अमेरिकी फैसले का स्वागत करते हुए इसे देश में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था में हुए सुधार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता बताया। सरकार का कहना है कि पिछले छह महीनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, कानून-व्यवस्था सुधारने और विदेशी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है। पर्यटन, व्यापार और निवेश को मिल सकता है बढ़ावा बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय का मानना है कि अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी में यह बदलाव दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास का संकेत है। इससे पर्यटन, व्यापार, विदेशी निवेश और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलने की संभावना है। वहीं, बांग्लादेश में अमेरिकी राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन ने कहा कि सर्जियो गोर की यात्रा केवल ट्रैवल एडवाइजरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अमेरिका और बांग्लादेश के बीच रणनीतिक साझेदारी, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को भी मजबूत करना है। कुछ इलाकों में अब भी सतर्क रहने की सलाह हालांकि अमेरिका ने यात्रा सलाह को नरम किया है, लेकिन उसने यह भी स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी जोखिम अब भी बने हुए हैं। ऐसे इलाकों में यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन और अमेरिकी विदेश विभाग की नवीनतम सलाह का पालन करने की सिफारिश की गई है।
डेमियेट्टा बंदरगाह पर अमेरिकी स्वामित्व वाले LNG पोत को बनाया गया निशाना, दो जहाजों में लगी आग; किसी ने नहीं ली जिम्मेदारी काहिरा, एजेंसियां। मिस्र के भूमध्यसागरीय बंदरगाह डेमियेट्टा पर पहली बार एक अमेरिकी स्वामित्व वाले LNG (Liquefied Natural Gas) पोत पर ड्रोन हमला हुआ है। हमले के बाद पोत में आग लग गई, जो पास खड़े दूसरे गैस पोत तक फैल गई। मिस्र सरकार ने पुष्टि की है कि आग ड्रोन हमले के कारण लगी थी। दो गैस पोत आग की चपेट में आए हमले में अमेरिकी स्वामित्व वाले फ्लोटिंग स्टोरेज यूनिट 'Energos Winter' को निशाना बनाया गया। आग बाद में दूसरे LNG पोत 'Gaslog Salem' तक फैल गई। राहत दल ने समय रहते आग पर काबू पा लिया और इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी संगठन ने नहीं ली है। हालांकि यह घटना ऐसे समय हुई है जब मध्य पूर्व में अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच तनाव चरम पर है। सुरक्षा एजेंसियां हमले के पीछे संभावित संगठनों और नेटवर्क की जांच कर रही हैं। ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर बढ़ी चिंता डेमियेट्टा बंदरगाह मिस्र के प्रमुख LNG निर्यात केंद्रों में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले से स्वेज नहर और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। यदि ऐसे हमले जारी रहे तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत और ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी घटना के बाद मिस्र ने डेमियेट्टा बंदरगाह और आसपास के समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ा दी है। नौसेना और सुरक्षा एजेंसियां बंदरगाह की निगरानी कर रही हैं, जबकि जहाजों की आवाजाही पर भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
70 से अधिक मिसाइलों और सैकड़ों ड्रोन से किया गया हमला, दर्जनों घायल; पोलैंड ने भी लड़ाकू विमान किए तैनात कीव, एजेंसियां। रूस ने यूक्रेन पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में बच्चों समेत कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राजधानी कीव, ल्वीव, ड्नीप्रोपेत्रोव्स्क, पोल्टावा और खेरसॉन सहित कई शहरों में भारी नुकसान हुआ है। 70 से ज्यादा मिसाइलें और 280 से अधिक ड्रोन दागे गए यूक्रेन की वायु सेना के मुताबिक, रूस ने रातभर चले हमले में 70 से अधिक मिसाइलें और लगभग 280 ड्रोन दागे। कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को यूक्रेनी एयर डिफेंस ने मार गिराया, लेकिन कई मिसाइलें रिहायशी इलाकों में गिरीं, जिससे इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और कई जगहों पर आग लग गई। कीव और ल्वीव में सबसे ज्यादा तबाही राजधानी कीव में कई आवासीय इमारतों को नुकसान पहुंचा, जबकि पश्चिमी शहर ल्वीव में भी मिसाइल हमलों से भारी तबाही हुई। राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। पोलैंड ने लड़ाकू विमान किए तैनात हमले के दौरान एक रूसी क्रूज़ मिसाइल पोलैंड के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गई, जिसके बाद पोलैंड और नाटो ने सुरक्षा के मद्देनज़र लड़ाकू विमान तैनात कर दिए। इस घटना को लेकर यूरोप में भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। जेलेंस्की ने की एयर डिफेंस सिस्टम की मांग यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि देश को तत्काल और अधिक आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत है। उन्होंने सहयोगी देशों से पैट्रियट मिसाइल प्रणाली और अन्य रक्षा उपकरणों की आपूर्ति तेज करने की अपील की।