दुनिया

फ्रांस और स्पेन में जंगल की आग विकराल, दो लाख से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे; दोनों देशों में राष्ट्रीय आपात कदम

anjali kumari जुलाई 25, 2026 0
France Wildfires
France Wildfires

पेरिस/मैड्रिड, एजेंसियां। फ्रांस और स्पेन इस समय वर्षों की सबसे भीषण जंगल की आग (Wildfire) से जूझ रहे हैं। तेज गर्मी, सूखी हवाओं और कम आर्द्रता के कारण आग तेजी से फैल रही है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि दोनों देशों में मिलाकर दो लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि कई इलाकों में राष्ट्रीय स्तर पर आपात कदम उठाए गए हैं।

 

फ्रांस में बोर्डो के बाहरी इलाके तक पहुंची आग

 

दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के गिरोंद (Gironde) क्षेत्र और कैप फेरे (Cap Ferret) प्रायद्वीप में लगी आग तेजी से फैलते हुए बोर्डो के बाहरी हिस्सों तक पहुंच गई है। अब तक 1.10 लाख से अधिक लोगों को निकाला गया है। कई पर्यटकों को सड़क मार्ग बंद होने के कारण नौकाओं के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। आग में दर्जनों घर, एक कैंपसाइट और हजारों हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं।

 

स्पेन ने पहली बार घोषित किया राष्ट्रीय आपातकाल

 

स्पेन ने जंगल की आग की गंभीरता को देखते हुए इतिहास में पहली बार वाइल्डफायर के कारण राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। मैड्रिड और आविला (Ávila) के आसपास दो बड़ी आग एक-दूसरे से मिल गई हैं, जिससे स्थिति और खतरनाक हो गई है। हजारों दमकलकर्मी, सैनिक और विमान आग पर काबू पाने में जुटे हैं।

 

यूरोपीय संघ से मांगी गई मदद

 

फ्रांस और स्पेन दोनों ने यूरोपीय संघ (EU) से अतिरिक्त अग्निशमन विमान और हेलीकॉप्टर भेजने का अनुरोध किया है। क्रोएशिया, पुर्तगाल, इटली और अन्य देशों ने राहत एवं अग्निशमन सहायता उपलब्ध करानी शुरू कर दी है।

 

भीषण गर्मी बनी सबसे बड़ी वजह

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप इस वर्ष की तीसरी बड़ी हीटवेव का सामना कर रहा है। रिकॉर्ड तापमान, सूखे जंगल और तेज हवाओं ने आग को तेजी से फैलने में मदद की है। वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से भी जोड़ रहे हैं।

 

स्थिति पर लगातार नजर

 

दोनों देशों की सरकारों ने प्रभावित इलाकों में लोगों से यात्रा से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। दमकलकर्मी लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में स्थिति अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Donald Trumph
व्हाइट हाउस का साफ संदेश: ट्रंप प्रशासन टेट ब्रदर्स के ब्रिटेन प्रत्यर्पण में नहीं करेगा हस्तक्षेप

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एंड्रयू टेट और ट्रिस्टन टेट के ब्रिटेन प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। व्हाइट हाउस की ओर से यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि ट्रंप प्रशासन दोनों भाइयों को कानूनी राहत दिलाने की कोशिश कर सकता है।   व्हाइट हाउस ने अफवाहों पर लगाया विराम   व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट से जब प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप या उनका प्रशासन टेट ब्रदर्स के प्रत्यर्पण को रोकने के लिए हस्तक्षेप करेगा, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा— "नहीं।" इसके साथ ही उन्होंने इस विषय पर चल रही तमाम अटकलों को खारिज कर दिया।   मार्को रुबियो ने भी बनाई दूरी   अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि इस मामले में सरकार की फिलहाल कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मामला अमेरिकी अदालतों की कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है और प्रशासन उसका सम्मान करेगा। रुबियो के अनुसार, अमेरिका और ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि लागू है और उसी के अनुरूप प्रक्रिया चलेगी।   क्या हैं टेट ब्रदर्स पर आरोप?   ब्रिटेन ने एंड्रयू और ट्रिस्टन टेट पर बलात्कार, यौन तस्करी, मानव तस्करी और महिलाओं के शोषण सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ब्रिटिश अभियोजन पक्ष ने हाल ही में दोनों भाइयों के खिलाफ दर्जनों नए आरोप जोड़े हैं, जिसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें मियामी में हिरासत में लिया। दोनों भाई इन सभी आरोपों से इनकार कर रहे हैं और अपने प्रत्यर्पण का अदालत में विरोध कर रहे हैं।   कानूनी प्रक्रिया के बाद होगा अंतिम फैसला   अमेरिकी अदालत पहले यह तय करेगी कि प्रत्यर्पण संधि की सभी कानूनी शर्तें पूरी होती हैं या नहीं। यदि अदालत प्रत्यर्पण को मंजूरी देती है, तो अंतिम प्रशासनिक निर्णय अमेरिकी विदेश विभाग के स्तर पर होगा। हालांकि व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि राजनीतिक स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।   राजनीतिक चर्चाएं भी तेज   टेट ब्रदर्स को ट्रंप समर्थक माना जाता रहा है और अमेरिकी मीडिया में यह चर्चा भी रही कि उन्होंने ट्रंप परिवार के कुछ सदस्यों से संपर्क बनाने की कोशिश की थी। इसी कारण यह मामला कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। हाल ही में कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने संभावित राजनीतिक प्रभाव की जांच की मांग भी उठाई है।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
चीन द्वारा यूरोपीय संघ की 14 कंपनियों पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जाने के बाद रणनीतिक और व्यापारिक तनाव

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सेंट पीटर्सबर्ग में वाइल्डबेरीज़ गोदाम में यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद लगी भीषण आग

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के टैंक जिले में सुरक्षा चौकी पर हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों की कार्रवाई
पाकिस्तान में आत्मघाती विस्फोट, सुरक्षा चौकी पर हमला; 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत, कई आतंकी ढेर

इस्लामाबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक संयुक्त पुलिस-सुरक्षा चौकी पर हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। मारे गए लोगों में सेना के जवान और पुलिसकर्मी शामिल हैं। यह हमला टैंक (Tank) जिले में देर रात हुआ, जिसके बाद पूरे इलाके में सुरक्षा अभियान तेज कर दिया गया।   विस्फोटकों से भरे वाहन से चौकी पर हमला   प्रारंभिक जांच के अनुसार, हमलावरों ने पहले विस्फोटकों से भरे वाहन को सुरक्षा चौकी के बाहरी हिस्से से टकराकर विस्फोट किया। धमाके के तुरंत बाद भारी हथियारों से लैस आतंकियों ने चौकी में घुसने की कोशिश की और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। विस्फोट से चौकी का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।   सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में कई आतंकियों को मार गिराया   पाकिस्तानी सेना और पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने 12 आतंकियों को मार गिराया और इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। आसपास के क्षेत्रों की घेराबंदी कर संदिग्धों की तलाश जारी है।   TTP पर लगाया गया हमले का आरोप   पाकिस्तानी सेना ने इस हमले के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को जिम्मेदार ठहराया है। पिछले कुछ महीनों में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर हमलों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जिससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।   सरकार ने शहीद सुरक्षाकर्मियों को दी श्रद्धांजलि   प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व ने हमले की निंदा करते हुए शहीद सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि दी है। सरकार ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा तथा दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
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पाकिस्तान ने ASEAN मंच पर उठाया सिंधु जल संधि का मुद्दा, भारत ने दिया करारा जवाब

India Pakistan: पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने उसके आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए आतंकवाद पर कड़ा जवाब दिया। मनीला में आयोजित आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) की मंत्रिस्तरीय बैठक में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर सवाल उठाए। इसके जवाब में भारत ने कहा कि पाकिस्तान बहुपक्षीय मंचों का इस्तेमाल झूठ फैलाने और सीमा-पार आतंकवाद से ध्यान भटकाने के लिए कर रहा है। इशाक डार ने क्या कहा? एआरएफ की बैठक में इशाक डार ने कहा कि सिंधु जल संधि के निलंबन से जुड़े मुद्दे का समाधान बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किया जाना चाहिए। उन्होंने कश्मीर का मुद्दा भी उठाते हुए भारत के फैसलों पर सवाल खड़े किए। भारत का कड़ा जवाब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के आरोपों को बेबुनियाद और भ्रामक बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल झूठ फैलाने, सरकार-प्रायोजित दुष्प्रचार करने और सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के अपने रिकॉर्ड से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए कर रहा है। जायसवाल ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और पाकिस्तान को इस विषय पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। सिंधु जल संधि पर भारत का रुख भारत ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि का निलंबन तब तक जारी रहेगा, जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से समर्थन देना बंद नहीं करता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले और लगातार जारी आतंकवादी गतिविधियों के बाद भारत ने यह फैसला लिया था। आतंकवाद पर पाकिस्तान को नसीहत भारत ने पाकिस्तान पर आधिकारिक स्तर पर गलत सूचना फैलाने और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के बजाय अपने देश में मौजूद आतंकवादी ढांचे को खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए। रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अपने आंतरिक संकटों और वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क के लिए सुरक्षित ठिकाना होने की छवि से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों पर आरोप लगाने के बजाय पाकिस्तान को पहले अपने घर की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। भारत ने दोहराया अपना रुख भारत ने साफ कर दिया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद कदम नहीं उठाता, तब तक सिंधु जल संधि पर भारत का मौजूदा रुख बरकरार रहेगा।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
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CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला

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अब गुलजार होंगी ब्रिटेन की रातें! नई सरकार का बड़ा ऐलान, पब-कल्ब्स को टैक्स में राहत, बस किराया भी घटेगा

Iran responds to Donald Trump’s warning, saying any attack on its civilian infrastructure will trigger a strong retaliation

US-Iran War: ट्रंप की धमकी पर ईरान का पलटवार, बोला- एक भी पुल या पावर प्लांट पर हमला हुआ तो मिलेगा करारा जवाब

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Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
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ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0

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