दुनिया

होर्मुज संकट: 34 भारतीय क्रू टैंकर में फंसे

होर्मुज में ईरान ने रोका भारतीय LPG टैंकर, 34 क्रू मेंबर फंसे

Anjali Kumari मार्च 14, 2026 0
India LPG tanker Hormuz
India LPG tanker Hormuz

तेहरान, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच Iran ने India से जुड़े एक एलपीजी टैंकर को Strait of Hormuz के पास रोक दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज में 34 सदस्यीय चालक दल मौजूद है और यह करीब 36 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर एलपीजी लेकर जा रहा था।

 

कुवैत से गुजरात जा रहा था जहाज


जानकारी के अनुसार यह टैंकर Mina Al Ahmadi Port (कुवैत) से Deendayal Port Kandla (गुजरात) के लिए रवाना हुआ था। लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव और 28 फरवरी से लागू समुद्री प्रतिबंधों के कारण जहाज आगे नहीं बढ़ सका।

 

यूएई के पास खड़ा है टैंकर


फिलहाल यह जहाज Mina Saqr Port के पास लंगर डाले खड़ा है और आगे बढ़ने की अनुमति का इंतजार कर रहा है। जहाज के कप्तान वीरेंद्र विश्वकर्मा और क्रू मेंबर लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं।

 

15वें दिन में पहुंचा पश्चिम एशिया संघर्ष


Israel, United States और Iran के बीच चल रहा टकराव अब और खतरनाक होता जा रहा है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह संघर्ष 15वें दिन में पहुंच चुका है। भारत सरकार ने कहा है कि क्षेत्र में तेजी से बदलती स्थिति पर उसकी करीबी नजर बनी हुई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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ईरान-अमेरिका जंग पर जवाद जरीफ की बड़ी सलाह, बोले- खुद को विजेता बताकर युद्ध खत्म करे तेहरान

वाशिंगटन/ तेहरान, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद जरीफ का बड़ा बयान सामने आया है। जरीफ ने तेहरान को सलाह दी है कि वह खुद को इस युद्ध का विजेता घोषित करे और फिर संघर्ष विराम की दिशा में कदम बढ़ाए। उनका मानना है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जंग रोकने में नाकाम दिख रहे हैं, तो ईरान को अपनी रणनीतिक बढ़त का इस्तेमाल कर युद्ध समाप्ति की पहल करनी चाहिए।   जरीफ ने क्या कहा? जरीफ ने यह भी संकेत दिया कि ईरान को केवल सैन्य मोर्चे पर नहीं, बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी चाल चलनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि तेहरान एक ऐसा समझौता तैयार करे, जिससे युद्ध रुके और भविष्य में टकराव की आशंका भी कम हो। हालांकि, मौजूदा हालात देखकर यह नहीं लगता कि ईरान फिलहाल युद्धविराम के मूड में है, क्योंकि क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई लगातार जारी हैं।   जरीफ की हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर आई उन्होंने कहा कि ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को खोलने का प्रस्ताव अमेरिका के सामने रख सकता है और बदले में अपने ऊपर लगे प्रतिबंध हटवाने की कोशिश कर सकता है। हॉर्मुज फिलहाल वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है और इसके बंद रहने से तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखी जा रही है।   रिपोर्ट्स के मुताबिक उधर, अमेरिका में युद्ध को लेकर रणनीति और आक्रामक होती दिख रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉशिंगटन में ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करने या कब्जे में लेने के लिए संभावित जमीनी ऑपरेशन पर भी विचार किया जा रहा है। ऐसे किसी अभियान में विशेष बलों, इंजीनियरों और भारी सैन्य संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है, जिससे यह जंग और ज्यादा खतरनाक मोड़ ले सकती है। कुल मिलाकर, जरीफ का बयान इस बात का संकेत है कि ईरान के भीतर भी अब ऐसी आवाजें उठ रही हैं जो युद्ध के बजाय ‘रणनीतिक जीत’ का नैरेटिव बनाकर बाहर निकलने का रास्ता तलाश रही हैं। लेकिन मैदान में जारी हमले बता रहे हैं कि शांति की राह अभी भी बेहद कठिन है।

Anjali Kumari अप्रैल 3, 2026 0
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मिडिल ईस्ट में ‘ब्रिज वॉर’ का खतरा गहराया, अमेरिका के हमले के बाद ईरान की चेतावनी

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ट्रंप प्रशासन में बड़ा झटका: अटॉर्नी जनरल Pam Bondi की बर्खास्तगी के पीछे क्या हैं वजहें?

अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को पद से हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब उनके कार्यकाल को लेकर लगातार विवाद और असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं। करीब 14 महीने पहले नियुक्त की गई बॉन्डी को ट्रंप की करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था, लेकिन हालात इस कदर बिगड़े कि उन्हें अचानक पद छोड़ना पड़ा। व्हाइट हाउस में टकराव बना टर्निंग पॉइंट रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस में एक अहम बैठक के दौरान ट्रंप और बॉन्डी के बीच तीखा टकराव हुआ। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने उन पर “अक्षम्य गलती” करने का आरोप लगाया। बॉन्डी ने पद पर बने रहने की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रपति अपने फैसले पर अडिग रहे और तत्काल प्रभाव से उन्हें हटा दिया गया। एपस्टीन फाइल्स विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें बॉन्डी की बर्खास्तगी के पीछे सबसे बड़ी वजह चर्चित Jeffrey Epstein से जुड़ा विवाद माना जा रहा है। आरोप है कि इस मामले से संबंधित दस्तावेजों को सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया और कुछ अहम नामों को सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे ट्रंप प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए और बॉन्डी की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे। लीक विवाद ने भी बढ़ाया दबाव एक अन्य विवाद में बॉन्डी पर अमेरिकी सांसद Eric Swalwell से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने का आरोप लगा। यह मामला कथित चीनी जासूस क्रिस्टीन फैंग से जुड़े जांच से संबंधित था। इस घटनाक्रम ने व्हाइट हाउस की नाराजगी को और बढ़ा दिया। ट्रंप की नाराजगी: विरोधियों पर कार्रवाई नहीं सूत्रों के अनुसार, ट्रंप इस बात से भी नाराज थे कि बॉन्डी ने उनके राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई। कई मामलों में कानूनी कार्रवाई कमजोर रही, जिसके चलते कोर्ट में केस टिक नहीं पाए। इससे राष्ट्रपति का भरोसा और कमजोर हुआ। विवादों से घिरा रहा कार्यकाल पाम बॉन्डी का पूरा कार्यकाल विवादों में रहा। न्याय विभाग में बड़े पैमाने पर बदलाव, अधिकारियों की छुट्टी, और राजनीतिक एजेंडे को प्राथमिकता देने के आरोप लगातार लगते रहे। इसके अलावा संसदीय सुनवाई के दौरान उनका आक्रामक रवैया भी आलोचना का कारण बना। अब आगे क्या? फिलहाल डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल बनाया गया है। स्थायी नियुक्ति के लिए कई नाम चर्चा में हैं, जिनमें Lee Zeldin और Ron DeSantis प्रमुख माने जा रहे हैं। इस बर्खास्तगी के साथ ही यह संकेत भी मिल रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन में आगे और बड़े फेरबदल हो सकते हैं, जिससे अमेरिकी राजनीति में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है।  

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3 अप्रैल की ऐतिहासिक घटनाएं
3 अप्रैल की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

3 अप्रैल की महत्त्वपूर्ण घटनाएं   1856 – यूनान के रोडोस द्वीप समूह में चर्च में हुए बारुद धमाके में चार हजार लोगों की मौत हुई। 1922 – जोसेफ स्टालिन को कम्युनिस्ट पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया। 1933 – विश्व की सबसे उंची चोटी माउंट एवरेस्ट के ऊपर से पहली बार विमान ने उडान भरी। 1942 – जापान ने द्वितीय विश्वयुद्ध में अमरीका पर आखिरी दौर की सैन्य कार्यवाई शुरू की। 1943 - भारतीय सेना चिकित्सा कोर का गठन हुआ। 1949 – अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने उत्तरी अटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर किए। 1952 - संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्थायी सदन के रूप में राज्यसभा की स्थापना 1952 में की गयी थी। 1973 - 3 अप्रैल 1973 को 8 लाख रुपए का था पहला मोबाइल, आज ही के दिन हुई पहली कॉल; दुनिया में सबसे ज्यादा बिका नोकिया 1100 । 1999 – भारत ने पहला वैश्विक दूरसंचार उपग्रह इनसैट 1ई का प्रक्षेपण हुआ। 2000 – ब्रिटेन में एक विवादास्पद नियम लागू किया गया, जिसमें यह कहा गया कि ब्रिटेन में शरण लेने वालों को कपड़े और खाने की चीजें खरीदने के लिए सरकार से कूपन खरीदने होंगे। 2001 - संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत यात्रा पर पहुँचे । 2001 - भारत और डेनमार्क के बीच चार वर्ष के बाद पुन: वार्ता। 2002 - पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ की जनमत संग्रह की योजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली। 2006 - नेपाल में माओवादियों ने संघर्षविराम की घोषणा की। 2007 - नई दिल्ली में 14वाँ सार्क सम्मेलन शुरू। 2008 - प्रकाश करात को माकपा का पुन: महासचिव चुना गया। 2008 - मेधा पाटकर को राष्ट्रीय क्रांतिवीर अवार्ड, 2008 से अलंकृत किया गया। 2010 – एप्पल का पहला आईपेड मार्केट में आया। 2012 – रूस की राजधानी मास्को में भीषण आग में 17 प्रवासी श्रमिकों की मौत हुई। 2013 – अफगानिस्तान के फरहा में एक आत्मघाती बम विस्फोट में 46 लोग मारे गए और 100 घायल हुए। 2013 – अर्जेंटीना में आयी भीषण बाढ़ से 50 से अधिक लोगों की मौत हुई। 2016 – कोलकाता के ईडन गार्डंस मैदान पर वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड को हराकर आईसीसी टी-20 विश्व कप जीता। 2019 - अल्जीरिया के राष्ट्रपति ने विरोध प्रदर्शनों के बाद छोड़ी सत्ता। 2019 - गोवा में हुई मूक बधिर प्रतियोगिता में रेवाड़ी की अंजली शर्मा बनी मिस इंडिया। 2020 - वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने 2020-21 के लिए भारत के विकास दर अनुमान को घटाकर 2 फीसदी कर दिया , यह 30 साल का सबसे निचला स्तर होगा। 2020 - विश्व बैंक (World Bank) ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर भारत के लिए एक अरब डॉलर (करीब 7600 करोड़ रुपये) के आपातकालीन कोष को मंजूरी दी। 2021 - अमेरिका समेत 3 देश उत्तर कोरिया पर परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कायर्क्रमों को बंद करने का दवाब डालने के लिए राज़ी हुए। 2021 - जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर में 5-दिवसीय ट्यूलिप फेस्टिवल शुरू हुआ। 2021 - छत्‍तीसगढ में माओवादी हमले में सुरक्षाबलों के 23 जवान शहीद हुए। 2022 - पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति डॉ आरिफ़ अल्वी ने नेशनल असेंबली को भंग किया। 2022 - अब तक के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में सभी कैबिनेट मंत्रियों ने इस्तीफा दिया। 2022 - भारतीय और फ्रांसीसी नौसेनाओं के बीच द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास का 20वां संस्करण- 'वरुण' अरब सागर में आयोजित किया गया (30 मार्च से 3 अप्रैल तक)। 2023 - नासा ने आर्टेमिस II मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों की टीम चुनी, पहली महिला और पहले अफ्रीकी अमेरिकी को एक चंद्र मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रियों के रूप में नियुक्त किया। 2023 - NCERT ने 12वीं के सिलेबस से मुगलों का चैप्टर हटाया। 2023 - भूकंप के झटकों से दहली धरती, पापुआ न्यू गिनी में 7.3 तो तिब्बत के शिजांग में 4.2 रही तीव्रता। 2023 - जी-20 की दूसरी पर्यटन कार्य समूह की बैठक सिलीगुड़ी/दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) में सम्पन्न हुई। 2023 - प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के हीरक जयंती समारोह का उद्घाटन किया।   3 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति👉   1903 - कमलादेवी चट्टोपाध्याय - समाजसुधारक , स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा भारतीय हस्तकला के क्षेत्र में नवजागरण लाने वाली गांधीवादी महिला। 1914 - सैम मानेकशॉ - भारतीय सेना के भूतपूर्व अध्यक्ष , जिनके नेतृत्व में भारत ने सन 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में विजय प्राप्त की थी। 1918 - ओलेस गोनचार, प्रसिद्ध उक्रेनी लेखक तथा उपन्यासकार। 1922 – अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री डोरिस डे का जन्म हुआ। 1929 - निर्मल वर्मा- साहित्यकार । 1931 - मन्नू भंडारी- साहित्यकार । 1949 - सोम प्रकाश - भारतीय राजनीतिज्ञ (भाजपा)। 1952 - रवीन्द्र नारायण रवि - बिहार के राजनीतिज्ञों में से एक। 1954 - डॉ. के. कृष्णास्वामी- राजनेता और फिजीशियन । 1955 – मशहूर गायक हरिहरन का जन्म हुआ। 1962 – भारत की मशहूर अभिनेत्री व नेत्री जया प्रदा का जन्म हुआ।   3 अप्रॅल को हुए निधन   1325 - निज़ामुद्दीन औलिया, चिश्ती सम्प्रदाय के चौथे संत। 1680 - शिवाजी- मराठा साम्राज्य के संस्थापक। 1989 - विष्णु सहाय - भारत के पूर्व कैबिनेट सचिव तथा नागालैण्ड व असम के राज्यपाल रहे। 2010 - अनंत लागू, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के छह संस्थापक सदस्यों में से एक थे (कन्फर्म नहीं)। 2017 - किशोरी अमोनकर - हिंदुस्‍तानी शास्‍त्रीय परंपरा की प्रमुख गायिकाओं में से एक और जयपुर घराने की अग्रणी गायिका। 2021 - भारत के पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज से कोच बने संजय चक्रवर्ती (79) का मुंबई में कोविड-19 से निधन हुआ। 2021 - राधेश्याम खेमका(87) एक पत्रकार थे जिन्होने गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित कल्याण का ३८ वर्षों तक सम्पादन किया।   3 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव👉   🔅 श्री नायकबा पालकी समारोह (बनपुरी)। 🔅 श्री कराड महाकाली यात्रा प्रारंभ (चंद्रपुर)। 🔅 मेला माईसरखाना (पं.)। 🔅 श्री यमुना छठ / जयन्ती (चैत्र शुक्ल षष्ठी)। 🔅 भगवान सम्भवनाथ जी मोक्ष कल्याणक (चैत्र शुक्ल षष्ठी)। 🔅 छत्रपति शिवाजी महाराज स्मृति दिवस। 🔅 राज्यसभा स्थापना दिवस (भारत)। 🔅 हिन्दी रंगमंच दिवस। 🔅 आर्मी मेडिकल कोर स्थापना दिवस भारत (261वां)।   कृपया ध्यान दें जी👉     यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की  कोई जिम्मेदारी नहीं है।

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