दुनिया

US Gains Strategic Access to Bangladesh Ports

बांग्लादेश के दो बंदरगाह अमेरिका इस्तेमाल करेगा, हिंद महासागर में बढ़ेगी रणनीतिक हलचल

surbhi मई 23, 2026 0
Bangladesh and US strategic agreement involving Chittagong and Matarbari ports in the Bay of Bengal
US Access to Bangladesh Ports Agreement

Bangladesh और United States के बीच हुए नए रणनीतिक समझौतों ने दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र की भू-राजनीति को लेकर नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश ने अमेरिका को अपने दो अहम बंदरगाहों - Port of Chittagong और Matarbari Port - के इस्तेमाल की अनुमति देने पर सहमति जताई है।

इसके साथ ही दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री रणनीतिक सहयोग बढ़ाने को लेकर भी अहम करार हुए हैं।

किन बंदरगाहों तक मिलेगी पहुंच?

समझौते के तहत अमेरिकी नौसेना और सैन्य जहाज:

  • Port of Chittagong
  • Matarbari Port

का इस्तेमाल कर सकेंगे।

विशेषज्ञों के मुताबिक इससे अमेरिका को बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिलेगी।

खास बात यह है कि चिटगांव बंदरगाह भारत के Andaman and Nicobar Islands से लगभग 1100 किलोमीटर दूर है।

अमेरिका की नजर मलक्का स्ट्रेट पर

Strait of Malacca दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है।

दुनिया के बड़े हिस्से का:

  • तेल व्यापार
  • गैस सप्लाई
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक सामानों का ट्रांसपोर्ट

इसी रास्ते से होता है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाकर चीन की समुद्री गतिविधियों पर करीबी नजर रखना चाहता है।

बांग्लादेश-अमेरिका के 3 बड़े समझौते

1. बंदरगाह इस्तेमाल समझौता

अमेरिकी सैन्य और नौसैनिक जहाजों को चिटगांव और मतारबाड़ी बंदरगाहों तक पहुंच मिलेगी।

2. खुफिया जानकारी साझा करना

दोनों देश समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी इंटेलिजेंस साझा करेंगे।

3. रणनीतिक सहयोग बढ़ाना

बंगाल की खाड़ी और मलक्का क्षेत्र में संयुक्त निगरानी और सामरिक सहयोग मजबूत किया जाएगा।

चीन के लिए क्यों अहम है मलक्का?

China के लिए मलक्का स्ट्रेट बेहद संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है।

चीन के लगभग 80% तेल आयात इसी रास्ते से गुजरते हैं। यही वजह है कि पूर्व चीनी राष्ट्रपति Hu Jintao ने इसे “मलक्का डिलेमा” कहा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह का दबाव बढ़ता है तो इसका असर सीधे चीन की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी अहमियत?

India का भी बड़ा समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

भारत के:

  • लगभग 55% समुद्री व्यापार
  • ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा

मलक्का मार्ग से जुड़ा है।

भारत की रणनीतिक ताकत का सबसे बड़ा आधार Andaman and Nicobar Islands माने जाते हैं, जो मलक्का स्ट्रेट के पश्चिमी प्रवेश द्वार के पास स्थित हैं।

INS बाज की भूमिका

INS Baaz भारत का महत्वपूर्ण एयर स्टेशन है, जो समुद्री निगरानी में अहम भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक यहां से हिंद महासागर और मलक्का क्षेत्र की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा सकती है।

क्या बढ़ेगा भारत-अमेरिका सहयोग?

रणनीतिक मामलों के जानकार मानते हैं कि यदि अमेरिका बंगाल की खाड़ी और मलक्का क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाता है, तो भारत की भूमिका भी और महत्वपूर्ण हो सकती है।

इस पूरे क्षेत्र में:

  • Indonesia
  • Malaysia

जैसे देश अपनी समुद्री संप्रभुता को लेकर काफी संवेदनशील हैं।

इसलिए आने वाले समय में हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति और भी दिलचस्प हो सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Protesters gather in Pakistan-occupied Kashmir (PoK) as demonstrations continue, with JAAC leaders alleging shortages of essential supplies and appealing for humanitarian assistance.
PoK में जारी विरोध के बीच भारत से मदद की अपील का दावा, आर्थिक नाकेबंदी के आरोप

मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले कई सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात को लेकर नए दावे सामने आए हैं। आंदोलन से जुड़े जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने कथित तौर पर भारत से मानवीय सहायता की अपील की है। भारत से मानवीय सहायता की मांग सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सरदार अमन खान कथित रूप से कहते दिखाई दे रहे हैं कि क्षेत्र में राशन और आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है तथा लोगों को मदद की जरूरत है। उन्होंने भारत से मानवीय सहायता भेजने और नियंत्रण रेखा (LoC) पर राहत के लिए व्यवस्था करने की अपील की। उनका यह भी दावा है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो लोगों को भारत आने का विकल्प मिलना चाहिए। आर्थिक नाकेबंदी का आरोप अमन खान का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने पूरे क्षेत्र की आर्थिक नाकेबंदी कर दी है, जिससे खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि इससे आम नागरिकों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईदगाह मैदान में हुई सभा रावलाकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित एक सभा के दौरान अमन खान ने कथित तौर पर लोगों से पूछा कि क्या उन्हें नियंत्रण रेखा (LoC) की ओर बढ़ना चाहिए। वायरल वीडियो में भीड़ की ओर से समर्थन में नारे सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें किए गए सभी दावों का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है। कई सप्ताह से जारी हैं प्रदर्शन PoK में पिछले महीने से विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रशासन पर नागरिक अधिकारों के हनन, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और आर्थिक समस्याओं को लेकर आरोप लगा रहे हैं। स्थानीय संगठनों का कहना है कि आंदोलन तब और तेज हुआ जब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा कार्रवाई की गई। वहीं, पाकिस्तान प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जाती रही है। दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और भारत से मदद की अपील संबंधी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें सत्यापित तथ्य के बजाय संबंधित पक्ष के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।  

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बीजिंग/वॉशिंगटन: चीन ने सोमवार को प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु पनडुब्बी (Nuclear Submarine) से बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण के बाद अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। चीन ने इसे अपनी नियमित सैन्य अभ्यास गतिविधि का हिस्सा बताया है। परमाणु पनडुब्बी से हुआ मिसाइल परीक्षण चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नेवी ने स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे परमाणु पनडुब्बी से एक रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया। चीनी सेना का दावा है कि मिसाइल में डमी (बिना विस्फोटक) वारहेड लगाया गया था और उसने प्रशांत महासागर के खुले समुद्री क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य पर सफलतापूर्वक निशाना साधा। चीन का कहना है कि यह उसकी वार्षिक सैन्य प्रशिक्षण गतिविधियों का हिस्सा था और संबंधित देशों को इसकी पूर्व सूचना दे दी गई थी। अमेरिका ने जताई गंभीर चिंता अमेरिकी विदेश विभाग ने परीक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन के इस कदम पर उसकी करीबी नजर थी। अमेरिका ने कहा कि जब दुनिया परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रयास कर रही है, तब चीन अपने परमाणु शस्त्रागार का तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिकी बयान में कहा गया कि बीजिंग का बिना पर्याप्त पारदर्शिता के परमाणु क्षमताओं का विस्तार वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी उठाए सवाल जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन के मिसाइल परीक्षण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां एशिया-प्रशांत की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती हैं। न्यूजीलैंड ने भी चीन से अधिक पारदर्शिता बरतने और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सैन्य कदमों पर स्पष्ट जानकारी साझा करने की अपील की है। हथियार नियंत्रण वार्ता की अपील अमेरिका ने चीन से परमाणु हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल होने का आग्रह किया है। साथ ही अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) और अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की नियमित जानकारी साझा करने की व्यवस्था अपनाने की भी मांग की है। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने रक्षा दायित्वों का पालन करता रहेगा। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रणनीतिक मिसाइल परीक्षण अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी सैन्य प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकते हैं। दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच यह परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस खड़ी कर सकता है।  

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USA striker Folarin Balogun during a FIFA World Cup 2026 match after his red card was overturned ahead of the Round of 16 clash against Belgium.
ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द, फीफा ने हटाया निलंबन

वॉशिंगटन/सिएटल: फीफा विश्व कप 2026 के बीच अमेरिका के स्टार स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को मिले रेड कार्ड को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फैसले पर सवाल उठाने के बाद फीफा ने रेड कार्ड की समीक्षा की और उसे वापस ले लिया। अब बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले में खेल सकेंगे। ट्रंप ने फैसले को बताया अन्यायपूर्ण डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि फोलारिन बालोगुन अमेरिकी टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं और उन्हें अगले मैच से बाहर करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ट्रंप ने कहा कि शुरुआत में उन्हें रेड कार्ड के नियमों की जानकारी नहीं थी, लेकिन जब पता चला कि इसके कारण खिलाड़ी अगले मैच में नहीं खेल सकता, तो उन्हें यह फैसला अनुचित लगा। उन्होंने कहा कि मैदान पर यह जानबूझकर किया गया फाउल नहीं था, बल्कि दोनों खिलाड़ी तेज रफ्तार में एक-दूसरे से टकरा गए थे। फीफा से की फैसले की समीक्षा की मांग ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर फीफा अधिकारियों से संपर्क किया और रेड कार्ड की समीक्षा करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी को उस मैच के लिए दंडित करना उचित नहीं है, जो अभी खेला ही नहीं गया। उनके अनुसार, ऐसा निर्णय खेल भावना के अनुरूप नहीं है। फीफा ने हटाया निलंबन फीफा द्वारा मामले की समीक्षा के बाद फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही उन पर लगाया गया एक मैच का प्रतिबंध भी समाप्त हो गया है। अब 25 वर्षीय स्ट्राइकर सोमवार को सिएटल में बेल्जियम के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ-16 मुकाबले में अमेरिकी टीम का हिस्सा होंगे। अमेरिका के लिए अहम खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन इस विश्व कप में अमेरिका के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अब तक तीन गोल किए हैं और टीम के आक्रमण की सबसे मजबूत कड़ी माने जा रहे हैं। उनकी वापसी अमेरिकी मुख्य कोच मौरिसियो पोचेटिनो के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। बेल्जियम फुटबॉल संघ ने जताई आपत्ति फीफा के फैसले पर बेल्जियम फुटबॉल संघ (RBFA) ने नाराजगी व्यक्त की है। संघ ने कहा कि अमेरिका-बेल्जियम मुकाबले से ठीक पहले रेड कार्ड हटाए जाने का फैसला हैरान करने वाला है और वह अपने हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा। टेड क्रूज ने किया ट्रंप का समर्थन अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज ने भी ट्रंप के रुख का समर्थन किया। उन्होंने रेड कार्ड को "बेतुका फैसला" बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने अमेरिकी टीम और उसके खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए सही कदम उठाया। खेल के साथ राजनीति पर भी छिड़ी बहस फोलारिन बालोगुन के रेड कार्ड को रद्द किए जाने के बाद विश्व कप के बीच खेल और राजनीति के संबंधों पर नई बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का मानना है कि इस फैसले ने रेफरी के निर्णयों की स्वतंत्रता और खेल प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया के जरिए एक गलत निर्णय को सुधारा गया है।  

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