बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए आज मतदान हो रहा है। इसी बीच मोकामा से जदयू विधायक Anant Singh को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के आदेश के बाद वे जेल से पुलिस कस्टडी में बाहर आकर राज्यसभा चुनाव में अपना वोट डाल सकेंगे।
बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए सुबह 9 बजे से मतदान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो शाम 4 बजे तक चलेगी। इसके बाद शाम में ही नतीजों की घोषणा भी की जाएगी।
मोकामा विधायक अनंत सिंह इस समय दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में जेल में बंद हैं। हालांकि MP-MLA कोर्ट ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति दे दी है।
कोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें पुलिस कस्टडी में बिहार विधानसभा लाया जाएगा, जहां वे मतदान करेंगे और उसके बाद फिर से उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कुल 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार National Democratic Alliance (NDA) के पास लगभग 202 विधायकों का समर्थन है, जिससे चार सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक समीकरण काफी दिलचस्प हो गए हैं। ऐसे में अनंत सिंह का वोट NDA के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोर्ट से मिली अनुमति के बाद उनके वोट डालने से NDA खेमे को राहत मिली है और राज्यसभा चुनाव की यह लड़ाई और भी रोचक हो गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रोहिणी का भावुक संदेश— हर मुश्किल में आप मेरी ढाल बनकर खड़े रहें... पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का आज 11 जून को 79वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर राबड़ी आवास में बुधवार देर रात पारिवार के बीच लालू यादव ने केक काटा और सभी ने जन्मदिन सेलिब्रेट किया। इस दौरान राबड़ी देवी ने अपने हाथों से लालू यादव को केक खिलाकर जन्मदिन की बधाई दी। रोहिणी ने किया भावुक पोस्ट इधर, लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने पिता के जन्मदिन पर भावुक संदेश सोशल मीडिया पर साझा किया। रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा- हर मुश्किल में आप मेरी ढाल बनकर खड़े रहें... रोहिणी ने लिखा कि उनकी जिंदगी में पिता का स्थान कोई और नहीं ले सकता। उनके पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया, उन्हें संभलना और आगे बढ़ना सिखाया। हर मुश्किल घड़ी में ढाल बनकर खड़े रहे। अपने संदेश में रोहिणी ने पिता के प्रेम, त्याग और आशीर्वाद को अपनी सबसे बेशकीमती धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि पिता का स्नेह और मार्गदर्शन ही उनकी ताकत है, जिसने जीवन के हर मोड़ पर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इसके बाद आगे रोहिणी ने ईश्वर से पिता के लिए लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि उनके सिर पर पिता के आशीर्वाद का हाथ हमेशा बना रहे, यही उनकी सबसे बड़ी इच्छा है। मुख्यमंत्री सम्राट ने लालू यादव के जन्मदिन पर दी बधाई बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी पूर्व सीएम लालू यादव के जन्मदिन पर ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं दीं हैं। सीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए राजद सुप्रीमो को बर्थडे की बधाई दी। राजद कार्यकर्ता मना रहे जश्न इस मौके को लेकर राजद कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी कार्यालय को खूबसुरत और आकर्षक ढंग से सजाया गया है। पूरे बिहार में लालू के समर्थक अलग-अलग जगह केक काटकर, मिठाईय़ां बांटकर अपने नेता का जन्मदिन मना रहे हैं।
बेतिया/पटना, एजेंसियां। बिहार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। अब सरकारी स्कूलों के शिक्षक केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि व्हाट्सएप चैनलों के माध्यम से विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और मेंटर की भूमिका भी निभाएंगे। विभाग का उद्देश्य बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार लाना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। सभी शिक्षकों को व्हाट्सएप चैनलों से जुड़ने का निर्देश प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर द्वारा जारी निर्देश के अनुसार प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को विभाग द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप चैनलों से अनिवार्य रूप से जुड़ना होगा। इन चैनलों के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहायता, मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करेंगे। कक्षावार बनाए गए चार अलग-अलग चैनल शिक्षा विभाग ने कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए चार अलग-अलग व्हाट्सएप चैनल तैयार किए हैं। इनमें फाउंडेशनल स्टेज (कक्षा 1-2), प्रिपरेटरी स्टेज (कक्षा 3-5), मिडिल स्टेज (कक्षा 6-8) तथा कॉम्प्लेक्स रिसोर्स सेंटर के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म शामिल हैं। जिला और प्रखंड स्तर के शिक्षा पदाधिकारियों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और नोडल अधिकारियों को इन चैनलों से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशिक्षण सामग्री और शैक्षणिक संसाधन होंगे उपलब्ध इन डिजिटल चैनलों के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षण सामग्री, शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी, विभागीय दिशा-निर्देश और मेंटरिंग से जुड़ी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे शिक्षकों को समय पर संसाधन मिलेंगे और वे विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से सहयोग कर सकेंगे। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कदम शिक्षा विभाग का मानना है कि तकनीक के बेहतर उपयोग से विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम में गुणात्मक सुधार लाया जा सकता है। सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को कार्यक्रम की नियमित समीक्षा और शत-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। विभाग को उम्मीद है कि यह पहल बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सुपौल, एजेंसियां। बिहार के सुपौल जिले में मंगलवार को कोसी नदी में एक दर्दनाक नाव हादसा हो गया। सरायगढ़ पंचायत के चिकनी गांव के समीप महिला, पुरुष और बच्चों से भरी एक नाव नदी के बीचोंबीच पलट गई। नाव पर सवार लोग नदी पार कर खेतों में मूंग तोड़ने जा रहे थे। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और नदी किनारे चीख-पुकार सुनाई देने लगी। कई लोग नदी की तेज धारा में बह गए, जबकि कुछ को ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। खेत जाने के दौरान बिगड़ा संतुलन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाव सुरक्षा गाइड बांध के पश्चिम दिशा स्थित खेतों की ओर जा रही थी। इसी दौरान अचानक नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई। नाव पलटते ही उसमें सवार सभी लोग नदी में गिर पड़े। घटना के बाद आसपास के लोगों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने बचाईं कई जानें स्थानीय ग्रामीणों ने बिना देर किए नदी में छलांग लगाकर डूब रहे लोगों को बचाने का प्रयास किया। उनकी तत्परता से कई लोगों की जान बच गई। अब तक पांच महिला और पुरुषों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भपटियाही पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चार गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। प्रशासन और एनडीआरएफ अलर्ट पर घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को सूचना दे दी है और लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी गई है। नदी किनारे पसरा मातम हादसे की खबर मिलते ही चिकनी गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक और चिंता का माहौल बन गया। परिजन नदी किनारे पहुंचकर अपने परिजनों की तलाश में जुट गए। प्रशासनिक टीम राहत और बचाव कार्य की निगरानी कर रही है। एनडीआरएफ के पहुंचने के बाद खोज अभियान को और तेज किए जाने की संभावना है। कोसी नदी का यह हादसा एक बार फिर नदी पार करने के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर रहा है।