बिहार

Nitish Likely to Retain JDU Leadership

जदयू अध्यक्ष चुनाव का ऐलान: क्या फिर नीतीश कुमार के हाथ में होगी कमान या आएगा नया चेहरा?

surbhi मार्च 17, 2026 0
Nitish Kumar at JDU meeting amid discussion on party president election and leadership future
Nitish Kumar at JDU meeting

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर पार्टी की कमान संभालेंगे या इस बार किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा।

 

चुनाव कार्यक्रम घोषित, तारीखें तय

जदयू द्वारा जारी आधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 22 मार्च रखी गई है। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 24 मार्च को नाम वापस लेने की आखिरी तारीख होगी।
यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो 27 मार्च को मतदान कराया जाएगा।

 

नीतीश कुमार का फिर अध्यक्ष बनना लगभग तय?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार का दोबारा निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। 29 दिसंबर 2023 को पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने संगठन को एकजुट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसा कोई दूसरा चेहरा नहीं है, जिस पर सभी गुटों की सहमति बन सके। ऐसे में अगर 24 मार्च तक केवल एक ही नामांकन आता है, तो उसी दिन औपचारिक रूप से उनके नाम का ऐलान हो सकता है।

 

दिल्ली से पटना तक तेज हुई राजनीतिक हलचल

चुनाव की घोषणा के साथ ही पटना और दिल्ली स्थित जदयू दफ्तरों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस संगठनात्मक चुनाव को पार्टी की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण में व्यस्त हैं। 17 से 20 मार्च के बीच वे भागलपुर, बांका, जमुई और गया समेत कई जिलों का दौरा कर रहे हैं और विकास योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं।

 

क्या संगठन में होगा बदलाव या जारी रहेगी पुरानी रणनीति?

यह चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे जदयू के आगामी राजनीतिक दिशा के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर नई पीढ़ी को लेकर चर्चा हो रही है और निशांत कुमार की संभावित सक्रियता को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, यह चुनाव और भी अहम हो गया है।

अब सबकी नजरें 24 मार्च और उसके बाद की स्थिति पर टिकी हैं- क्या जदयू फिर से नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा या पार्टी किसी नए नेतृत्व की ओर कदम बढ़ाएगी।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

बिहार

View more
Illegal sand mining
अवैध बालू खनन पर कार्रवाई करने गई पुलिस टीम पर हमला, एसआई समेत कई जवान घायल

बांका, एजेंसियां। बिहार के बांका जिले के धोरैया थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची पुलिस टीम पर कथित बालू माफियाओं ने हमला कर दिया। लाठी-डंडों, ईंट और पत्थरों से किए गए इस हमले में अवर निरीक्षक (एसआई) प्रदीप कुमार चौधरी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस ने झारखंड के गोड्डा जिले के नौ लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।   अवैध खनन की सूचना पर पहुंची थी पुलिस टीम पुलिस के अनुसार, धोरैया थाना को पसहाना बालू घाट पर अवैध बालू उठाव की सूचना मिली थी। इसके बाद अवर निरीक्षक प्रदीप कुमार चौधरी, अवर निरीक्षक सूरज कुमार वैभव, सतीश कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची। वहां करीब 30 से 40 ट्रैक्टर बिहार की सीमा में कथित रूप से अवैध बालू खनन करते पाए गए। पुलिस को देखते ही अधिकांश चालक ट्रैक्टर छोड़कर भाग निकले। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक ट्रैक्टर जब्त कर लिया।   ट्रैक्टर छुड़ाने पहुंचे लोग, पुलिस पर किया हमला एफआईआर के मुताबिक, ट्रैक्टर जब्त होने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए और पुलिस टीम पर लाठी-डंडों, ईंट और पत्थरों से हमला कर दिया। हमले में एसआई प्रदीप कुमार चौधरी के सिर पर गंभीर चोट लगी, जबकि अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए। हमलावर जब्त ट्रैक्टर छुड़ाकर झारखंड की ओर फरार हो गए। घायल पुलिसकर्मियों को धोरैया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया।   पुलिस ने गोड्डा जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सौर पचीसा गांव के नौ लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। धोरैया थाना पुलिस का कहना है कि झारखंड से ट्रैक्टरों के जरिए बिहार की सीमा में अवैध बालू खनन की शिकायतें पहले भी मिलती रही हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी अभियान चला रही है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Balirajgarh ASI

मधुबनी के बलिराजगढ़ में प्राचीन सभ्यता के अहम अवशेष मिले, ASI अगले 10 वर्षों तक करेगा उत्खनन

BSPHCL

बिहार में रिकॉर्ड बिजली खपत, पहली बार 9,350 मेगावाट के पार पहुंची पीक पावर डिमांड

Bihar Police Recruitment

बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के 150 पदों पर भर्ती, 9 जुलाई से शुरू होंगे आवेदन

Lalu Yadav Rabari Devi
लालू-राबड़ी को फिर मिली Z सिक्योरिटी और बुलेटप्रूफ गाड़ियां

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा को लेकर अपना पहले का फैसला बदलते हुए दोनों की Z श्रेणी की सुरक्षा बहाल कर दी है। इसके साथ ही उन्हें बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा भी दोबारा उपलब्ध करा दी गई है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ समय पहले बंगला विवाद के दौरान दोनों की सुरक्षा घटा दी गई थी, जिसके बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा वापस लौटा दी थी।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, अब दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को पहले की तरह Z कैटेगरी सुरक्षा मिलेगी। इस श्रेणी में लगभग 22 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इनमें घर की सुरक्षा के लिए हथियारबंद गार्ड, 24 घंटे तैनात रहने वाले पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO), सुरक्षा वाहनों का काफिला और एक बुलेटप्रूफ कार शामिल होती है। सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य संभावित खतरों से वीआईपी व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।   क्या है मामला ? दरअसल, राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने के बाद राज्य सरकार ने लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। इसके बाद लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती कर दी गई थी। हालांकि, उस समय नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और सांसद मीसा भारती की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया था।   सुरक्षा में कटौती के फैसले के विरोध में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने सरLकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा लौटा दी थी। बाद में तेजस्वी यादव और मीसा भारती ने भी अपनी सुरक्षा वापस कर दी थी। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी बयानबाजी और विवाद देखने को मिला था।   अब बिहार सरकार द्वारा सुरक्षा बहाल किए जाने के बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को फिर से Z श्रेणी सुरक्षा और बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा मिल गई है। इसे राज्य सरकार के बदले हुए रुख के रूप में देखा जा रहा है, जबकि राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Sitamarhi Encounter

सीतामढ़ी में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, एक आरोपी घायल, पांच अपराधी गिरफ्तार

Bihar Weather

बिहार में बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से अगले 48 घंटे भारी बारिश के आसार, कई जिलों के लिए अलर्ट जारी

Bullet Train

बिहार को मिली हाई-स्पीड रेल की सौगात, पटना से दिल्ली का सफर अब 4 घंटे 41 मिनट में

Kaimur Accident
कैमूर में दर्दनाक सड़क हादसा, पानी से भरे गड्ढे में पलटा ई-रिक्शा

कैमूर, एजेंसियां। बिहार के कैमूर जिले में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में ई-रिक्शा चालक और नौ महीने की मासूम बच्ची की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। यह हादसा मोहनिया थाना क्षेत्र के भिट्टी गांव के समीप उस समय हुआ, जब यात्रियों से भरा एक ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पानी से भरे गहरे गड्ढे में पलट गया। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।   अनियंत्रित होकर गहरे पानी में जा पलटा ई-रिक्शा जानकारी के अनुसार, सोनहन थाना क्षेत्र के मिरिया खुर्द गांव निवासी 29 वर्षीय पिंकू कुमार सिंह भभुआ रोड रेलवे स्टेशन से यात्रियों को लेकर भिट्टी गांव की ओर जा रहे थे। गांव के बाहर पहुंचते ही ई-रिक्शा अचानक संतुलन खो बैठा और सड़क किनारे पानी से भरे गहरे गड्ढे में पलट गया। हादसे के बाद ई-रिक्शा में सवार सभी लोग पानी में फंस गए और डूबने लगे।   ग्रामीणों ने किया रेस्क्यू, दो की नहीं बच सकी जान यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और सभी को पानी से बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल चालक पिंकू कुमार सिंह और नौ महीने की सना खातून को तत्काल अनुमंडल अस्पताल, मोहनिया ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। हादसे में घायल चार अन्य लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।   कोलकाता से मायके आई थी बच्ची की मां बताया गया कि मासूम सना खातून अपनी मां, नानी और मामा सहित अन्य परिजनों के साथ ई-रिक्शा में सवार थी। उसकी मां हाल ही में कोलकाता से अपने मायके भिट्टी आई थी। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजन बच्ची का शव लेकर अपने गांव रवाना हो गए।   पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही मोहनिया थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और चालक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और जलभराव वाले गड्ढों की समस्या पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Khan Sir FIR

खान सर को कोर्ट से बड़ी राहत, 7 जुलाई तक गिरफ्तारी पर लगी रोक

Manjhi Reaction on Bharat Tiwari Encounter

भरत तिवारी एनकाउंटर पर मांझी का बयान, बोले- पुलिस की कार्रवाई थी सटीक

Bankipur Vidhan Sabha

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होगा उपचुनाव, चुनाव आयोग ने जारी किया कार्यक्रम

0 Comments

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?