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Bihar RWD Labs for Faster Road Quality Checks

बिहार के हर जिले में बनेगी RWD लैब, 24 घंटे में मिलेगी रिपोर्ट; घटिया सड़क निर्माण पर कसेगा शिकंजा

surbhi अगस्त 13, 2026 0
Bihar RWD district laboratories to test road construction materials and deliver quality reports within 24 hours
Bihar RWD District Laboratory Initiative

Bihar RWD Laboratory: बिहार में ग्रामीण सड़कों और पुल-पुलियों की गुणवत्ता सुधारने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अब सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली गिट्टी, मिट्टी, सीमेंट और डामर की गुणवत्ता जांच के लिए नमूनों को पटना भेजकर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। विभाग राज्य के सभी जिलों में जिला स्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित करने की तैयारी कर रहा है।

इन प्रयोगशालाओं में निर्माण सामग्री की जांच स्थानीय स्तर पर की जाएगी और विभाग की योजना के अनुसार 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। इससे न केवल सड़क निर्माण की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर निगरानी भी मजबूत होगी।

हर जिले में होगी RWD की अपनी प्रयोगशाला

ग्रामीण कार्य विभाग ने जिला स्तर पर प्रयोगशालाएं स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग के मुख्य अभियंता ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को करीब 2,000 से 2,500 वर्ग फीट उपयुक्त जगह चिह्नित करने का निर्देश दिया है।

जिन जिलों में सरकारी जमीन या भवन उपलब्ध नहीं है, वहां किराये के भवन में भी प्रयोगशाला शुरू करने का विकल्प रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भवन या जमीन की अनुपलब्धता के कारण लैब की स्थापना में अनावश्यक देरी न हो।

अधिकारियों को जल्द से जल्द उपयुक्त स्थान चिह्नित कर रिपोर्ट देने को कहा गया है, ताकि प्रयोगशालाओं को जल्द कार्यशील बनाया जा सके।

अब पटना भेजने की जरूरत कम होगी

फिलहाल सड़क निर्माण से जुड़े कई नमूनों को जांच के लिए दूसरे स्थानों, विशेष रूप से पटना भेजना पड़ता है। नमूने भेजने और रिपोर्ट प्राप्त करने में लगने वाला समय कई बार निर्माण कार्य की निगरानी को प्रभावित करता है।

जिला स्तर पर प्रयोगशाला शुरू होने के बाद संबंधित जिले में ही निर्माण सामग्री की वैज्ञानिक जांच संभव होगी। इससे अधिकारियों को मौके के करीब रहते हुए गुणवत्ता संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

गिट्टी की मजबूती, मिट्टी की गुणवत्ता, सीमेंट और डामर जैसे महत्वपूर्ण निर्माण पदार्थों की जांच स्थानीय स्तर पर की जा सकेगी।

24 घंटे में रिपोर्ट मिलने से क्या बदलेगा?

इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच रिपोर्ट की समयसीमा है। विभाग की योजना के मुताबिक नमूने की जांच के बाद 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी।

इससे निर्माण के दौरान यदि किसी सामग्री की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलती है, तो समय रहते उस पर कार्रवाई की जा सकेगी। घटिया सामग्री को निर्माण में इस्तेमाल होने से पहले ही हटाने या बदलने का रास्ता साफ हो सकता है।

इससे निर्माण पूरा होने के बाद सड़क की गुणवत्ता खराब होने पर दोबारा मरम्मत कराने जैसी स्थिति को भी कम करने में मदद मिल सकती है।

ठेकेदारों की मनमानी पर बढ़ेगी निगरानी

ग्रामीण इलाकों में सड़क बनने के कुछ समय बाद उसके टूटने, उखड़ने या गड्ढों की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। ऐसी स्थिति में सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में आती है।

जिला स्तरीय प्रयोगशालाएं विभाग को निर्माण सामग्री की जांच के लिए एक स्थानीय और तेज व्यवस्था उपलब्ध करा सकती हैं। यदि किसी ठेकेदार या निर्माण एजेंसी द्वारा निर्धारित मानकों से कम गुणवत्ता वाली सामग्री इस्तेमाल की जाती है, तो जांच रिपोर्ट के आधार पर जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है।

यही वजह है कि इस व्यवस्था को ठेकेदारों की निगरानी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भ्रष्टाचार और अनियमितता पर भी लग सकता है अंकुश

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों के साथ-साथ अनियमितताओं के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक जांच की व्यवस्था विभाग के लिए निगरानी का एक अतिरिक्त माध्यम बन सकती है।

यदि किसी निर्माण स्थल से लिए गए नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं, तो उसकी जांच रिपोर्ट रिकॉर्ड के रूप में उपलब्ध रहेगी। इससे निर्माण एजेंसी या ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को मजबूती मिल सकती है।

हालांकि, लैब की स्थापना के साथ-साथ यह भी जरूरी होगा कि नमूने पारदर्शी तरीके से लिए जाएं और जांच रिपोर्ट के आधार पर समय पर कार्रवाई की जाए।

आम लोगों को भी मिलेगा फायदा

इस योजना का असर केवल विभाग और ठेकेदारों तक सीमित नहीं रहेगा। बिहार की ग्रामीण सड़कें गांवों को बाजार, स्कूल, अस्पताल, प्रखंड कार्यालय और जिला मुख्यालय से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

सड़क की खराब गुणवत्ता का सीधा असर ग्रामीणों के आवागमन, व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर निर्माण सामग्री की जांच होने से गुणवत्ता संबंधी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।

यदि किसी गांव में सड़क निर्माण को लेकर शिकायत सामने आती है, तो संबंधित विभाग स्थानीय स्तर पर सामग्री और निर्माण की जांच कराने में पहले की तुलना में अधिक सक्षम हो सकता है।

मुजफ्फरपुर में भी शुरू हुई जगह की तलाश

जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं के लिए जगह चिह्नित करने की प्रक्रिया विभिन्न जिलों में आगे बढ़ रही है। मुजफ्फरपुर में भी प्रयोगशाला के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश शुरू कर दी गई है।

सरकार की कोशिश है कि सभी जिलों में आवश्यक आधारभूत व्यवस्था तैयार कर प्रयोगशालाओं को जल्द से जल्द काम करने की स्थिति में लाया जाए।

गांवों की सड़कों की गुणवत्ता पर होगा सीधा असर

बिहार में ग्रामीण सड़कें केवल परिवहन का साधन नहीं हैं। ये ग्रामीण क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए इनकी मजबूती और टिकाऊपन सीधे ग्रामीण विकास से जुड़ा हुआ है।

जिला स्तर पर RWD लैब की स्थापना से निर्माण सामग्री की जांच में तेजी, गुणवत्ता की बेहतर निगरानी और शिकायतों के त्वरित समाधान की उम्मीद है।

हालांकि, इस योजना की वास्तविक सफलता केवल लैब स्थापित करने से तय नहीं होगी। प्रयोगशालाओं में पर्याप्त तकनीकी संसाधन, प्रशिक्षित कर्मी, पारदर्शी सैंपलिंग और जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी होगी।

अगर इन सभी पहलुओं पर प्रभावी तरीके से काम हुआ, तो बिहार की ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता सुधारने की दिशा में यह व्यवस्था बड़ा बदलाव ला सकती है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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कर्नाटक के 83 लाख डकैती और हत्या मामले में वैशाली से दो आरोपी गिरफ्तार
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हाजीपुर, एजेंसियां। कर्नाटक के बीदर में एसबीआई की मुख्य शाखा के पास करीब 83 लाख रुपये की डकैती और हत्या के मामले में कर्नाटक पुलिस ने बिहार के वैशाली जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई कर्नाटक पुलिस और वैशाली के सराय थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने की।   दामोदरपुर के पास छापेमारी   पुलिस को सूचना मिली थी कि मामले में शामिल दोनों आरोपी वैशाली के सराय थाना क्षेत्र के दामोदरपुर गांव के पास छिपे हुए हैं। इसके बाद कर्नाटक पुलिस और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर दोनों को पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आलोक उर्फ अंबानी और अमन कुमार के रूप में हुई है।   फायरिंग कर लूटा था 83 लाख रुपये   पुलिस के अनुसार, बीदर में एसबीआई की मुख्य शाखा से एक सीएमएस कंपनी के कर्मचारी नकदी लेकर एटीएम में जमा करने जा रहे थे। इसी दौरान अपराधियों ने फायरिंग कर करीब 83 लाख रुपये से भरा ट्रंक लूट लिया था। गोलीबारी में कंपनी के एक कर्मचारी की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ था।   कर्नाटक पुलिस आरोपियों को अपने साथ ले गई   गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को कर्नाटक पुलिस अपने साथ ले गई। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर डकैती में शामिल अन्य आरोपियों और पूरे आपराधिक नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है। इस मामले में पहले भी कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।   सादे कपड़ों में पहुंची थी पुलिस टीम   बताया गया है कि कर्नाटक पुलिस की टीम सादे कपड़ों में आरोपियों की तलाश में पहुंची थी। इसी दौरान स्थानीय लोगों और पुलिस टीम के बीच गलतफहमी के कारण झड़प की स्थिति भी बनी थी। बाद में पुलिस की पहचान स्पष्ट होने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

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पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC) बनाने की योजना सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में पटना को आधुनिक और वैश्विक स्तर का शहर बनाने के लिए इस परियोजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।   NBCC ने पेश किया वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का प्रस्ताव     बैठक के दौरान नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) की ओर से पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही शहर की कई सरकारी जमीनों के पुनर्विकास की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।     4,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद     सरकार के अनुसार पटना में प्रस्तावित विभिन्न पुनर्विकास परियोजनाओं के जरिए करीब 4,000 करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सरकारी जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ आधुनिक व्यावसायिक और आधारभूत सुविधाओं का विकास करना है।     इन इलाकों के विकास पर भी नजर     बैठक में बिहार म्यूजियम के सामने नेहरू पथ, गर्दनीबाग, भूतनाथ सेक्टर-6 और बोरिंग कैनाल रोड स्थित सरकारी जमीन के पुनर्विकास प्रस्तावों की जानकारी दी गई। पुराने और जर्जर सरकारी भवनों की जगह जरूरत के अनुसार नए भवन और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया गया।     पटना को वैश्विक व्यापार केंद्र बनाने की तैयारी     वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसी परियोजना से पटना में व्यापार, निवेश और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अभी परियोजना की विस्तृत लागत, निर्माण शुरू होने की तारीख और अंतिम स्थान को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।  

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Barachatti police POCSO Act
गया में POCSO एक्ट के आरोपी समेत तीन गिरफ्तार, बाराचट्टी पुलिस की कार्रवाई

गया, एजेंसियां। बाराचट्टी थाना क्षेत्र में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए POCSO एक्ट के एक आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की यह कार्रवाई लंबित मामलों में फरार आरोपियों और वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।   POCSO मामले में आरोपी गिरफ्तार   पुलिस ने POCSO एक्ट के एक मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए न्यायालय में पेश करने की तैयारी की गई।   अन्य दो आरोपियों पर भी कार्रवाई   बाराचट्टी पुलिस ने अभियान के दौरान दो अन्य आरोपियों को भी पकड़ा। पुलिस ने इनके खिलाफ दर्ज मामलों और वारंट से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। तीनों गिरफ्तारियों के बाद पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुटी है।   पुलिस का अभियान जारी   बाराचट्टी पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में फरार आरोपियों और वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा। पुलिस की टीमें लंबित मामलों में आरोपियों की तलाश कर रही हैं।

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