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Bihar Weather Alert in 38 Districts

बिहार में आज बिगड़ेगा मौसम, 38 जिलों में अलर्ट; बारिश, आंधी और वज्रपात का खतरा

surbhi अगस्त 17, 2026 0
Dark rain clouds over Bihar as thunderstorms, strong winds and lightning warnings are issued across 38 districts
Bihar Weather Alert Rain and Thunderstorm

पटना: बिहार में सोमवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। सावन की तीसरी सोमवारी के दिन राज्य के सभी 38 जिलों में मौसम को लेकर चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, कई इलाकों में तेज बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। गरज-चमक और वज्रपात की भी आशंका है।

मौसम विभाग ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ऐसे में खासकर खुले इलाकों, खेतों और यात्रा करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

आधे बिहार में येलो, आधे में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में येलो अलर्ट जारी किया गया है।

वहीं बक्सर, भोजपुर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, भागलपुर, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई और बांका समेत कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

इन इलाकों में बारिश का ज्यादा असर

पूर्वानुमान के मुताबिक गया, नवादा और जमुई में मौसम ज्यादा सक्रिय रह सकता है। इन जिलों में तेज बारिश और आंधी के साथ बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा।

ऑरेंज अलर्ट वाले इलाकों में लोगों को मौसम खराब होने के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है।

बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का असर

मौसम में इस बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल-ओडिशा तट के आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र को प्रमुख कारण बताया गया है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण भी ऊंचाई तक फैला हुआ है।

इस मौसम प्रणाली के उत्तर और पश्चिम की ओर बढ़ने के कारण बिहार में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

18 अगस्त को भी डबल अलर्ट

बिहार में मौसम का असर सोमवार तक सीमित रहने वाला नहीं है। 18 अगस्त को भी पूरे राज्य में डबल अलर्ट जारी किया गया है। कुछ जिलों में येलो तो बाकी हिस्सों में ऑरेंज अलर्ट रहने की संभावना है।

इसके बाद 19 अगस्त को पूरे बिहार में येलो अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सीवान और बक्सर समेत कुछ इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत ज्यादा खराब रह सकता है।

लगातार बारिश होने से तापमान में गिरावट और पिछले दिनों से बनी उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

पटना में भी बारिश और वज्रपात की संभावना

राजधानी पटना में रविवार को तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान किया। सोमवार सुबह धूप और बादलों के बीच मौसम में बदलाव देखने को मिला।

मौसम विभाग ने पटना में बारिश के साथ बिजली चमकने और गरज-चमक की संभावना जताई है। अगले कुछ दिनों तक राजधानी में मौसम का मिजाज इसी तरह बदलता रह सकता है।

सावधानी जरूरी

बारिश और आंधी के दौरान खुले मैदान, पेड़, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं के पास खड़े होने से बचें। मौसम खराब होने पर विशेष रूप से कांवरिया और अन्य यात्रियों को स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा सलाह का पालन करना चाहिए।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बांकीपुर हार के बाद बीजेपी का फोकस बदला, सवर्ण वोटरों को साधने की रणनीति पर जोर; सरकार ने उठाए कई कदम

पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार के बाद बिहार की सियासत में नई रणनीति के संकेत दिखाई देने लगे हैं। चुनाव परिणाम के बाद पार्टी और राज्य सरकार की ओर से सवर्ण मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता बढ़ी है। राजनीतिक हलकों में इसे बीजेपी के पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बांकीपुर उपचुनाव का मुकाबला केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहा। यूजीसी से जुड़े मुद्दे, पेपर लीक, भरत तिवारी एनकाउंटर और जेन-जी के विरोध जैसे मुद्दों ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। इस चुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर की जीत के बाद बीजेपी के सामने अपने पारंपरिक समर्थक वर्ग को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाने की चुनौती खड़ी हुई है। सवर्ण आयोग ने जिलों में नियुक्त किए नोडल अधिकारी सरकार की ओर से सवर्ण आयोग की गतिविधियों को जिला स्तर तक पहुंचाने की दिशा में कदम उठाया गया है। आयोग ने विभिन्न जिलों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है। इसका उद्देश्य लोगों की शिकायतों को स्थानीय स्तर पर दर्ज कर उनका समाधान कराने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, ताकि लोगों को अपनी समस्याएं लेकर बार-बार पटना न आना पड़े। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब सवर्ण समाज से जुड़े कई मुद्दे राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक मदद और नौकरी का ऐलान आरा में भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर भी सरकार पर सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। हालांकि, परिवार की ओर से न्याय की मांग अभी भी उठाई जा रही है। सरकार के इस फैसले को राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला चुनावी दौर में सवर्ण समाज के बीच चर्चा का प्रमुख विषय रहा था। EWS छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग पर जोर सरकार सवर्ण आयोग की सिफारिशों पर भी विचार कर रही है। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा सरकार द्वारा संचालित आवासीय विद्यालयों में EWS और सवर्ण वर्ग के विद्यार्थियों के दाखिले से जुड़े सुझावों पर भी विचार किया जा रहा है। इससे शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े अवसरों को बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। छात्रों की शिकायतों के लिए बनेगा विशेष पोर्टल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में छात्रों के लिए एक विशेष पोर्टल शुरू करने की घोषणा की थी। इस पोर्टल के जरिए छात्र स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक जरूरतों से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इन शिकायतों के समाधान के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाएगी और करीब एक महीने के भीतर समस्याओं के निपटारे की कोशिश की जाएगी। पोर्टल के सोमवार से शुरू होने की बात कही गई है। बांकीपुर परिणाम ने बढ़ाई राजनीतिक चिंता बांकीपुर में बीजेपी की हार के बाद पार्टी के सामने सिर्फ एक सीट गंवाने की चुनौती नहीं है, बल्कि अपने पारंपरिक समर्थक वर्ग के बीच भरोसा बनाए रखने का सवाल भी खड़ा हुआ है। प्रशांत किशोर की जीत ने यह संकेत दिया है कि रोजगार, शिक्षा, विकास और स्थानीय मुद्दे जातीय समीकरणों के साथ मिलकर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। अब सरकार की ओर से सवर्ण आयोग, EWS छात्रों, शिकायत निवारण और भरत तिवारी के परिवार को सहायता जैसे मुद्दों पर उठाए जा रहे कदमों को इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।  

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मनेर में पुलिस द्वारा बरामद जिंदा कारतूस और मैगजीन
पटना: मनेर में BTech छात्र के घर से 17 जिंदा कारतूस और मैगजीन बरामद, 21 वर्षीय युवक गिरफ्तार

पटना। बिहार की राजधानी पटना के मनेर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक BTech छात्र को 17 जिंदा कारतूस और एक मैगजीन के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने छात्र के सराय गांव स्थित घर पर छापेमारी कर यह बरामदगी की। गिरफ्तार युवक की पहचान 21 वर्षीय प्रफुल्ल कुमार के रूप में हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसके पास कारतूस और मैगजीन कहां से आए और इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।   घर पर छापेमारी में हुई बरामदगी   पुलिस के अनुसार, मनेर थाना क्षेत्र के सराय बाजार में रहने वाले प्रफुल्ल कुमार के घर में हथियार और कारतूस छिपाकर रखे जाने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने उसके घर पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान पुलिस को घर से 17 जिंदा कारतूस और एक मैगजीन मिली। पुलिस की कार्रवाई के दौरान घर के कुछ पुरुष सदस्य मौके से फरार हो गए। इसके बाद पुलिस ने प्रफुल्ल कुमार की तलाश शुरू की।   छितनावां मोड़ से पकड़ा गया छात्र   बरामदगी के बाद पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। इसी दौरान पुलिस टीम ने उसे छितनावां-खगौल रोड स्थित छितनावां मोड़ से गिरफ्तार कर लिया। प्रफुल्ल कुमार बेंगलुरु के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से BTech की पढ़ाई कर रहा है। वह छुट्टियों के दौरान अपने गांव स्थित घर आया हुआ था।   दोस्तों की संगत में कारतूस लाने की बात   पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रफुल्ल दोस्तों की संगत में आकर कारतूस अपने घर लेकर आया था। पुलिस उसके दोस्तों और संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या उसका संबंध उन युवकों से था जिन्हें 15 अगस्त को शाहपुर थाना क्षेत्र में हथियार और गोली के साथ गिरफ्तार किया गया था।   कारतूस कहां से आए, पुलिस कर रही जांच   पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रफुल्ल कुमार को इतनी संख्या में जिंदा कारतूस और मैगजीन किसने उपलब्ध कराई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इनका इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधि के लिए किया जाना था या नहीं। पुलिस आरोपी से पूछताछ के आधार पर इस मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है।   थाना प्रभारी ने की गिरफ्तारी की पुष्टि   मनेर थाना प्रभारी रजनीश कुमार ने प्रफुल्ल कुमार की गिरफ्तारी और उसके घर से 17 जिंदा कारतूस व एक मैगजीन बरामद होने की पुष्टि की है। पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है और बरामद सामान के स्रोत तथा आरोपी के संपर्कों की जांच जारी है।

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प्रशांत किशोर का बड़ा दावा: ‘बिहार में सरकार का चरित्र बदला, अब नेतृत्व भी बदलेगा’; सम्राट चौधरी पर साधा निशाना

पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जन सुराज के विधायक प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि उपचुनाव के परिणाम ने बिहार सरकार के कामकाज और राजनीतिक रुख पर असर डाला है। उन्होंने कहा कि सरकार का चरित्र बदलना शुरू हो गया है और आने वाले समय में नेतृत्व में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। बांकीपुर में आभार यात्रा के दौरान आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि उपचुनाव के नतीजे के बाद सरकार के बयानों और प्राथमिकताओं में बदलाव नजर आने लगा है। ‘अब एनकाउंटर की बात नहीं हो रही’ प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम आने के बाद से बिहार में एनकाउंटर और ‘हाफ एनकाउंटर’ जैसे बयानों की चर्चा कम हुई है। उन्होंने दावा किया कि पहले जिस तरह जाति और धर्म के आधार पर कार्रवाई की बातें कही जा रही थीं, अब सरकार का फोकस दूसरी चीजों पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनकाउंटर के नाम पर जिन लोगों की हत्या हुई, उनके परिवारों को अब मुआवजा और नौकरी देने की बात की जा रही है तथा दोषियों पर कार्रवाई की चर्चा हो रही है। हालांकि, प्रशांत किशोर के ये आरोप और दावे राजनीतिक बयान के तौर पर सामने आए हैं। इन पर सरकार या संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब इस खबर में उपलब्ध नहीं है। ‘अब फैक्ट्रियों और रोजगार की बात हो रही’ प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर के परिणाम के बाद सरकार के राजनीतिक संदेश में बदलाव दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, अब मुख्यमंत्री की ओर से रात 11 बजे तक पढ़ाई की व्यवस्था और बिहार में फैक्ट्रियां लगाने तथा रोजगार पैदा करने जैसी बातें कही जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के रुख में बदलाव कितना स्थायी और कितना ईमानदार है, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन लोगों को यह बदलाव दिखाई देने लगा है। ‘सम्राट चौधरी को जाना ही पड़ेगा’ प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर उपचुनाव से पहले ही उन्होंने कहा था कि यदि बीजेपी यहां से हारती है तो नेतृत्व में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गलियारों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है और उनका मानना है कि सम्राट चौधरी को पद छोड़ना पड़ेगा। प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया कि अधिकतम उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक मौजूदा नेतृत्व को समय मिल सकता है, लेकिन उसके बाद बदलाव तय है। हालांकि, यह प्रशांत किशोर का राजनीतिक आकलन और दावा है। नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सरकार या बीजेपी की ओर से किसी आधिकारिक फैसले की जानकारी इस रिपोर्ट में नहीं है। ‘लोगों के वोट की ताकत दिख रही है’ प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर के मतदाताओं के फैसले ने सरकार को अपना राजनीतिक रुख बदलने पर मजबूर किया है। उन्होंने इसे लोगों के वोट की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह विधायक के तौर पर अपना काम शुरू करने से पहले क्षेत्र के लोगों का आभार व्यक्त कर रहे हैं। आने वाले समय में वह विधायक की भूमिका में सक्रिय रूप से काम करेंगे। बिहार की राजनीति में बढ़ेगी हलचल? प्रशांत किशोर के बयान ऐसे समय आए हैं जब बिहार की राजनीति में नेतृत्व, कानून-व्यवस्था, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेर रहे हैं। उनका दावा कि सरकार का ‘चरित्र’ बदल रहा है और नेतृत्व भी बदलेगा, आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। हालांकि, नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।  

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