बिहार

गयाजी में सड़क परियोजनाओं की सौगात, NH-82 बाईपास होगा फोरलेन; नालंदा और पलामू से कनेक्टिविटी मजबूत होगी

anjali kumari अगस्त 8, 2026 0
Gaya Road Projects
Gaya Road Projects

गया, एजेंसियां। गया यानी गयाजी में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने गयाजी के लिए स्वीकृत नई सड़क परियोजनाओं की जानकारी साझा की है। इनमें NH-82 के बाईपास को फोरलेन बनाने की योजना प्रमुख है। इससे गया शहर में यातायात का दबाव कम करने और आसपास के क्षेत्रों से संपर्क बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

NH-82 बाईपास होगा फोरलेन

 

प्रस्तावित परियोजना के तहत NH-82 बाईपास को फोरलेन बनाया जाएगा। इससे गया से गुजरने वाले वाहनों को शहर के भीतरी हिस्सों में जाने की जरूरत कम होगी और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। सड़क के चौड़ीकरण से स्थानीय लोगों के साथ लंबी दूरी के यात्रियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

 

नालंदा और पलामू से बेहतर संपर्क

 

नई सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य गयाजी की नालंदा और झारखंड के पलामू क्षेत्र से कनेक्टिविटी को मजबूत करना भी है। बेहतर सड़क संपर्क से यात्रियों और माल परिवहन दोनों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।

 

गया पहले से ही धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में सड़क बुनियादी ढांचे में सुधार का असर पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है।

 

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा फायदा

 

गयाजी में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। सड़क संपर्क बेहतर होने से तीर्थयात्रियों की आवाजाही आसान हो सकती है।

 

नई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद गया और आसपास के क्षेत्रों में यात्रा समय कम होने तथा यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, परियोजनाओं की निर्माण समयसीमा और विस्तृत लागत से जुड़ी जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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भभुआ में प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में 10 अगस्त को आंदोलन का ऐलान

भभुआ, एजेंसियां। प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम को लेकर भभुआ में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। विभिन्न संगठनों और स्थानीय लोगों की ओर से 10 अगस्त को आंदोलन करने का ऐलान किया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर उनकी कई आपत्तियां हैं और सरकार को इस पर स्पष्टता देनी चाहिए।   प्रस्तावित कानून को लेकर विरोध   आंदोलन से जुड़े लोगों ने प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय से जुड़े फैसलों में स्थानीय हितों और शैक्षणिक संस्थानों की आवश्यकताओं को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से उनकी मांगों पर बातचीत करने और प्रस्तावित व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है।   10 अगस्त को प्रदर्शन की तैयारी   विरोध को लेकर 10 अगस्त को प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। आंदोलनकारियों ने अधिक से अधिक लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन भी प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर स्थिति पर नजर रख रहा है। आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने की संभावना है।   सरकार के रुख पर नजर   अब सभी की नजर 10 अगस्त के आंदोलन और इसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया पर है। यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है तो विरोध आगे भी जारी रहने की संभावना है।

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मखाना उत्पादन में बिहार अव्वल, देश के कुल उत्पादन में राज्य की बड़ी हिस्सेदारी

पटना, एजेंसियां। मखाना उत्पादन के मामले में बिहार देश में पहले स्थान पर है। राज्य में बड़े पैमाने पर मखाने की खेती और प्रसंस्करण किया जाता है। खासकर उत्तर बिहार के दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा और सुपौल जैसे जिलों में मखाना किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है।   देश के मखाना उत्पादन में बिहार की बड़ी हिस्सेदारी   बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है। राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्से में मौजूद तालाबों, चौरों और जल क्षेत्रों में मखाने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।   मखाना को स्थानीय स्तर पर ‘फॉक्स नट’ या ‘गोरखपुरा’ जैसे नामों से भी जाना जाता है। इसकी बढ़ती मांग के कारण किसानों और प्रसंस्करण इकाइयों के लिए नए बाजार तैयार हो रहे हैं।   मिथिलांचल बना मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र   बिहार का मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्र मखाना उत्पादन के लिए देश का प्रमुख केंद्र है। दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया और आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में किसान मखाने की खेती से जुड़े हैं।   मखाने की खेती पारंपरिक रूप से जलाशयों में की जाती रही है, लेकिन अब आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों के इस्तेमाल से इसकी उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।   किसानों की आय बढ़ाने पर जोर   मखाने की बढ़ती राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए बिहार में केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। मखाना आधारित उत्पादों की मांग देश के महानगरों के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी बढ़ रही है। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।   ‘मिथिला मखाना’ को मिला GI टैग   बिहार के मखाने की पहचान को मजबूत करने में ‘मिथिला मखाना’ का GI टैग महत्वपूर्ण रहा है। इससे क्षेत्र विशेष में उत्पादित मखाने को अलग पहचान मिली है और इसके बाजार मूल्य तथा ब्रांडिंग को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।   मखाना उत्पादन में बिहार की अग्रणी स्थिति राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। आने वाले वर्षों में उत्पादन के साथ-साथ आधुनिक प्रसंस्करण और निर्यात बढ़ने से इस क्षेत्र में किसानों की आय और रोजगार दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

anjali kumari अगस्त 8, 2026 0
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बिहार के फुटवियर और लेदर सेक्टर में ₹125 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, करीब 1,800 रोजगार की उम्मीद

पटना, एजेंसियां। बिहार में फुटवियर और लेदर उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। राज्य सरकार के अनुसार, फुटवियर और लेदर क्षेत्र में करीब 125 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे लगभग 1,800 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। सरकार इस क्षेत्र को राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के नए अवसर के रूप में देख रही है।   निवेशकों को आकर्षित करने पर जोर   बिहार सरकार राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों के साथ लगातार बैठकें कर रही है। फुटवियर और लेदर सेक्टर को भी इसी औद्योगिक विस्तार की रणनीति में शामिल किया गया है। इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से उत्पादन इकाइयों के साथ-साथ कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, पैकेजिंग और अन्य सहायक गतिविधियों में भी रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।   रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद   सरकार के मुताबिक प्रस्तावित निवेश से करीब 1,800 प्रत्यक्ष और संबंधित रोजगार अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे खासकर युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के विकल्प बढ़ सकते हैं। फुटवियर और लेदर उद्योग में श्रमिकों के साथ तकनीकी, डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण, बिक्री और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कामों की भी जरूरत होती है।   औद्योगिक विकास को गति देने की कोशिश   बिहार सरकार राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों पर जोर दे रही है। फुटवियर और लेदर सेक्टर में प्रस्तावित निवेश को इसी प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।   हालांकि, ₹125 करोड़ का आंकड़ा निवेश प्रस्तावों से जुड़ा है, इसे अभी हुआ वास्तविक निवेश नहीं माना जाना चाहिए। परियोजनाओं के जमीन पर उतरने के बाद ही वास्तविक निवेश और रोजगार की स्थिति स्पष्ट होगी।

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