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बिहार में रिकॉर्ड बिजली खपत, पहली बार 9,350 मेगावाट के पार पहुंची पीक पावर डिमांड

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
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BSPHCL Peak Power Demand

पटना,एजेंसियां। भीषण गर्मी और उमस के बीच बिहार में बिजली की मांग ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। शनिवार को राज्य की पीक पावर डिमांड पहली बार 9,350 मेगावाट के आंकड़े को पार कर गई। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक की सबसे अधिक बिजली मांग है और राज्य की वितरण कंपनियों ने बिना बड़े व्यवधान के आपूर्ति बनाए रखी।

 

गर्मी और उमस से बढ़ी बिजली की खपत

 

ऊर्जा विभाग के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से राज्य के अधिकांश जिलों में तापमान और उमस बढ़ने के कारण एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसका सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ा और राज्य की पीक डिमांड नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। सबसे अधिक मांग पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और दरभंगा जैसे शहरी क्षेत्रों में दर्ज की गई। 

 

रिकॉर्ड मांग के बावजूद निर्बाध रही बिजली आपूर्ति

 

बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड ने बताया कि रिकॉर्ड मांग के बावजूद राज्य में बिजली आपूर्ति सामान्य रही। पर्याप्त बिजली खरीद, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने और ग्रिड प्रबंधन की वजह से उपभोक्ताओं को बड़े स्तर पर कटौती का सामना नहीं करना पड़ा। अधिकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में भी बढ़ती मांग को देखते हुए सभी बिजली संयंत्रों और ग्रिड की लगातार निगरानी की जा रही है।

 

बिजली व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी

 

ऊर्जा विभाग का कहना है कि राज्य में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण क्षमता को लगातार बढ़ाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में हर उपभोक्ता को 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराई जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक गतिविधियों और घरेलू उपभोग में वृद्धि के कारण बिहार में बिजली की मांग आगे भी बढ़ सकती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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केंद्र की ₹13,041 करोड़ की रेलवे और बिहार हाईवे परियोजनाएं
केंद्र ने पांच राज्यों में रेलवे और हाईवे परियोजनाओं के लिए ₹13,041 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी दी

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने देश में रेल और सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए ₹13,041 करोड़ की पांच बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी है। कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने 19 अगस्त 2026 को इन प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें चार रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं और बिहार में एक चार-लेन हाईवे परियोजना शामिल है।   चार राज्यों में रेलवे नेटवर्क का होगा विस्तार   चार रेलवे परियोजनाओं पर कुल ₹9,450 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इनके तहत पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में करीब 410 किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइन क्षमता विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं से हावड़ा-चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर यात्री और माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी।   बिहार में ₹3,590 करोड़ की हाईवे परियोजना   कैबिनेट ने बिहार में मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा मार्ग पर करीब 82.6 किलोमीटर लंबे NH-22 हिस्से को चार लेन में बदलने की परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस पर लगभग ₹3,590.73 करोड़ खर्च होंगे। यह सड़क परियोजना बिहार की कनेक्टिविटी को बेहतर करने के साथ नेपाल सीमा की ओर आवागमन को भी आसान बनाएगी।   6,448 गांवों को मिलेगा बेहतर रेल संपर्क   सरकार के अनुसार चारों रेलवे परियोजनाएं आठ जिलों के करीब 6,448 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ेंगी। इन क्षेत्रों की संयुक्त आबादी लगभग 60 लाख है। अतिरिक्त ट्रैक बनने से व्यस्त रेल मार्गों पर भीड़ कम करने और ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।   2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य   रेलवे की चारों परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से परिवहन क्षमता बढ़ने के साथ लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और माल एवं यात्री परिवहन की दक्षता में सुधार आएगा।

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Bihar Weather: आज 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, पटना समेत कई शहरों में बारिश; जानें अपने जिले का हाल

पटना: बिहार में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग ने 20 अगस्त को राज्य के कई हिस्सों में बारिश, आंधी और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। खासकर कोसी और सीमांचल के जिलों में मौसम ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है। सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं उत्तर और पूर्वी बिहार के 12 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को कोसी और सीमांचल के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी और मेघगर्जन हो सकता है। इन दौरान वज्रपात की भी आशंका है। ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कुछ जगहों पर मौसम काफी खराब हो सकता है। लोगों को सलाह दी गई है कि आंधी-तूफान और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान या पेड़ के नीचे खड़े होने से बचें। इन 12 जिलों में येलो अलर्ट मौसम विभाग ने सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, खगड़िया, समस्तीपुर, मुंगेर, जमुई, बांका और भागलपुर में भी येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में बारिश के साथ तेज हवा, गरज-चमक और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। मौसम अचानक बदलने की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पटना में कैसा रहेगा मौसम? राजधानी पटना में गुरुवार को आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। शहर के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। पटना का अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस, जबकि न्यूनतम तापमान लगभग 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। हालांकि राजधानी में भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। भागलपुर और पूर्णिया में भी बारिश के आसार भागलपुर में बादल छाए रहने के साथ मध्यम बारिश हो सकती है। यहां मेघगर्जन और वज्रपात की भी संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। वहीं पूर्णिया में आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। यहां अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। मुजफ्फरपुर, दरभंगा और गया में भी बदलेगा मौसम मुजफ्फरपुर में बादल छाए रहने और बारिश के एक-दो दौर होने की संभावना है। दिन का तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। दरभंगा में हल्की बारिश के साथ वज्रपात की आशंका है। वहीं गया में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ जगहों पर मेघगर्जन के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। छपरा में भी बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश होने का अनुमान है। दक्षिण-पश्चिम बिहार में कमजोर रहेगा मानसून मौसम विभाग के मुताबिक, 20 अगस्त को दक्षिण-पश्चिम बिहार में मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती हैं। झारखंड से सटे इलाकों में बने चक्रवाती परिसंचरण का प्रभाव अब कमजोर पड़ रहा है। इसके बावजूद राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। गरज-चमक या बिजली गिरने के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।  

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Bihar supply officials protest over resources and workload for issuing 11 lakh new ration cards
बिहार में 11 लाख नए राशन कार्ड पर संकट? अधिकारी आंदोलन पर, हड़ताल हुई तो अटक सकता है काम

पटना: बिहार में नए राशन कार्ड बनाने के बड़े अभियान को लेकर अब विभागीय अधिकारियों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। राज्य में 11,04,425 नए राशन कार्ड जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने इस लक्ष्य और इसे पूरा करने के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों पर सवाल उठाए हैं। संघ का कहना है कि अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन दिए बिना इतना बड़ा लक्ष्य सौंप दिया गया है। इसी के विरोध में आपूर्ति विभाग से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर विरोध करेंगे। अगर मांगों पर सहमति नहीं बनी तो आंदोलन आगे बढ़ाने की चेतावनी दी गई है। 20 अगस्त से शुरू हुआ विरोध बिहार आपूर्ति सेवा संघ के मुताबिक, पहले चरण में 20 से 26 अगस्त तक अधिकारी और कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे। इस दौरान विभागीय काम पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। अगर सरकार की ओर से मांगों पर कोई समाधान नहीं निकलता है तो संघ सामूहिक अवकाश का कदम उठा सकता है। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो पूर्ण हड़ताल की चेतावनी दी गई है। संघ ने आंदोलन की जानकारी खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के साथ मुख्य सचिव और संबंधित मंत्री को भी दी है। 11.04 लाख राशन कार्ड का लक्ष्य क्यों बना विवाद? आपूर्ति सेवा संघ के अध्यक्ष श्रीराम मिश्रा ने दावा किया है कि नए राशन कार्ड का लक्ष्य जमीनी सर्वे के बजाय एक गणितीय गणना के आधार पर तय किया गया है। संघ के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बिहार में लाभुकों की अधिकतम सीमा करीब 8.71 करोड़ है। इनमें लगभग 8.24 करोड़ लोग पहले से योजना के दायरे में हैं। इस हिसाब से करीब 46.93 लाख लाभुकों की जगह बचती है। इसी संख्या को औसत परिवार के आकार 4.25 से विभाजित करने पर करीब 11.04 लाख नए राशन कार्ड का आंकड़ा निकाला गया है। अधिकारियों का सवाल है कि पुराने जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर तय सीमा को आज की वास्तविक स्थिति से कैसे जोड़ा जा सकता है। कंप्यूटर-स्कैनर से लेकर इंटरनेट तक की कमी का आरोप संघ ने राशन कार्ड अभियान के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया है। उसका कहना है कि कई आपूर्ति कार्यालयों में पर्याप्त कंप्यूटर, स्कैनर और इंटरनेट सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा आवेदनों की जांच और फील्ड वेरिफिकेशन के लिए पर्याप्त सरकारी वाहन नहीं मिलने की बात भी कही गई है। संघ का दावा है कि दस्तावेजों की जांच, प्रिंटिंग और फील्ड विजिट जैसे कामों में अधिकारियों को अपने स्तर पर खर्च करना पड़ रहा है। इसके लिए प्रति कार्ड करीब 250 से 300 रुपये तक का खर्च आने का दावा किया गया है। कॉल और GPS को लेकर भी नाराजगी आपूर्ति अधिकारियों ने अधिकारियों की निगरानी को लेकर की गई कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई है। संघ के मुताबिक, 17 जुलाई को CUG नंबर पर कॉल रिसीव नहीं होने या GPS की लाइव लोकेशन उपलब्ध नहीं होने के आधार पर कई अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटा गया। संघ का कहना है कि फील्ड में काम करने के दौरान नेटवर्क और तकनीकी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में पहले पर्याप्त तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए और उसके बाद जवाबदेही तय होनी चाहिए। अभी बंद नहीं होंगे राशन कार्ड से जुड़े काम फिलहाल 20 से 26 अगस्त तक के काला बिल्ला विरोध के दौरान सामान्य कामकाज जारी रखने की बात कही गई है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि बिहार में राशन कार्ड बनना बंद हो गया है। हालांकि, अगर आंदोलन आगे बढ़कर सामूहिक अवकाश या पूर्ण हड़ताल में बदलता है तो नए राशन कार्ड के आवेदन, दस्तावेजों की जांच, फील्ड वेरिफिकेशन और मंजूरी की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और आपूर्ति सेवा संघ के बीच बातचीत से विवाद का समाधान निकलता है या आंदोलन आगे बढ़ता है। फिलहाल 11 लाख से ज्यादा नए राशन कार्ड बनाने के लक्ष्य के बीच अधिकारियों का विरोध सरकार के लिए नई चुनौती बन गया है।  

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