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VinFast Electric Scooter India Debut Soon

OLA, TVS और Bajaj की बढ़ सकती है चुनौती! VinFast ला रही नया इलेक्ट्रिक स्कूटर, 150Km तक की रेंज और प्रीमियम फीचर्स का दावा

surbhi जुलाई 1, 2026 0
VinFast upcoming electric scooter featuring premium styling, LED lighting, smart features and a claimed 150 km riding range for India.
VinFast Electric Scooter India 150Km Range

भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और इसी बढ़ते बाजार पर अब वैश्विक कंपनियों की भी नजर है। वियतनाम की प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी VinFast ने भारत में अपने नए इलेक्ट्रिक स्कूटर का डिजाइन पेटेंट कराया है। इस कदम को कंपनी की भारतीय ईवी टू-व्हीलर बाजार में एंट्री की मजबूत तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

अगर VinFast भारतीय बाजार में इस स्कूटर को लॉन्च करती है, तो इसका सीधा मुकाबला OLA Electric, TVS Motor, Bajaj Auto, Ather Energy और अन्य स्थापित कंपनियों के इलेक्ट्रिक स्कूटरों से होगा। कंपनी ने फिलहाल लॉन्च डेट और कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन पेटेंट दाखिल होने के बाद माना जा रहा है कि जल्द ही इससे जुड़े और बड़े अपडेट सामने आ सकते हैं।

भारत बना VinFast की रणनीति का अहम हिस्सा

VinFast की पैरेंट कंपनी Vingroup भारत को अपने सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शामिल कर रही है। कंपनी पहले ही भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों को लेकर अपनी योजनाओं का ऐलान कर चुकी है और हाल ही में अपनी Green SM इलेक्ट्रिक कैब सेवा के जरिए भी भारतीय बाजार में मौजूदगी दर्ज करा चुकी है।

अब इलेक्ट्रिक स्कूटर का डिजाइन पेटेंट यह संकेत देता है कि कंपनी सिर्फ चार पहिया वाहनों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में भी अपनी मजबूत हिस्सेदारी बनाना चाहती है।

प्रीमियम डिजाइन के साथ मिलेगा नया लुक

पेटेंट इमेज के अनुसार नया इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी के मौजूदा VinFast Viper मॉडल से काफी मिलता-जुलता दिखाई देता है, लेकिन इसमें कई नए डिजाइन अपडेट किए गए हैं।

संभावित डिजाइन फीचर्स में शामिल हैं—

  • नया एलईडी हेडलाइट सेटअप
  • इंटीग्रेटेड एलईडी डीआरएल
  • नया फ्रंट फेंडर
  • नीचे की ओर शिफ्ट किया गया VinFast लोगो
  • बैट-विंग स्टाइल एलईडी टेललाइट
  • 14 इंच के अलॉय व्हील
  • स्टेप-अप सीट
  • फ्लैट फ्लोरबोर्ड
  • फुट पेग

इन बदलावों के चलते स्कूटर का लुक पहले से अधिक मॉडर्न और प्रीमियम नजर आता है।

फीचर्स में मिलेगी एडवांस टेक्नोलॉजी

रिपोर्ट्स के अनुसार नए इलेक्ट्रिक स्कूटर में कई आधुनिक फीचर्स देखने को मिल सकते हैं। इनमें शामिल हैं—

  • TFT डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर
  • स्मार्ट-की सिस्टम
  • कीलेस-गो फीचर
  • स्मार्टफोन कनेक्टिविटी
  • डिजिटल डिस्प्ले
  • टेलीस्कोपिक फ्रंट फोर्क
  • गैस-चार्ज्ड ट्विन रियर शॉक एब्जॉर्बर
  • फ्रंट डिस्क ब्रेक

इन फीचर्स के साथ VinFast का यह स्कूटर प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में मजबूत दावेदारी पेश कर सकता है।

150 किलोमीटर तक की रेंज का दावा

कंपनी के मौजूदा VinFast Viper मॉडल में 1.5kWh की फिक्स्ड बैटरी मिलती है, जिससे लगभग 82 किलोमीटर तक की ड्राइविंग रेंज प्राप्त होती है।

इसके अलावा इसमें 1.15kWh की अतिरिक्त बैटरी लगाने का विकल्प भी दिया जाता है। दोनों बैटरियों के साथ कुल संभावित रेंज लगभग 150 किलोमीटर तक पहुंच जाती है, जो रोजाना शहर में आने-जाने वाले ग्राहकों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

हालांकि भारत में आने वाले मॉडल में यही बैटरी सेटअप मिलेगा या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

मोटर और परफॉर्मेंस

मौजूदा VinFast Viper में 3000W पीक पावर वाला रियर हब मोटर मिलता है, जो लगभग 4bhp की पावर जनरेट करता है। इसकी टॉप स्पीड करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जाती है।

यदि भारतीय मॉडल इसी पावरट्रेन के साथ लॉन्च होता है, तो यह शहरों में रोजमर्रा की यात्रा के लिए एक संतुलित और किफायती विकल्प बन सकता है।

कब होगा लॉन्च?

फिलहाल VinFast ने भारत में इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की लॉन्च डेट, कीमत और आधिकारिक स्पेसिफिकेशन का खुलासा नहीं किया है। हालांकि डिजाइन पेटेंट दाखिल होने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि कंपनी जल्द ही भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में अपनी नई पेशकश के साथ दस्तक दे सकती है।

यदि ऐसा होता है तो आने वाले समय में भारतीय ईवी बाजार में प्रतिस्पर्धा और भी तेज होने की संभावना है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Electric scooter charging at home with battery, range, and service checklist before making an EV purchase.
EV स्कूटर खरीदने से पहले जरूर जान लें ये 5 बातें, सिर्फ रेंज देखकर फैसला किया तो हो सकता है बड़ा नुकसान

नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का विकल्प चुन रहे हैं। बाजार में 80 हजार रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले कई इलेक्ट्रिक स्कूटर उपलब्ध हैं, जिनमें लंबी रेंज, स्मार्ट फीचर्स और आकर्षक डिजाइन का दावा किया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कंपनी द्वारा बताई गई रेंज, कीमत या फीचर्स के आधार पर इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना सही फैसला नहीं है। कई खरीदार बाद में बैटरी, चार्जिंग, सर्विस और ऐप सपोर्ट जैसी समस्याओं का सामना करते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च और असुविधा बढ़ सकती है। अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन पांच महत्वपूर्ण बातों पर जरूर ध्यान दें। 1. कंपनी की बताई रेंज पर पूरी तरह भरोसा न करें अधिकांश कंपनियां इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज नियंत्रित परीक्षण (Test Conditions) के आधार पर बताती हैं। वास्तविक परिस्थितियों में ट्रैफिक, सड़क की स्थिति, मौसम, वाहन पर लोड और ड्राइविंग स्टाइल के कारण यह रेंज काफी कम हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी स्कूटर की आधिकारिक रेंज 120 किलोमीटर बताई गई है, तो सामान्य उपयोग में वह लगभग 75 से 90 किलोमीटर तक ही चल सकता है। इसलिए स्कूटर खरीदने से पहले वास्तविक उपयोगकर्ताओं के अनुभव पढ़ें, वीडियो रिव्यू देखें और संभव हो तो मौजूदा मालिकों से बात करें। 2. बैटरी वारंटी की शर्तें ध्यान से पढ़ें बैटरी किसी भी इलेक्ट्रिक स्कूटर का सबसे महंगा हिस्सा होती है। कई कंपनियां 3 से 5 वर्ष तक की वारंटी देती हैं, लेकिन हर वारंटी की अपनी अलग शर्तें होती हैं। खरीदने से पहले यह जरूर जान लें कि किन परिस्थितियों में बैटरी मुफ्त बदली जाएगी और किन मामलों में वारंटी लागू नहीं होगी। इससे भविष्य में होने वाले बड़े खर्च से बचा जा सकता है। 3. घर पर चार्जिंग की सुविधा पहले जांच लें इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके घर या अपार्टमेंट में सुरक्षित चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है। पुराने मकानों या कुछ सोसायटी में बिजली की वायरिंग, लोड क्षमता या चार्जिंग की अनुमति से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। यदि सही चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध नहीं होगा, तो रोजाना स्कूटर चार्ज करना मुश्किल हो सकता है। फ्लैट में रहने वाले लोगों को सोसायटी के नियम भी पहले से जान लेने चाहिए। 4. नजदीकी सर्विस सेंटर की उपलब्धता जरूर देखें इलेक्ट्रिक स्कूटर की मरम्मत हर सामान्य मैकेनिक नहीं कर सकता। इसके लिए कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर की जरूरत होती है। यदि सर्विस सेंटर आपके घर से काफी दूर है, तो छोटी-सी तकनीकी खराबी में भी समय और अतिरिक्त खर्च दोनों बढ़ सकते हैं। खरीदारी से पहले कंपनी की वेबसाइट या डीलर से अपने शहर के सर्विस नेटवर्क की पूरी जानकारी जरूर लें। 5. कंपनी और उसके मोबाइल ऐप की विश्वसनीयता जांचें आज के अधिकांश इलेक्ट्रिक स्कूटर मोबाइल ऐप से जुड़े होते हैं। इन ऐप्स के जरिए वाहन की लोकेशन, बैटरी स्टेटस, लॉक- अनलॉक, डायग्नोस्टिक्स और कई स्मार्ट फीचर्स का उपयोग किया जाता है। यदि भविष्य में कंपनी ऐप का सपोर्ट बंद कर दे या नियमित अपडेट न दे, तो कई स्मार्ट सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए यह भी देखें कि कंपनी कितने समय से बाजार में मौजूद है, उसकी वित्तीय स्थिति कैसी है, सर्विस नेटवर्क कितना मजबूत है और ऐप को नियमित अपडेट मिलते हैं या नहीं। सिर्फ रेंज नहीं, पूरी तस्वीर देखें इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना एक लंबी अवधि का निवेश है। ऐसे में केवल अधिक रेंज या कम कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। अगर आप रेंज के साथ बैटरी की गुणवत्ता, वारंटी, चार्जिंग सुविधा, सर्विस नेटवर्क और कंपनी की विश्वसनीयता जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखेंगे, तो भविष्य में होने वाली परेशानियों और अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला न केवल आपके पैसे बचाएगा बल्कि बेहतर ओनरशिप अनुभव भी देगा।  

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पुरानी गाड़ियों की हेडलाइट पर क्यों लगाई जाती थी काली पट्टी? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

आज की आधुनिक कारों और ट्रकों में एडवांस LED और प्रोजेक्टर हेडलाइट्स देखने को मिलती हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब सड़कों पर चलने वाले कई ट्रकों, बसों और कारों की हेडलाइट पर काली पट्टी लगाई जाती थी। नई पीढ़ी के लिए यह सिर्फ एक अजीब डिजाइन लग सकता है, लेकिन इसके पीछे सड़क सुरक्षा, तकनीकी सीमाएं और ऐतिहासिक कारण जुड़े हुए थे। तेज रोशनी से बचाने के लिए अपनाया जाता था यह तरीका पहले के दौर में वाहनों में आधुनिक हेडलाइट तकनीक उपलब्ध नहीं थी। अधिकांश गाड़ियों में साधारण बल्ब आधारित हेडलाइट्स लगी होती थीं, जिनमें रोशनी को नियंत्रित करने के लिए बेहतर फोकसिंग सिस्टम नहीं होता था। ऐसे में हाई बीम की तेज रोशनी सामने से आने वाले वाहन चालक की आंखों में पड़कर दुर्घटना का कारण बन सकती थी। इसी समस्या से बचने के लिए कई ड्राइवर हेडलाइट के ऊपरी हिस्से पर काली पट्टी या काला रंग लगा देते थे। इससे रोशनी का कुछ हिस्सा अवरुद्ध हो जाता था और प्रकाश सड़क पर अधिक केंद्रित रहता था, जिससे सामने वाले वाहन चालक को कम ग्लेयर महसूस होता था। द्वितीय विश्व युद्ध से भी जुड़ा है इसका इतिहास हेडलाइट पर काली पट्टी लगाने का चलन केवल आम वाहनों तक सीमित नहीं था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई देशों की सैन्य गाड़ियों में भी हेडलाइट्स को आंशिक रूप से ढंका जाता था। इसका उद्देश्य दुश्मन को वाहन की सटीक स्थिति और दिशा का अंदाजा लगाने से रोकना था। रात में सीमित रोशनी के साथ वाहन चलाना उस समय सैन्य रणनीति का हिस्सा माना जाता था। इसलिए हेडलाइट की चमक को नियंत्रित करना आवश्यक समझा जाता था। भारतीय ट्रक ड्राइवरों का लोकप्रिय जुगाड़ भारत में 1970 से 1990 के दशक के बीच ट्रक और बस चालकों के बीच यह तरीका काफी लोकप्रिय था। कई ड्राइवर अपने अनुभव के आधार पर हेडलाइट पर तिरछी काली पट्टी लगाते थे। उनका मानना था कि इससे सामने वाले वाहन चालक को कम चकाचौंध होती है और रात के समय दुर्घटनाओं की आशंका घट जाती है। दिलचस्प बात यह है कि यह किसी सरकारी नियम या कानून का हिस्सा नहीं था, बल्कि पूरी तरह ड्राइवरों के अनुभव और व्यवहारिक समझ पर आधारित एक देसी जुगाड़ था। अब क्यों नहीं दिखाई देती काली पट्टी? समय के साथ वाहन तकनीक में बड़ा बदलाव आया है। आज की कारों और ट्रकों में लो बीम और हाई बीम सिस्टम अलग-अलग तरीके से काम करते हैं। LED, प्रोजेक्टर और मैट्रिक्स हेडलाइट्स रोशनी को अधिक सटीक दिशा में भेजती हैं। कई आधुनिक वाहनों में ऑटोमैटिक हाई-बीम कंट्रोल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आज के दौर में हेडलाइट पर काली पट्टी लगाने से चालक की अपनी विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है, इसलिए इसकी जरूरत लगभग खत्म हो चुकी है। तकनीक ने बदल दी पुरानी परंपरा जिस समस्या का समाधान कभी ड्राइवर काली पट्टी लगाकर करते थे, आज वही काम आधुनिक हेडलाइट तकनीक आसानी से कर रही है। हालांकि पुराने ट्रकों और बसों की तस्वीरों में दिखाई देने वाली यह काली पट्टी आज भी ऑटोमोबाइल इतिहास की एक दिलचस्प याद के रूप में देखी जाती है।  

surbhi जून 24, 2026 0
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कार में हमेशा रखें ये 5 जरूरी चीजें, इमरजेंसी में आएंगी बेहद काम

नई दिल्ली: सड़क पर सफर के दौरान कब कौन-सी समस्या सामने आ जाए, इसका अंदाजा पहले से नहीं लगाया जा सकता। कई बार अचानक कार की बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है, रात के समय गाड़ी खराब हो जाती है या किसी छोटी दुर्घटना में तुरंत मदद की जरूरत पड़ जाती है। ऐसे समय में अगर कार में कुछ जरूरी सामान पहले से मौजूद हो, तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है। एक अनुभवी कार सेल्समैन के अनुसार, हर ड्राइवर को अपनी कार में कम से कम पांच जरूरी चीजें हमेशा रखनी चाहिए। ये सामान न सिर्फ इमरजेंसी में मदद करते हैं, बल्कि आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं। 1. जंप लीड्स या पोर्टेबल जंप पैक अगर कार की बैटरी अचानक बैठ जाए तो जंप लीड्स काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि, इसके लिए दूसरी कार की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में पोर्टेबल जंप पैक बेहतर विकल्प माना जाता है। यह छोटा और आसानी से साथ रखने योग्य उपकरण है, जिससे बिना किसी दूसरी गाड़ी की मदद के कार को दोबारा स्टार्ट किया जा सकता है। 2. टॉर्च, मोबाइल फ्लैशलाइट पर न करें पूरी तरह भरोसा रात के समय या कम रोशनी वाले इलाके में कार खराब होने पर टॉर्च बेहद काम आती है। मोबाइल की बैटरी सीमित होती है, इसलिए उस पर पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं माना जाता। बैटरी से चलने वाली एक अच्छी टॉर्च ज्यादा रोशनी देती है और लंबे समय तक उपयोग में लाई जा सकती है। 3. पावर बैंक रखें हमेशा चार्ज इमरजेंसी की स्थिति में मोबाइल फोन ही सबसे बड़ा सहारा होता है। मदद के लिए कॉल करना हो, लोकेशन शेयर करनी हो या जरूरी जानकारी हासिल करनी हो, फोन का चार्ज रहना बेहद जरूरी है। ऐसे में एक अच्छी क्षमता वाला पावर बैंक आपकी बड़ी मदद कर सकता है। 4. फर्स्ट एड किट सबसे जरूरी सुरक्षा उपकरण छोटी-मोटी चोट या दुर्घटना की स्थिति में फर्स्ट एड किट तुरंत राहत प्रदान करती है। इसमें बैंडेज, मेडिकल टेप, एंटीसेप्टिक, ग्लव्स और अन्य जरूरी सामान मौजूद होते हैं। कई कार कंपनियां यह किट पहले से उपलब्ध कराती हैं, लेकिन समय-समय पर इसकी जांच करते रहना भी जरूरी है। 5. हाई-विजिबिलिटी वेस्ट और वार्निंग ट्रायंगल हालांकि भारत में इन्हें रखना अनिवार्य नहीं है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद उपयोगी साबित होते हैं। यदि सड़क पर आपकी कार खराब हो जाए तो वार्निंग ट्रायंगल अन्य वाहन चालकों को पहले से सतर्क करता है। वहीं हाई-विजिबिलिटी वेस्ट पहनने से अंधेरे या खराब मौसम में आपकी मौजूदगी आसानी से दिखाई देती है। सुरक्षित सफर के लिए छोटी तैयारी, बड़ा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी-सी तैयारी आपको किसी भी आपात स्थिति में बड़ी परेशानी से बचा सकती है। इसलिए अपनी कार में इन जरूरी चीजों को हमेशा रखें और समय-समय पर उनकी स्थिति की जांच करते रहें।  

surbhi जून 18, 2026 0
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