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Masik Krishna Janmashtami 2026 Guide

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026: जानें क्या करें और क्या नहीं

surbhi मई 8, 2026 0
Devotees worshipping Lord Krishna with flowers, tulsi and lamps on Masik Krishna Janmashtami
Masik Krishna Janmashtami 2026 Rituals

Masik Krishna Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। ज्येष्ठ माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष 9 मई को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से भगवान Krishna की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है।

मान्यता है कि इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करने से शुभ फल मिलते हैं, जबकि छोटी-छोटी गलतियां पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करना शुभ माना जाता है और किन बातों से बचना चाहिए।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करें?

भगवान कृष्ण को पीले वस्त्र पहनाएं

भगवान Krishna को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। पूजा के दौरान उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें और मुकुट में मोरपंख जरूर लगाएं। इससे पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।

भोग में तुलसी दल जरूर रखें

धार्मिक मान्यता के अनुसार बिना तुलसी के भगवान कृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए माखन-मिश्री, फल या अन्य प्रसाद में तुलसी दल अवश्य रखें।

मंत्र जाप और भजन करें

इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही भजन-कीर्तन और Bhagavad Gita का पाठ करने से मन को शांति मिलती है।

दान-पुण्य करें

जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

गौ सेवा करें

भगवान कृष्ण को गोपाल कहा जाता है। इस दिन गाय को हरा चारा, गुड़ या रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। इसे विशेष पुण्यदायी कार्य माना गया है।

मध्यरात्रि में करें पूजा

भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए रात 12 बजे विशेष आरती और पूजा का महत्व माना जाता है। इस समय घंटी, शंख और भजन के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या न करें?

तामसिक भोजन से बचें

इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। घर का वातावरण सात्विक और शांत रखना शुभ माना जाता है।

अन्न और चावल का सेवन न करें

यदि आप व्रत कर रहे हैं तो चावल और सामान्य अन्न से परहेज करें। फलाहार में साबूदाना, कुट्टू का आटा और फल ग्रहण किए जा सकते हैं।

तुलसी के पत्ते न तोड़ें

जन्माष्टमी के दिन तुलसी तोड़ना अशुभ माना जाता है। पूजा के लिए आवश्यक तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

काले कपड़े पहनने से बचें

पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ नहीं माना जाता। पीले, सफेद या लाल रंग के कपड़े पहनना बेहतर माना गया है।

क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहें

व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन की शुद्धता का भी प्रतीक माना जाता है। इस दिन झूठ बोलने, किसी की निंदा करने और क्रोध करने से बचना चाहिए।

दिन में ज्यादा न सोएं

धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत वाले दिन आलस्य नहीं करना चाहिए। समय को भजन, ध्यान और धार्मिक पाठ में लगाना अधिक शुभ माना जाता है।

क्या है धार्मिक मान्यता?

मान्यता है कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने और श्रद्धा से पूजा करने से भगवान Krishna भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। दांपत्य जीवन में सुख, संतान सुख और मानसिक शांति के लिए भी यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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ज्येष्ठ में बनेगा 4 एकादशी का महासंयोग, जानें कब रखें अपरा से निर्जला तक के व्रत

अधिक मास के कारण इस बार खास है ज्येष्ठ महीना वैदिक पंचांग के अनुसार साल 2026 में अधिक मास पड़ने की वजह से दो ज्येष्ठ माह का संयोग बन रहा है। सनातन धर्म में अधिक मास को बेहद पुण्यदायी माना जाता है। इस विशेष संयोग के चलते इस बार भक्तों को एक नहीं बल्कि चार प्रमुख एकादशी व्रत करने का अवसर मिलेगा। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। 17 मई से अधिक मास की शुरुआत होगी और इसी दौरान अपरा, पद्मिनी, परमा और निर्जला एकादशी के व्रत किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। ज्येष्ठ माह में कब-कब पड़ेगी एकादशी? इस बार ज्येष्ठ और अधिक ज्येष्ठ मास के दौरान कुल चार एकादशी व्रत पड़ रहे हैं। इनमें अपरा एकादशी, पद्मिनी एकादशी, परमा एकादशी और निर्जला एकादशी शामिल हैं। अपरा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026 को रखा जाएगा। एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। पद्मिनी एकादशी 2026: दुर्लभ व्रत का महत्व पद्मिनी एकादशी 27 मई 2026 को मनाई जाएगी। यह व्रत अधिक मास में आने वाली विशेष एकादशी मानी जाती है। तिथि प्रारंभ: 26 मई सुबह 5:10 बजे तिथि समाप्त: 27 मई सुबह 6:21 बजे पारण समय: सुबह 5:25 बजे से 7:56 बजे तक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। परमा एकादशी 2026: कब रखा जाएगा व्रत? परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। तिथि प्रारंभ: 11 जून रात 12:57 बजे तिथि समाप्त: 11 जून रात 10:36 बजे पारण समय: सुबह 5:23 बजे से 8:10 बजे तक धर्म ग्रंथों में परमा एकादशी को मोक्षदायिनी और विशेष पुण्य देने वाली एकादशी बताया गया है। निर्जला एकादशी 2026: साल की सबसे कठिन एकादशी निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को पड़ेगी। इसे सबसे कठिन लेकिन सबसे फलदायी एकादशी माना जाता है क्योंकि इस व्रत में जल ग्रहण भी नहीं किया जाता। तिथि प्रारंभ: 24 जून शाम 6:12 बजे तिथि समाप्त: 25 जून रात 8:09 बजे पारण समय: 26 जून सुबह 5:25 बजे से 8:13 बजे तक मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता क्या कहती है? हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ दिनों में गिना जाता है। भक्त इस दिन उपवास रखकर पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से एकादशी व्रत करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।  

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