धर्म

Nag Panchami 2026: नागचंद्रेश्वर मंदिर के 24 घंटे दर्शन

Nag Panchami 2026: आधी रात खुला नागचंद्रेश्वर मंदिर, 24 घंटे होंगे दर्शन; सावन सोमवार पर उमड़ा आस्था का सैलाब

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में नाग पंचमी पर दर्शन करते श्रद्धालु
नाग पंचमी पर नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुले

उज्जैन, एजेंसियां। नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के विशेष संयोग पर उज्जैन में श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर है। महाकाल मंदिर के शिखर पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट 16 अगस्त की रात 12 बजे खोल दिए गए। साल में सिर्फ एक बार खुलने वाले इस मंदिर में श्रद्धालुओं को 24 घंटे तक भगवान नागचंद्रेश्वर के दुर्लभ दर्शन का अवसर मिलेगा।

 

आधी रात को विशेष पूजा के बाद खुले कपाट

 

परंपरा के अनुसार श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज ने रात करीब 11:30 बजे मंदिर के कपाट खोलने की पूजा शुरू की। मध्यरात्रि 12 बजे मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद भगवान नागचंद्रेश्वर का महाभिषेक, विशेष पूजन और आरती की गई। पूजा-अर्चना पूरी होने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू कर दिए गए।

कपाट खुलते ही मंदिर परिसर भगवान नागचंद्रेश्वर के जयकारों से गूंज उठा। दर्शन के लिए रविवार रात 11 बजे से ही श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी।

 

11वीं शताब्दी की है नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा

 

नागचंद्रेश्वर मंदिर महाकाल मंदिर के शिखर के तीसरे खंड में स्थित है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती सात फनों वाले नाग के नीचे विराजमान हैं। प्रतिमा में भगवान शिव के गले और भुजाओं में नाग लिपटे हुए दिखाई देते हैं। साथ ही भगवान गणेश, नंदी और सिंह की आकृतियां भी बनी हुई हैं।

इस दुर्लभ प्रतिमा को करीब 11वीं शताब्दी यानी 1050 ईस्वी का माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी।

 

सावन सोमवार और नाग पंचमी का विशेष संयोग

 

17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार भी है। इसी दिन बाबा महाकाल की पारंपरिक सवारी भी निकलेगी। ऐसे में श्रद्धालुओं को एक ही दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन और बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन का अवसर मिल रहा है।

इस विशेष धार्मिक संयोग को देखते हुए उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकासी मार्ग निर्धारित किए हैं।

 

दिन में तीन बार होगी पूजा

 

नाग पंचमी के अवसर पर भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की व्यवस्था की गई है। दोपहर 12 बजे शासन की ओर से पूजा होगी। शाम 7:30 बजे महाकाल की संध्या आरती के बाद पुजारी-पुरोहित भगवान नागचंद्रेश्वर की पूजा करेंगे। रात 12 बजे अखाड़े की ओर से पूजा के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।

 

श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजाम

 

भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग रूट बनाए हैं। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा जगह-जगह पेयजल, जूता स्टैंड और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। आज 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और इसकी पूर्णता की पट्टी ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन तथा पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से होकर गुजरेगी। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के कई हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण भी दिखाई देगा।   भारत में नहीं दिखाई देगा सूर्य ग्रहण   12 अगस्त का यह सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोग इसे आसमान में प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाएंगे। NASA के अनुसार ग्रहण का मुख्य दृश्य क्षेत्र उत्तरी अटलांटिक और उत्तरी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में रहेगा।   कहां दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?   पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से में देखा जा सकेगा। वहीं यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा। NASA के मुताबिक मैड्रिड में सूर्य का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा ढक जाएगा, जबकि रेक्याविक और स्पेन के कुछ क्षेत्रों में पूर्ण ग्रहण देखा जा सकेगा।   ग्रहण का वैज्ञानिक समय क्या है?   ग्रहण की वैश्विक खगोलीय घटना 12 अगस्त UTC को होती है। इसका अधिकतम चरण लगभग 17:45:51 UTC पर है, यानी भारतीय समय के अनुसार करीब रात 11:15 बजे। हालांकि स्थानीय जगह के अनुसार ग्रहण के शुरू और खत्म होने का समय अलग-अलग होगा। इसलिए किसी एक भारतीय समय को पूरे विश्व के लिए ग्रहण का स्थानीय समय मानना सही नहीं होगा।   ऑनलाइन कैसे देख सकते हैं सूर्य ग्रहण?   भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन इसे ऑनलाइन देखा जा सकता है। NASA इस पूर्ण सूर्य ग्रहण की लाइव कवरेज उपलब्ध करा रहा है।   सूर्य ग्रहण देखते समय रखें ये सावधानियां   जहां आंशिक या पूर्ण ग्रहण दिखाई दे रहा हो, वहां आंशिक चरण के दौरान बिना उचित सुरक्षा के सीधे सूर्य को देखना आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है। NASA के अनुसार सुरक्षित सोलर-व्यूइंग ग्लास या प्रमाणित सोलर फिल्टर का इस्तेमाल करना चाहिए। साधारण धूप के चश्मे सूर्य ग्रहण देखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।   सूतक और धार्मिक मान्यताएं   सूर्य ग्रहण को लेकर सूतक और पूजा-पाठ से जुड़ी परंपराएं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में सूतक मानने को लेकर अलग-अलग पंचांग और परंपराओं में मतभेद हो सकते हैं। वैज्ञानिक रूप से सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को कुछ समय के लिए ढक देता है। इस साल 12 अगस्त का ग्रहण खगोलीय दृष्टि से बेहद खास है और पूर्णता की अधिकतम अवधि लगभग 2 मिनट 18 सेकंड तक रह सकती है।

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दूल्हा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल और भस्म आरती में श्रद्धालु
श्रावण के दूसरे सोमवार दूल्हा बने बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ी भक्तों की भीड़

उज्जैन, एजेंसियां। श्रावण मास के दूसरे सोमवार और प्रदोष के विशेष संयोग पर उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दूल्हा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा के दिव्य दर्शन के लिए देर रात से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं।   रात 1 बजे से लगने लगी भक्तों की कतार   भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालु रात करीब 1 बजे से ही कतारों में लगने लगे थे। श्रावण के दूसरे सोमवार के कारण मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ रही। भस्म आरती के दौरान ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश गुरु के मुताबिक, सोमवार को मंदिर के पट तड़के 2:30 बजे खोले गए। श्रावण मास में सामान्य दिनों की तुलना में मंदिर के कपाट जल्दी खोले जाते हैं।   वीर बाल भद्र के पूजन से शुरू हुई प्रक्रिया   परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीर बाल भद्र का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और नंदी का विधि-विधान से अभिषेक और पूजन संपन्न हुआ। हरि ॐ जल से अभिषेक के बाद पंचामृत समेत पंचाभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान को विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई और विधिवत स्नान कराया गया। इसके बाद भगवान महाकाल को भस्म स्नान कराया गया और भस्म आरती संपन्न हुई।   दूल्हा स्वरूप में दिए दिव्य दर्शन   भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत मुकुट, आभूषण और दिव्य वस्त्र धारण कराए गए। दूल्हा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। हजारों श्रद्धालुओं ने चलित भस्म आरती के माध्यम से भी बाबा महाकाल के दर्शन किए। मंदिर परिसर में पूरे समय भक्तों का उत्साह और ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारे सुनाई देते रहे।   प्रदोष के संयोग पर सिर्फ फलाहार का भोग   श्रावण के दूसरे सोमवार और प्रदोष के विशेष संयोग के चलते भगवान महाकाल को केवल फलाहार का भोग अर्पित किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान भी भक्तों के साथ उपवास रखते हैं। बताया गया कि देर शाम नगर भ्रमण से मंदिर लौटने के बाद भगवान महाकाल को संपूर्ण भोग अर्पित किया जाएगा। इस विशेष पर्व को लेकर मंदिर में दर्शन और पूजन की विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।

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