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सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचीं प्रियंका चोपड़ा, ‘वाराणसी’ की शूटिंग के बीच लिया बप्पा का आशीर्वाद

abhishek singh अगस्त 12, 2026 0
Priyanka Chopra
Priyanka Chopra at Siddhivinayak Temple

मुंबई, एजेंसियां। ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा हाल ही में मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचीं और भगवान गणेश के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। प्रियंका अपनी बेटी मालती मैरी के साथ हैदराबाद में एसएस राजामौली की फिल्म ‘वाराणसी’ की शूटिंग पूरी करने के बाद मुंबई लौटी हैं। मंदिर में उनके साथ उनकी कजिन और अभिनेत्री मन्नारा चोपड़ा भी मौजूद थीं।

 

गुलाबी सूट में पहुंचीं प्रियंका

 

मंदिर दर्शन के दौरान प्रियंका गुलाबी रंग के पारंपरिक सूट और नीले दुपट्टे में नजर आईं। वह बिना चप्पलों के मंदिर पहुंचीं और पूजा-अर्चना कर भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया। उनकी एक झलक पाने के लिए मंदिर के बाहर प्रशंसकों की भीड़ भी जमा हो गई थी। प्रियंका के साथ कड़ी सुरक्षा भी मौजूद थी। अभिनेत्री ने बाहर मौजूद प्रशंसकों की ओर हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया।

 

‘वाराणसी’ की शूटिंग के बाद मुंबई लौटीं

 

प्रियंका इन दिनों एसएस राजामौली की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में वह मंदाकिनी की भूमिका निभा रही हैं। उनके साथ महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी भारतीय संस्कृति और रोमांच से जुड़ी एक बड़े पैमाने की एडवेंचर कहानी बताई जा रही है। ‘वाराणसी’ 7 अप्रैल 2027 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

 

हॉलीवुड प्रोजेक्ट्स पर भी नजर

 

प्रियंका चोपड़ा के पास हॉलीवुड के भी कई बड़े प्रोजेक्ट हैं। वह रसेल क्रो के साथ साइंस-फिक्शन एक्शन थ्रिलर ‘Bluefly’ में नजर आएंगी। इसके अलावा वह ‘Citadel’ सीजन 2 में नादिया के किरदार में वापसी करेंगी।

 

सिद्धिविनायक मंदिर में प्रियंका की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच उनकी यह यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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68 की उम्र में भी सनी देओल का जबरदस्त वर्कआउट, बोले- रोज करता हूं एक्सरसाइज

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल 68 साल की उम्र में भी अपनी फिटनेस को लेकर बेहद सक्रिय हैं। अपनी आगामी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के प्रचार के दौरान अभिनेता ने अपनी फिटनेस दिनचर्या के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह हर दिन वर्कआउट करते हैं और सुबह जल्दी उठकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं।   सुबह जल्दी उठकर करते हैं कार्डियो और वेट ट्रेनिंग   सनी देओल के मुताबिक उनकी फिटनेस दिनचर्या में कार्डियो और वेट ट्रेनिंग दोनों शामिल हैं। वह सूर्योदय से पहले उठने की कोशिश करते हैं और नियमित रूप से व्यायाम करते हैं। अभिनेता का कहना है कि लगातार वर्कआउट करने से उन्हें आज भी खुद को युवा और ऊर्जावान महसूस करने में मदद मिलती है। हाल ही में उनके वर्कआउट से जुड़ी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर सामने आई, जिसमें वह जिम सेशन के दौरान नजर आए।   सख्त डाइट का दावा नहीं, समोसा और देसी घी के पराठे भी पसंद   दिलचस्प बात यह है कि सनी देओल अपनी फिटनेस के बावजूद बहुत सख्त डाइट फॉलो करने का दावा नहीं करते। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि कभी-कभी वह समोसा और देसी घी के पराठे भी खा लेते हैं। यानी उनकी फिटनेस का राज केवल डाइट नहीं बल्कि नियमित शारीरिक गतिविधि भी है।   68 की उम्र में भी एक्शन भूमिकाओं के लिए तैयार   सनी देओल अभी भी बड़े पर्दे पर एक्शन और मुख्य भूमिकाएं निभा रहे हैं। उनकी आने वाली फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में वह प्रीति जिंटा, शबाना आजमी और अन्य कलाकारों के साथ नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज से पहले उनकी फिटनेस को लेकर चर्चा और बढ़ गई है।   सनी देओल का कहना है कि उम्र बढ़ने के बावजूद वह खुद को सीमित नहीं करना चाहते। नियमित वर्कआउट और सक्रिय जीवनशैली के जरिए वह आज भी अपने किरदारों के लिए जरूरी ऊर्जा और फिटनेस बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

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‘बंटवारा 1947’ की एडवांस बुकिंग में तेजी, रिलीज से पहले 7 हजार से ज्यादा टिकट बिके

मुंबई, एजेंसियां। सनी देओल, प्रीति जिंटा और शबाना आजमी की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली इस फिल्म ने पहले दिन की टिकट बिक्री में शुरुआती दौर में अच्छी रफ्तार पकड़ी है। ताजा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 7,074 टिकट बिक चुके हैं और 2,554 शो के लिए बुकिंग दर्ज की गई है।   पहले दिन कितनी हुई एडवांस बुकिंग?   NDTV Profit की 11 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ने पहले दिन के लिए ₹24.37 लाख का सकल एडवांस बुकिंग कलेक्शन दर्ज किया था। इसमें 7,074 टिकटों की बिक्री शामिल थी। ब्लॉक सीटों को जोड़ने पर बुकिंग वैल्यू करीब ₹89.75 लाख बताई गई।   इससे पहले शाम 4 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों में करीब 3,600 टिकट बिकने और ₹9.12 लाख की सकल बुकिंग की जानकारी सामने आई थी। यानी कुछ ही घंटों में टिकट बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली।   दिल्ली और महाराष्ट्र में अच्छी शुरुआत   एडवांस बुकिंग में दिल्ली-NCR और महाराष्ट्र शुरुआती दौर में प्रमुख बाजारों में रहे हैं। राजस्थान और उत्तराखंड से भी फिल्म को शुरुआती प्रतिक्रिया मिली है। हालांकि, फिल्म की स्क्रीन संख्या और शोकेसिंग में बदलाव होने के कारण शुरुआती आंकड़े अंतिम तस्वीर नहीं बताते।   ‘अवारापन 2’ से सीधा मुकाबला   ‘बंटवारा 1947’ का बॉक्स ऑफिस पर ‘अवारापन 2’ से सीधा मुकाबला है। ताजा ट्रेड रिपोर्टों में ‘अवारापन 2’ की एडवांस बुकिंग फिलहाल सनी देओल की फिल्म से आगे बताई गई है। बॉलीवुड हंगामा के अनुसार, ‘अवारापन 2’ ने करीब 68,000 टिकट, जबकि ‘बंटवारा 1947’ ने लगभग 37,600 टिकट बेचे हैं—हालांकि ये आंकड़े अलग-अलग समय और ट्रैकिंग आधार पर हैं।   14 अगस्त को रिलीज होगी फिल्म   राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी ‘बंटवारा 1947’ का निर्माण आमिर खान प्रोडक्शंस ने किया है। फिल्म में सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा, शबाना आजमी, अली फजल और करण देओल अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

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‘हैवान’ का टीजर आज होगा रिलीज, अक्षय कुमार और सैफ अली खान के खतरनाक अंदाज ने बढ़ाई उत्सुकता

मुंबई, एजेंसियां। अक्षय कुमार और सैफ अली खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘हैवान’ को लेकर दर्शकों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी इस फिल्म का बहुप्रतीक्षित टीजर आज, 12 अगस्त 2026 को रिलीज किया जाएगा। मेकर्स ने नए पोस्टर जारी कर टीजर रिलीज को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है।   आज सामने आएगा फिल्म का टीजर   मेकर्स ने टीजर से पहले फिल्म के नए पोस्टर भी जारी किए हैं, जिनमें अक्षय कुमार और सैफ अली खान के किरदारों का अलग-अलग और इंटेंस अंदाज देखने को मिल रहा है।   अक्षय-सैफ के बीच दिखेगा जबरदस्त टकराव   ‘हैवान’ में अक्षय कुमार और सैफ अली खान करीब 17 साल बाद फिर एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। फिल्म में दोनों के किरदारों के बीच टकराव कहानी का अहम हिस्सा बताया जा रहा है।   रिपोर्टों के मुताबिक, सैफ अली खान एक दृष्टिबाधित मार्शल आर्टिस्ट का किरदार निभा रहे हैं, जबकि अक्षय कुमार का किरदार बेहद खतरनाक और नकारात्मक शेड वाला बताया जा रहा है।   ‘ओप्पम’ का आधिकारिक रीमेक है ‘हैवान’   ‘हैवान’ का निर्देशन प्रियदर्शन कर रहे हैं और यह उनकी ही 2016 में आई मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का आधिकारिक रीमेक है। फिल्म में अक्षय और सैफ के अलावा बोमन ईरानी, सैयामी खेर और श्रिया पिलगांवकर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।   फिल्म को 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना है। अब आज आने वाले टीजर से यह साफ होने की उम्मीद है कि प्रियदर्शन ने इस कहानी को हिंदी दर्शकों के लिए किस तरह पेश किया है।

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