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करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, अभिनेत्री ने बेटे को दिया जन्म

anjali kumari जुलाई 30, 2026 0
Karishma Tanna Baby Boy
Karishma Tanna Baby Boy

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेत्री Karishma Tanna और उनके पति Varun Bangera के घर खुशियों ने दस्तक दी है। करिश्मा तन्ना ने गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) के शुभ अवसर पर एक बेटे को जन्म दिया। इस खुशखबरी को कपल ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद फिल्म और टीवी जगत से उन्हें बधाइयों का तांता लग गया।

 

सोशल मीडिया पोस्ट से दी जानकारी

 

करिश्मा और वरुण ने अपने आधिकारिक पोस्ट में नवजात के आगमन की जानकारी देते हुए लिखा, "It's a Boy! Our greatest blessing is here." पोस्ट में उन्होंने अपने बेटे के जन्म की तारीख 29 जुलाई 2026 भी साझा की।

 

सेलेब्स ने दी शुभकामनाएं

 

करिश्मा की पोस्ट पर स्मृति ईरानी, सोनू सूद, दिया मिर्जा, भारती सिंह, राहुल वैद्य, रकुल प्रीत सिंह समेत कई कलाकारों ने उन्हें माता-पिता बनने की बधाई दी। फैंस ने भी सोशल मीडिया पर कपल को शुभकामनाएं दीं।

 

2022 में हुई थी शादी

 

करिश्मा तन्ना और वरुण बंगेरा ने फरवरी 2022 में शादी की थी। इस साल अप्रैल में दोनों ने अपनी पहली प्रेग्नेंसी की घोषणा की थी और अब बेटे के जन्म के साथ उनके परिवार में एक नया सदस्य जुड़ गया है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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यश के 'रावण' लुक की तारीफ, लेकिन 'रामायण' में हनुमान की झलक न मिलने से फैंस में सवाल

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता यश की आगामी फिल्म 'रामायण: पार्ट वन' में उनके रावण लुक की जमकर तारीफ हो रही है। फिल्म के टीजर और सामने आई झलकियों में यश का खतरनाक और शक्तिशाली अंदाज दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है। हालांकि, फिल्म की पहली झलक में भगवान हनुमान के किरदार की मौजूदगी नजर नहीं आने से सोशल मीडिया पर फैंस के बीच चर्चा तेज हो गई है।   यश के रावण अवतार ने जीता ध्यान   फिल्म में यश लंकापति रावण की भूमिका निभा रहे हैं। उनके लंबे बाल, भारी कवच और रौद्र रूप को देखकर दर्शक उनकी तुलना पौराणिक किरदारों के बड़े चित्रणों से कर रहे हैं। यश ने अपने लुक के जरिए रावण के अहंकार, शक्ति और प्रभावशाली व्यक्तित्व को दिखाने की कोशिश की है।   हनुमान की झलक नहीं मिलने पर उठे सवाल   फिल्म के टीजर में भगवान राम, माता सीता और रावण के किरदारों पर ज्यादा फोकस किया गया है, लेकिन हनुमान जी की कोई स्पष्ट झलक नहीं दिखाई गई। इसके बाद सोशल मीडिया पर फैंस पूछ रहे हैं कि क्या हनुमान का किरदार फिल्म के अगले भाग में सामने आएगा या निर्माताओं ने इसे अभी गुप्त रखा है।   रणबीर कपूर निभा रहे हैं भगवान राम की भूमिका   'रामायण: पार्ट वन' में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे, जबकि साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी कर रहे हैं और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे बड़े बजट वाली पौराणिक फिल्मों में से एक माना जा रहा है।   दर्शकों को अगले अपडेट का इंतजार   फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। जहां यश के रावण अवतार की तारीफ हो रही है, वहीं हनुमान के किरदार को लेकर रहस्य ने फिल्म के प्रति उत्सुकता और बढ़ा दी है। निर्माताओं की ओर से इस किरदार से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

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मुंबई, एजेंसियां। भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित एक और मेगा फिल्म प्रोजेक्ट की घोषणा की गई है। 'श्रीमद्भागवतम्' को सात भागों (7 Parts) में बड़े पर्दे पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। निर्माताओं का दावा है कि यह भारतीय सिनेमा के सबसे महत्वाकांक्षी और बड़े बजट वाले प्रोजेक्ट्स में से एक होगा, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, अवतारों और श्रीमद्भागवत महापुराण की प्रमुख कथाओं को आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।   कई वर्षों में पूरी होगी पूरी सीरीज   निर्माताओं के अनुसार, सातों फिल्मों की कहानी क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। प्रत्येक भाग में श्रीमद्भागवत महापुराण के अलग-अलग प्रसंगों को विस्तार से दिखाया जाएगा। परियोजना की शूटिंग और निर्माण कई चरणों में किया जाएगा ताकि हर फिल्म को भव्य स्तर पर तैयार किया जा सके।   अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक का होगा इस्तेमाल   फिल्म सीरीज में अत्याधुनिक VFX, बड़े सेट, अंतरराष्ट्रीय तकनीकी टीम और व्यापक रिसर्च का उपयोग किया जाएगा। मेकर्स का कहना है कि उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाना भी है।   कलाकारों और रिलीज़ शेड्यूल का इंतजार   फिलहाल फिल्म की स्टार कास्ट और रिलीज़ डेट का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि, निर्माताओं ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही कलाकारों और पहले भाग की शूटिंग से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। इस घोषणा के बाद पौराणिक फिल्मों के प्रशंसकों में इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साह बढ़ गया है।

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Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah
'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' ने पूरे किए 18 साल, टीवी के सबसे लंबे चलने वाले कॉमेडी शो ने रचा इतिहास

मुंबई, एजेंसियां। लोकप्रिय टीवी कॉमेडी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' ने अपने प्रसारण के 18 साल पूरे कर लिए हैं। 28 जुलाई 2008 को शुरू हुआ यह शो आज भी भारतीय टेलीविजन के सबसे लंबे समय तक चलने वाले और सबसे लोकप्रिय पारिवारिक मनोरंजन कार्यक्रमों में शामिल है। 18 साल पूरे होने के मौके पर शो की पूरी टीम ने इस उपलब्धि का जश्न मनाया और दर्शकों का आभार व्यक्त किया।   जेठालाल और गोकुलधाम बने हर घर की पहचान   शो के प्रमुख कलाकार Dilip Joshi (जेठालाल), Amit Bhatt, Mandar Chandwadkar सहित कई कलाकारों ने वर्षों से अपने किरदारों के जरिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है। गोकुलधाम सोसायटी की कहानियां और सामाजिक संदेश शो की सबसे बड़ी पहचान बन चुके हैं।   निर्माता असित मोदी ने दर्शकों को दिया धन्यवाद   शो के निर्माता Asit Kumarr Modi ने कहा कि यह 18 साल का सफर दर्शकों के प्यार और विश्वास की वजह से संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि पूरी टीम आगे भी परिवार के साथ बैठकर देखे जाने लायक साफ-सुथरा मनोरंजन देने के लिए प्रतिबद्ध है।   टीवी इतिहास में दर्ज हुई खास उपलब्धि   लगातार 18 वर्षों तक प्रसारित होने के बाद 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' भारतीय टेलीविजन के सबसे सफल सिटकॉम में अपनी जगह बनाए हुए है। बदलते समय और कई कलाकारों के आने-जाने के बावजूद शो की लोकप्रियता बरकरार है और यह आज भी टीआरपी तथा दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बनाए हुए है।

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