भारतीय सर्राफा बाजार में हफ्ते के आखिरी दिन एक बार फिर हलचल देखने को मिली है। 11 अप्रैल 2026 को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में मामूली बढ़त दर्ज की गई है। ऐसे में अगर आप आज ज्वेलरी खरीदने या निवेश की योजना बना रहे हैं, तो ताजा रेट्स जानना बेहद जरूरी हो जाता है।
आज सोने की कीमतों में प्रति ग्राम करीब 1 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। 24 कैरेट सोना अब 15,236 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी और बदलते भू-राजनीतिक हालात ने सोने को सहारा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोना अब भी सुरक्षित निवेश बना हुआ है, हालांकि आगे कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है।
चांदी के दाम में भी आज तेजी देखने को मिली है। कीमत में 100 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी के साथ चांदी 2,60,100 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है।
औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर चांदी की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोना और चांदी दोनों में यह तेजी वैश्विक अनिश्चितताओं और निवेशकों के सुरक्षित विकल्प की ओर झुकाव को दर्शाती है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। वैश्विक संकेतों के मजबूत रहने और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरों के बीच सेंसेक्स 736.38 अंक की बढ़त के साथ 76,264.33 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 231 अंक चढ़कर 23,853.90 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में बाजार ने 1,000 से अधिक अंकों की शुरुआती बढ़त भी दर्ज की। रुपये में मजबूती, डॉलर के मुकाबले 47 पैसे की बढ़त विदेशी मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपये ने मजबूती दिखाई। सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 47 पैसे मजबूत होकर बंद हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को समर्थन मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबरों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 5 प्रतिशत गिरकर 82.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो पिछले तीन महीनों का निचला स्तर माना जा रहा है। इससे भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को राहत मिलने की उम्मीद है। एशियाई बाजारों में भी मजबूत तेजी वैश्विक बाजारों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक करीब 5 प्रतिशत तक उछले, जबकि हांगकांग और शंघाई के बाजार भी तेजी के साथ बंद हुए। घरेलू बाजार में ट्रेंट, मारुति, बजाज फिनसर्व और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। विशेषज्ञों की राय और बाजार की स्थिति बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान समझौते की संभावनाओं से वैश्विक जोखिम कम हुआ है, जिसका सीधा फायदा इक्विटी बाजारों को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत में महंगाई पर दबाव घटने और आर्थिक स्थिरता में सुधार की उम्मीद है। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने हाल ही में 1,082 करोड़ रुपये की बिकवाली की है, जो बाजार के लिए सतर्क संकेत माना जा रहा है। कुल मिलाकर, वैश्विक सकारात्मक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सत्र में तेजी दर्ज की गई और निवेशकों की धारणा मजबूत बनी रही।
नई दिल्ली: अक्सर कहा जाता है कि "नाम में क्या रखा है", लेकिन कई बार यही नाम किसी उत्पाद की सबसे बड़ी पहचान और बिक्री का आधार बन जाता है। यही वजह है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कुछ कंपनियों के ब्रांड नाम और उनके उत्पादों पर किए गए दावों को लेकर आपत्ति जताई है। खाद्य नियामक FSSAI ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के कथित उल्लंघन के आरोप में आठ कंपनियों को नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि इन कंपनियों के ब्रांड नाम, टैगलाइन या उत्पाद संबंधी दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। इन कंपनियों को भेजा गया नोटिस FSSAI की ओर से नोटिस पाने वाली कंपनियों में शामिल हैं— Emami Healthy & Tasty Health Aid TruVy The Healthy Factory Healthy Master Healthy Choice Plan B Newherbs नियामक का मानना है कि इन कंपनियों के कुछ नाम और दावे उत्पादों की वास्तविक प्रकृति से अलग संदेश दे सकते हैं। Emami Healthy & Tasty पर क्या है आपत्ति? कोलकाता स्थित इमामी समूह की एडिबल ऑयल यूनिट Emami Healthy & Tasty के नाम पर FSSAI ने सवाल उठाया है। प्राधिकरण का कहना है कि "Healthy & Tasty" जैसा ट्रेड नाम उपभोक्ताओं में यह धारणा बना सकता है कि उत्पाद स्वाभाविक रूप से स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, जबकि ऐसे दावों को नियमों के अनुरूप साबित करना आवश्यक होता है। 'Plant Based Vegan' दावे पर Plan B को नोटिस Plan B अपने उत्पादों को "Plant Based Vegan" के रूप में प्रचारित करती है। FSSAI के अनुसार, कंपनी ने आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना अपने उत्पादों को वीगन के रूप में पेश किया, जिससे ग्राहकों के बीच गलत धारणा बन सकती है। The Healthy Factory के उत्पाद भी जांच के दायरे में The Healthy Factory के— Zero Maida Whole Wheat Bread Zero Maida Pizza Base जैसे उत्पादों पर किए गए दावों को भी FSSAI ने जांच के दायरे में रखा है। नियामक का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। TruVy और Newherbs पर भी सवाल TruVy के— Healthy Mix Veggie Chips Healthy Ragi Chips Healthy Moong Dal Chips जैसे उत्पादों में कई अन्य सामग्री शामिल होने के बावजूद "Healthy" शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई है। वहीं Newherbs की "True Vitamin" श्रृंखला को लेकर FSSAI का कहना है कि यह नाम उसके निर्धारित मानकों में परिभाषित नहीं है और इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। टैगलाइन और ब्रांडिंग पर भी आपत्ति FSSAI ने Healthy Master की टैगलाइन "Vision to Serve Healthy", Healthy Choice के "Healthy Food for Healthy Life Poha" और Health Aid के ब्रांड नाम पर भी सवाल उठाए हैं। प्राधिकरण का मानना है कि केवल नाम या टैगलाइन देखकर ग्राहक उत्पाद को अधिक स्वास्थ्यवर्धक मान सकते हैं, जबकि वास्तविक पोषण मूल्य अलग हो सकता है। उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद को खरीदते समय केवल उसके नाम या पैकेजिंग पर भरोसा करने के बजाय— न्यूट्रिशन लेबल पढ़ें, सामग्री (Ingredients) की सूची देखें, और प्रमाणित दावों पर ही भरोसा करें।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। अमेरिका द्वारा ईरान के कई ठिकानों पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई और बाजार दबाव में आ गया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,100 के स्तर के नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 73,983.18 अंक पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 73,615.99 अंक पर खुला। सुबह करीब 9:21 बजे सेंसेक्स 289.38 अंक यानी 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 73,693.80 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 भी 75.30 अंक यानी 0.32 फीसदी टूटकर 23,139.65 के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान रुपया भी दबाव में दिखा और डॉलर के मुकाबले 35 पैसे कमजोर होकर 95.60 पर खुला। आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 गिरावट के साथ खुले। सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: एचसीएल टेक इन्फोसिस टेक महिंद्रा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) महिंद्रा एंड महिंद्रा टाइटन टाटा स्टील एशियन पेंट्स ट्रेंट एचसीएल टेक का शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 2.96 फीसदी तक टूट गया। इन शेयरों में रही तेजी बाजार की कमजोरी के बीच कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली। तेजी वाले प्रमुख शेयर: पावरग्रिड आईसीआईसीआई बैंक सन फार्मा भारती एयरटेल ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.61 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.62 फीसदी फिसला। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 2 फीसदी से अधिक की कमजोरी रही। ऑटो, केमिकल और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टरों में भी गिरावट देखी गई। हालांकि, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में मजबूती बनी रही। क्यों टूटा शेयर बाजार? अमेरिका के ईरान पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड लगभग 1.72 फीसदी बढ़कर 94.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 2 फीसदी की तेजी के साथ 91.82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और बाजार में बिकवाली बढ़ गई।