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Waaree Shares Gain on ₹3,900 Cr Capex

Waaree Energies में तेजी: ₹3,900 करोड़ के कैपेक्स प्लान और सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बढ़ाने का असर

surbhi मार्च 25, 2026 0
Waaree Energies stock rises after ₹3900 crore capex plan for solar glass manufacturing expansion
Waaree Energies Capex Boost Share Rally

सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Waaree Energies के शेयरों में बुधवार को शुरुआती कारोबार में मजबूती देखने को मिली। कंपनी के बोर्ड द्वारा ₹3,900 करोड़ के बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को मंजूरी देने और सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बढ़ाने के फैसले के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

BSE पर सुबह 09:18 बजे कंपनी का शेयर ₹3,140.25 पर ट्रेड कर रहा था, जो ₹54.40 या 1.76% की बढ़त को दर्शाता है। इससे पहले यह ₹3,085.85 पर बंद हुआ था।

ग्लास मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा निवेश

कंपनी के बोर्ड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Waaree Green Glass के जरिए 2,500 टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता वाले ग्लास मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए ₹3,900 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है।

यह निवेश कर्ज (debt) और आंतरिक संसाधनों (internal accruals) के मिश्रण से किया जाएगा। यह कदम कंपनी की वैल्यू चेन को मजबूत करने और सोलर सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बढ़ी

इसके साथ ही कंपनी ने अपनी एक अन्य सहायक इकाई Waaree Transpower में हिस्सेदारी 64.04% से बढ़ाकर 75.10% करने का फैसला किया है। इस कदम से कंपनी को संचालन पर अधिक नियंत्रण मिलेगा और भविष्य की रणनीतिक योजनाओं को गति मिलेगी।

शेयर का प्रदर्शन

कंपनी का शेयर 12 सितंबर 2025 को ₹3,864.40 के 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचा था, जबकि 7 अप्रैल 2025 को ₹1,808.65 के निचले स्तर को छुआ था। वर्तमान में यह अपने हाई से 20.15% नीचे, लेकिन लो से 70.62% ऊपर ट्रेड कर रहा है।

कंपनी का मार्केट कैप ₹88,761.67 करोड़ है, जो इसे रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की मजबूत कंपनियों में शामिल करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े निवेश और विस्तार योजनाएं कंपनी के दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को और मजबूत कर सकती हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Indian and Indonesian leaders during the BrahMos missile defence agreement announcement.
भारत-इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल समझौता, रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा क्षेत्र में बड़ा समझौता हुआ है। दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कदम को भारत के रक्षा निर्यात और दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में संपन्न हुआ। इंडोनेशिया खरीदेगा Astra मिसाइल भी समझौते के तहत इंडोनेशिया भारत में विकसित Astra एयर-टू-एयर मिसाइल का भी आयात करेगा। यह मिसाइल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई है। Astra एक Beyond Visual Range (BVR) मिसाइल है, जिसे लंबी दूरी से दुश्मन के अत्यधिक गतिशील लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। ब्रह्मोस की अतिरिक्त बैटरियां भी मिल सकती हैं रिपोर्ट के अनुसार, भारत भविष्य में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां भी उपलब्ध करा सकता है। माना जा रहा है कि हालिया सैन्य अभियानों में ब्रह्मोस और Astra जैसी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों के प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी विश्वसनीयता और मांग बढ़ी है। समुद्री सुरक्षा सहयोग पर भी बनी सहमति दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और समुद्री संरक्षा (Maritime Safety and Security) को लेकर भी एक व्यापक सहयोग ढांचा तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता विश्वास रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को नई मजबूती दे रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनाई है। स्वास्थ्य और औद्योगिक सहयोग भी होगा मजबूत प्रधानमंत्री ने कहा कि नए समझौतों के बाद भारत की उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती दवाएं इंडोनेशिया के नागरिकों तक अधिक आसानी से पहुंच सकेंगी। साथ ही, भारत इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण में भी सहयोग करेगा। क्रिटिकल मिनरल्स पर भी हुआ समझौता भारत और इंडोनेशिया ने स्टील सप्लाई चेन से जुड़े महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और तकनीकों पर भी समझौता किया है। इसका उद्देश्य वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। चुनाव तकनीक में भी सहयोग की संभावना सूत्रों के मुताबिक, भारत इंडोनेशिया के लिए वहां की आवश्यकताओं के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विकसित करने में भी सहयोग कर सकता है। इसे भारत की चुनाव प्रबंधन तकनीक पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास का संकेत माना जा रहा है।  

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ब्लू जेट हेल्थकेयर ने ₹800 करोड़ का QIP लॉन्च किया, ₹531.70 प्रति शेयर तय किया फ्लोर प्राइस

मुंबई, एजेंसियां। दवा निर्माण कंपनी ब्लू जेट हेल्थकेयर लिमिटेड ने पूंजी जुटाने के लिए क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) जारी करने की घोषणा की है। कंपनी के निदेशक मंडल ने इस इश्यू के लिए ₹531.70 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। कंपनी इस QIP के जरिए करीब ₹800 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है।    संस्थागत निवेशकों को जारी होंगे शेयर   कंपनी ने बताया कि QIP के तहत केवल योग्य संस्थागत निवेशकों को शेयर जारी किए जाएंगे। नियामकीय मंजूरी के अनुसार कंपनी फ्लोर प्राइस पर अधिकतम 5% तक की छूट भी दे सकती है।    विस्तार योजनाओं में होगा फंड का इस्तेमाल   ब्लू जेट हेल्थकेयर ने कहा कि जुटाई गई पूंजी का उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, अनुसंधान एवं विकास (R&D), कार्यशील पूंजी की जरूरतों और अन्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति और मजबूत करना है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां।  घरेलू सर्राफा बाजार में सोमवार को सोना और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव 832 रुपये घटकर 1,46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमत में 2,046 रुपये की कमी आई, जिसके बाद यह 2.32 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करती दिखी। लगातार बढ़ती कीमतों के बीच यह गिरावट खरीदारों के लिए कुछ राहत लेकर आई है।   सोना अब भी पिछले साल के मुकाबले काफी महंगा है हालांकि, पूरे वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सोना अब भी पिछले साल के मुकाबले काफी महंगा है। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब 12 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोना करीब 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब 1.46 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी भी वर्ष की शुरुआत में लगभग 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी और अब 2.32 लाख रुपये के आसपास बनी हुई है। इस दौरान सोने ने 29 जनवरी को 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड उच्च स्तर भी छुआ था।   विशेषज्ञों का कहना विशेषज्ञों का कहना है कि सोना खरीदते समय केवल बीआईएस हॉलमार्क वाला प्रमाणित आभूषण ही खरीदना चाहिए। साथ ही, खरीदारी से पहले उस दिन का बाजार भाव विश्वसनीय स्रोतों से जरूर जांच लेना चाहिए, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट सोने की कीमतों में अंतर होता है। चांदी खरीदने वालों के लिए भी सावधानी जरूरी है। असली चांदी की पहचान मैग्नेट टेस्ट, आइस टेस्ट, गंध और कपड़े से रगड़ने जैसे आसान तरीकों से की जा सकती है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच समझदारी से खरीदारी करना निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

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