नई दिल्ली, एजेंसियां। बारिश का मौसम और गर्मागर्म चाय के साथ कुरकुरे पकौड़ों का स्वाद हर किसी को पसंद आता है। रिमझिम बारिश के बीच परिवार के साथ शाम की चाय को और खास बनाने के लिए आप घर पर आसानी से 5 तरह के स्वादिष्ट और क्रिस्पी पकौड़े तैयार कर सकते हैं। इन्हें बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और ये बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आते हैं।
बारिश के मौसम में प्याज के पकौड़े सबसे लोकप्रिय स्नैक माने जाते हैं। पतले कटे प्याज में बेसन, अजवाइन, हरी मिर्च, धनिया, हल्दी और थोड़ा चावल का आटा मिलाकर बिना ज्यादा पानी के मिश्रण तैयार करें। इसे सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें। चाय के साथ इसका स्वाद लाजवाब लगता है।
पतले कटे आलू के स्लाइस को बेसन, जीरा, लाल मिर्च, हींग और नमक से बने गाढ़े घोल में डुबोकर डीप फ्राई करें। बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम ये पकौड़े पुदीने की चटनी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगते हैं।
अगर स्वाद के साथ सेहत भी चाहते हैं तो पालक के पकौड़े बेहतरीन विकल्प हैं। बारीक कटे पालक में बेसन, चावल का आटा, अमचूर, लाल मिर्च और नमक मिलाकर छोटे-छोटे पकौड़े तैयार करें। ये बाहर से क्रिस्पी और अंदर से मुलायम होते हैं।
उबले हुए कॉर्न, कद्दूकस किए हुए चीज, शिमला मिर्च, बेसन और मसालों से तैयार चीजी कॉर्न पकौड़े बच्चों को खूब पसंद आते हैं। तलने के बाद इनके अंदर पिघला हुआ चीज इनका स्वाद और बढ़ा देता है।
उबले आलू, मटर और मसालों की स्टफिंग को ब्रेड के बीच भरकर बेसन के घोल में डुबोएं और सुनहरा होने तक तलें। टोमैटो केचप या हरी चटनी के साथ परोसे गए ब्रेड पकौड़े मानसून की शाम को और भी खास बना देते हैं।
इन आसान और स्वादिष्ट रेसिपी के साथ आप बारिश के मौसम में घर बैठे रेस्टोरेंट जैसा स्वाद ले सकते हैं और परिवार के साथ चाय का आनंद दोगुना कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। बारिश का मौसम और गर्मागर्म चाय के साथ कुरकुरे पकौड़ों का स्वाद हर किसी को पसंद आता है। रिमझिम बारिश के बीच परिवार के साथ शाम की चाय को और खास बनाने के लिए आप घर पर आसानी से 5 तरह के स्वादिष्ट और क्रिस्पी पकौड़े तैयार कर सकते हैं। इन्हें बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और ये बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आते हैं। 1. एवरग्रीन प्याज के पकौड़े बारिश के मौसम में प्याज के पकौड़े सबसे लोकप्रिय स्नैक माने जाते हैं। पतले कटे प्याज में बेसन, अजवाइन, हरी मिर्च, धनिया, हल्दी और थोड़ा चावल का आटा मिलाकर बिना ज्यादा पानी के मिश्रण तैयार करें। इसे सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें। चाय के साथ इसका स्वाद लाजवाब लगता है। 2. स्पाइसी आलू के पकौड़े पतले कटे आलू के स्लाइस को बेसन, जीरा, लाल मिर्च, हींग और नमक से बने गाढ़े घोल में डुबोकर डीप फ्राई करें। बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम ये पकौड़े पुदीने की चटनी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगते हैं। 3. हेल्दी पालक के पकौड़े अगर स्वाद के साथ सेहत भी चाहते हैं तो पालक के पकौड़े बेहतरीन विकल्प हैं। बारीक कटे पालक में बेसन, चावल का आटा, अमचूर, लाल मिर्च और नमक मिलाकर छोटे-छोटे पकौड़े तैयार करें। ये बाहर से क्रिस्पी और अंदर से मुलायम होते हैं। 4. बच्चों के लिए चीजी कॉर्न पकौड़े उबले हुए कॉर्न, कद्दूकस किए हुए चीज, शिमला मिर्च, बेसन और मसालों से तैयार चीजी कॉर्न पकौड़े बच्चों को खूब पसंद आते हैं। तलने के बाद इनके अंदर पिघला हुआ चीज इनका स्वाद और बढ़ा देता है। 5. भरवां ब्रेड पकौड़े उबले आलू, मटर और मसालों की स्टफिंग को ब्रेड के बीच भरकर बेसन के घोल में डुबोएं और सुनहरा होने तक तलें। टोमैटो केचप या हरी चटनी के साथ परोसे गए ब्रेड पकौड़े मानसून की शाम को और भी खास बना देते हैं। इन आसान और स्वादिष्ट रेसिपी के साथ आप बारिश के मौसम में घर बैठे रेस्टोरेंट जैसा स्वाद ले सकते हैं और परिवार के साथ चाय का आनंद दोगुना कर सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रसोई में पूड़ी, कचौड़ी, पकौड़े और अन्य तली-भुनी चीजें अक्सर बनाई जाती हैं। ऐसे में कढ़ाई में काफी मात्रा में तेल बच जाता है। कई लोग इस तेल को फेंक देते हैं, जबकि कुछ बिना साफ किए बार-बार इस्तेमाल करते रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों ही तरीके सही नहीं हैं। यदि तेल केवल एक बार उपयोग हुआ है और अधिक जला नहीं है, तो उसे साफ कर सीमित मात्रा में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे पहले तेल को ठंडा होने दें पूड़ी या अन्य खाद्य पदार्थ तलने के तुरंत बाद तेल को छानने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। गर्म तेल को संभालना खतरनाक हो सकता है। तेल को सामान्य तापमान तक ठंडा होने दें ताकि उसमें मौजूद आटे, मसालों और जले हुए कण नीचे बैठ जाएं। यह तेल को साफ करने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। महीन छलनी या मलमल के कपड़े से छानें तेल पूरी तरह ठंडा होने के बाद उसे स्टील की महीन छलनी या साफ मलमल के कपड़े से छान लें। इससे आटे के छोटे कण, मसाले और जले हुए टुकड़े अलग हो जाते हैं। छना हुआ तेल अधिक साफ दिखाई देता है और उसका स्वाद भी बेहतर बना रहता है। यह तरीका तेल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करता है। रंग और गंध की जांच करना न भूलें तेल का दोबारा उपयोग करने से पहले उसकी गुणवत्ता जांचना जरूरी है। यदि तेल का रंग बहुत गहरा भूरा या काला हो गया है, उसमें तेज जली हुई गंध आ रही है या वह गर्म करने पर धुआं छोड़ रहा है, तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा तेल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। सही तरीके से करें स्टोर छाने हुए तेल को साफ और सूखे एयरटाइट कंटेनर में रखें। इसे नमी, धूप और अधिक गर्मी से दूर रखना चाहिए। उचित स्टोरेज से तेल लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है और उसकी गुणवत्ता बनी रहती है। दोबारा उपयोग करते समय रखें सावधानी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बचे हुए तेल का उपयोग हल्की फ्राइंग, सब्जी या तड़का लगाने जैसे कार्यों में किया जाए। एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से बचना चाहिए। साथ ही पुराने और नए तेल को मिलाकर उपयोग करना भी उचित नहीं माना जाता। स्वास्थ्य को दें प्राथमिकता रसोई में तेल की बचत करना अच्छी बात है, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता नहीं होना चाहिए। यदि तेल कई बार उपयोग हो चुका है या उसकी गुणवत्ता खराब हो गई है, तो उसे दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय सुरक्षित तरीके से नष्ट करना ही बेहतर विकल्प है। सही सावधानी अपनाकर आप तेल की बचत भी कर सकते हैं और परिवार की सेहत का भी ध्यान रख सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अगर आप रोज-रोज एक जैसे स्नैक्स खाकर बोर हो चुके हैं और कुछ हेल्दी व टेस्टी ट्राई करना चाहते हैं, तो मखाना कैरेमल पॉप्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। यह स्नैक बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। खास बात यह है कि इसमें स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखा गया है। मखाना कैरेमल पॉप्स हल्के मीठे स्वाद और जबरदस्त क्रंच के कारण तेजी से लोगों की पसंद बन रहे हैं। इसे घर पर बहुत कम समय और मेहनत में तैयार किया जा सकता है। शाम की चाय, मूवी टाइम या बच्चों की छोटी भूख मिटाने के लिए यह एक शानदार स्नैक माना जा रहा है। बनाने के लिए जरूरी सामग्री इस हेल्दी स्नैक को बनाने के लिए 2 कप मखाना, 2 बड़े चम्मच घी, 4 बड़े चम्मच गुड़ पाउडर या ब्राउन शुगर, 1 छोटा चम्मच शहद, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, एक चुटकी नमक और थोड़े कटे हुए बादाम या पिस्ता की जरूरत होगी। ऐसे बनाएं मखाना कैरेमल पॉप्स सबसे पहले एक पैन में घी गर्म करें और उसमें मखानों को धीमी आंच पर 5 से 7 मिनट तक भून लें। जब मखाने अच्छे से क्रिस्पी हो जाएं तो उन्हें अलग निकाल लें।इसके बाद उसी पैन में बचा हुआ घी डालें और उसमें गुड़ पाउडर या ब्राउन शुगर डालकर धीमी आंच पर पिघलाएं। जब मिश्रण कैरेमल जैसा बनने लगे तो उसमें शहद, इलायची पाउडर और नमक मिलाएं। अब भुने हुए मखानों को इस मिश्रण में डालकर अच्छी तरह मिलाएं ताकि हर मखाने पर कैरेमल की परत चढ़ जाए। चाहें तो ऊपर से ड्राई फ्रूट्स भी डाल सकते हैं। तैयार मखानों को बटर पेपर या प्लेट पर फैलाकर 5 मिनट तक ठंडा होने दें। ठंडा होते ही ये और ज्यादा क्रंची हो जाएंगे। इन्हें एयरटाइट कंटेनर में 4 से 5 दिन तक स्टोर किया जा सकता है।