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हरियाली तीज पर मेहमानों के लिए बनाएं 6 रिफ्रेशिंग ड्रिंक्स

हरियाली तीज पर मेहमानों को सर्व करें ये 6 ठंडी-ठंडी ड्रिंक्स, स्वाद के साथ मिलेगा रिफ्रेशिंग ट्विस्ट

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
हरियाली तीज पर मेहमानों के लिए तैयार की गई छह ठंडी देसी ड्रिंक्स
हरियाली तीज पार्टी के लिए 6 रिफ्रेशिंग देसी ड्रिंक्स

हरियाली तीज के मौके पर घर आने वाले मेहमानों के लिए अगर आप कुछ खास और रिफ्रेशिंग बनाना चाहती हैं, तो बाजार की पैकेज्ड ड्रिंक्स की जगह घर पर तैयार देसी पेय सर्व कर सकती हैं। तीज की पार्टी में केसर ठंडाई, गुलाब लस्सी, नींबू-पुदीना कूलर, आम पन्ना और जलजीरा जैसे ड्रिंक्स स्वाद के साथ मेहमानों को ठंडक भी देंगे।

 

शाही केसर ठंडाई

 

 

दूध, बादाम, काजू, सौंफ, इलायची और केसर से तैयार ठंडाई तीज के लिए शानदार विकल्प है। इसे पहले से बनाकर फ्रिज में ठंडा किया जा सकता है। सर्व करते समय ऊपर से केसर, पिस्ता और गुलाब की पंखुड़ियां डालें।

 

 

गुलाब लस्सी

 

 

ठंडे दही, दूध और गुलाब के शरबत से बनने वाली गुलाब लस्सी त्योहार के लिए आसान और स्वादिष्ट ड्रिंक है। इसे लंबे ग्लास में पिस्ते और गुलाब की पंखुड़ियों से सजाकर सर्व किया जा सकता है।

 

 

नींबू-पुदीना कूलर

 

 

नींबू, पुदीना, काला नमक, चीनी और बर्फ से कुछ ही मिनटों में तैयार होने वाला कूलर गर्म और उमस भरे मौसम में रिफ्रेशिंग विकल्प है। चाहें तो इसमें ठंडे पानी की जगह सोडा भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

 

 

खट्टा-मीठा आम पन्ना

 

 

कच्चे आम, भुना जीरा, काला नमक और पुदीने से तैयार आम पन्ना तीज के स्नैक्स के साथ भी खूब पसंद किया जा सकता है। इसका कॉन्संट्रेट पहले से तैयार करके फ्रिज में रखा जा सकता है।

 

 

मसालेदार जलजीरा

 

 

अगर मेहमानों को चटपटा स्वाद पसंद है तो जलजीरा जरूर बनाएं। पुदीना, सौंफ, भुना जीरा, काला नमक, चाट मसाला और नींबू से तैयार जलजीरा स्वादिष्ट होने के साथ पार्टी में देसी फ्लेवर भी जोड़ता है।

 

 

ठंडा केसर दूध

 

 

दूध में केसर और इलायची मिलाकर तैयार किया गया ठंडा केसर दूध भी तीज के लिए अच्छा विकल्प है। इसे ठंडा करके ऊपर से कटे हुए मेवे और केसर डालकर सर्व किया जा सकता है।

 

सजाने का आइडिया: ड्रिंक्स को खूबसूरत ग्लास में बर्फ, पुदीने की पत्तियों, गुलाब की पंखुड़ियों, नींबू स्लाइस और केसर से गार्निश करें। इससे आपकी तीज पार्टी की ड्रिंक्स टेबल और भी आकर्षक लगेगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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हरियाली तीज के मौके पर घर आने वाले मेहमानों के लिए अगर आप कुछ खास और रिफ्रेशिंग बनाना चाहती हैं, तो बाजार की पैकेज्ड ड्रिंक्स की जगह घर पर तैयार देसी पेय सर्व कर सकती हैं। तीज की पार्टी में केसर ठंडाई, गुलाब लस्सी, नींबू-पुदीना कूलर, आम पन्ना और जलजीरा जैसे ड्रिंक्स स्वाद के साथ मेहमानों को ठंडक भी देंगे।   शाही केसर ठंडाई     दूध, बादाम, काजू, सौंफ, इलायची और केसर से तैयार ठंडाई तीज के लिए शानदार विकल्प है। इसे पहले से बनाकर फ्रिज में ठंडा किया जा सकता है। सर्व करते समय ऊपर से केसर, पिस्ता और गुलाब की पंखुड़ियां डालें।     गुलाब लस्सी     ठंडे दही, दूध और गुलाब के शरबत से बनने वाली गुलाब लस्सी त्योहार के लिए आसान और स्वादिष्ट ड्रिंक है। इसे लंबे ग्लास में पिस्ते और गुलाब की पंखुड़ियों से सजाकर सर्व किया जा सकता है।     नींबू-पुदीना कूलर     नींबू, पुदीना, काला नमक, चीनी और बर्फ से कुछ ही मिनटों में तैयार होने वाला कूलर गर्म और उमस भरे मौसम में रिफ्रेशिंग विकल्प है। चाहें तो इसमें ठंडे पानी की जगह सोडा भी इस्तेमाल कर सकती हैं।     खट्टा-मीठा आम पन्ना     कच्चे आम, भुना जीरा, काला नमक और पुदीने से तैयार आम पन्ना तीज के स्नैक्स के साथ भी खूब पसंद किया जा सकता है। इसका कॉन्संट्रेट पहले से तैयार करके फ्रिज में रखा जा सकता है।     मसालेदार जलजीरा     अगर मेहमानों को चटपटा स्वाद पसंद है तो जलजीरा जरूर बनाएं। पुदीना, सौंफ, भुना जीरा, काला नमक, चाट मसाला और नींबू से तैयार जलजीरा स्वादिष्ट होने के साथ पार्टी में देसी फ्लेवर भी जोड़ता है।     ठंडा केसर दूध     दूध में केसर और इलायची मिलाकर तैयार किया गया ठंडा केसर दूध भी तीज के लिए अच्छा विकल्प है। इसे ठंडा करके ऊपर से कटे हुए मेवे और केसर डालकर सर्व किया जा सकता है।   सजाने का आइडिया: ड्रिंक्स को खूबसूरत ग्लास में बर्फ, पुदीने की पत्तियों, गुलाब की पंखुड़ियों, नींबू स्लाइस और केसर से गार्निश करें। इससे आपकी तीज पार्टी की ड्रिंक्स टेबल और भी आकर्षक लगेगी।

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नई दिल्ली: शाम की चाय के साथ गरमा-गरम, कुरकुरा समोसा मिल जाए तो बात ही अलग है। लेकिन घर पर समोसा बनाने का नाम आते ही आटा गूंथने, लोई बेलने और सही तिकोना आकार देने की मेहनत कई लोगों को पीछे हटा देती है। अगर आप भी इसी वजह से घर पर समोसा बनाने से बचते हैं, तो एक आसान तरीका आपके काम आ सकता है। फूड क्रिएटर इति बरनवाल ने ‘नो-रैप समोसा’ बनाने का तरीका शेयर किया है। इसमें न आटा गूंथने की जरूरत है और न ही समोसे की पारंपरिक परत बनाकर उसे आकार देने की। आलू-मटर की स्टफिंग तैयार करें, उसकी छोटी-छोटी बॉल्स बनाएं और खास मैदा मिश्रण की कोटिंग करके एयर फ्रायर में तैयार कर लें। इस तरीके की खासियत यह है कि इसे बनाने में करीब एक चम्मच तेल या थोड़ा-सा ऑयल स्प्रे इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे पहले तैयार करें चटपटा समोसा मसाला समोसे का स्वाद काफी हद तक उसके मसाले पर निर्भर करता है। इसके लिए एक पैन में 1 छोटा चम्मच सौंफ, 2 छोटे चम्मच साबुत धनिया, आधा छोटा चम्मच जीरा, आधा छोटा चम्मच काली मिर्च और एक चौथाई छोटा चम्मच लौंग डालकर धीमी आंच पर हल्का भून लें। मसालों को ठंडा करने के बाद इन्हें 3-4 हरी मिर्च और अदरक के एक छोटे टुकड़े के साथ दरदरा पीस लें। ताजा तैयार यह मसाला स्टफिंग को खास स्वाद देगा। ऐसे तैयार करें आलू-मटर की स्टफिंग अब पैन में 1-2 छोटे चम्मच तेल गर्म करें। इसमें एक चुटकी हींग, थोड़ा कटा हुआ काजू और किशमिश डालकर हल्का भूनें। इसके बाद 3-4 उबले और मैश किए हुए आलू, 4-5 छोटे चम्मच उबले मटर और तैयार किया हुआ समोसा मसाला डालें। इसमें आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाएं। सभी सामग्री को अच्छी तरह भूनने के बाद थोड़ा हरा धनिया डालें और मिश्रण को अच्छी तरह मिला लें। स्टफिंग को इस्तेमाल करने से पहले पूरी तरह ठंडा होने दें। बिना आटा गूंथे ऐसे तैयार होगी बाहरी परत अब इस रेसिपी का सबसे खास हिस्सा आता है। एक चौड़े बर्तन में 100-150 ग्राम मैदा, 2-3 छोटे चम्मच सूजी, एक चौथाई छोटा चम्मच अजवाइन, एक चौथाई छोटा चम्मच कलौंजी, एक चौथाई छोटा चम्मच बेकिंग सोडा और स्वादानुसार नमक डालें। इसमें 4-5 छोटे चम्मच तेल डालकर हाथों से अच्छी तरह मिलाएं। मिश्रण को इस तरह मिलाना है कि वह भुरभुरा हो जाए। ध्यान रखें कि इस सूखे मिश्रण में पानी नहीं डालना है। पानी में डुबोकर बनाएं समोसे की कोटिंग ठंडी हो चुकी आलू-मटर की स्टफिंग से छोटी-छोटी बॉल्स बना लें। एक बॉल को सूखे मैदा मिश्रण में रोल करें ताकि उसकी सतह पर हल्की कोटिंग आ जाए। अब इसे पानी में सिर्फ एक सेकंड के लिए डुबोएं और तुरंत निकालकर दोबारा सूखे मैदा मिश्रण में रोल करें। इसी प्रक्रिया को 2-3 बार दोहराया जा सकता है। इससे बॉल के ऊपर धीरे-धीरे एक मोटी और क्रिस्पी बाहरी परत तैयार हो जाएगी। एयर फ्रायर में ऐसे करें क्रिस्पी कोटिंग की हुई समोसा बॉल्स को करीब 15 मिनट तक सूखने दें, ताकि बाहरी परत अच्छी तरह सेट हो जाए। अब इनके ऊपर थोड़ा तेल स्प्रे करें और 180-200 डिग्री सेल्सियस पर करीब 30-40 मिनट तक एयर फ्राई करें। बीच में एक बार पलट दें, जिससे समोसे चारों तरफ से सुनहरे और कुरकुरे बनें। अगर एयर फ्रायर नहीं है, तो इन्हें मध्यम आंच पर गर्म तेल में भी सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तला जा सकता है। हरी चटनी के साथ परोसें तैयार ‘नो-रैप समोसे’ को गरमा-गरम धनिया-पुदीना चटनी, इमली की खट्टी-मीठी चटनी या टमैटो केचप के साथ परोसें। यह तरीका खास तौर पर उन लोगों के लिए आसान हो सकता है जिन्हें समोसा पसंद है, लेकिन आटा गूंथने, बेलने और सही आकार देने की मेहनत पसंद नहीं। हालांकि, एयर फ्रायर में पकाने का समय और तापमान उपकरण के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए पकाते समय समोसे की सतह पर नजर रखें।  

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सावन सोमवार व्रत में कमजोरी से बचाएंगे ये 6 हेल्दी ड्रिंक्स

नई दिल्ली, एजेंसियां। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और उपवास के लिए खास माना जाता है। इस दौरान कई श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं। लंबे समय तक कुछ न खाने की वजह से कई बार शरीर में कमजोरी, थकान और पानी की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में व्रत के दौरान कुछ पौष्टिक और हाइड्रेटिंग ड्रिंक्स को डाइट में शामिल किया जा सकता है।   1. नारियल पानी देगा तुरंत ताजगी   व्रत के दौरान नारियल पानी एक बेहतर विकल्प माना जाता है। इसमें प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में पानी की कमी को पूरा करने और ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।   2. मखाना मिल्क ड्रिंक से मिलेगी लंबे समय तक एनर्जी   दूध में भुने हुए मखाने मिलाकर तैयार किया गया ड्रिंक व्रत के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने के साथ शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है। इसमें स्वाद के लिए इलायची पाउडर भी मिलाया जा सकता है।   3. फ्रूट शेक से मिलेगी प्राकृतिक मिठास   केला, सेब या चीकू जैसे व्रत में खाए जाने वाले फलों से तैयार शेक शरीर को तुरंत ऊर्जा दे सकते हैं। इसमें चीनी मिलाने की बजाय फलों की प्राकृतिक मिठास का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।   4. दूध और ड्राई फ्रूट शेक बढ़ाएगा पोषण   बादाम, खजूर, अखरोट या मखाने को दूध के साथ मिलाकर तैयार किया गया शेक पोषण से भरपूर होता है। यह लंबे समय तक शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकता है।   5. तरबूज-पुदीना स्मूदी रखेगी शरीर को हाइड्रेटेड   तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है। इसे पुदीने की पत्तियों के साथ मिलाकर तैयार की गई स्मूदी शरीर को ठंडक देने के साथ हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद कर सकती है।   6. केला-खजूर स्मूदी से मिलेगी भरपूर ताकत   व्रत में जल्दी भूख लगने पर केला और खजूर की स्मूदी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। दूध के साथ तैयार यह ड्रिंक शरीर को ऊर्जा देने के साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करती है।   ध्यान रखें: व्रत के दौरान अपनी सेहत और जरूरत के अनुसार ही भोजन व पेय पदार्थों का सेवन करें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

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