स्वास्थ्य

Red Rashes After Sun Exposure? It Could Be Sun Allergy

धूप में निकलते ही होने लगती है खुजली और लाल चकत्ते? जानिए कहीं यह सन एलर्जी का संकेत तो नहीं

surbhi जून 22, 2026 0
Red skin rashes and itching after sun exposure indicating possible sun allergy symptoms.
Sun Allergy Symptoms and Prevention Tips

गर्मी के मौसम में तेज धूप से बचने की सलाह हर किसी को दी जाती है, क्योंकि इससे सनबर्न, टैनिंग और त्वचा में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन कुछ लोगों के लिए धूप सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर त्वचा समस्या का कारण बन जाती है। यदि धूप में निकलते ही आपकी त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या छोटे-छोटे दाने दिखाई देने लगते हैं, तो यह सन एलर्जी (Sun Allergy) का संकेत हो सकता है।

त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, सन एलर्जी केवल धूप से होने वाली सामान्य परेशानी नहीं है, बल्कि यह शरीर के इम्यून सिस्टम की सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों के प्रति असामान्य प्रतिक्रिया होती है। इससे त्वचा में सूजन, रैशेज और अन्य लक्षण विकसित हो सकते हैं।

क्या होती है सन एलर्जी?

सन एलर्जी ऐसी स्थिति है, जिसमें सूर्य की किरणों के संपर्क में आने के बाद त्वचा जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने लगती है। इसका सबसे सामान्य प्रकार पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन (Polymorphous Light Eruption) कहलाता है, जिसमें धूप के संपर्क में आने के बाद त्वचा पर खुजली वाले लाल दाने दिखाई देते हैं।

सन एलर्जी के प्रमुख प्रकार

1. पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन (PMLE)

यह सन एलर्जी का सबसे आम प्रकार है। इसमें हाथ, गर्दन और छाती जैसे हिस्सों पर खुजली वाले लाल दाने निकल आते हैं। यह समस्या महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।

2. एक्टिनिक प्रुरिगो

इस स्थिति में त्वचा पर अत्यधिक खुजली वाले दाने हो सकते हैं और यह समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है।

3. फोटोएलर्जिक रिएक्शन

कुछ सनस्क्रीन, परफ्यूम या स्किनकेयर उत्पाद धूप के साथ मिलकर त्वचा पर एलर्जी पैदा कर सकते हैं।

4. सोलर अर्टिकेरिया (Sun Hives)

यह सन एलर्जी का गंभीर रूप है, जिसमें धूप के संपर्क में आने के कुछ ही मिनटों के भीतर त्वचा पर पित्ती या उभरे हुए खुजलीदार निशान दिखाई देने लगते हैं।

5. दवाओं के कारण होने वाली संवेदनशीलता

कुछ एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं और मुंहासों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं त्वचा को धूप के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती हैं।

किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?

  • हल्के रंग की त्वचा वाले लोग
  • जिनके परिवार में सन एलर्जी का इतिहास हो
  • कुछ विशेष दवाओं का सेवन करने वाले लोग
  • ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित मरीज

सन एलर्जी के सामान्य लक्षण

  • धूप में जाने के बाद खुजली होना
  • त्वचा पर लाल चकत्ते या रैशेज
  • सूजन और जलन
  • छोटे दाने या छाले
  • कुछ मामलों में पित्ती (Hives)

ये लक्षण मुख्य रूप से चेहरे, गर्दन, हाथों और शरीर के खुले हिस्सों पर दिखाई देते हैं।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

यदि धूप में जाने के बाद बार-बार त्वचा पर रैशेज या एलर्जी की समस्या हो रही है और इससे आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर उपचार और उचित सावधानियों से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

  • तेज धूप में निकलते समय पूरी बांह के कपड़े पहनें।
  • SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करें।
  • दोपहर की तेज धूप से बचें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं का सेवन न करें।
  • यदि कोई स्किनकेयर प्रोडक्ट एलर्जी पैदा कर रहा हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें।

त्वचा पर धूप के कारण होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और सही उपचार से सन एलर्जी के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और त्वचा को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Cup of green tea with fresh leaves highlighting benefits for oral health and brain function.
सिर्फ वजन घटाने के लिए नहीं, दांतों और दिमाग के लिए भी फायदेमंद है ग्रीन टी, जानिए इसके बड़े लाभ

ग्रीन टी को आमतौर पर वजन कम करने और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने वाले पेय के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसके फायदे केवल वेट लॉस तक सीमित नहीं हैं। इसमें मौजूद कैटेचिन, पॉलीफेनॉल, ईजीसीजी (EGCG) और एल-थीनिन जैसे शक्तिशाली तत्व शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। खासकर यह दांतों, मसूड़ों और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। ग्रीन टी में क्यों होते हैं इतने फायदे? ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं। फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कई पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनॉल और ईजीसीजी शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं। दांतों और ओरल हेल्थ के लिए ग्रीन टी के फायदे 1. कैविटी का खतरा कम कर सकती है ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन ऐसे बैक्टीरिया की गतिविधि को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो दांतों में सड़न और कैविटी का कारण बनते हैं। इससे दांतों की सतह पर बैक्टीरिया के चिपकने का जोखिम भी कम हो सकता है। 2. मसूड़ों को रख सकती है स्वस्थ ग्रीन टी के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मसूड़ों की सूजन और ब्लीडिंग को कम करने में मदद कर सकते हैं। नियमित सेवन से पीरियोडोंटल डिजीज का जोखिम कम होने की संभावना भी बताई गई है। 3. मुंह की बदबू से दिला सकती है राहत मुंह की दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में ग्रीन टी मददगार हो सकती है। इससे ओरल हाइजीन बेहतर बनी रहती है और सांसों की बदबू कम हो सकती है। दिमाग और याददाश्त के लिए भी फायदेमंद 1. बढ़ा सकती है एकाग्रता ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और एल-थीनिन का संयोजन मानसिक सतर्कता और फोकस को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। यह दिमाग को सक्रिय बनाए रखने में सहायक माना जाता है। 2. याददाश्त को दे सकती है मजबूती कुछ अध्ययनों के अनुसार, ग्रीन टी का नियमित सेवन मूड को बेहतर बनाने और उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त में होने वाली गिरावट के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। ध्यान रखें ग्रीन टी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती है, लेकिन इसे किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली के साथ सीमित मात्रा में ग्रीन टी का सेवन बेहतर परिणाम दे सकता है।  

surbhi जून 19, 2026 0
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