स्वास्थ्य

Long Period Cycles May Signal PMOS

35 दिनों से लंबी हो रही है पीरियड्स साइकिल? हो सकता है PMOS का संकेत, महिलाओं को नहीं करनी चाहिए यह गलती

surbhi जून 25, 2026 0
Woman tracking menstrual cycle symptoms linked to PMOS and hormonal health concerns
PMOS Symptoms and Irregular Periods

आज की व्यस्त जीवनशैली में महिलाएं अक्सर अपनी सेहत से जुड़े कई संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं। खासतौर पर पीरियड्स में होने वाली अनियमितता को तनाव, काम के दबाव या बदलती दिनचर्या का असर मानकर टाल दिया जाता है। लेकिन अगर आपकी पीरियड्स साइकिल लगातार 35 दिनों से ज्यादा लंबी हो रही है या मासिक धर्म कई महीनों तक नहीं आ रहा है, तो यह पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) का शुरुआती संकेत हो सकता है।

महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पहले जिसे PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) के नाम से जाना जाता था, अब कई विशेषज्ञ इसे PMOS के रूप में भी संदर्भित कर रहे हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हार्मोनल असंतुलन महिलाओं की प्रजनन क्षमता, मेटाबॉलिज्म और संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

क्या है PMOS?

PMOS एक हार्मोनल और मेटाबोलिक समस्या है, जिसमें ओवरीज में कई छोटे फॉलिकल्स विकसित हो जाते हैं और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, वजन बढ़ सकता है और शरीर में कई अन्य बदलाव दिखाई देने लगते हैं।

नई दिल्ली स्थित कैपिटल हेल्थ क्लिनिक की डायरेक्टर और महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. बिमलप्रीत मोहन के अनुसार, कई युवा महिलाएं पीरियड्स की अनियमितता को सामान्य मान लेती हैं, जबकि यह शरीर में चल रहे हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है।

PMOS के प्रमुख लक्षण

1. 35 दिनों से लंबी पीरियड्स साइकिल

यह PMOS का सबसे सामान्य और शुरुआती संकेत माना जाता है। पीरियड्स के बीच का अंतर 35 दिनों से अधिक होना, महीनों तक मासिक धर्म न आना या ब्लीडिंग का पैटर्न अनियमित होना हार्मोनल गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।

2. बिना वजह वजन बढ़ना

विशेष रूप से पेट और कमर के आसपास तेजी से वजन बढ़ना PMOS से जुड़ा आम लक्षण है। कई बार डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद वजन कम नहीं होता।

3. लगातार मुंहासे होना

अगर टीनएज के बाद भी चेहरे पर बार-बार मुंहासे निकल रहे हैं, खासकर ठुड्डी और जॉलाइन के आसपास, तो यह हार्मोनल असंतुलन की ओर इशारा कर सकता है।

4. चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल

होंठों के ऊपर, ठुड्डी, छाती, पेट या पीठ पर अत्यधिक बाल उगना शरीर में एंड्रोजन हार्मोन के बढ़े स्तर का संकेत हो सकता है।

5. बालों का झड़ना

सिर के बाल पतले होना, हेयरलाइन चौड़ी होना या जरूरत से ज्यादा बाल झड़ना भी PMOS से जुड़ा महत्वपूर्ण लक्षण माना जाता है।

6. गर्भधारण में परेशानी

अनियमित ओव्यूलेशन के कारण कई महिलाओं को कंसीव करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। हालांकि समय पर उपचार से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि आपको निम्न में से कोई समस्या लगातार दिखाई दे रही है, तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए—

  • तीन महीने से अधिक समय तक अनियमित पीरियड्स
  • लगातार मुंहासों की समस्या
  • चेहरे या शरीर पर अत्यधिक बाल
  • बिना कारण तेजी से वजन बढ़ना
  • बालों का अत्यधिक झड़ना
  • गर्भधारण में कठिनाई

क्या PMOS को रोका जा सकता है?

हालांकि आनुवंशिक और हार्मोनल कारणों को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • नियमित व्यायाम करें
  • संतुलित और पौष्टिक भोजन लें
  • प्रोसेस्ड फूड्स से दूरी बनाएं
  • तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें
  • पर्याप्त नींद लें
  • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं

विशेषज्ञों का मानना है कि PMOS का समय पर पता लगने और सही इलाज मिलने पर महिलाएं सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकती हैं। इसलिए पीरियड्स से जुड़े किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकता है।

 

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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पैरों में सूजन या उभरी नसें? वैरिकोज वेन्स और लेग एडिमा में क्या अंतर, जानें कारण, लक्षण और खतरे

पैरों में सूजन, भारीपन या नसों का उभरना कई लोगों के लिए आम समस्या हो सकती है। खासकर लंबे समय तक खड़े रहने, लगातार बैठकर काम करने या दिनभर चलने-फिरने के बाद पैरों में ऐसी परेशानी महसूस हो सकती है। लेकिन हर बार इसे सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कई मामलों में पैरों की उभरी हुई नसें वैरिकोज वेन्स का संकेत हो सकती हैं, जबकि पैर, टखने या पंजे में आने वाली सूजन लेग एडिमा से जुड़ी हो सकती है। देखने में दोनों समस्याएं कुछ हद तक समान लग सकती हैं, लेकिन इनके कारण, लक्षण और उपचार अलग-अलग होते हैं। वैरिकोज वेन्स और लेग एडिमा क्या एक ही समस्या है? नहीं। वैरिकोज वेन्स और लेग एडिमा दो अलग-अलग स्वास्थ्य स्थितियां हैं। वैरिकोज वेन्स में पैरों की सतही नसों के अंदर मौजूद वाल्व ठीक से काम नहीं कर पाते। इससे रक्त पैरों से ऊपर की ओर लौटने के बजाय नसों में जमा होने लगता है। धीरे-धीरे नसें फैल जाती हैं और त्वचा के नीचे नीली, बैंगनी या टेढ़ी-मेढ़ी उभरी हुई दिखाई देने लगती हैं। वहीं लेग एडिमा में पैरों के ऊतकों में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है। इसके कारण पैर, टखने या पंजे में सूजन दिखाई देती है। एडिमा केवल लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने से नहीं, बल्कि कुछ दवाओं, गर्भावस्था और हृदय, किडनी, लिवर या लसीका तंत्र से जुड़ी समस्याओं के कारण भी हो सकती है। वैरिकोज वेन्स के प्रमुख लक्षण वैरिकोज वेन्स का सबसे स्पष्ट संकेत पैरों की नसों का सामान्य से अधिक उभरकर दिखाई देना है। इसके साथ कई अन्य लक्षण भी हो सकते हैं: नीली या बैंगनी रंग की उभरी हुई नसें नसों का टेढ़ा-मेढ़ा या गुच्छेदार दिखाई देना पैरों में भारीपन या थकान लंबे समय तक खड़े रहने पर दर्द या असहजता पैरों में खुजली या जलन रात के समय पैरों में ऐंठन टखनों के आसपास हल्की सूजन कुछ लोगों में लंबे समय तक वैरिकोज वेन्स रहने पर त्वचा के रंग में बदलाव, त्वचा में कठोरता या घाव जैसी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं। इसलिए लगातार दिखाई देने वाली उभरी नसों को केवल कॉस्मेटिक समस्या मानना उचित नहीं है। लेग एडिमा क्यों होती है? लेग एडिमा का अर्थ है पैरों के ऊतकों में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा होना। यह एक लक्षण है, जिसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। संभावित कारणों में शामिल हैं: लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना गर्भावस्था अधिक नमक का सेवन कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव किडनी से जुड़ी बीमारी लिवर संबंधी समस्या हृदय संबंधी बीमारी लसीका तंत्र की समस्या डीप वेन थ्रॉम्बोसिस यानी डीवीटी कई मामलों में सूजे हुए हिस्से को उंगली से दबाने पर कुछ समय के लिए गड्ढा दिखाई दे सकता है। इसे पिटिंग एडिमा कहा जाता है। हालांकि, हर तरह की एडिमा में ऐसा होना जरूरी नहीं है। एक पैर अचानक सूज जाए तो सावधान पैरों में सूजन होने पर यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि सूजन एक पैर में है या दोनों पैरों में। अगर एक पैर में अचानक सूजन, दर्द, लालिमा या गर्माहट महसूस हो, तो इसे सामान्य समस्या मानकर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण डीप वेन थ्रॉम्बोसिस जैसी गंभीर स्थिति से जुड़े हो सकते हैं और चिकित्सकीय जांच की जरूरत पड़ सकती है। अगर पैर की सूजन के साथ सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। वैरिकोज वेन्स और लेग एडिमा में मुख्य अंतर विशेषता वैरिकोज वेन्स लेग एडिमा मुख्य समस्या नसों के वाल्व का कमजोर होना ऊतकों में अतिरिक्त तरल जमा होना प्रमुख पहचान नीली, बैंगनी, उभरी या टेढ़ी नसें पैर, टखने या पंजे में सूजन सामान्य लक्षण भारीपन, दर्द, जलन और ऐंठन सूजन, खिंचाव और भारीपन त्वचा पर असर नसें स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं त्वचा तनी हुई या चमकदार लग सकती है दबाने पर गड्ढा आमतौर पर प्रमुख संकेत नहीं कुछ प्रकार की एडिमा में हो सकता है संभावित कारण नसों में रक्त का जमा होना शरीर के ऊतकों में तरल पदार्थ का जमा होना उपचार स्थिति के अनुसार कंप्रेशन, जीवनशैली में बदलाव या अन्य चिकित्सा उपचार मूल कारण के अनुसार उपचार दोनों समस्याओं का इलाज अलग होता है वैरिकोज वेन्स के मामले में डॉक्टर समस्या की गंभीरता के अनुसार व्यायाम, पैरों को कुछ समय के लिए ऊंचा रखने, कंप्रेशन स्टॉकिंग या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में नसों को बंद करने या हटाने से जुड़ी प्रक्रियाओं की आवश्यकता भी हो सकती है। लेग एडिमा में सबसे महत्वपूर्ण बात इसके मूल कारण का पता लगाना है। यदि सूजन किसी बीमारी या दवा के कारण है, तो उपचार उसी वजह के अनुसार किया जाता है। इसलिए केवल सूजन कम करने के लिए खुद से दवा लेना उचित नहीं है। कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? यदि पैरों में लगातार सूजन, दर्द, भारीपन, उभरी हुई नसें, त्वचा के रंग में बदलाव या बार-बार ऐंठन जैसी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। खासकर अचानक एक पैर में सूजन आने, तेज दर्द होने, त्वचा लाल या गर्म होने अथवा इसके साथ सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द होने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।      

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Abdominal pain moving from the navel to the lower right side may indicate appendicitis and require medical evaluation.
नाभि से शुरू होकर पेट के दाईं तरफ खिसक रहा है दर्द? इसे गैस समझकर न करें नजरअंदाज, हो सकता है अपेंडिसाइटिस

पेट में दर्द होना आम समस्या है। कई बार गैस, कब्ज, अपच या एसिडिटी की वजह से होने वाला दर्द कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन अगर दर्द पहले नाभि के आसपास शुरू हो और कुछ घंटों के भीतर पेट के निचले दाहिने हिस्से में पहुंचकर लगातार तेज होने लगे, तो इसे सामान्य गैस समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, दर्द का इस तरह नाभि से पेट के निचले दाहिने हिस्से की ओर जाना अपेंडिसाइटिस का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। अपेंडिसाइटिस में अपेंडिक्स में सूजन आ जाती है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह फट भी सकता है। ऐसी स्थिति गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है। नाभि से दाईं तरफ क्यों खिसकता है दर्द? अपेंडिक्स बड़ी आंत से जुड़ी एक छोटी, उंगली जैसी संरचना होती है और आमतौर पर पेट के निचले दाहिने हिस्से में स्थित रहती है। अपेंडिक्स में सूजन की शुरुआत होने पर दर्द कई बार नाभि के आसपास महसूस होता है। शुरुआती चरण में यह दर्द आंतों से जुड़ी नसों के जरिए महसूस होता है। जैसे-जैसे सूजन बढ़ती है और पेट की अंदरूनी परत प्रभावित होती है, दर्द अपेंडिक्स की वास्तविक जगह यानी पेट के निचले दाहिने हिस्से में अधिक स्पष्ट और तेज महसूस होने लगता है। दर्द के इस स्थान बदलने को चिकित्सकीय भाषा में दर्द का स्थानांतरण कहा जाता है। हालांकि, हर व्यक्ति में अपेंडिसाइटिस के लक्षण बिल्कुल एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं है। किन लक्षणों के साथ बढ़ सकती है अपेंडिसाइटिस की आशंका? अगर पेट दर्द के साथ कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: 1. नाभि से दाईं तरफ जाता दर्द शुरुआत में दर्द नाभि के आसपास हो सकता है और कुछ घंटों के भीतर पेट के निचले दाहिने हिस्से में पहुंच सकता है। समय के साथ दर्द अधिक तेज और लगातार हो सकता है। 2. चलने या खांसने पर दर्द बढ़ना अपेंडिसाइटिस में पेट की हल्की गतिविधि भी दर्द बढ़ा सकती है। खांसने, चलने, शरीर को हिलाने या अचानक झटका लगने पर दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है। 3. भूख कम लगना अपेंडिसाइटिस के दौरान अचानक खाने की इच्छा कम हो सकती है। इसके साथ कमजोरी या असहज महसूस होना भी हो सकता है। 4. मतली और उल्टी पेट दर्द के साथ जी मिचलाना या उल्टी होना भी अपेंडिसाइटिस के संभावित लक्षणों में शामिल है। 5. बुखार अपेंडिक्स में सूजन या संक्रमण बढ़ने पर हल्का बुखार हो सकता है। गंभीर स्थिति में बुखार अधिक भी हो सकता है। हर दाईं तरफ का दर्द अपेंडिसाइटिस नहीं होता यह समझना भी जरूरी है कि पेट के निचले दाहिने हिस्से में दर्द होने का मतलब हमेशा अपेंडिसाइटिस नहीं होता। गैस, आंतों से जुड़ी दूसरी समस्याएं, मूत्र संबंधी परेशानी और महिलाओं में कुछ स्त्री रोग संबंधी स्थितियां भी इसी क्षेत्र में दर्द का कारण बन सकती हैं। इसीलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी तय करना उचित नहीं है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में लक्षण अलग तरीके से दिखाई दे सकते हैं। समय पर इलाज क्यों जरूरी है? अपेंडिसाइटिस का समय पर उपचार न होने पर अपेंडिक्स फट सकता है। इसके बाद संक्रमण पेट के अंदर फैल सकता है और पेरिटोनाइटिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। कुछ मामलों में पेट के अंदर पस जमा हो सकती है और संक्रमण खून तक फैलने पर सेप्सिस का खतरा भी पैदा हो सकता है। इसी वजह से लगातार बढ़ते पेट दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टर स्थिति के अनुसार सर्जरी या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं। कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें? अगर पेट का दर्द नाभि से शुरू होकर निचले दाहिने हिस्से में पहुंच रहा है और लगातार बढ़ रहा है, तो जल्द चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। खासतौर पर दर्द के साथ बुखार, उल्टी, भूख न लगना, पेट में अत्यधिक संवेदनशीलता या चलने-खांसने पर तेज दर्द हो तो देरी नहीं करनी चाहिए।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
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हार्ट अटैक से पहले दिख सकते हैं ये शुरुआती संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली, एजेंसियां। हार्ट अटैक अक्सर अचानक नहीं आता, बल्कि इसके कई शुरुआती संकेत घंटों, दिनों या कई बार हफ्तों पहले ही शरीर में दिखाई देने लगते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन लक्षणों को सामान्य थकान, गैस या तनाव समझकर नजरअंदाज करना गंभीर साबित हो सकता है। समय रहते पहचान और इलाज से जान बचाई जा सकती है।   सीने में दर्द और जकड़न को न करें नजरअंदाज   विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक से पहले सीने के बीच में दबाव, जकड़न, भारीपन या जलन महसूस हो सकती है। यह दर्द कुछ मिनट तक रहकर कम हो सकता है और फिर दोबारा लौट सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।   बिना वजह थकान और सांस फूलना भी हो सकते हैं संकेत   अगर पर्याप्त आराम के बाद भी लगातार थकान महसूस हो, सीढ़ियां चढ़ने या हल्का काम करने पर सांस फूलने लगे, तो यह दिल तक रक्त और ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति न होने का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं में असामान्य थकान का लक्षण अधिक देखा जाता है।   शरीर के अन्य हिस्सों में भी हो सकता है दर्द   हार्ट अटैक से पहले दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता। कंधे, बांह, पीठ, गर्दन, जबड़े, दांत या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या बेचैनी भी महसूस हो सकती है। कई लोग इसे मांसपेशियों के दर्द या गैस की समस्या समझकर अनदेखा कर देते हैं।   पसीना, चक्कर और मतली भी हैं चेतावनी   विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक ठंडा पसीना आना, चक्कर महसूस होना, मतली, बेहोशी या बिना किसी स्पष्ट कारण के बेचैनी होना भी हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। विशेष रूप से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित लोगों को ऐसे लक्षणों पर अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।   कब लें तुरंत डॉक्टर की मदद?   यदि सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी, हाथ या जबड़े में दर्द, अत्यधिक पसीना या अन्य गंभीर लक्षण पांच मिनट से अधिक समय तक बने रहें, तो बिना देरी किए तुरंत अस्पताल जाएं या आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। समय पर इलाज से हार्ट अटैक के गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।

anjali kumari अगस्त 7, 2026 0
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