स्वास्थ्य

Breakthrough in Gastric Cancer Prediction

गैस्ट्रिक कैंसर में बड़ी खोज: CXCL12 और Eotaxin बने सर्वाइवल के नए संकेतक

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Microscopic view of gastric cancer cells highlighting biomarkers CXCL12 and eotaxin in medical research
Gastric Cancer Biomarkers CXCL12 Eotaxin Study

गैस्ट्रिक कैंसर के इलाज और पूर्वानुमान (प्रोग्नोसिस) को लेकर एक नई रिसर्च ने अहम जानकारी सामने रखी है। इस अध्ययन में दो नए बायोमार्कर-CXCL12 और eotaxin-की पहचान की गई है, जो मरीजों की जीवित रहने की संभावना का अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं। यह खोज Gastric Cancer के उपचार और निगरानी के तरीकों को बदल सकती है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

गैस्ट्रिक कैंसर दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। इसकी बड़ी वजह है-देर से पहचान और एडवांस स्टेज में सीमित इलाज विकल्प।

ऐसे में, ब्लड टेस्ट के जरिए मापे जा सकने वाले बायोमार्कर डॉक्टरों को यह समझने में मदद करते हैं कि कौन सा मरीज ज्यादा जोखिम में है और किसे ज्यादा निगरानी या अलग इलाज की जरूरत है।

रिसर्च में क्या पाया गया?

यह अध्ययन Helsinki University Hospital में 2000 से 2009 के बीच सर्जरी करा चुके 240 मरीजों पर आधारित था।

वैज्ञानिकों ने 48 अलग-अलग प्रोटीन का विश्लेषण किया, जिनमें से तीन ने शुरुआती स्तर पर अहम भूमिका दिखाई:

  • CXCL12
  • Stem Cell Factor
  • Eotaxin

लेकिन विस्तृत विश्लेषण (Multivariate Analysis) में केवल CXCL12 और Eotaxin ही स्वतंत्र (independent) रूप से सर्वाइवल के मजबूत संकेतक साबित हुए।

कैसे काम करते हैं ये बायोमार्कर?

  • CXCL12: यह एक केमोकिन है, जो इम्यून सेल्स की गतिविधि और ट्यूमर के माइक्रोएनवायरमेंट को नियंत्रित करता है। अध्ययन में यह बेहतर सर्वाइवल से जुड़ा पाया गया।
  • Eotaxin: यह एक इंफ्लेमेटरी प्रोटीन है, जो शरीर में सूजन और इम्यून प्रतिक्रिया से संबंधित है। इसका भी स्वतंत्र प्रभाव सर्वाइवल पर देखा गया।

यह संकेत देता है कि कैंसर के विकास में इम्यून सिस्टम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

क्लिनिकल महत्व क्या है?

इस खोज से भविष्य में:

  • मरीजों के लिए सटीक जोखिम आकलन संभव होगा
  • डॉक्टर बेहतर तरीके से ट्रीटमेंट प्लान बना सकेंगे
  • हाई-रिस्क मरीजों की करीबी निगरानी की जा सकेगी

यह पर्सनलाइज्ड मेडिसिन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सीमाएं और आगे की जरूरत

हालांकि, यह अध्ययन एक ही सेंटर और पुराने डेटा पर आधारित है, जिससे इसके परिणामों की व्यापकता सीमित हो सकती है।

साथ ही, इन बायोमार्कर्स को रोजमर्रा की क्लिनिकल प्रैक्टिस में लागू करने से पहले बड़े और भविष्य-आधारित (prospective) अध्ययनों की जरूरत होगी।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Betel Leaves: सिरदर्द से एलर्जी तक, पान के पत्ते के देसी नुस्खे से पाएं राहत

भारतीय परंपरा में पान के पत्तों का खास महत्व रहा है, लेकिन अब यह सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं। आयुर्वेद के अनुसार, पान के पत्ते प्राकृतिक औषधि की तरह काम करते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। इनमें कैल्शियम, विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाने और कई छोटी-बड़ी समस्याओं में राहत देने में मदद करते हैं। पान के पत्तों के बड़े फायदे 1. यूरिक एसिड कंट्रोल में मदद आजकल बढ़ता यूरिक एसिड कई लोगों की परेशानी बन चुका है। पान के पत्ते शरीर में जमा अतिरिक्त यूरिक एसिड को संतुलित करने में सहायक माने जाते हैं। 2. पाचन तंत्र को बनाएं मजबूत गैस, कब्ज और एसिडिटी में राहत पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है खाना खाने के बाद पान का पत्ता चबाना फायदेमंद हो सकता है। 3. दांत और मसूड़ों के लिए लाभकारी मसूड़ों की सूजन और दर्द कम करता है दांतों को मजबूत बनाने में मदद ध्यान रखें: पान बिना तंबाकू और सुपारी के ही खाएं। 4. सूजन और दर्द में राहत पान के पत्तों में मौजूद तत्व: सूजन कम करते हैं हल्के दर्द में आराम देते हैं पत्ते को हल्का गर्म करके प्रभावित जगह पर लगाने से राहत मिल सकती है। 5. सर्दी-खांसी और एलर्जी में उपयोगी शहद के साथ सेवन करने से खांसी में राहत इम्युनिटी मजबूत करता है 6. सिरदर्द और छोटे घाव में कारगर सिरदर्द में पत्ते का लेप लगाने से आराम छोटे घाव भरने में मददगार उपयोग करते समय रखें ध्यान तंबाकू और सुपारी के साथ पान का सेवन नुकसानदायक हो सकता है सीमित मात्रा में ही उपयोग करें किसी गंभीर बीमारी में डॉक्टर की सलाह जरूर लें

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जानें गर्मियों में चिया सीड्स का पानी क्यों है जरूरी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भीषण गर्मी और बढ़ते पारे के बीच शरीर को अंदर से ठंडा और हाइड्रेटेड रखना एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में चिया सीड्स (Chia Seeds) का पानी एक "सुपरड्रिंक" की तरह काम करता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर ये छोटे-छोटे बीज न केवल आपकी प्यास बुझाते हैं, बल्कि सेहत को कई अनगिनत लाभ भी पहुँचाते हैं।   1. शरीर को रखता है कूल और हाइड्रेटेड चिया सीड्स की सबसे बड़ी खासियत इसकी जल-शोषण क्षमता है। भिगोने पर ये अपने वजन से कई गुना ज्यादा पानी सोख लेते हैं और जेली जैसा स्वरूप ले लेते हैं। गर्मियों में इसका सेवन शरीर में पानी की कमी (Dehydration) को रोकता है और शरीर के तापमान को नियंत्रित कर ठंडक प्रदान करता है।   2. पाचन तंत्र के लिए रामबाण गर्मियों में अक्सर पेट फूलना, गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है। चिया सीड्स में मौजूद घुलनशील फाइबर प्रीबायोटिक के रूप में काम करते हैं। यह पेट में जाकर एक चिकनी परत बनाता है, जिससे पाचन सुचारू रहता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।   3. वजन घटाने में मददगार अगर आप बढ़ते वजन से परेशान हैं, तो चिया सीड्स आपके लिए बेहतरीन साथी हैं। इसमें हाई फाइबर और प्रोटीन होता है, जिससे इसे पीने के बाद काफी देर तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। यह बेवजह की भूख (Cravings) को रोकता है, जिससे आप अतिरिक्त कैलोरी लेने से बच जाते हैं।   4. एनर्जी बूस्टर और दिल की सेहत चिया सीड्स ऊर्जा का पावरहाउस हैं। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड (ALA) खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और हृदय की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से ब्लड शुगर लेवल भी स्थिर रहता है, जिससे शुगर स्पाइक्स का खतरा कम हो जाता है।   सेवन का सही तरीका: कैसे बनाएं चिया वॉटर? चिया सीड्स का अधिकतम लाभ उठाने के लिए इसे सही ढंग से तैयार करना जरूरी है: स्टेप 1: रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में एक चम्मच चिया सीड्स डालकर भिगो दें। स्टेप 2: सुबह तक ये बीज पूरी तरह फूलकर जेली की तरह हो जाएंगे। स्टेप 3: आप इसे सादा पी सकते हैं या फिर स्वाद और पोषक तत्व बढ़ाने के लिए इसमें नींबू का रस और एक चुटकी काला नमक मिला सकते हैं। स्टेप 4: इसे सुबह खाली पेट पीना सबसे अधिक फायदेमंद माना जाता है।   सावधानी और सुझाव चिया सीड्स का सेवन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, लेकिन इसकी तासीर और फाइबर की मात्रा को देखते हुए शुरुआत कम मात्रा से करें। किसी भी विशेष स्वास्थ्य स्थिति या एलर्जी के मामले में अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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