झारखंड

Heatwave Hits Gumla Students

गुमला में बढ़ती गर्मी का कहर: 39°C तापमान, लू की चपेट में आ रहे छात्र

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
School children affected by heatwave in Gumla as temperature reaches 39°C causing illness
Gumla Heatwave Impact Students

झारखंड के Gumla जिले में गर्मी ने अचानक तेज़ी पकड़ ली है। तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के साथ ही लू का असर साफ दिखाई देने लगा है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली छात्रों पर पड़ रहा है, जहां बड़ी संख्या में बच्चे बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।

छात्रों की सेहत पर असर

स्थानीय अस्पतालों में ऐसे कई छात्र पहुंचे हैं, जिन्हें तेज गर्मी और लू के कारण बुखार, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत हुई। हालांकि राहत की बात यह है कि समय पर इलाज मिलने से सभी छात्र अब खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी और धूप में लंबे समय तक रहने के कारण बच्चों में यह समस्या बढ़ रही है।

मॉर्निंग क्लास लागू नहीं, बढ़ रही परेशानी

राज्य सरकार ने गर्मी को देखते हुए सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक स्कूल संचालन का निर्देश दिया है, ताकि बच्चे तेज धूप से बच सकें।
लेकिन गुमला के कई निजी स्कूल अब भी दोपहर 3 बजे तक कक्षाएं चला रहे हैं, जिससे छात्रों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

गौरतलब है कि जंगलों से घिरा गुमला आमतौर पर अत्यधिक गर्मी से बचा रहता है, लेकिन इस बार यहां भी तापमान में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

डॉक्टरों की सलाह: सावधानी ही बचाव

जिला अस्पताल के डीएस डॉ अनुपम किशोर ने अभिभावकों और छात्रों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:

  • पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी और अन्य तरल पदार्थ लें
  • हल्के रंग और सूती कपड़े पहनें
  • तेज धूप में बाहर निकलने से बचें
  • चक्कर या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत ठंडी जगह पर जाएं
  • स्थिति गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

झारखंड

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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर  प्रशासन सख्त,नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

धनबाद। जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्कूलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए। Jharkhand Education Tribunal Act 2017 के तहत अब सभी निजी विद्यालयों को फीस, किताब और ड्रेस से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।   फीस और री-एडमिशन पर स्पष्ट नियम प्रशासन ने निर्देश दिया है कि स्कूल अपनी वार्षिक फीस का पूरा ब्योरा वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करें। अभिभावकों पर एकमुश्त फीस जमा करने का दबाव नहीं बनाया जाएगा, बल्कि उन्हें तिमाही आधार पर भुगतान की सुविधा दी जाएगी। साथ ही री-एडमिशन के नाम पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और डेवलपमेंट फीस का उद्देश्य स्पष्ट करना होगा।   किताब और ड्रेस को लेकर सख्ती नए नियमों के अनुसार, स्कूलों को नवंबर तक अगले सत्र की किताबों और ड्रेस की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। स्कूल ड्रेस पांच साल से पहले नहीं बदली जा सकेगी और निर्धारित किताबों में भी बार-बार बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, स्कूल परिसर में किताब और ड्रेस बेचने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिससे अभिभावकों को बाजार से सस्ती दर पर सामग्री खरीदने का विकल्प मिलेगा।   उल्लंघन पर जुर्माना और जांच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन एक सप्ताह के भीतर करना होगा। इसके बाद पांच सदस्यीय टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा। किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।   छात्रों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर इसके साथ ही बीपीएल श्रेणी के छात्रों के लिए 25% सीट आरक्षित रखने, स्कूल बसों में GPS और CCTV अनिवार्य करने तथा चालकों का पुलिस सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन कदमों से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

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झारखंड ट्रेजरी घोटाले में अब ED की एंट्री

रांची। झारखंड ट्रेजरी घोटाले में जल्द ही ED की इंट्री होने जा रही है। राज्य में ट्रेजरी से अवैध निकासी की जांच में ईडी की भी एंट्री की चर्चा होते ही हड़कंप मच गया है। बोकारो में पुलिस विभाग के खाते से अब तक नौ करोड़ व हजारीबाग में करीब 30 करोड़ की अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद वहां प्राथमिकी दर्ज हुई है। ईडी उन प्राथमिकियों की समीक्षा कर रही है। ताजा मामला रांची में पशुपालन विभाग में वेतन मद में 2.94 करोड़ रुपये की फर्जी तरीके से निकासी मामले में कोतवाली थाने में दर्ज प्राथमिकी की भी ईडी समीक्षा कर रही है। रामगढ़ में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया है, जिसमें 34.25 लाख रुपये की फर्जी तरीके से निकासी उजागर हो चुकी है। ईडी सभी मामलों को देख रही है। बताया जा रहा है कि जल्द ही ईडी इन प्राथमिकियों को जोड़कर इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट यानी ईसीआइआर दर्ज करेगी। ईडी इसे मनी लांड्रिंग के बिंदु पर देखेगी।  उर्जा व पर्यटन विभाग में अवैध निकासी की जांच कर रही ईडी इससे पहले ईडी ने ऊर्जा व पर्यटन निगम के खाते से 107 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी मामले में केस दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था। ईडी इस मामले में भी मनी लांड्रिंग के बिंदु पर जांच कर रही है। एमडीएम में गड़बड़ी की जांच कर चुकी ईडी पूर्व में मिड डे मील के 100 करोड़ रुपये की हेराफेरी मामले में भी ईडी ने जांच कर बड़ी कार्रवाई की थी। अब ट्रेजरी घोटाले में भी ईडी की शीघ्र एंट्री की संभावना जताई जा रही है। सीआइडी को अब तक नहीं मिला है औपचारिक आदेश अवैध निकासी की उच्चस्तरीय जांच चल रही है। जांच समिति के अध्यक्ष उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव डा. अमिताभ कौशल हैं। वहीं, सदस्यों में प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) के प्रतिनिधि डिप्टी अकाउंटेंट जनरल भार्गव राम ख्याति, वित्त विभाग की उप सचिव ज्योति कुमारी झा, अवर सचिव कपिल देव पंडित, अंकेक्षण निदेशालय के लेखा नियंत्रक नरेश झा, एनआइसी के वरीय निदेशक (आईटी) ओमेश प्रसाद सिन्हा, सहायक निदेशक गौरव कुमार तथा सदस्य सचिव के रूप में वित्त विभाग के प्रशाखा पदाधिकारी खिरोद सिंह मुंडा शामिल हैं। समिति कर रही जांच समिति के पदाधिकारी व सदस्यों ने वित्त विभाग व एजी से वित्तीय निकासी से संबंधित दस्तावेज मंगवाकर उसकी समीक्षा शुरू कर दी है। इस केस में सीआईडी को आपराधिक मामलों की जांच करने का आदेश सीएम हेमंत सोरेन ने दिया है। सीआइडी को नहीं मिली औपचारिक आदेश की कापी सीआडी को बोकारो, धनबाद व अन्य जिलों में दर्ज मामले की जांच करनी थी, लेकिन बुधवार की शाम तक सीआइडी को औपचारिक आदेश की कापी नहीं मिली थी।

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धनबाद में फिर फटी धरती, बाघमारा के टांडाबाड़ी में 8 घर जमींदोज

धनबाद। धनबाद जिले के बाघमारा क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा भू-धसान हुआ, जिससे टांडाबाड़ी बस्ती में 7 से 8 घर पलभर में जमीन में समा गए। घटना बुधवार सुबह हुई, जब अचानक तेज आवाज के साथ जमीन धंसने लगी और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने बच्चों और जरूरी सामान के साथ घर छोड़कर भागने को मजबूर हो गए। गनीमत रही कि हादसा सुबह हुआ, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी।   बेघर हुए परिवार, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप घटना के बाद दर्जनों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। चिलचिलाती गर्मी में बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घटना के घंटों बाद भी न तो प्रशासन और न ही संबंधित एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। इससे लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।   इलाके में दरारें, खतरे में अन्य घर भू-धसान के बाद इलाके की सड़कों और आसपास की जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे अन्य घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि उन्हें जल्द सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए।   पहले भी हो चुकी है दर्दनाक घटना गौरतलब है कि 31 मार्च को इसी इलाके में हुए भू-धसान में तीन लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।   अवैध खनन पर उठे गंभीर सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध कोयला उत्खनन के कारण जमीन अंदर से खोखली हो चुकी है, जिससे ऐसे हादसे बार-बार हो रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई के अभाव में कोयला माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

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