झारखंड

चांडिलः खेत में मिला विशालकाय अजगर, मचा हड़कंप

anjali kumari जून 13, 2026 0
snake rescue news
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चांडिल। सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के कुकड़ु गांव में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक सब्जी के खेत में विशालकाय अजगर सांप निकल आया। अजगर के निकलने की खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। अजगर के आकार और वजन को देखकर लोग हैरान रह गए। ग्रामीणों के अनुसार खेत की सुरक्षा और जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए खेत के चारों ओर प्लास्टिक का जाल लगाया गया था।

इसी जाल में अजगर फंस गया, जिससे वह बाहर नहीं निकल सका। खेत में काम करने पहुंचे लोगों की नजर जैसे ही अजगर सांप पर पड़ी, उन्होंने शोर मचाकर आसपास के लोगों को इसकी सूचना दी। अजगर के खेत में पाए जाने से ग्रामीणों में दहशत है। खासकर महिलाएं और बच्चे खेत की ओर जाने से डर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सांप जाल से निकल जाता है तो आसपास के इलाके में खतरा बढ़ सकता है। 


पहली बार इतना बड़ा अजगर देखा गया


घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचकर अजगर को देखने लगे। कई लोगों ने मोबाइल फोन से वीडियो और तस्वीरें भी बनाई। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में पहली बार इतना बड़ा अजगर देखा गया है, जिससे लोगों में डर भी बना हुआ है। वहीं ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि वन विभाग की रेस्क्यू टीम को मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से अजगर को जाल से निकालते हुए उसे किसी सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ देना चाहिए, ताकि सांप को भी नुकसान न पहुंचे और ग्रामीणों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुकड़ु क्षेत्र जंगलों और पहाड़ी इलाकों से जुड़ा हुआ है, जिस कारण समय-समय पर जंगली जीव आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड

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CM Hemant Soren meeting
सीएम हेमंत सोरेन से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने की मुलाकात

रांची। झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास में मुलाकात की। हालांकि इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया है, लेकिन राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले हुई इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। बैठक में झारखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू, राज्यसभा सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक प्रदीप यादव और पार्टी के पर्यवेक्षक अजय शर्मा मौजूद रहे।   सरकार और संगठन के समन्वय पर चर्चा की अटकलें मुख्यमंत्री आवास में हुई इस मुलाकात के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता पक्ष के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय, राज्यसभा चुनाव की रणनीति तथा समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई होगी। बैठक के बाद किसी भी नेता ने बातचीत के विषय पर सार्वजनिक बयान नहीं दिया।   राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के सामने चुनौती झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है। चुनाव मैदान में झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी हैं। विधानसभा में झामुमो के 34 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 28 मतों की आवश्यकता है। ऐसे में बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है।   वहीं कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की राह अपेक्षाकृत कठिन नजर आ रही है। उनकी जीत के लिए कांग्रेस, झामुमो, राजद और भाकपा (माले) के विधायकों का पूरा समर्थन जरूरी माना जा रहा है। गठबंधन के किसी विधायक की क्रॉस वोटिंग या वोट के अमान्य होने की स्थिति कांग्रेस की रणनीति पर असर डाल सकती है।   क्रॉस वोटिंग रोकने पर गठबंधन का फोकस राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार राज्यसभा चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती क्रॉस वोटिंग की आशंका है। यही वजह है कि महागठबंधन अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। दूसरी ओर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी लगातार सक्रिय हैं और विभिन्न नेताओं से संपर्क कर अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।   वर्तमान विधानसभा संख्या बल के अनुसार महागठबंधन के पास 56 विधायक हैं, जबकि एनडीए के पास 24 विधायक हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव का परिणाम काफी हद तक दलों की एकजुटता और मतदान के दिन की राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। 18 जून का चुनाव झारखंड की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है और सभी दल अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

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राज्यसभा चुनाव: 28 वोटों की जंग में फंसे प्रणव झा, बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय

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राज्यसभा चुनाव से पहले 16 को कांग्रेस व JMM और 17 जून को गठबंधन की बैठक

रांची। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन अंतिम तैयारी में जुटा है। कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने दावा किया है कि महागठबंधन दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेगा। इसे लेकर 16 जून को कांग्रेस नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें चुनावी रणनीति और विधायकों के समन्वय पर चर्चा होगी। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा भी बैठक कर रणनीति बनायेगा।  17 जून को होगी महागठबंधन की अहम बैठक राज्यसभा चुनाव को लेकर 17 जून को महागठबंधन की संयुक्त बैठक होगी। इस बैठक में कांग्रेस, झामुमो और गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेता शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि चुनाव से एक दिन पहले होने वाली यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण होगी, जिसमें वोटिंग की रणनीति और सभी विधायकों के बीच समन्वय को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ये बैठकें सीएम आवास में 6 बजे से होगी।  कौन-कौन है प्रत्याशी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि झामुमो ने बैजनाथ राम को मैदान में उतारा है। वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवाणी चुनाव लड़ रहे हैं। महागठबंधन नेतृत्व को भरोसा है कि गठबंधन के दोनों उम्मीदवार जीत हासिल करेंगे।

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BJP विधायक प्रकाश राम की तबीयत बिगड़ी, राज्यसभा चुनाव के समीकरणों पर नजर

रांची। झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भाजपा विधायक प्रकाश राम की तबीयत अचानक बिगड़ने से सियासी हलकों में हलचल बढ़ गई है। उन्हें रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि उनकी हालत स्थिर है और मतदान तक उनके स्वस्थ होकर विधानसभा पहुंचने की पूरी उम्मीद है।   मतदान से पहले बढ़ी चुनावी चिंता प्रकाश राम के अस्पताल में भर्ती होने की खबर के बाद भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की चुनावी रणनीति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि पार्टी नेताओं का दावा है कि विधायक मतदान में हिस्सा लेंगे और इससे चुनावी गणित पर कोई असर नहीं पड़ेगा।   प्रकाश राम का राजनीतिक सफर लातेहार से विधायक प्रकाश राम का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। वह सबसे पहले झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) के टिकट पर विधायक बने थे। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन मंत्री और वर्तमान राज्यसभा उम्मीदवार बैजनाथ राम को हराकर जीत दर्ज की थी।   दो सीटों पर कांटे की टक्कर झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने बैजनाथ राम, कांग्रेस ने प्रणव झा, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी मैदान में हैं। इंडिया गठबंधन के सामने अपने 56 विधायकों को एकजुट बनाए रखने की चुनौती है, जबकि परिमल नाथवानी को एनडीए के 24 विधायकों के अलावा अतिरिक्त चार वोट जुटाने होंगे। ऐसे में प्रत्येक विधायक का वोट बेहद अहम माना जा रहा है।   बैठकों और संपर्क अभियान पर जोर चुनाव से पहले परिमल नाथवानी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से मुलाकात की, जिसे राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं भाजपा ने सोमवार शाम अपने विधायकों की बैठक भी बुलाई है, जिसमें राज्यसभा चुनाव की रणनीति, विधायकों की एकजुटता और मतदान की तैयारियों पर चर्चा होने की संभावना है। 18 जून को होने वाले मतदान से पहले झारखंड की राजनीति में हर गतिविधि पर नजर बनी हुई है और सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं।

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