रांची: झारखंड में केंद्र की दो प्रमुख योजनाओं जल जीवन मिशन (JJM) और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन को लेकर CAG की ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में नियमों की कथित अनदेखी, अयोग्य संवेदकों को काम दिए जाने और पात्र ग्रामीण परिवारों के योजना से बाहर रह जाने जैसे मुद्दे सामने आए हैं।
ऑडिट में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, एक ऐसे ठेकेदार को बड़ी राशि के काम दिए गए, जिसकी टेंडर क्षमता नियमों के मुताबिक शून्य बताई गई थी। वहीं, PMAY-G में राज्य के बड़ी संख्या में पात्र परिवारों को केंद्र से मिले सीमित लक्ष्य के कारण योजना का लाभ नहीं मिल सका।
CAG की रिपोर्ट के अनुसार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में टेंडर क्षमता तय करने के लिए सिविल इंजीनियरिंग कार्यों को आधार बनाया जाना था। ऑडिट में एक ऐसे संवेदक का मामला सामने आया, जिसने वित्तीय वर्ष 2021-22 में केवल 5.60 करोड़ रुपये का सिविल कार्य दिखाया था।
रिपोर्ट के अनुसार, इस आधार पर उसकी टेंडर क्षमता शून्य होनी चाहिए थी। इसके बावजूद उसे सात टेंडरों में 54.05 करोड़ रुपये के काम आवंटित किए गए। ऑडिट में ऐसे आवंटनों की कुल राशि 159.36 करोड़ रुपये तक बताए जाने का उल्लेख है।
CAG ने टेंडर प्रक्रिया में नियमों के पालन और विभागीय निगरानी को लेकर सवाल उठाए हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के ऑडिट में भी लाभार्थियों के चयन और योजना के लक्ष्य को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
राज्य में करीब 22.34 लाख पात्र ग्रामीण परिवारों की पहचान की गई थी। हालांकि, केंद्र की ओर से राज्य को 16.02 लाख आवासों का ही लक्ष्य मिला। इसके चलते करीब 6.32 लाख पात्र परिवार, यानी लगभग 28 फीसदी, तत्काल योजना के लाभ से बाहर रह गए।
इसका मतलब यह हुआ कि बड़ी संख्या में ऐसे ग्रामीण परिवार, जिन्हें आवास की जरूरत थी और जो पात्रता पूरी करते थे, उन्हें उपलब्ध लक्ष्य के भीतर आवास नहीं मिल सका।
CAG की रिपोर्ट में लाभार्थी चयन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, PMAY-G की प्रतीक्षा सूची में करीब 2.90 लाख ऐसे लोगों के नाम शामिल पाए गए, जो पात्र नहीं थे।
बाद में जांच के दौरान इन नामों को सूची से हटाया गया। इससे लाभार्थियों की पहचान और योजना की निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
ऑडिट में यह भी सामने आया कि झारखंड को ODF घोषित किए जाने के बावजूद पूर्ण हो चुके करीब 8 फीसदी PMAY-G आवासों में शौचालय का निर्माण नहीं हुआ था।
इस स्थिति से योजना के तहत केवल मकान निर्माण पर ही नहीं, बल्कि आवास के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और जमीनी स्तर पर निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
CAG की रिपोर्ट में सामने आए मामलों से जल जीवन मिशन और PMAY-G जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में निगरानी, पात्रता जांच और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
एक ओर जहां जल जीवन मिशन में बड़े मूल्य के ठेकों के आवंटन को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं, वहीं दूसरी ओर PMAY-G में पात्र परिवारों के वंचित रहने और अपात्र नामों के शामिल होने का मामला सामने आया है।
अब इन ऑडिट निष्कर्षों पर राज्य सरकार और संबंधित विभागों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर नजर रहेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन अब राजनीतिक टकराव में बदलता जा रहा है। रांची में विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में बुधवार को झारखंड भाजपा के सांसदों ने संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने किया। भाजपा सांसदों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाए और छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। आदित्य साहू ने राहुल गांधी पर लगाया आरोप संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि झारखंड में कांग्रेस के समर्थन से सरकार चल रही है और छात्र आंदोलन को लेकर कांग्रेस चुप है। उन्होंने दावा किया कि 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज राहुल गांधी के इशारे पर हुआ। हालांकि, यह भाजपा नेता का आरोप है। इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं रखा गया है। आदित्य साहू ने कहा कि छात्रों की मुख्य मांग कथित परीक्षा गड़बड़ियों की CBI जांच कराना है। उन्होंने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेतृत्व से छात्रों के मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। ‘सरकार को छात्रों से बात करनी चाहिए’ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं और सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र लंबे समय से आमरण अनशन पर हैं। उन्होंने रांची के प्रशासनिक अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि प्रदर्शनकारियों को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। झारखंड बंद की चेतावनी आदित्य साहू ने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ किसी तरह की अप्रिय घटना होती है तो भाजपा और जनता के साथ मिलकर अनिश्चितकालीन झारखंड बंद किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध जारी रहेगा और सरकार को परीक्षा संबंधी विवादों पर जवाब देना होगा। राहुल गांधी बोले- हिंसा का समर्थन नहीं इस बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि वह झारखंड के छात्र आंदोलन के मुद्दे पर चुप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह पहले ही सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट कर चुके हैं कि छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा को सही नहीं माना जा सकता। राहुल गांधी की इस प्रतिक्रिया के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के आसार हैं। JPSC-JSSC विवाद बना राजनीतिक मुद्दा JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में छात्र आंदोलन कई दिनों से जारी है। प्रदर्शनकारी छात्र विभिन्न परीक्षाओं की जांच, परिणाम रद्द करने और CBI जांच समेत कई मांगें उठा रहे हैं। छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद अब यह मुद्दा विधानसभा से निकलकर संसद तक पहुंच गया है, जिससे झारखंड में सियासी तापमान और बढ़ गया है।
रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकने के आरोपी अमरनाथ पांडेय को रांची की अदालत ने जमानत दे दी है। अदालत ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को आरोपी को राहत दी। 7 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान हुआ था स्याहीकांड यह घटना 7 अगस्त 2026 को रांची में झारखंड विधानसभा की ओर निकाले गए विरोध मार्च के दौरान हुई थी। नेहा बोरा JPSC, JSSC CGL और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल थीं। इसी दौरान उन पर काली स्याही फेंकी गई थी। पुलिस ने घटना के बाद आरोपी को हिरासत में लिया था। आरोपी अमरनाथ पांडेय को मिली जमानत मामले में गिरफ्तार अमरनाथ पांडेय को रांची सिविल कोर्ट से जमानत मिल गई। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी को रिहा किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। छात्र आंदोलन के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद स्याही फेंकने की घटना ने पहले से जारी JPSC-JSSC आंदोलन के बीच राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया था। छात्र संगठन परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, नेहा बोरा पर हुए हमले को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया था। मामले की जांच जारी अदालत से जमानत मिलने के बावजूद स्याही फेंकने की घटना से जुड़ी जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। जमानत मिलना आरोपों से बरी होना नहीं है; मामले में अंतिम निर्णय आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।
रांची: राजधानी रांची में रेलवे फाटकों पर लगने वाले लंबे जाम से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में सात ब्रिज और दो सबवे का निर्माण कराया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ट्रेन के गुजरने पर वाहनों को फाटक खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सड़क और रेल यातायात अलग-अलग होने से आवागमन आसान होगा और दुर्घटनाओं का खतरा भी कम होगा। इन परियोजनाओं को अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रांची रेलवे स्टेशन, बिरसा चौक, नयासराय, पिस्का, केतारी बागान, चुटिया, हटिया-बालसिरिंग और नामकुम-टाटीसिलवे जैसे इलाकों में इसका सीधा असर दिखाई देगा। फाटक बंद होते ही लगती है वाहनों की कतार फिलहाल रांची के कई रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन गुजरने के दौरान फाटक बंद कर दिए जाते हैं। कुछ ही मिनटों में सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। ट्रेन के गुजरने के बाद फाटक खुलते ही दोनों तरफ से वाहन एक साथ आगे बढ़ते हैं, जिससे आसपास के चौराहों पर भी जाम की स्थिति बन जाती है। ब्रिज और सबवे बनने के बाद सड़क यातायात रेलवे लाइन से अलग हो जाएगा। इससे वाहन चालकों को रुकने और दोबारा चलने की समस्या से राहत मिलेगी। समय के साथ ईंधन की भी बचत होगी। इमरजेंसी वाहनों को भी मिलेगा फायदा रेलवे फाटकों पर लगने वाला जाम केवल आम वाहन चालकों के लिए परेशानी नहीं है। कई बार एंबुलेंस, दमकल और अन्य जरूरी सेवाओं के वाहनों को भी ट्रेन के गुजरने तक रुकना पड़ता है। नए ब्रिज और सबवे तैयार होने के बाद ऐसे वाहनों को रेलवे फाटक खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय कम करने में मदद मिलेगी। रांची रेलवे स्टेशन पर उत्तर-दक्षिण हिस्से को जोड़ेगा ब्रिज रांची रेलवे स्टेशन के उत्तर और दक्षिण गेट को जोड़ने वाले ब्रिज का निर्माण जारी है। यह ब्रिज उत्तर दिशा में ऑयल डिपो के पास से शुरू होकर दक्षिण गेट की ओर जाएगा। करीब 447 करोड़ रुपये की स्टेशन पुनर्विकास परियोजना में इस कनेक्टिविटी का प्रावधान किया गया है। इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तैयार होने से कांटाटोली की ओर से आने-जाने वाले लोगों को भी सुविधा मिलेगी। बिरसा चौक पर बनेगा नया ब्रिज बिरसा चौक पर भी अतिरिक्त ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। नया ब्रिज शुरू होने के बाद पुराने ब्रिज को हटाने की योजना है। इससे बिरसा चौक और आसपास के व्यस्त इलाकों में यातायात को नए तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। नयासराय में ब्रिज का काम अंतिम चरण में नयासराय में बन रहे ब्रिज का निर्माण लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। फिलहाल एप्रोच रोड का काम प्रमुख रूप से बाकी है। परियोजना को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। ब्रिज शुरू होने के बाद रेलवे लाइन पार करने के लिए वाहनों को फाटक पर ट्रेन के गुजरने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पिस्का में फाटक होगा बंद पिस्का क्षेत्र में भी ब्रिज का निर्माण जारी है। परियोजना पूरी होने के बाद संबंधित रेलवे फाटक को बंद कर दिया जाएगा। इससे ट्रेन के आवागमन के दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगने की समस्या खत्म करने में मदद मिलेगी। इस परियोजना के पूरा होने में करीब एक वर्ष लगने की संभावना जताई गई है। केतारी बागान में 920 मीटर लंबा स्ट्रक्चर केतारी बागान में रेलवे फाटक के स्थान पर ब्रिज बनाया जा रहा है। परियोजना में मुख्य ब्रिज की लंबाई करीब 540 मीटर है, जबकि एप्रोच रोड को मिलाकर इसकी कुल लंबाई लगभग 920 मीटर होगी। इसे पूरा होने में करीब दो वर्ष लगने की संभावना है। ब्रिज शुरू होने के बाद केतारी बागान और आसपास के इलाकों में रेलवे क्रॉसिंग के कारण होने वाले यातायात व्यवधान में कमी आएगी। चुटिया और हटिया-बालसिरिंग में भी काम जारी पावर हाउस, चुटिया के पास रेलवे ब्रिज का निर्माण चल रहा है। इसके पूरा होने में करीब दो वर्ष लगने की संभावना है। वहीं हटिया-बालसिरिंग के बीच भी ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। इसे करीब तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है। इन दोनों परियोजनाओं के बाद रेलवे लाइन के कारण सड़क यातायात रुकने की समस्या कम होगी। स्मार्ट सिटी को हटिया स्टेशन से जोड़ेगा LHS हटिया स्टेशन के पास एचईसी स्मार्ट सिटी को स्टेशन से जोड़ने के लिए LHS (Limited Height Subway) का निर्माण किया जा रहा है। इसे मार्च 2028 तक पूरा करने की योजना है। इसके शुरू होने के बाद स्मार्ट सिटी क्षेत्र से हटिया स्टेशन आने-जाने वाले लोगों को रेलवे लाइन के कारण होने वाले यातायात व्यवधान से राहत मिलेगी। नामकुम-टाटीसिलवे में दिसंबर तक सबवे नामकुम-टाटीसिलवे क्षेत्र में भी सबवे का निर्माण कराया जा रहा है। इसे दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। सबवे चालू होने के बाद वाहनों को रेलवे फाटक पर रुककर ट्रेन के गुजरने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नौ परियोजनाओं से बदलेगी रांची की ट्रैफिक तस्वीर सात ब्रिज और दो सबवे की ये परियोजनाएं अलग-अलग इलाकों की समस्याओं को दूर करने के साथ रांची की पूरी यातायात व्यवस्था पर असर डाल सकती हैं। रेलवे फाटकों पर वाहनों के रुकने का समय कम होने से प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा। फाटक के दोनों ओर बनने वाली लंबी कतारों का दबाव आसपास के चौराहों पर भी कम होगा। वाहन चालकों को समय और ईंधन की बचत होगी, जबकि सड़क और रेल यातायात के अलग होने से क्रॉसिंग पर दुर्घटनाओं की आशंका भी घटेगी। प्रमुख परियोजनाएं और समयसीमा क्षेत्र परियोजना लक्ष्य रांची रेलवे स्टेशन उत्तर-दक्षिण ब्रिज मार्च 2027 बिरसा चौक नया ब्रिज मार्च 2027 नयासराय ब्रिज व एप्रोच रोड दिसंबर 2026 नामकुम-टाटीसिलवे सबवे दिसंबर 2026 पिस्का रेलवे ब्रिज करीब 1 वर्ष केतारी बागान 540 मीटर मुख्य ब्रिज, कुल 920 मीटर करीब 2 वर्ष चुटिया रेलवे ब्रिज करीब 2 वर्ष हटिया-बालसिरिंग रेलवे ब्रिज करीब 3 वर्ष हटिया स्टेशन-स्मार्ट सिटी LHS मार्च 2028 रेल और सड़क यातायात होगा अलग रांची रेल मंडल के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल जाम कम करना नहीं है। सड़क यातायात को रेलवे क्रॉसिंग से अलग करने से ट्रेनों के परिचालन में बाधा कम होगी और रेलवे फाटकों पर होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका भी घटेगी। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रांची में कई प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम होने और आवागमन अधिक सुगम होने की उम्मीद है।