झारखंड

Student Hospitalized After Hunger Strike in Ranchi

रांची में भूख हड़ताल पर बैठी छात्रा की तबीयत बिगड़ी, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अस्पताल पहुंचकर जाना हाल

surbhi अगस्त 12, 2026 0
Health Minister Dr Irfan Ansari visits hospitalized student Umme Habiba after her health deteriorates during hunger strike
Irfan Ansari Visits Hunger-Strike Student

रांची: प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों में शामिल उम्मे हबीबा की मंगलवार को तबीयत बिगड़ गई। पिछले आठ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी छात्रा को इलाज के लिए रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

छात्रा की तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने उम्मे हबीबा से मुलाकात कर उनका हाल जाना और डॉक्टरों से स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली।

डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश

स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सकों को छात्रा का समुचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती अन्य आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं की सेहत पर भी लगातार नजर रखने को कहा।

डॉ. अंसारी ने अधिकारियों से कहा कि इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना कर रहे छात्रों को जरूरत के अनुसार तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

'युवाओं को पीड़ा होगी तो हर हाल में मदद करूंगा'

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं को किसी तरह की परेशानी होती है तो वह हर संभव मदद के लिए उनके बीच पहुंचेंगे।

उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा सहायता में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दिन हो या रात, जरूरत पड़ने पर छात्रों की मदद के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार रहेगा।

इलाज के खर्च की चिंता न करने की अपील

सदर अस्पताल में भर्ती आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं से मुलाकात के दौरान मंत्री ने उन्हें इलाज के खर्च को लेकर चिंता नहीं करने का भरोसा दिया।

उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल अधिकारियों को नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि आंदोलन के कारण स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है और छात्रों को अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए।

भूख हड़ताल के तरीके पर पुनर्विचार की अपील

डॉ. इरफान अंसारी ने छात्रों से अपील की कि वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाएं, लेकिन इसके लिए अपनी जिंदगी और स्वास्थ्य को खतरे में न डालें।

उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने आंदोलनकारियों से संवाद के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

राहुल गांधी को बताया युवाओं की आवाज

स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को युवाओं की आवाज बताते हुए कहा कि वह छात्रों के आंदोलन और उनकी स्थिति से जुड़ी जानकारी लगातार ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि युवाओं के अधिकार, न्याय और बेहतर भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस लगातार आवाज उठाती रही है। सरकार भी छात्रों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है।

बातचीत से समाधान निकालने पर जोर

डॉ. अंसारी ने कहा कि किसी भी समस्या का स्थायी समाधान बातचीत और संवाद के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और किसी के बहकावे में नहीं आने की अपील की।

उन्होंने कहा कि युवा अकेले नहीं हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग उनकी समस्याओं और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को लेकर संवेदनशील हैं। आंदोलनकारी छात्रों की स्थिति पर आगे भी नजर रखी जाएगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

झारखंड

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Police and administration officials reach Jaipal Singh Stadium amid ongoing JPSC student protest in Ranchi
जयपाल सिंह स्टेडियम में आधी रात पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम, बाबूलाल मरांडी बोले- छात्रों के आंदोलन को दबाने की कोशिश न करे सरकार

रांची। झारखंड में 14वीं JPSC परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। इसी बीच मंगलवार देर रात रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में पुलिस-प्रशासन की टीम के पहुंचने को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि देर रात प्रशासन ने धरने पर बैठे छात्रों को हटाने की कोशिश की और धरनास्थल की बिजली भी काट दी गई। मरांडी ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच सिटी एसपी, एसएसपी और डीसी समेत कई अधिकारी जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचे थे। छात्रों को हटाने की कोशिश का लगाया आरोप बाबूलाल मरांडी के मुताबिक, प्रशासन की ओर से छात्रों से कहा गया कि JPSC से संबंधित मामला सुलझ चुका है और अब धरना जारी रखने की जरूरत नहीं है। हालांकि, रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने इस दावे से अलग पक्ष रखा। उनके अनुसार, वह छात्रों का हालचाल जानने और उनकी परेशानियों को समझने के लिए धरनास्थल पहुंचे थे। मरांडी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से धरना और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को आधी रात में परेशान करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया। बिजली काटने का भी लगाया आरोप नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि देर रात धरनास्थल की बिजली काट दी गई। इसके बाद छात्रों ने अपने सहयोगियों और अन्य लोगों को फोन कर मौके पर बुलाया। आरोप के अनुसार, भाजपा प्रदेश महामंत्री अमर बावरी, भानु राज सिन्हा समेत कई अन्य लोग भी रात में जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचे। इसके बाद पुलिस और प्रशासन की टीम धीरे-धीरे वहां से वापस लौट गई। 14वीं JPSC परीक्षा रद्द होने के बावजूद क्यों जारी है आंदोलन? मरांडी ने कहा कि सरकार की ओर से 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने का निर्णय छात्रों की सभी मांगों का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, आंदोलन कर रहे छात्रों की सबसे बड़ी मांग परीक्षा में कथित गड़बड़ी की CBI जांच है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कराई जा रही CID जांच पर भी सवाल उठाया। मरांडी का कहना है कि छात्रों और झारखंड की जनता का इस जांच पर भरोसा नहीं है। CBI जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पूरे मामले की जांच CBI से कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने हाई कोर्ट की निगरानी में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की मांग की। उनके अनुसार, इससे परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े सबूत रखने वाले छात्रों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई और निर्दोष लोगों को राहत मिल सकेगी। मरांडी ने सरकार से सवाल किया कि यदि उसे अपनी जांच और कार्रवाई पर पूरा भरोसा है, तो CBI जांच कराने में उसे आपत्ति क्यों है। रात में कार्रवाई को बताया अनुचित नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने का अधिकार है। उन्होंने प्रशासन से धरना खत्म कराने के बजाय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धरनास्थल पर बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहनी चाहिए। साथ ही किसी भी परिस्थिति में लाठीचार्ज या बल प्रयोग करके आंदोलन खत्म करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। आंदोलन बढ़ने की दी चेतावनी मरांडी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्रों के आंदोलन को बलपूर्वक खत्म करने का प्रयास किया गया तो इसकी प्रतिक्रिया पूरे झारखंड में देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि JPSC की परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र राज्य के अलग-अलग जिलों और गांवों से आते हैं। ऐसे में आंदोलन के व्यापक रूप लेने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने 10 अगस्त को बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इससे पहले इतना बड़ा और अनुशासित छात्र आंदोलन नहीं देखा। सरकार से की संयम बरतने की अपील बाबूलाल मरांडी ने सरकार और जिला प्रशासन से छात्रों को चुनौती देने के बजाय उनकी बात सुनने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक खत्म करने के बजाय सरकार को छात्रों की मुख्य मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। नोट: उपरोक्त खबर उपलब्ध कराए गए समाचार पाठ के आधार पर पूरी तरह पुनर्लिखित है। इसमें प्रशासन और विपक्ष की ओर से सामने आए अलग-अलग दावों को उनके पक्ष के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।  

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रांची में बारिश से गेतलसूद डैम का जलस्तर बढ़ा, कभी भी खुल सकते हैं फाटक; निचले इलाकों में अलर्ट

रांची में लगातार हो रही बारिश के कारण गेतलसूद डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने डैम के फाटक खोले जाने की संभावित स्थिति को लेकर आसपास और डाउनस्ट्रीम इलाकों में अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों की नजर लगातार जलस्तर और पानी के बहाव पर बनी हुई है। गेतलसूद डैम पर बढ़ा दबाव मंगलवार को रांची में हुई तेज बारिश के बाद गेतलसूद डैम में पानी की आवक बढ़ गई। जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए विभाग ने एहतियात के तौर पर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि बारिश जारी रहती है और पानी का स्तर निर्धारित सीमा तक पहुंचता है, तो डैम के फाटक खोले जा सकते हैं। फाटक खुलने की स्थिति में डैम से नीचे की ओर जाने वाले क्षेत्रों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। नदी-नाले और डूब क्षेत्र से दूर रहने की अपील जल संसाधन विभाग ने लोगों से नदी, नाले और संभावित डूब क्षेत्र के आसपास जाने से बचने की अपील की है। खासकर तेज बारिश के दौरान पानी के बहाव को पार करने या जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन और विभागीय अधिकारी डैम के जलस्तर तथा जल प्रवाह की लगातार निगरानी कर रहे हैं। परिस्थितियों के अनुसार आगे आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हटिया और गोंदा डैम में भी बढ़ा जलस्तर बारिश का असर रांची के अन्य जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। हटिया और गोंदा डैम के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। लगातार बारिश राजधानी के लिए एक तरफ जलसंकट से राहत की उम्मीद लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर जलाशयों में अत्यधिक पानी जमा होने की स्थिति चुनौती बन सकती है। अगले कुछ घंटे अहम रांची में मौसम की स्थिति को देखते हुए आने वाले कुछ घंटे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि बारिश का दौर जारी रहा और गेतलसूद डैम में पानी की आवक तेज बनी रही, तो फाटक खोलने का निर्णय लिया जा सकता है। ऐसे में डैम के आसपास, निचले इलाकों और नदी-नालों के करीब रहने वाले लोगों को प्रशासन की सूचना पर नजर रखनी चाहिए और किसी भी तरह की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लोगों के लिए जरूरी सावधानी डैम और नदी के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचें। तेज बहाव वाले पानी को पार करने की कोशिश न करें। निचले इलाकों में रहने वाले लोग सतर्क रहें। जलस्तर बढ़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर जाएं। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की एडवाइजरी का पालन करें।

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Former JPSC member Dr Jamal Ahmad denies TDPL links before CID questioning in recruitment exam case
JPSC Scam: CID पूछताछ से पहले डॉ. जमाल अहमद बोले- TDPL से कोई संबंध नहीं, OMR जांच की खुद की थी मांग

रांची: JPSC नियुक्ति परीक्षा मामले में CID की पूछताछ से पहले आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर सफाई दी है। उन्होंने अभय तिवारी या किसी अन्य बिचौलिए से परिचय होने और TDPL एजेंसी से किसी भी तरह का संबंध होने से साफ इनकार किया है। डॉ. जमाल ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जानकारी उन्हें मीडिया रिपोर्टों के जरिए मिली। उन्होंने दावा किया कि इसके उलट उन्होंने खुद TDPL एजेंसी की कार्यप्रणाली में कथित खामियों को आयोग के स्तर पर उठाया था। TDPL से संबंध के आरोपों को बताया गलत CID पूछताछ से पहले अपना पक्ष रखते हुए डॉ. जमाल अहमद ने कहा कि उनका TDPL एजेंसी से कोई व्यक्तिगत या अन्य प्रकार का संबंध नहीं था। उन्होंने अभय तिवारी समेत किसी बिचौलिए से परिचित होने से भी इनकार किया। उनका कहना है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उन्हें आपत्तियां थीं और इसी वजह से उन्होंने मामले को आयोग के सक्षम स्तर पर उठाया था। JPSC अध्यक्ष को पत्र लिखकर जताई थी आपत्ति डॉ. जमाल के अनुसार, उन्होंने TDPL की कार्यप्रणाली को लेकर JPSC अध्यक्ष को लिखित रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने पत्र के माध्यम से एजेंसी के कामकाज को उचित नहीं होने की बात सामने रखी थी। उनका दावा है कि उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाए और एजेंसी के काम से खुद को अलग रखने का अनुरोध भी किया था। OMR शीट की फॉरेंसिक जांच की मांग डॉ. जमाल ने यह भी बताया कि उन्होंने आयोग के अध्यक्ष से OMR शीट की फॉरेंसिक जांच कराने का अनुरोध किया था। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह जांच जरूरी थी। उन्होंने कहा कि TDPL की कार्यप्रणाली उन्हें संतोषजनक और पारदर्शी नहीं लगी थी। इसी कारण उन्होंने एजेंसी से जुड़े कार्यों से खुद को अलग रखने का अनुरोध किया था। CID ने पूछताछ के लिए जारी किया है नोटिस डॉ. जमाल अहमद का यह बयान ऐसे समय आया है, जब CID ने JPSC नियुक्ति परीक्षा मामले की जांच के सिलसिले में उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। पूछताछ से पहले डॉ. जमाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए TDPL और कथित बिचौलियों से संबंध से इनकार किया है। अब CID की पूछताछ और जांच में उनके दावों समेत मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।  

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