झारखंड

₹7.59 Crore Burudih Bypass Delayed for 14 Months

7.59 करोड़ की सड़क 14 महीने बाद भी अधूरी, तीन साल से अटका बुरुडीह बाइपास

surbhi अगस्त 12, 2026 0
Incomplete Burudih bypass road project in Kharsawan delayed despite a cost of Rs 7.59 crore
Burudih Bypass Road Project Delay

खरसावां: सरायकेला-खरसावां जिले में खरसावां-सरायकेला मुख्य मार्ग पर बन रहा बुरुडीह बाइपास लंबे समय से अधूरा पड़ा है। करीब 7.59 करोड़ रुपये की लागत वाली इस सड़क परियोजना को पूरा करने की तय समयसीमा बीतने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। परियोजना में देरी का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है।

स्थानीय विधायक दशरथ गागराई ने विधानसभा के शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से निर्माण कार्य में तेजी लाने और बाइपास को जल्द पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क पूरी होने से इलाके के लोगों को जाम और यातायात की परेशानी से काफी राहत मिल सकती है।

बुरुडीह गांव के बीच से गुजरता है मुख्य मार्ग

फिलहाल खरसावां-सरायकेला मुख्य सड़क बुरुडीह गांव के बीच से होकर गुजरती है। सड़क की चौड़ाई सीमित होने के कारण यहां रोजाना बड़ी संख्या में यात्री और मालवाहक वाहनों की आवाजाही होती है।

भारी वाहनों के दबाव के कारण अक्सर सड़क पर जाम की स्थिति बन जाती है। यह मार्ग खरसावां और कुचाई प्रखंडों को जिला मुख्यालय सरायकेला से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है।

बाइपास बनने से भारी वाहनों को मिलेगा वैकल्पिक मार्ग

प्रस्तावित बुरुडीह बाइपास के पूरा होने के बाद भारी वाहनों को गांव के भीतर से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। इससे मुख्य सड़क पर वाहनों का दबाव कम होने और स्थानीय लोगों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।

बाइपास के निर्माण से गांव के बीच यातायात कम होने पर सड़क सुरक्षा में भी सुधार की संभावना है।

1.554 किलोमीटर लंबी सड़क पर खर्च होंगे 7.59 करोड़

बुरुडीह बाइपास की लंबाई करीब 1.554 किलोमीटर है। इसके निर्माण पर 7.59 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

यह सड़क बुरुडीह रेलवे ओवरब्रिज के सामने से शुरू होकर बुरुडीह गांव के बाहर से होते हुए पंचू ढाबा तक बनाई जानी है। परियोजना के लिए बुरुडीह, बेगनाडीह और हांसदा मौजा के कुल 98 रैयतों से 10.4595 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है।

चार महीने में पूरा होना था काम, 14 महीने बाद भी अधूरा

जानकारी के अनुसार, परियोजना को पूरा करने के लिए चार महीने की समयसीमा तय की गई थी। लेकिन काम शुरू होने के करीब 14 महीने बाद भी बाइपास पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण में देरी के कारण उन्हें अभी भी उसी संकरी मुख्य सड़क से होकर गुजरना पड़ रहा है। जाम की समस्या भी पहले की तरह बनी हुई है।

विधायक ने विधानसभा में उठाया मामला

निर्माण कार्य में देरी को लेकर विधायक दशरथ गागराई ने विधानसभा में सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने पथ प्रमंडल सरायकेला-खरसावां के अधीन चल रहे इस काम को जल्द पूरा कराने की मांग की।

अब स्थानीय लोगों की नजर सरकार और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर है। यदि बाइपास का निर्माण जल्द पूरा होता है, तो खरसावां-सरायकेला मार्ग पर यातायात का दबाव कम होने के साथ बुरुडीह क्षेत्र को लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या से राहत मिल सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

झारखंड

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रांची में बारिश से गेतलसूद डैम का जलस्तर बढ़ा, कभी भी खुल सकते हैं फाटक; निचले इलाकों में अलर्ट

रांची में लगातार हो रही बारिश के कारण गेतलसूद डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने डैम के फाटक खोले जाने की संभावित स्थिति को लेकर आसपास और डाउनस्ट्रीम इलाकों में अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों की नजर लगातार जलस्तर और पानी के बहाव पर बनी हुई है। गेतलसूद डैम पर बढ़ा दबाव मंगलवार को रांची में हुई तेज बारिश के बाद गेतलसूद डैम में पानी की आवक बढ़ गई। जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए विभाग ने एहतियात के तौर पर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि बारिश जारी रहती है और पानी का स्तर निर्धारित सीमा तक पहुंचता है, तो डैम के फाटक खोले जा सकते हैं। फाटक खुलने की स्थिति में डैम से नीचे की ओर जाने वाले क्षेत्रों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। नदी-नाले और डूब क्षेत्र से दूर रहने की अपील जल संसाधन विभाग ने लोगों से नदी, नाले और संभावित डूब क्षेत्र के आसपास जाने से बचने की अपील की है। खासकर तेज बारिश के दौरान पानी के बहाव को पार करने या जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन और विभागीय अधिकारी डैम के जलस्तर तथा जल प्रवाह की लगातार निगरानी कर रहे हैं। परिस्थितियों के अनुसार आगे आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हटिया और गोंदा डैम में भी बढ़ा जलस्तर बारिश का असर रांची के अन्य जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। हटिया और गोंदा डैम के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। लगातार बारिश राजधानी के लिए एक तरफ जलसंकट से राहत की उम्मीद लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर जलाशयों में अत्यधिक पानी जमा होने की स्थिति चुनौती बन सकती है। अगले कुछ घंटे अहम रांची में मौसम की स्थिति को देखते हुए आने वाले कुछ घंटे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि बारिश का दौर जारी रहा और गेतलसूद डैम में पानी की आवक तेज बनी रही, तो फाटक खोलने का निर्णय लिया जा सकता है। ऐसे में डैम के आसपास, निचले इलाकों और नदी-नालों के करीब रहने वाले लोगों को प्रशासन की सूचना पर नजर रखनी चाहिए और किसी भी तरह की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लोगों के लिए जरूरी सावधानी डैम और नदी के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचें। तेज बहाव वाले पानी को पार करने की कोशिश न करें। निचले इलाकों में रहने वाले लोग सतर्क रहें। जलस्तर बढ़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर जाएं। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की एडवाइजरी का पालन करें।

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JPSC Scam: CID पूछताछ से पहले डॉ. जमाल अहमद बोले- TDPL से कोई संबंध नहीं, OMR जांच की खुद की थी मांग

रांची: JPSC नियुक्ति परीक्षा मामले में CID की पूछताछ से पहले आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर सफाई दी है। उन्होंने अभय तिवारी या किसी अन्य बिचौलिए से परिचय होने और TDPL एजेंसी से किसी भी तरह का संबंध होने से साफ इनकार किया है। डॉ. जमाल ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जानकारी उन्हें मीडिया रिपोर्टों के जरिए मिली। उन्होंने दावा किया कि इसके उलट उन्होंने खुद TDPL एजेंसी की कार्यप्रणाली में कथित खामियों को आयोग के स्तर पर उठाया था। TDPL से संबंध के आरोपों को बताया गलत CID पूछताछ से पहले अपना पक्ष रखते हुए डॉ. जमाल अहमद ने कहा कि उनका TDPL एजेंसी से कोई व्यक्तिगत या अन्य प्रकार का संबंध नहीं था। उन्होंने अभय तिवारी समेत किसी बिचौलिए से परिचित होने से भी इनकार किया। उनका कहना है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उन्हें आपत्तियां थीं और इसी वजह से उन्होंने मामले को आयोग के सक्षम स्तर पर उठाया था। JPSC अध्यक्ष को पत्र लिखकर जताई थी आपत्ति डॉ. जमाल के अनुसार, उन्होंने TDPL की कार्यप्रणाली को लेकर JPSC अध्यक्ष को लिखित रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने पत्र के माध्यम से एजेंसी के कामकाज को उचित नहीं होने की बात सामने रखी थी। उनका दावा है कि उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाए और एजेंसी के काम से खुद को अलग रखने का अनुरोध भी किया था। OMR शीट की फॉरेंसिक जांच की मांग डॉ. जमाल ने यह भी बताया कि उन्होंने आयोग के अध्यक्ष से OMR शीट की फॉरेंसिक जांच कराने का अनुरोध किया था। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह जांच जरूरी थी। उन्होंने कहा कि TDPL की कार्यप्रणाली उन्हें संतोषजनक और पारदर्शी नहीं लगी थी। इसी कारण उन्होंने एजेंसी से जुड़े कार्यों से खुद को अलग रखने का अनुरोध किया था। CID ने पूछताछ के लिए जारी किया है नोटिस डॉ. जमाल अहमद का यह बयान ऐसे समय आया है, जब CID ने JPSC नियुक्ति परीक्षा मामले की जांच के सिलसिले में उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। पूछताछ से पहले डॉ. जमाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए TDPL और कथित बिचौलियों से संबंध से इनकार किया है। अब CID की पूछताछ और जांच में उनके दावों समेत मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।  

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CM Hemant Soren plants a sapling at Jharkhand Assembly during the 77th State Van Mahotsav 2026
झारखंड विधानसभा में 77वां वन महोत्सव: CM हेमंत सोरेन ने किया पौधरोपण, जल संकट पर भी किया आगाह

रांची: झारखंड विधानसभा परिसर में मंगलवार को 77वां राज्यव्यापी वन महोत्सव 2026 आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए और पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने जल, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर लोगों से जिम्मेदारी निभाने की अपील की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की पहचान उसके जल, जंगल, पहाड़ और नदियों से है। प्रकृति यहां के लोगों के जीवन और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। पर्यावरण बचाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी वन महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की देखभाल करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने किया पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विधानसभा परिसर में पौधरोपण किया। उन्होंने पौधों की देखभाल और उनके संरक्षण को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया जितना पौधरोपण को। वन महोत्सव के जरिए राज्य में हरियाली बढ़ाने और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया। विधायकों के आवासीय परिसर में लगेंगे फलदार पौधे मुख्यमंत्री ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों को विधायकों के आवासीय परिसरों में भी फलदार पौधे लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी विधायकों को फलदार पौधे उपलब्ध कराए जाएं और उनके रोपण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे विधानसभा परिसर के साथ-साथ आवासीय क्षेत्रों में भी हरियाली बढ़ाने में मदद मिलेगी। जल संकट को लेकर मुख्यमंत्री ने किया सावधान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भविष्य में बढ़ते जल संकट को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन सकती है। उन्होंने वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे-बड़े सभी शहरों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत है। मंत्री और विधायक भी कार्यक्रम में हुए शामिल वन महोत्सव कार्यक्रम में विधायक कल्पना सोरेन समेत राज्य सरकार के कई मंत्री और विधायक मौजूद रहे। कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और जल संरक्षण को लेकर सामूहिक प्रयास का संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री के पौधरोपण के साथ आयोजित यह कार्यक्रम राज्य में हरियाली बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित रहा।  

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