झारखंड

श्रावणी मेले में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई, 45 किलो एक्सपायरी घी और 56 किलो संदिग्ध पेड़ा नष्ट

abhishek singh अगस्त 7, 2026 0
Expired Ghee and Suspicious Peda
45 Kg Expired Ghee and 56 Kg Suspicious Peda Destroyed

देवघर। राजकीय श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को मिलावटी और खराब खाद्य पदार्थों से बचाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच अभियान तेज कर दिया है। विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए 45 किलो एक्सपायरी घी और 56 किलो संदिग्ध पेड़ा जब्त कर नष्ट कराया। कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में भी हड़कंप मच गया।

 

खाद्य दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच

 

श्रावणी मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर पहुंच रहे हैं। मेले में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें मिठाई, पेड़ा, घी और अन्य खाद्य सामग्री बेचने वाली दुकानों की जांच कर रही हैं।

 

जांच के दौरान अधिकारियों ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि के साथ-साथ भंडारण की स्थिति की भी जांच की। इसी क्रम में एक्सपायरी घी और संदिग्ध पेड़ा बरामद किया गया।

 

45 किलो एक्सपायरी घी और 56 किलो पेड़ा नष्ट

 

जांच के दौरान टीम ने 45 किलो एक्सपायरी घी बरामद किया। इसके अलावा करीब 56 किलो संदिग्ध पेड़ा भी मिला। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने के बाद दोनों खाद्य पदार्थों को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री को रोकना है, जिनके सेवन से श्रद्धालुओं की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

 

दुकानदारों को सख्त चेतावनी

 

खाद्य सुरक्षा विभाग ने मेले में खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों और कारोबारियों को साफ निर्देश दिया है कि वे केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप खाद्य सामग्री की बिक्री करें। अधिकारियों ने एक्सपायरी और खराब खाद्य सामग्री नहीं बेचने, खाद्य पदार्थों को उचित तापमान और स्वच्छ वातावरण में रखने तथा साफ-सफाई के नियमों का पालन करने की हिदायत दी है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर आगे भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

 

श्रावणी मेले में लगातार जारी रहेगा जांच अभियान

 

श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग का जांच अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है। विभाग की टीमें दुकानों, होटलों, मिठाई प्रतिष्ठानों और अन्य खाद्य कारोबारियों की निगरानी कर रही हैं। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए देवघर आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध हों।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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Jharkhand students protest
JPSC-JSSC Protest: CM हेमंत बोले- छात्रों से बातचीत को तैयार

रांची। 14वीं JPSC पीटी परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बार फिर प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को समझने और समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है तथा इस उद्देश्य से गठित समिति संवाद का माध्यम बनेगी।   'सरकार बातचीत के लिए तैयार'   मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहती है। उन्होंने कहा कि बातचीत के लिए बनाई गई समिति के माध्यम से सरकार छात्रों के सुझाव और शिकायतें जानने की इच्छुक है, ताकि उचित समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।   'मुद्दे को जयपाल सिंह स्टेडियम से बाहर तक ले जाना चाहते हैं'   हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार चाहती है कि यह चर्चा केवल जयपाल सिंह स्टेडियम तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे राज्य के छात्र-छात्राएं भी इस विषय पर अपनी राय रखें। उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में व्यापक और मजबूत सुधार (रिफॉर्म) लाने की दिशा में काम करना चाहती है, ताकि युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जा सके।   14 दिनों से जारी है छात्र आंदोलन   14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा समेत अन्य परीक्षाओं को रद्द करने और मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर छात्र पिछले 14 दिनों से रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में धरने पर बैठे हैं। आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल रहा है।   वार्ता पर अब भी बनी हुई है स्थिति   सरकार की ओर से बातचीत की पहल के बावजूद अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच वार्ता की संभावना जताई जा रही है, हालांकि प्रतिनिधिमंडल में शामिल कुछ नामों को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। सत्तापक्ष ने आंदोलन के राजनीतिकरण का आरोप लगाया है।   क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?   छात्रों की मुख्य मांगें हैं कि TDPL कंपनी द्वारा आयोजित JPSC और JSSC की हालिया परीक्षाओं को रद्द किया जाए, पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए और दोनों आयोगों में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ठोस सुधारात्मक कदम उठाए। 

anjali kumari अगस्त 7, 2026 0
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देवघर श्रावणी मेले में महिला श्रद्धालुओं के लिए 10 स्थानों पर मातृत्व विश्राम गृह

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भूख हड़ताल पर बैठे छात्र की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में कराया गया भर्ती

BJP legislators protesting over the alleged JPSC-JSSC recruitment irregularities outside the Jharkhand Assembly in Ranchi.

JPSC-JSSC मामले पर विधानसभा में हंगामा, BJP विधायकों का प्रदर्शन तेज; अनशन कर रहे छात्र की बिगड़ी तबीयत

The submerged low-level bridge over the Roro River in Chaibasa after continuous heavy rainfall.
लगातार बारिश से रोरो नदी उफान पर, छोटा पुल डूबा, चाईबासा में बढ़ी परेशानी

चाईबासा: जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित हो गया है. बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है. चाईबासा की रोरो नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी पर बना छोटा पुल पूरी तरह पानी में डूब गया है. लगातार बारिश के कारण रोरो नदी में पानी का बहाव तेज हो गया है. नदी स्थित छोटा पुलिया पर करीब एक फीट ऊपर से पानी बह रहा है, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह तक लगातार तेज बारिश होती रही, जिसके बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया. 39.7 एमएम बारिश दर्ज मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार सुबह तक चाईबासा में 39.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. भारी बारिश के कारण जिले के कई तालाब, पोखर, खेत और निचले इलाकों में पानी भर गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलभराव की स्थिति देखने को मिल रही है. नदियों के बढ़ते जलस्तर से सतर्क प्रशासन बारिश के कारण नदी-नालों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है. प्रशासन की नजर जलभराव वाले इलाकों पर बनी हुई है. खासकर नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. लगातार बारिश जारी रहने से आने वाले दिनों में जलस्तर और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है.  

kalpana अगस्त 7, 2026 0
Expired Ghee and Suspicious Peda

श्रावणी मेले में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई, 45 किलो एक्सपायरी घी और 56 किलो संदिग्ध पेड़ा नष्ट

Officials and revenue staff attending a two-day Census 2026 training programme in Khunti.

जनगणना 2026 की तैयारी तेज, खूंटी में दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, 20 अगस्त से होगा डाटा संकलन

Election officials reviewing the draft voter list during the SIR-2026 campaign in Garhwa district.

गढ़वा में 47 नए मतदान केंद्र बने, 4 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे दावा-आपत्ति

Officials verifying ration card records during a beneficiary verification drive in Dhanbad.
धनबाद में 23,612 राशन कार्ड होंगे रद्द, आयकरदाता और सरकारी कर्मचारी भी कार्रवाई के दायरे में

धनबाद: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता लाने और सरकारी राशन का लाभ केवल जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए धनबाद जिला प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया है. उपायुक्त आदित्य रंजन के निर्देश पर खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने जिले में 23,612 अपात्र राशन कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. कार्रवाई के तहत केवल कार्डधारक ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सभी सदस्यों के राशन कार्ड भी निरस्त किए जाएंगे. जिला प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई झारखंड लक्षित जन वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2024 में तय पात्रता और अपात्रता के मानकों के आधार पर की जा रही है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ वास्तविक गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक ही पहुंचे. 21,996 आयकरदाता और 123 सरकारी कर्मचारी चिह्नित जिला आपूर्ति विभाग द्वारा तैयार सूची के अनुसार कार्रवाई के लिए बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से सक्षम लाभुकों की पहचान की गई है. विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 21,996 आयकरदाता, 25 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले 1,493 लोग और 123 सरकारी कर्मचारी राशन कार्डधारकों के रूप में चिह्नित किए गए हैं. विभाग ने इन्हें की परफॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) और विभिन्न सरकारी डाटाबेस के सत्यापन के आधार पर अपात्र श्रेणी में रखा है. प्रशासन का मानना है कि ऐसे लोगों द्वारा सरकारी राशन का लाभ लेने से वास्तविक गरीब परिवारों का अधिकार प्रभावित होता है. पूरे परिवार के राशन कार्ड भी होंगे निरस्त उपायुक्त आदित्य रंजन ने बताया कि जिन लाभुकों को अपात्र पाया गया है, उनके साथ उनके परिवार के सभी सदस्यों के राशन कार्ड भी रद्द किए जाएंगे. जिला आपूर्ति विभाग ने इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों के अनुसार विभिन्न सरकारी डाटाबेस से लगातार लाभुकों की जानकारी का मिलान किया जा रहा है, ताकि पात्रता की सही जांच हो सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके. जिले में 4.29 लाख से अधिक राशन कार्ड सरकारी आंकड़ों के अनुसार धनबाद जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत कुल 4,29,887 राशन कार्ड जारी किए गए हैं. इनमें 3,95,681 प्राथमिकता परिवार (PHH) और 34,206 अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के राशन कार्ड शामिल हैं. इन राशन कार्डों के माध्यम से जिले के 18,71,094 लाभुकों को हर महीने रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा जिले में 30,758 श्वेत राशन कार्ड भी जारी किए गए हैं. पात्र लाभुकों को मिलेगा सीधा फायदा जिला प्रशासन का कहना है कि अपात्र लाभुकों के नाम हटने से सरकारी खाद्यान्न योजना अधिक प्रभावी होगी और जरूरतमंद परिवारों को समय पर उनका अधिकार मिल सकेगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी विभिन्न सरकारी रिकॉर्ड और डाटाबेस के आधार पर सत्यापन अभियान जारी रहेगा. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति अपात्र होने के बावजूद राशन योजना का लाभ ले रहा है, तो वह स्वयं आगे आकर जानकारी उपलब्ध कराए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पात्र लाभुकों के हितों की रक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और खाद्य सुरक्षा योजनाओं में किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.  

kalpana अगस्त 7, 2026 0
Jharkhand Fire Tenders

झारखंड को मिले 58 आधुनिक मिनी फायर टेंडर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिखाई हरी झंडी

Municipal workers and JCB machines removing garbage and debris during a mega cleanliness drive in Dhanbad.

धनबाद में चला मेगा सफाई अभियान, पांच वार्डों में विशेष ड्राइव; जेसीबी से हटाया गया कचरा और मलबा

Food Safety Department officials inspecting and seizing fake paneer and mawa during a raid at a dairy shop in Ranchi.

रांची में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, 1000 किलो नकली पनीर और मावा जब्त; मौके पर ही कराया नष्ट

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जम्मू-कश्मीर में 10 दिन में दूसरा आतंकी हमला, तीन की मौत; सुरक्षा व्यवस्था और सख्त

kalpana अगस्त 1, 2026 0

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