गोड्डा। झारखंड के गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र में गुरुवार को दिनदहाड़े पंचायत मुखिया अनुपम भगत उर्फ लड्डू पर जानलेवा हमला किया गया। मुख्य बाजार स्थित पंडित टोला कांबली बगीचा के पास बाइक सवार बदमाशों ने उन पर फायरिंग कर दी। घटना में मुखिया बाल-बाल बच गए, जबकि हमलावर वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने घटनास्थल से एक खाली खोखा बरामद कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, अनुपम भगत भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और करीब से दो राउंड फायरिंग की। गोली उन्हें नहीं लगी और वह सुरक्षित बच निकले। फायरिंग की आवाज से बाजार में अफरा-तफरी मच गई।
मुखिया ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि हमलावरों की पहचान कर ली गई है। उन्होंने नयन यादव, अंकित यादव और विकास यादव समेत अन्य लोगों पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अनुपम भगत वर्ष 2024 के चर्चित शैलेंद्र भगत हत्याकांड के मुख्य गवाह हैं और उन्होंने अदालत में आरोपियों के खिलाफ गवाही भी दी थी। इसी वजह से इस हमले को पुरानी रंजिश और गवाही से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है।
घटना के बाद हजारों ग्रामीण पोड़ैयाहाट थाना पहुंच गए और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर थाना का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुखिया को पहले से धमकियां मिल रही थीं, फिर भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई।
फिलहाल इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कोडरमा। कोडरमा जिले के प्रसिद्ध केशरिया कलाकंद को अब भौगोलिक संकेत (GI Tag) मिल गया है। इस उपलब्धि के बाद स्थानीय मिठाई कारोबारियों और लोगों में खुशी की लहर है। यह मान्यता न सिर्फ इस पारंपरिक मिठाई की पहचान को मजबूत करेगी, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई ऊंचाई भी देगी। झारखंड के 11 उत्पादों को मिला GI टैग GI टैग मिलने के साथ ही झारखंड के कुल 11 पारंपरिक उत्पादों को यह विशेष पहचान मिली है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— कोडरमा का केशरिया कलाकंद गोड्डा का भगैया सिल्क सरायकेला-खरसावां का कुचाई सिल्क मुंडा ज्वेलरी खूंटी का बांस शिल्प डोकरा क्राफ्ट दुमका के चंदर बदोनी पपेट्स तसर सिल्क और साड़ी जादूपटुआ पेंटिंग पंची साड़ी झारखंड हैंडीक्राफ्ट उत्पाद इस प्रक्रिया में नाबार्ड (NABARD) की भी अहम भूमिका रही है, जिसने GI टैग की पुष्टि की। कोडरमा के केशरिया कलाकंद का ऐतिहासिक सफर कोडरमा के झुमरीतिलैया का केशरिया कलाकंद आज सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक पहचान बन चुका है। इसका इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ बताया जाता है। स्थानीय व्यापारी रवि अग्रवाल के अनुसार, विभाजन के बाद पाकिस्तान के रावलपिंडी से आए भाटिया परिवार ने कोडरमा में इस मिठाई की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में इसे “भाटिया स्वीट्स” के नाम से बेचा जाता था और उस समय सफेद कलाकंद प्रसिद्ध था। 1975 में बना केशरिया कलाकंद 1975 में झुमरीतिलैया के आदर्श जलपान के एक कारीगर ने प्रयोग करते हुए पहली बार केशरिया कलाकंद तैयार किया। इसके बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और 1977 में यह दुकान “आनंद बिहार मिठाई” के रूप में स्थापित हुई। आज भी झुमरीतिलैया की कई दुकानों में यह मिठाई बनाई जाती है और इसकी मांग लगातार बढ़ ही रही है। विदेशों तक पहुंची कोडरमा की मिठास केशरिया कलाकंद की पहचान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी इसकी मांग बनी हुई है। प्रवासी भारतीय जब अपने देश लौटते हैं तो वे अक्सर यह मिठाई अपने साथ ले जाना नहीं भूलते। स्थानीय लोगों का मानना है कि झुमरीतिलैया की जलवायु और परंपरागत बनाने की विधि इसके स्वाद को खास बनाती है। GI टैग से मिलेगा बड़ा लाभ GI टैग मिलने के बाद कोडरमा के केशरिया कलाकंद को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी। इससे— उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी स्थानीय कारीगरों की आय में वृद्धि होगी नकली उत्पादों पर रोक लगेगी पारंपरिक विरासत को कानूनी सुरक्षा मिलेगी GI टैग किसी भी विशेष भौगोलिक क्षेत्र के उत्पाद को दी जाने वाली पहचान है, जो उसकी विशिष्टता और गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। कोडरमा के केशरिया कलाकंद को मिला GI टैग झारखंड की सांस्कृतिक और पाक विरासत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल स्थानीय पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि इस पारंपरिक मिठाई को वैश्विक मंच पर भी नई ऊंचाई तक पहुंचाएगा।
Jharkhand Weather News: झारखंड में पिछले कुछ दिनों से कमजोर पड़े मॉनसून के बीच अब मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार से राज्य में मॉनसून के सक्रिय होने की संभावना है। इसके चलते रांची समेत 17 जिलों में तेज आंधी, बारिश और वज्रपात को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 18 और 19 जून को इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 18 और 19 जून को दोपहर के बाद मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है। रांची के अलावा खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ जिलों में तेज बारिश और आंधी की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही मेघ गर्जन और वज्रपात की भी आशंका है। इसी को देखते हुए मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बाकी जिलों के लिए येलो अलर्ट राज्य के शेष सात जिलों में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। यहां तेज हवा, गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कहीं-कहीं वज्रपात हो सकता है। इन क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। रांची का तापमान कैसा रहेगा? मौसम विभाग के अनुसार 18 और 19 जून को राजधानी रांची का अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। दिन में उमस बनी रह सकती है, लेकिन शाम के समय मौसम सुहावना होने की संभावना है। 20 जून को भी जारी रहेगा बारिश का दौर पूर्वानुमान के मुताबिक 20 जून को भी झारखंड के कई हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा कुछ स्थानों पर वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। जून में सामान्य से 56 प्रतिशत कम हुई बारिश मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 17 जून के बीच झारखंड में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। इस अवधि में राज्य में 67 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक वर्षा सामान्य से 56 प्रतिशत कम रही। ऐसे में मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने से किसानों और आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए? खराब मौसम के दौरान खुले मैदान में जाने से बचें। बिजली चमकने के समय पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। तेज हवा के दौरान सुरक्षित स्थान पर शरण लें। मौसम विभाग की चेतावनियों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दूरदर्शी सोच और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत ने झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। राज्य सरकार की पहल और ‘पलाश’ ब्रांड के तहत संचालित झारखंड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव आज हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का मजबूत आधार बन चुका है। कभी स्थानीय बाजारों तक सीमित रहने वाला झारखंड का आम्रपाली आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहा है। दुबई और लंदन जैसे वैश्विक शहरों तक झारखंड के आम की पहुंच राज्य की इस सफलता की बड़ी मिसाल बन गई है। बिरसा हरित ग्राम योजना से आई क्रांति कोरोना काल के दौरान शुरू की गई बिरसा हरित ग्राम योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में शुरू हुई इस योजना का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। राज्य के करीब 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में आम के बगीचे विकसित किए गए हैं, जिससे लगभग 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को रोजगार और स्थायी आय का स्रोत मिला है। 50 हजार मीट्रिक टन आम उत्पादन का अनुमान वर्तमान में लगभग 52 हजार एकड़ क्षेत्र के आम बागान तुड़ाई के लिए तैयार हैं। इस सीजन में करीब 50 हजार मीट्रिक टन आम उत्पादन का अनुमान लगाया गया है, जो राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने वाला साबित हो सकता है। ग्रामीण महिलाएं ही कर रही मार्केटिंग झारखंड की सखी मंडल की महिलाएं इस पूरी पहल की असली ताकत बनकर उभरी हैं। आम के संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक की जिम्मेदारी महिलाएं खुद संभाल रही हैं। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (JSLPS) द्वारा किसानों को फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) से जोड़कर बेहतर बाजार और उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा रहा है। समाज में बढ़ा कद महिलाओं की भागीदारी ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि ग्रामीण समाज में उनकी भूमिका को भी नई पहचान दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी झारखंड के आम की मांग वित्तीय वर्ष 2026-27 में झारखंड ने आम निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। सिमडेगा जिले से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम लंदन भेजे गए हैं। वहीं रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई निर्यात किए जा चुके हैं। राज्य के कृषि उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान राज्य के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जैसे जिले अहम भूमिका निभा रहे हैं। आम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की तकनीकी सहायता भी ली जा रही है। 60 लाख से अधिक का कारोबार पलाश ब्रांड के तहत राज्य में अब तक 2,24,200 किलोग्राम आम की बिक्री हो चुकी है, जिससे ₹60.51 लाख से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। राज्य के 115 से अधिक FPO इस अभियान से जुड़े हुए हैं। बाजार विस्तार के लिए ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे बड़े कॉर्पोरेट संस्थानों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। यदि यह साझेदारी सफल होती है, तो झारखंड के किसानों और ग्रामीण महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बाजार मिल सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया मॉडल बन रहा झारखंड पलाश ब्रांड की सफलता यह साबित करती है कि यदि सरकारी योजनाओं को सही दिशा और बाजार से जोड़ दिया जाए तो ग्रामीण विकास की नई कहानी लिखी जा सकती है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का यह मॉडल न केवल किसानों और महिलाओं की आय बढ़ा रहा है बल्कि झारखंड को कृषि निर्यात के नए केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रहा है।