झारखंड

Hazaribagh RTE 2026: 279 Kids to Join Private Schools

हजारीबाग में RTE एडमिशन प्रक्रिया पूरी: 500 से ज्यादा आवेदन, 279 बच्चों को मिलेगा निजी स्कूलों में पढ़ने का मौका

surbhi मार्च 17, 2026 0
Hazaribagh RTE admission process with children and school registration forms
Hazaribagh RTE 2026 Admission Update

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों में नामांकन के लिए इस साल जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। निर्धारित समय सीमा खत्म होने तक 500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। अब शिक्षा विभाग द्वारा जांच (स्क्रूटनी) के बाद 279 बच्चों का चयन कर संबंधित स्कूलों को सूची भेजी जाएगी।

 

14 मार्च को खत्म हुई आवेदन की डेडलाइन

शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 14 मार्च तय की गई थी। इस दौरान बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आवेदन किया।

जिला प्रशासन की निगरानी में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जा रही है। उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह लगातार नामांकन प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।

 

23 निजी स्कूलों में होगा नामांकन

जिले के कुल 23 निजी स्कूलों में RTE के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अवसर मिलेगा। चयनित बच्चों को एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र में प्रवेश दिया जाएगा।

 

इन स्कूलों में सबसे ज्यादा आवेदन

इस बार कुछ स्कूलों में आवेदन की संख्या काफी ज्यादा रही। खासकर:

  • बरकट्ठा का डिवाइन पब्लिक स्कूल गंगपाचो
  • चौपारण का सुरेखा प्रकाश भाई पब्लिक स्कूल बहेरा
  • शहरी क्षेत्र का नेशनल पब्लिक स्कूल
  • इचाक का चैंपियन बेसिक अकैडमी

इन सभी स्कूलों में 20-20 सीटों पर नामांकन किया जाएगा।

 

कहीं ज्यादा तो कहीं कम सीटें

जहां कई स्कूलों में अधिक सीटें निर्धारित हैं, वहीं कुछ स्कूलों में सीटें सीमित हैं। उदाहरण के तौर पर डाडी प्रखंड के डीएवी पब्लिक स्कूल गिद्दी-ए में केवल 5 बच्चों का ही नामांकन होगा।

इसके अलावा शहर के प्रमुख स्कूलों जैसे दिल्ली पब्लिक स्कूल, संत पॉल स्कूल, संत स्टेफन स्कूल, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर और अन्य संस्थानों में भी अलग-अलग कक्षाओं के लिए सीटें तय की गई हैं।

 

स्क्रूटनी के बाद जारी होगी फाइनल सूची

अब शिक्षा विभाग सभी आवेदनों की गहन जांच करेगा। इसके बाद योग्य 279 बच्चों की सूची तैयार कर संबंधित स्कूलों को भेजी जाएगी, ताकि समय पर नामांकन प्रक्रिया पूरी हो सके।

 

हर सीट पर होगा RTE के तहत एडमिशन

जिला शिक्षा अधीक्षक आकाश कुमार ने स्पष्ट किया कि तय समय सीमा के भीतर सभी सीटों पर RTE के तहत नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए विभाग हर स्तर पर गंभीरता से काम कर रहा है।

 

गरीब बच्चों के लिए शिक्षा का बड़ा अवसर

RTE के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा मिलती है। हजारीबाग में इस योजना के जरिए सैकड़ों बच्चों को बेहतर शिक्षा और उज्जवल भविष्य का मौका मिलने जा रहा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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मनरेगा मजदूरों की अब बनेगी ऑनलाइन हाजिरी

रांची। रांची जिले के अनगड़ा प्रखंड में मनरेगा कार्यों को और उचित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ी पहल की गई है। यहां मनरेगा विभाग की ओर से डिजिटल कर्मियों को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में मनरेगा मेट, पंचायत सचिव और लाभार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य मनरेगा से जुड़े लोगों को नई डिजिटल व्यवस्था की जानकारी देना और उसे सही तरीके से लागू करना था। मौके पर प्रशिक्षण प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) जयपाल सोय और बीपीओ अवनीन्द्र कुमार ने एनएमएमएस और ई-केवाईसी की जानकारी दी।  इस दौरान राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (NMMS), ई-केवाईसी और जन-मनरेगा ऐप के बारे में विस्तार से बताया गया। अधिकारियों ने समझाया कि इन डिजिटल प्रणालियों के जरिए मनरेगा कार्यों की निगरानी पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी होगी।   अब ऑनलाइन लगेगी मजदूरों की हाजिरी बीडीओ जयपाल सोय ने बताया कि अब एनएमएमएस सिस्टम के जरिए मजदूरों की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इसके तहत कार्यस्थल पर काम कर रहे मजदूरों की दो पालियों में फोटो अपलोड करनी होगी। यानी अब मास्टररोल में सिर्फ कागजी उपस्थिति नहीं चलेगी, बल्कि मौके पर मौजूद मजदूरों की तस्वीर के जरिए उपस्थिति दर्ज होगी। इससे फर्जी हाजिरी और गड़बड़ी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।   निगरानी व्यवस्था होगी और मजबूत अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से मनरेगा कार्यों की मॉनिटरिंग और बेहतर होगी। इससे योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और काम की गुणवत्ता पर भी नजर रखना आसान होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सरकार लगातार डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है।   ‘विकसित भारत’ मिशन की भी दी गई जानकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बीडीओ जयपाल सोय ने भारत सरकार की आगामी योजना ‘विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-GRAMJI के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करना है। इस मौके पर सहायक अभियंता दुक्खू राम सोरेन, कनीय अभियंता गौतम कुमार, विश्वजीत यादव समेत कई अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।

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गिरिडीह में 14 साल की बच्ची बनी मां, सदर अस्पताल के टॉयलेट में जन्मा बच्चा  कमर दर्द की शिकायत पर आई थी हॉस्पिटल

गिरिडीह। गिरिडीह के सदर अस्पताल से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां शुक्रवार की शाम 14 साल नाबालिग छात्रा ने अस्पताल के शौचालय में बच्चे को जन्म दिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। नौवीं कक्षा की छात्रा है जानकारी के अनुसार जिस छात्रा ने बच्चे को जन्म दिया वह बेंगाबाद थाना क्षेत्र की रहने वाली है। वह नौवीं कक्षा की छात्रा है। फिलहाल नवजात और प्रसूता दोनों को बेहतर इलाज के लिए चैताडीह स्थित मातृत्व एवं शिशु अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां दोनों की स्थिति पर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है। कमर दर्द की शिकायत पर अस्पताल पहुंची थी छात्रा परिजनों के मुताबिक, शुक्रवार को स्कूल में गर्मी की छुट्टी होने के बाद छात्रा घर लौटी थी। घर पहुंचने के कुछ समय बाद उसने कमर दर्द की शिकायत की। परिजनों ने इसे सामान्य शारीरिक समस्या समझते हुए उसे इलाज के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल ले गए। अस्पताल में भर्ती होने के बाद देर शाम वह शौचालय गई, जहां उसने एक नवजात को जन्म दे दिया। इस घटना से परिजन और अस्पताल कर्मी दोनों ही अचंभित रह गए। रक्तस्राव की हालत में बाहर निकली बताया जाता है कि नवजात को जन्म देने के बाद नाबालिग रक्तस्राव की गंभीर स्थिति में ही शौचालय से बाहर निकलकर जाने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की नजर उस पर पड़ी। स्थिति को भांपते हुए कर्मियों ने तत्काल उसे रोका। इसके बाद उससे पूछताछ की, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए शौचालय से नवजात को सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार शुरू किया। समय पर हस्तक्षेप के कारण मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकी। मातृत्व एवं शिशु अस्पताल भेजा गया चिकित्सकों की सलाह पर नाबालिग और नवजात को एंबुलेंस के माध्यम से चैताडीह स्थित मातृत्व एवं शिशु अस्पताल भेजा गया है। एसएनसीयू में भर्ती नवजात, जांच में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सदर अस्पताल पहुंची। मामले की जांच शुरू कर दी। वहां नवजात को एसएनसीयू में भर्ती किया गया है। जबकि नाबालिग का भी यहीं इलाज जारी है। अस्पताल प्रबंधन ने घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

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रांची। रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में महिला कैदी के साथ कथित यौन शोषण के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया हैI कोर्ट ने राज्य के डीजीपी से इस मामले में दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी हैI मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने साफ कहा कि जेल जैसी सुरक्षित जगह में अगर इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, तो यह बेहद चिंताजनक हैI मामला रांची जेल में बंद एक महिला कैदी से जुड़ा हैI आरोप है कि जेल के अंदर उसके साथ यौन शोषण हुआI  पूरे राज्य में मचा हड़कंप यह मामला सामने आने के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गयाI घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जेल जैसी हाई सिक्योरिटी जगह में ऐसी घटना कैसे हुईI सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैंI हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान मामले को गंभीर मानते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लियाI कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा हैI  सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जेल प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ कैदियों को बंद रखना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी हैI   डीजीपी को दो हफ्ते का समय हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक यानी DGP को निर्देश दिया है कि मामले की जांच रिपोर्ट दो हफ्ते के भीतर कोर्ट में पेश की जाएI कोर्ट यह जानना चाहता है कि अब तक जांच में क्या सामने आया है, किस स्तर पर लापरवाही हुई और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गईI इस मामले के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैंI लोगों का कहना है कि अगर जेल के अंदर ही महिला कैदी सुरक्षित नहीं हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से सोचने की जरूरत हैI मानवाधिकार और महिला संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की हैI हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ गया हैI माना जा रहा है कि मामले में जल्द कुछ बड़े फैसले या कार्रवाई हो सकती हैI  विपक्ष जुटा सरकार को घेरने मे राज्य में विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेर रहे हैं और जेल व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैंI

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