झारखंड

हजारीबाग से बस यात्रा हुई महंगी, 15 से 20 फीसदी तक बढ़ा किराया

abhishek singh जून 20, 2026 0
Hazaribagh Bus Stand
Hazaribagh Bus Fare Hike

हजारीबाग। हजारीबाग से विभिन्न शहरों के लिए बस से सफर करने वाले यात्रियों को अब पहले से अधिक किराया चुकाना होगा। हजारीबाग जिला बस ऑनर एसोसिएशन ने बस किराए में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें शुक्रवार से तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। किराया बढ़ने से रोजाना बस से यात्रा करने वाले यात्रियों के मासिक खर्च में भी इजाफा होगा।

 

बस संचालकों का कहना है कि डीजल, स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इसी वजह से किराए में संशोधन करना आवश्यक हो गया था। नई दरें हजारीबाग से संचालित लगभग सभी प्रमुख रूटों पर लागू कर दी गई हैं।

 

नई दरें कुछ इस प्रकार हैं

 

मार्ग (हजारीबाग से)    किराया (₹)

 

  • रामगढ़                        120
  • रांची                                230
  • टाटा (जमशेदपुर)        480
  • बोकारो (भाया रामगढ़)        280
  • बरही                                  85
  • चौपारण                        120
  • इटखोरी (भाया बरही)        150
  • इटखोरी (भाया करमा)        120
  • कान्हाचट्टी                        180
  • दारू                                 40
  • टाटीझरिया                         60
  • विष्णुगढ़                         85
  • नवादा/बनासो               100
  • गोमिया                       155
  • तेनुघाट                       180
  • फुसरो                       215
  • पेटरवार                       215
  • चंद्रपुरा                       240
  • दुघदा                       250
  • बोकारो                       285
  • शीला                                 60
  • सिमरिया                      120
  • बगरा                           140
  • चतरा                              170
  • बारियातु                      180
  • बालूमाथ                      215
  • चंदवा                      240
  • लातेहार                      300
  • डाल्टेनगंज                      420
  • कटकमसांडी                60
  • गिद्धौर                      120
  • टंडवा                      120
  • बड़कागांव                       60
  • विश्रामपुर                       85
  • बादम                       95
  • नापो                              100
  • टंडवा (भाया बड़कागांव) 120
  • बचरा/खेलारी              180
  • बगोदर                      120
  • डुमरी/इसरी              180
  • गिरिडीह                      280
  • तोपचांची                      240
  • राजगंज                      240
  • धनबाद                      280
  • कतरास                       280
  • झरिया                     280
  • आसनसोल                     360
  • दुर्गापुर                     400
  • वर्द्धमान                      480
  • कलकत्ता सीट (नॉन एसी) 600
  • कलकत्ता स्लीपर (नॉन एसी) 700
  • कलकत्ता सीट (एसी)        960
  • कलकत्ता स्लीपर (एसी)       1200
  • कलकत्ता (वोल्वो)          1400
  • देवघर                        420
  • सरिया                        150
  • बरमसिया                         180
  • राजधनवार                        240
  • खोरिमहुआ                        240
  • मंडरो                        300
  • तीसरी                       300
  • जमुआ                       300
  • बरकट्ठा                       240
  • चतरो                         310
  • गांवा                               360
  • चकाई                      360
  • भागलपुर                      600
  • जमुई/खैरा                      480
  • सोना, डुमरी, गिद्धौर     420


द्रुतगामी वातानुकूलित डिलक्स बस सेवा (एसी बस)


मार्ग                        किराया (₹)

 

  • हजारीबाग – रांची    250
  • हजारीबाग – धनबाद    300
  • हजारीबाग – गिरिडीह    300
  • हजारीबाग – देवघर    450
  • हजारीबाग – कोडरमा    200
  • देवघर – रांची             600
  • गिरिडीह – रांची            480
  • कोडरमा – रांची             350
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

झारखंड

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लोहरदगा में दर्दनाक सड़क हादसा, शादी में जा रहे तीन भाई-बहनों की मौत

लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा जिले में शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। मिशन चौक के पास तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से स्कूटी सवार तीन भाई-बहनों की मौत हो गई। तीनों एक पड़ोसी के शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई, जबकि मृतकों के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, शहर के बरवाटोली निवासी मुकेश साहू के पड़ोस में शादी का कार्यक्रम कृषि बाजार स्थित एक धर्मशाला में आयोजित था। उसी समारोह में शामिल होने के लिए उनके बेटे 28 वर्षीय रोहित साहू, 24 वर्षीय विवाहित बेटी सपना कुमारी और 14 वर्षीय सृष्टि कुमारी एक ही स्कूटी से निकले थे। रास्ते में मिशन चौक के पास गुमला से लोहरदगा की ओर आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी।   प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक स्कूटी और उसमें सवार तीनों भाई-बहनों को काफी दूर तक घसीटता चला गया। हादसे में सपना कुमारी और सृष्टि कुमारी की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल रोहित साहू को स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल सदर अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने भी दम तोड़ दिया।   बताया जा रहा है कि मृतक सपना कुमारी गर्भवती थीं, जिससे यह हादसा और भी दर्दनाक बन गया। रोहित साहू एक निजी प्रतिष्ठान में कार्यरत थे, जबकि उनके पिता मुकेश साहू मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।इस हृदयविदारक हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला-जमीन विवाद में SC/ST एक्ट के आरोपी को नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत

रांची। रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र स्थित डाहु गांव के एक बहुचर्चित जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सुमन महतो उर्फ सुमन कुमार को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सुनाया है। यह मूल विवाद ग्राम डाहु इलाके में एक जमीन को लेकर है। शिकायतकर्ता (पीड़ित पक्ष) का आरोप था कि कोर्ट के आदेश से मिली जमीन पर उनके कब्जे को सुमन महतो और उनके परिवार द्वारा बाधित किया गया, जिसके बाद इस मामले में SC/ST एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इससे पहले 12 मई, 2026 को झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश कुमार ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि मामला प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होता है और SC/ST एक्ट की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट झारखंड हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ सुमन महतो ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि SC/ST एक्ट की धारा 18 के कड़े प्रावधानों को देखते हुए वे हाईकोर्ट के आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच के पुराने आपराधिक मुकदमों और विवाद को संज्ञान में लिया और अदालत ने सुमन महतो को 4 सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने और नियमित जमानत के लिए आवेदन करने की छूट दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरोपी की नियमित जमानत याचिका पर उसी दिन विचार कर फैसला सुनाया जाए।

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वज्रपात और हादसों में चार की मौत

रांची। मानसून की सक्रियता के बीच राज्य के विभिन्न जिलों में वज्रपात और हादसों की घटनाएं भी सामने आई हैं। गढ़वा, कोडरमा, गुमला और लातेहार में वज्रपात से चार लोगों की मौत हो गई। गढ़वा के धुरकी थाना क्षेत्र में 18 वर्षीय चंदा कुमारी की जान चली गई। वहीं एक अन्य युवक घायल हो गया। कोडरमा में दीवार गिरने से एक महिला की मौत हो गई। लातेहार और गुमला में भी वज्रपात से लोगों की जान गई। पलामू के पाटन क्षेत्र में वज्रपात से पांच लोग झुलस गए। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। पलामू, गढ़वा और चतरा में उमस वाली गर्मी मौसम विभाग ने 25 जून तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में मेघ गर्जन, वज्रपात और तेज हवा के साथ बारिश की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं पलामू फिलहाल भीषण गर्मी से झुलस रहा है। यहां का पारा 40 डिग्री सेसि के आसपास रह रहा है। तेज हवाएं चलेंगी मौसम विभाग के अनुसार आनेवाले दिनों में अधिकांश क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की आशंका है। हालांकि उत्तर-पश्चिमी जिलों पलामू, गढ़वा और चतरा में कहीं-कहीं गर्म और उमस भरा मौसम बना रह सकता है। 56 प्रतिशत कम वर्षा जारी आकड़ों के अनुसार 1 से 19 जून के बीच राज्य में सामान्य से 56 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, लेकिन अब मानसून के सक्रिय होने से स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने और खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।

abhishek singh जून 20, 2026 0
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