झारखंड

Police Warn Over Child Kidnapping Rumors

सरायकेला-खरसावां में बच्चा चोरी की अफवाहों से हड़कंप, पुलिस ने लोगों से कहा– अपुष्ट खबरों पर न करें भरोसा

surbhi मार्च 11, 2026 0
Police in Seraikela-Kharsawan warn residents about child kidnapping rumors spreading on social media.
Police Alert Over Child Kidnapping Rumors in Seraikela-Kharsawan

 

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में सोशल मीडिया पर फैल रही बच्चा चोरी और अपहरण की अफवाहों को लेकर पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है। इन अफवाहों के कारण लोगों के बीच डर और भ्रम का माहौल बन रहा है। इसे देखते हुए खरसावां पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट खबर या वायरल संदेश पर बिना जांच-पड़ताल के विश्वास न करें।

 

सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरें

पुलिस के अनुसार पिछले कुछ दिनों से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की चोरी और गुमशुदगी से जुड़ी कई तरह की खबरें तेजी से वायरल हो रही हैं। इन संदेशों के कारण कई इलाकों में लोगों के बीच आशंका और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

खरसावां थाना प्रभारी गौरव कुमार ने बताया कि पुलिस द्वारा की गई जांच में ऐसे अधिकांश मामलों को अफवाह या भ्रामक सूचना पाया गया है। उन्होंने लोगों से कहा कि किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें।

 

बिना पुष्टि के किसी सूचना पर न करें विश्वास

थाना प्रभारी गौरव कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली हर सूचना सही नहीं होती। कई बार कुछ लोग बिना जांच के ही संदेश आगे बढ़ा देते हैं, जिससे अफवाह तेजी से फैल जाती है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार की खबर पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि करें और अनावश्यक रूप से उसे आगे न फैलाएं।

 

अफवाह फैलाना और भीड़ हिंसा दोनों अपराध

पुलिस ने साफ किया है कि झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाना कानूनन अपराध है। इसके साथ ही ऐसी अफवाहों के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ मारपीट करना या भीड़ द्वारा हिंसा करना भी गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

पुलिस के अनुसार कई बार अफवाहों के कारण निर्दोष लोग भी भीड़ के गुस्से का शिकार हो जाते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।

 

संदिग्ध सूचना मिलने पर तुरंत पुलिस को दें जानकारी

पुलिस ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यदि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या सूचना सामने आती है तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। आपात स्थिति में लोग 112 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं या सीधे खरसावां थाना को जानकारी दे सकते हैं।

पुलिस का कहना है कि समाज में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आम लोगों की सतर्कता और सहयोग बेहद जरूरी है। अगर लोग अफवाहों से बचें और जिम्मेदारी से व्यवहार करें, तो ऐसी स्थितियों से आसानी से निपटा जा सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Luv Bhatia death
पंचतत्व में विलीन हुए व्यवसायी लव भाटिया

रांची। रांची के प्रसिद्ध कारोबारी और कावेरी रेस्त्रां के मालिक लव भाटिया का पार्थिव शरीर आज पंचतत्व में विलीन हो गया। उनके अंतिम संस्कार में शहर के कई बड़े कारोबारी, समाजसेवी और गणमान्य लोग शामिल हुए। अंतिम यात्रा पीपी कंपाउंड स्थित उनके आवास से निकाली गई, जो हरमू मुक्ति धाम पहुंची, जहां पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। लव भाटिया की अचानक मौत से परिवार, रिश्तेदारों और कारोबार जगत में गहरा शोक है। घर का माहौल बेहद गमगीन बना हुआ है। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि रिश्तेदार और करीबी लोग अब भी इस घटना से सदमे में हैं। बता दें कि बीते गुरुवार को लालपुर स्थित कावेरी रेस्त्रां में लव भाटिया को उल्टी करते हुए देखा गया था। इसके बाद परिजन और कर्मचारियों ने उन्हें आनन-फानन में एक निजी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आत्महत्या का अनुमान लगा रही है। बताया जा रहा है कि उनके शरीर और कपड़ों से सल्फास पाउडर के अंश मिले हैं। हालांकि पुलिस अभी पूरे मामले की जांच कर रही है और हर पहलू को खंगाला जा रहा है। लव भाटिया के निधन पर समाजसेवी और व्यवसायी कुणाल अजमानी ने गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि लव भाटिया का इस तरह अचानक चले जाना बेहद दुखद और अविश्वसनीय है। वे मिलनसार और व्यवहार कुशल व्यक्ति थे, जिनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। लव भाटिया के निधन से रांची के व्यवसाय जगत में शोक है। भाटिया परिवार के सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी आज बंद रहे। मेन रोड स्थित कैपिटल हिल्स, पंजाब स्वीट्स और कावेरी रेस्त्रां बंद रहे। हालांकि कैपिटल हिल्स होटल पूरी तरह बंद नहीं किया गया, क्योंकि वहां पहले से लोग ठहरे थे। फिलहाल पूरे शहर में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग इस दुखद घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

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रांची। झारखंड में भोजपुरी और मगही को लेकर चल रहे भाषा विवाद पर महागठबंधन के भीतर सहमति नहीं बन पाई है। जानकारी के अनुसार भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा सूची में शामिल करने के मुद्दे पर एक ओर कांग्रेस और राजद अपनी राय पर कायम हैं, जबकि दूसरी ओर झामुमो ने अलग रुख अपनाया है। इस मुद्दे पर गठबंधन के भीतर मंथन जारी है, लेकिन अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकल सका है।  कांग्रेस और राजद शामिल करने के पक्ष मे जानकारी के मुताबिक कांग्रेस और राजद इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में नजर आ रहे हैं, जबकि झामुमो की ओर से इस पर सावधानीपूर्वक विचार करने की बात कही जा रही है। भाषा पहचान और स्थानीय अस्मिता से जुड़े इस मुद्दे ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सुदिव्य सोनू कमेटी में और सदस्य चाहते है इस बीच मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भाषा समिति में अल्पसंख्यक और जनजातीय मंत्री को भी शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मसलों पर व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है, ताकि सभी वर्गों की राय को महत्व मिल सके। भाषा विवाद पर अब अंतिम फैसला मुख्यमंत्री के स्तर पर होने की संभावना है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सभी पक्षों की राय लेने के बाद इस मामले में अंतिम निर्णय ले सकते हैं। ऐसे में अब सबकी नजर मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हुई है।

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झारखंड पुलिस की सफलताः अष्टधातु की 24 तीर्थंकर प्रतिमाएं बरामद

चतरा। झारखंड के इटखोरी थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से चोरी हुई करीब 100 साल पुरानी अष्टधातु की 24 तीर्थंकर प्रतिमाएं बरामद की है। प्राचीन तीर्थंकर प्रतिमा चोरी मामले पर एसपी अनिमेष नैथानी ने बताया कि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चोरी की इस घटना का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मयूरहंड थाना क्षेत्र के साले गांव निवासी संदीप सिंह के रूप में की गई है। 100 साल पुरानी मूर्तियां बरामद एसपी अनिमेष नैथानी के अनुसार पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी गई बहुमूल्य प्रतिमा तथा घटना में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल को बरामद कर जब्त कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस अष्टधातु प्रतिमा की अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई जा रही है। लाखों की मूर्तियां 20 मई को हुई थीं चोरी उन्होंने बताया कि 20 मई को जैन मंदिर से प्रतिमा चोरी होने के बाद इटखोरी थाना में अज्ञात चोरों के विरुद्ध कांड संख्या 65/2026, धारा 305(डी) बीएनएस के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के निर्देश पर इटखोरी थाना प्रभारी अभिषेक कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी टीम गठित की गई। खुफिया खबर से पुलिस पहुंची चोरों तक इसी दौरान चतरा पुलिस टीम को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदीप सिंह को हिरासत में ले लिया। कड़ी पूछताछ में आरोपी ने जैन मंदिर से चोरी की घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। इसके बाद उसकी निशानदेही पर अष्टधातु की 24 तीर्थंकर प्रतिमा तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल को सकुशल बरामद कर लिया गया। आरोपी को नशे की लत एसपी ने बताया कि आरोपी संदीप सिंह नशे की लत का शिकार है। उसने संध्या आरती के बाद मंदिर में सूनापन देखकर चोरी की घटना को अंजाम दिया। वह इन बेशकीमती प्रतिमाओं को दिल्ली ले जाकर बेचने की फिराक में था, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पुलिस इस कांड में शामिल अन्य संभावित आरोपियों तथा इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की संलिप्तता की गहन जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि इस त्वरित कार्रवाई को अंजाम देने वाली छापेमारी टीम में मुख्य रूप से इटखोरी थाना प्रभारी अभिषेक कुमार सिंह, सहायक अवर निरीक्षक दुखीराम महतो, आरक्षी ओम प्रकाश यादव, आरक्षी अर्जुन कुमार एवं आरक्षी रविकांत सिंह शामिल थे।

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