स्वास्थ्य

5 Yoga Poses for Instant Stress Relief

सस्ते और असरदार ‘होम स्पा’ का तरीका: तनाव दूर करने वाले 5 आसान योगासन, जो मन और शरीर को देंगे गहरी राहत

surbhi मार्च 11, 2026 0
Person practicing relaxing yoga poses at home for stress relief.
5 Easy Yoga Poses for Stress Relief at Home

 

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। लंबे समय तक घर से काम करना, लगातार स्क्रीन के सामने बैठना और भागदौड़ भरी जीवनशैली हमारे शरीर और दिमाग दोनों पर दबाव डालती है। ऐसे में कई लोग तनाव से राहत पाने के लिए महंगे स्पा या थेरेपी का सहारा लेते हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सरल योगासन नियमित रूप से करने से भी शरीर और मन को वही सुकून मिल सकता है, जो एक महंगे स्पा से मिलता है। योग न केवल मानसिक तनाव को कम करता है बल्कि शरीर की मांसपेशियों में जमी थकान को भी दूर करता है।

 

तनाव और चिंता कम करने में योग कैसे मदद करता है?

योग एक प्राचीन अभ्यास है जो शरीर, मन और सांस के बीच संतुलन स्थापित करता है। जब हम योग करते हैं तो शरीर में कॉर्टिसोल (तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन) का स्तर कम होने लगता है। इससे मन शांत होता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।

इसके अलावा योगासन करने से शरीर की मांसपेशियों में जकड़न कम होती है, रक्त संचार बेहतर होता है और नींद की गुणवत्ता भी सुधरती है। यही कारण है कि नियमित योग अभ्यास तनाव प्रबंधन के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है।

नीचे दिए गए 5 सरल योगासन घर पर ही किए जा सकते हैं, जो तनाव और चिंता को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

 

1. बालासन (Child Pose)

बालासन एक बेहद आरामदायक योग मुद्रा है, जो मन को तुरंत शांत करने में मदद करती है।

कैसे करें:

  • घुटनों के बल बैठ जाएं।
  • शरीर को आगे की ओर झुकाते हुए माथा जमीन पर टिकाएं।
  • दोनों हाथों को आगे की ओर फैला दें या शरीर के पास रखें।
  • गहरी सांस लेते हुए 30–60 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें।

फायदा:
यह आसन पीठ, कंधों और गर्दन की थकान दूर करता है और मानसिक तनाव कम करता है।

 

2. मार्जरी-बीटलासन (Cat–Cow Pose)

यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और शरीर में जमा तनाव को कम करता है।

कैसे करें:

  • हाथ और घुटनों के बल टेबल पोज़िशन में आ जाएं।
  • सांस लेते हुए पीठ को नीचे की ओर झुकाएं और सिर ऊपर उठाएं (काउ पोज़)।
  • सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और ठुड्डी को छाती की ओर लाएं (कैट पोज़)।
  • इसे 10–12 बार दोहराएं।

फायदा:
यह आसन रीढ़ को आराम देता है और लंबे समय तक बैठने से होने वाले तनाव को कम करता है।

 

3. उत्तानासन (Standing Forward Bend)

यह आसन पूरे शरीर को स्ट्रेच करता है और दिमाग को शांत करता है।

कैसे करें:

  • सीधे खड़े हों और धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें।
  • हाथों को पैरों या जमीन के पास रखें।
  • सिर को ढीला छोड़ दें और गहरी सांस लें।

फायदा:
इससे मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है और मानसिक तनाव कम होता है।

 

4. विपरीत करनी (Legs Up The Wall Pose)

दिनभर की थकान और तनाव दूर करने के लिए यह बेहद सरल और प्रभावी आसन है।

कैसे करें:

  • दीवार के पास पीठ के बल लेट जाएं।
  • दोनों पैरों को दीवार के सहारे ऊपर की ओर सीधा रखें।
  • हाथों को आराम से बगल में रखें और गहरी सांस लें।
  • 5–10 मिनट तक इसी स्थिति में रहें।

फायदा:
यह आसन शरीर को गहरा आराम देता है और दिमाग को शांत करता है।

 

5. शवासन (Corpse Pose)

योग सत्र के अंत में किया जाने वाला यह आसन पूर्ण विश्राम के लिए जाना जाता है।

कैसे करें:

  • पीठ के बल सीधे लेट जाएं।
  • हाथ और पैरों को हल्का फैला लें।
  • आंखें बंद करके सांसों पर ध्यान दें।

फायदा:
यह आसन शरीर और मन को पूरी तरह रिलैक्स करता है और तनाव व चिंता को कम करता है।

 

योग करते समय रखें ये छोटी-छोटी बातें

  • शांत वातावरण में योग करें।
  • हल्का संगीत या सुगंधित मोमबत्ती माहौल को और सुकूनभरा बना सकती है।
  • हर आसन करते समय गहरी और धीमी सांस लें।
  • नियमित अभ्यास से ही इसका पूरा लाभ मिलता है।
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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आयरन की कमी से बचने के लिए खाएं ये 6 हरी चीजें

  आजकल आयरन की कमी (Iron Deficiency) एक आम समस्या बन गई है, खासकर महिलाओं में। लेकिन सही डाइट अपनाकर इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं 6 ऐसी हरी चीजों के बारे में जो आपके शरीर में आयरन की कमी नहीं होने देंगी  1. करी पत्ता (Curry Leaves) — आयरन का पावरहाउस करी पत्ता सिर्फ तड़के के लिए नहीं, बल्कि आयरन और फोलिक एसिड का बेहतरीन स्रोत है। फोलिक एसिड आयरन को शरीर में अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है। इसे चटनी बनाकर या सीधे खाएं, फेंकें नहीं। 2. पालक (Spinach) — सबसे मशहूर आयरन सोर्स पालक आयरन से भरपूर होता है और रेड ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है। हल्का उबालकर या पकाकर खाएं नींबू या टमाटर के साथ लेने से आयरन जल्दी अवशोषित होता है 3. मेथी के पत्ते (Fenugreek Leaves) — खून बढ़ाने वाली सब्जी मेथी में आयरन के साथ-साथ फाइबर और विटामिन K भी होता है। खासकर महिलाओं के लिए फायदेमंद पराठा, सब्जी या दाल में शामिल करें 4. सहजन के पत्ते (Moringa) — ‘मिरेकल फूड’ मोरिंगा के पत्तों में पालक से भी ज्यादा आयरन होता है। इसमें विटामिन C भी होता है, जो आयरन को आसानी से शरीर में पहुंचाता है पाउडर, सूप या सांभर में इस्तेमाल करें 5. चौलाई (Amaranth Leaves) — आयरन + कैल्शियम का खजाना चौलाई के पत्ते आयरन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। ये खून को मजबूत बनाते हैं स्टर-फ्राई या सब्जी के रूप में खाएं 6. सरसों का साग (Mustard Greens) — सर्दियों की ताकत सरसों का साग आयरन के साथ विटामिन A, C और K से भरपूर होता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और खून साफ करता है सर्दियों में इसे जरूर डाइट में शामिल करें जरूरी टिप्स आयरन के साथ विटामिन C लेना जरूरी है (नींबू, आंवला) चाय/कॉफी खाने के तुरंत बाद न लें (आयरन अवशोषण कम होता है) संतुलित मात्रा में सेवन करें

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नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में तेज धूप, बढ़ता पसीना और ऑयल प्रोडक्शन स्किन के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं। यही कारण है कि इस मौसम में चेहरे पर बार-बार मुहांसे (Acne) उभरते हैं। पसीना और धूल-मिट्टी की वजह से त्वचा पर गंदगी जमती है, जिससे पिंपल्स बढ़ते हैं। हाथों से बार-बार चेहरे को छूना भी बैक्टीरिया फैलाता है और समस्या को और गंभीर बना देता है। सही स्किन केयर और जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।   दिन में दो बार चेहरा धोएं गर्मी में चेहरे को साफ रखना सबसे जरूरी है। दिन में कम से कम दो बार हल्के फेस वॉश से चेहरा धोएं। इससे अतिरिक्त तेल और गंदगी हटती है और पोर्स क्लियर रहते हैं।   ऑयल-फ्री प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल हेल्दी स्किन के लिए ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र और सनस्क्रीन का उपयोग जरूरी है। ये त्वचा को हाइड्रेट रखते हैं और सूरज की हानिकारक किरणों से भी बचाते हैं।   आइस थेरेपी अपनाएं हफ्ते में दो से तीन बार आइस फेशियल करने से त्वचा की सूजन और रेडनेस कम होती है। बर्फ को सीधे चेहरे पर न लगाएं, बल्कि किसी कपड़े में लपेटकर 2-4 मिनट हल्के हाथों से रगड़ें।   घरेलू नुस्खे नीम का रस या एलोवेरा जेल रात में लगाने से त्वचा को ठंडक और मजबूती मिलती है। गुलाब जल भी चेहरे को हाइड्रेटेड और ग्लोइंग बनाता है।   चेहरे को बार-बार न छुएं हाथों की गंदगी से बैक्टीरिया फैलते हैं। इसलिए चेहरे को अनावश्यक न छुएं और हाथ हमेशा साफ रखें।   हेल्दी डाइट और पर्याप्त पानी हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और त्वचा में सुधार आता है।   पर्याप्त नींद लें नींद की कमी से स्किन की समस्या बढ़ सकती है। हर मौसम में पूरी नींद लेना जरूरी है।   क्या न करें ज्यादा केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें। पिंपल्स को दबाकर न निकलें और गंदे तौलिये या तकिये का उपयोग बंद करें।

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