Uttar Pradesh में 41 हजार से ज्यादा होमगार्ड भर्ती को लेकर युवाओं के बीच काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। लिखित परीक्षा पूरी हो चुकी है और अब अगले चरण की तैयारी चल रही है। ऐसे में कई उम्मीदवार यह जानना चाहते हैं कि होमगार्ड की नौकरी में क्या काम करना होता है, कितनी सैलरी मिलती है और चयन प्रक्रिया कैसी होती है।
होमगार्ड पुलिस और प्रशासन की सहायता करने वाला एक महत्वपूर्ण बल माना जाता है। हालांकि यह स्थायी सरकारी नौकरी नहीं होती, बल्कि स्वयंसेवक आधारित सेवा होती है।
Uttar Pradesh में होमगार्ड भर्ती के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना जरूरी है।
इसके अलावा उम्मीदवार का चरित्र अच्छा होना चाहिए और वह शारीरिक रूप से फिट होना चाहिए।
होमगार्ड राज्य में पुलिस और प्रशासन की मदद के लिए काम करते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं।
होमगार्ड को स्थायी मासिक वेतन नहीं मिलता। उन्हें ड्यूटी के हिसाब से भुगतान किया जाता है।
अगर किसी होमगार्ड को पूरे महीने यानी 30 दिन ड्यूटी मिलती है, तो उसे करीब ₹18,000 तक भुगतान हो सकता है।
इसके अलावा राज्य सरकार समय-समय पर महंगाई भत्ता (DA) भी देती है।
होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन चरणों में पूरी होती है।
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25 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं।
लिखित परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को शारीरिक मानक और दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाता है।
फिजिकल टेस्ट के बाद मेडिकल टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया जाता है। सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को होमगार्ड के रूप में चयनित किया जाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अगर आप ग्रेजुएट हैं और एक प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो SSC CGL 2026 आपके लिए बेहतरीन अवसर लेकर आया है। इस बार कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (CGL) के माध्यम से गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) में Sub-Inspector (SI) और Junior Intelligence Officer (JIO) के पदों पर भर्ती की जाएगी। SSC CGL के जरिए हर साल केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में ग्रुप-B और ग्रुप-C पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं। NCB में शामिल ये पद युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। कब शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया? SSC CGL 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 मई 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवार 22 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। फीस जमा करने की अंतिम तिथि 23 जून 2026 निर्धारित की गई है। इसके अलावा आवेदन फॉर्म में सुधार के लिए करेक्शन विंडो 29 जून से 1 जुलाई 2026 तक खुली रहेगी। Tier-1 परीक्षा का आयोजन अगस्त या सितंबर 2026 में किया जाएगा। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इन पदों के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) पास होना अनिवार्य है। आयु सीमा पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है— न्यूनतम आयु: 18 वर्ष अधिकतम आयु: 27 से 32 वर्ष आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। ऐसे करें आवेदन उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके आवेदन कर सकते हैं— SSC की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं। SSC CGL 2026 रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें। बेसिक जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन पूरा करें। लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क जमा करें। फॉर्म सबमिट करके उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। आवेदन शुल्क सामान्य, OBC और EWS वर्ग: ₹100 SC, ST और PwBD उम्मीदवार: कोई शुल्क नहीं सभी महिला अभ्यर्थियों को भी आवेदन शुल्क से छूट दी गई है। फीस का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या UPI के माध्यम से किया जा सकता है। कितनी मिलेगी सैलरी? नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में Sub-Inspector पद पे-लेवल 6 के अंतर्गत आता है। चयनित उम्मीदवारों को ₹35,400 से लेकर ₹1,12,400 प्रति माह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) समेत कई अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। युवाओं के लिए शानदार अवसर अगर आप केंद्र सरकार के प्रतिष्ठित विभाग में नौकरी करने का सपना देख रहे हैं, तो SSC CGL 2026 के जरिए NCB में भर्ती आपके लिए एक शानदार अवसर साबित हो सकती है। अच्छी सैलरी, स्थिर करियर और सरकारी सुविधाओं के कारण यह भर्ती लाखों उम्मीदवारों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड न्यायिक सेवा के अंतर्गत सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा का संशोधित रिजल्ट जारी कर दिया है। आयोग की ओर से जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक यह संशोधित रिजल्ट विज्ञापन संख्या-22/2023 के लिए सुर्प्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में तैयार किया गया है। JPSC की वेबसाइट पर देखें रिजल्ट आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी 2026 को एक न्यायिक आदेश पारित किया था। इस आदेश के अनुपालन में आयोग ने पहले एक संशोधित उत्तर कुंजी तैयार की। इसी संशोधित आंसर की को आधार बनाते हुए 10 मार्च 2024 को आयोजित की गई सिविल जज प्रारंभिक परीक्षा का नया और संशोधित परिणाम जारी किया गया है। परीक्षार्थी अपना रिजल्ट JPSC की आधिकारिक वेबसाइट www.jpsc.gov.in पर जाकर देख सकते हैं।
देहरादून, एजेंसियां। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने वर्ष 2026 के लिए देहरादून स्थित डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स एप्लीकेशन लेबोरेटरी (DEAL) में पेड इंटर्नशिप का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 45 इंटर्नशिप पदों पर योग्य छात्रों का चयन किया जाएगा। खास बात यह है कि उम्मीदवारों को किसी लिखित परीक्षा से नहीं गुजरना होगा और चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर किया जाएगा। किन विभागों में हैं अवसर? इंटर्नशिप के अवसर तीन प्रमुख इंजीनियरिंग क्षेत्रों में उपलब्ध हैं— • इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग – 20 पद • कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग – 20 पद • मैकेनिकल इंजीनियरिंग – 5 पद यह इंटर्नशिप तकनीकी क्षेत्र के छात्रों को रक्षा अनुसंधान से जुड़ी परियोजनाओं पर काम करने का अवसर प्रदान करेगी। कौन कर सकता है आवेदन? आवेदन के लिए B.Tech./B.E., M.Tech. और M.Sc. (Electronics) के छात्र पात्र हैं। • B.Tech./B.E. उम्मीदवारों ने तीसरा वर्ष या छठा सेमेस्टर पूरा किया हो या जुलाई 2026 तक पूरा करने वाले हों। • M.Tech. और M.Sc. (Electronics) के छात्रों ने पहला वर्ष या दूसरा सेमेस्टर पूरा किया हो या जुलाई 2026 तक पूरा कर लें। • उम्मीदवार AICTE मान्यता प्राप्त संस्थान से होना चाहिए। • न्यूनतम 7.0 CGPA आवश्यक है। • पहले पांच सेमेस्टर में किसी भी विषय में बैकलॉग नहीं होना चाहिए। स्टाइपेंड और प्रशिक्षण अवधि चयनित अभ्यर्थियों को कुल 30,000 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा। यह राशि दो किस्तों में मिलेगी— • 3 महीने पूरे होने पर 15,000 रुपये • 6 महीने पूरे होने पर 15,000 रुपये स्टाइपेंड प्राप्त करने के लिए प्रत्येक महीने कम से कम 15 दिन की उपस्थिति अनिवार्य होगी। महत्वपूर्ण तिथियां • आवेदन की अंतिम तिथि: 30 जून 2026 • चयनित उम्मीदवारों को सूचना: 15 जुलाई 2026 तक • इंटर्नशिप शुरू होने की तिथि: 3 अगस्त 2026 आवेदन प्रक्रिया इच्छुक उम्मीदवार DRDO की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। फॉर्म भरने के बाद आवश्यक दस्तावेजों की स्वप्रमाणित प्रतियों के साथ स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड पोस्ट के माध्यम से निर्धारित पते पर भेजना होगा। आवेदन 30 जून 2026 तक संबंधित कार्यालय में पहुंच जाना चाहिए। यह इंटर्नशिप रक्षा अनुसंधान क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए एक बेहतरीन अवसर मानी जा रही है, जहां उन्हें उद्योग और अनुसंधान का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा।