नई दिल्ली: अगर आप 12वीं के बाद कॉरपोरेट सेक्टर में एक प्रोफेशनल करियर बनाना चाहते हैं, तो Company Secretary यानी CS एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह सिर्फ कॉमर्स स्टूडेंट्स तक सीमित करियर नहीं है। मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास करने वाले विद्यार्थी इस प्रोफेशनल कोर्स की ओर आगे बढ़ सकते हैं।
कंपनी सेक्रेटरी की भूमिका किसी कंपनी में कॉरपोरेट लॉ, कानूनी अनुपालन, कॉरपोरेट गवर्नेंस, बोर्ड मीटिंग और रेगुलेटरी मामलों से जुड़ी होती है। यह कोर्स Institute of Company Secretaries of India (ICSI) द्वारा संचालित किया जाता है।
अगर आप भी CS बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले इसके पूरे रास्ते, योग्यता, परीक्षा और ट्रेनिंग को समझना जरूरी है।
12वीं के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने वाले विद्यार्थियों को सामान्य तौर पर इन चरणों से गुजरना होता है:
इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद विद्यार्थी कंपनी सेक्रेटरी के रूप में करियर की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
पहले CS कोर्स के शुरुआती स्तर को Foundation Programme के नाम से जाना जाता था, लेकिन ICSI ने अब इसकी जगह CSEET लागू किया है।
12वीं के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने वाले विद्यार्थियों को निर्धारित पात्रता पूरी करने के बाद CSEET के रास्ते आगे बढ़ना होता है।
वहीं, ग्रेजुएशन के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश का रास्ता अलग हो सकता है और उन्हें शुरुआती स्तर की परीक्षा से छूट मिलने के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
CSEET के बाद अगला चरण CS Executive Programme है। यह CS की पढ़ाई का महत्वपूर्ण स्तर है, जिसमें विद्यार्थियों को कंपनी कानून, कॉरपोरेट से जुड़े नियमों और अन्य प्रोफेशनल विषयों की जानकारी दी जाती है।
इस स्तर पर विद्यार्थियों को निर्धारित मॉड्यूल और विषयों की परीक्षा पास करनी होती है। परीक्षा की तैयारी में कॉन्सेप्ट समझने के साथ-साथ कानून और नियमों को नियमित रूप से पढ़ना महत्वपूर्ण होता है।
CS Professional Programme CS कोर्स का अंतिम शैक्षणिक चरण है। इस स्तर पर विद्यार्थियों को कॉरपोरेट और प्रोफेशनल क्षेत्र से जुड़े उन्नत विषयों की पढ़ाई करनी होती है।
Professional Programme के निर्धारित मॉड्यूल और पेपर सफलतापूर्वक पास करने के बाद विद्यार्थी ट्रेनिंग और अन्य जरूरी प्रोफेशनल औपचारिकताओं को पूरा करके CS के रूप में करियर आगे बढ़ा सकते हैं।
CS कोर्स में सिर्फ किताबों और परीक्षाओं की पढ़ाई ही नहीं होती। विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी करनी होती है, जिसमें उन्हें वास्तविक कॉरपोरेट वातावरण में काम से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी और कौशल सीखने का मौका मिलता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार ट्रेनिंग की अवधि करीब 21 महीने हो सकती है। हालांकि ट्रेनिंग और अन्य प्रोफेशनल आवश्यकताओं के मौजूदा नियम ICSI के अनुसार जांचना जरूरी है।
CS की पढ़ाई के लिए विद्यार्थी का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है। केवल कॉमर्स स्ट्रीम के विद्यार्थियों तक यह कोर्स सीमित नहीं है।
हालांकि कॉमर्स बैकग्राउंड वाले विद्यार्थियों को अकाउंटिंग, बिजनेस और कॉमर्स से जुड़े कुछ कॉन्सेप्ट पहले से परिचित हो सकते हैं, लेकिन साइंस और आर्ट्स स्ट्रीम के विद्यार्थी भी पात्रता पूरी करने पर CS की पढ़ाई कर सकते हैं।
इस करियर में सफलता के लिए नियमित अध्ययन, कानून और नियमों को समझने की क्षमता, धैर्य और निरंतर तैयारी महत्वपूर्ण है।
कंपनी सेक्रेटरी बनने के बाद कॉरपोरेट सेक्टर में कई तरह की भूमिकाओं के अवसर मिल सकते हैं। CS प्रोफेशनल्स कंपनी के कॉरपोरेट लॉ, कानूनी अनुपालन, कॉरपोरेट गवर्नेंस, बोर्ड मीटिंग, रेगुलेटरी अफेयर्स और कंपनी से जुड़े वैधानिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बड़ी कंपनियों और प्रोफेशनल सर्विस फर्मों में भी CS से जुड़े अवसर मिल सकते हैं। कॉरपोरेट सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में Deloitte, PwC, EY और KPMG जैसी बड़ी प्रोफेशनल सर्विस फर्मों में संबंधित भूमिकाओं के अवसर तलाशे जा सकते हैं।
12वीं के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने पर इसे पूरा करने में लगभग चार साल या उससे अधिक समय लग सकता है। वास्तविक अवधि विद्यार्थी की परीक्षा पास करने की गति, ट्रेनिंग और लागू प्रोफेशनल आवश्यकताओं पर निर्भर करती है।
CS की परीक्षाएं आम तौर पर जून और दिसंबर के सत्रों में आयोजित की जाती हैं। किसी स्तर पर परीक्षा पास नहीं होने की स्थिति में कोर्स पूरा करने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
अगर आपको कंपनी कानून, कॉरपोरेट गवर्नेंस, नियम-कायदे, कानूनी अनुपालन और बिजनेस से जुड़े मामलों में रुचि है, तो CS आपके लिए एक उपयोगी करियर विकल्प हो सकता है।
हालांकि सिर्फ डिग्री हासिल करने के उद्देश्य से इस कोर्स में प्रवेश लेने के बजाय इसकी पढ़ाई और प्रोफेशनल जिम्मेदारियों को समझना जरूरी है। लगातार पढ़ाई और अपडेटेड कानूनों व नियमों की जानकारी इस क्षेत्र में लंबे समय तक आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए BPSC TRE 4.0 को लेकर नया अपडेट सामने आया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग को शिक्षक भर्ती से संबंधित प्रस्ताव मिल गया है और अब आवश्यक स्वीकृति के बाद बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से भर्ती का विस्तृत विज्ञापन जारी किया जा सकता है। 32,388 पदों पर भर्ती की जानकारी ताजा रिपोर्टों में TRE 4.0 के तहत 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती की बात सामने आई है। इनमें प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षक पद शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, पदों की अंतिम संख्या और विषयवार विवरण को BPSC की आधिकारिक अधिसूचना से ही अंतिम माना जाएगा। नोटिफिकेशन का इंतजार TRE 4.0 का आधिकारिक नोटिफिकेशन अभी जारी नहीं हुआ है। प्रस्ताव और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद BPSC आवेदन की तारीख, पात्रता, शुल्क, विषयवार रिक्तियां और परीक्षा कार्यक्रम जारी करेगा। इसलिए अभ्यर्थियों को फिलहाल वायरल सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय आयोग की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए। परीक्षा और आवेदन से जुड़ी जानकारी TRE 4.0 की परीक्षा तिथि, आवेदन की शुरुआत और अंतिम तिथि जैसी महत्वपूर्ण जानकारी आधिकारिक विज्ञापन जारी होने के बाद ही निश्चित होगी। अलग-अलग रिपोर्टों में पहले अलग-अलग पद संख्या और संभावित तारीखें बताई गई हैं, इसलिए अभी किसी एक आंकड़े को अंतिम मानना उचित नहीं है। अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे अपनी शैक्षणिक डिग्री, प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, जाति/आरक्षण प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार रखें, ताकि आवेदन शुरू होने पर परेशानी न हो।
पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए अच्छी खबर है। राज्य स्वास्थ्य समिति (SHS) बिहार ने 450 विशेषज्ञ डॉक्टरों की संविदा आधारित भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार 21 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। 450 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के तहत छह विशेषज्ञ श्रेणियों में नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें सबसे अधिक 132 पद एनेस्थेटिस्ट, 115 पद पीडियाट्रिशियन, 94 पद गायनेकोलॉजिस्ट, 60 पद एमडी मेडिसिन/फिजिशियन, 27 पद जनरल सर्जन और 22 पद ऑर्थोपेडिक सर्जन के लिए निर्धारित हैं। क्या है योग्यता? आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषय में एमडी, एमएस, डीएनबी या निर्धारित डिप्लोमा (डीजीओ, डीसीएच, डीए, डी.ऑर्थो आदि) की मान्यता प्राप्त डिग्री होनी चाहिए। प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है। 1.20 लाख रुपये तक मिलेगा मानदेय चयनित विशेषज्ञ डॉक्टरों को पद और पोस्टिंग के आधार पर 90 हजार रुपये से 1.20 लाख रुपये प्रति माह तक मानदेय मिलेगा। जिला मुख्यालय से बाहर तैनात एमडी/एमएस/डीएनबी योग्य डॉक्टरों को अधिक मानदेय दिया जाएगा। ऑनलाइन करना होगा आवेदन उम्मीदवार SHS बिहार की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक विवरण, आवश्यक दस्तावेज और पोस्टिंग के लिए अधिकतम तीन जिलों की प्राथमिकता दर्ज करनी होगी। 21 अगस्त है अंतिम तिथि राज्य स्वास्थ्य समिति ने योग्य उम्मीदवारों से अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन करने की अपील की है। आवेदन प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 21 अगस्त 2026 तक जारी रहेगी।
KGBV भर्ती 2026: 261 पदों पर निकली वैकेंसी, बुलंदशहर और बरेली में होगी नियुक्ति लखनऊ, एजेंसियां। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) में नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है। KGBV भर्ती 2026 के तहत कुल 261 संविदा पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई है। ये रिक्तियां उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर और बरेली जिलों में हैं। भर्ती में शिक्षण के साथ-साथ गैर-शिक्षण पद भी शामिल बताए गए हैं। किन पदों पर होगी भर्ती? KGBV भर्ती के तहत अलग-अलग जिम्मेदारियों वाले पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इनमें प्रिंसिपल, पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT), लैब असिस्टेंट, ऑफिस सुपरिंटेंडेंट और केयरटेकर समेत अन्य पद शामिल हैं। पद के अनुसार शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें अलग-अलग निर्धारित की गई हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को संबंधित जिले की आधिकारिक भर्ती अधिसूचना में अपनी पात्रता जरूर जांचनी चाहिए। संविदा आधार पर होगी नियुक्ति यह भर्ती संविदा आधार पर की जा रही है। KGBV के माध्यम से बालिकाओं को आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं में इन कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया में पद के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और चयन प्रक्रिया लागू होगी। उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती नोटिफिकेशन में दिए गए नियमों के अनुसार आवेदन करना होगा। आवेदन से पहले जरूर जांचें नोटिफिकेशन KGBV भर्ती में अलग-अलग पदों के लिए योग्यता और आवेदन की अंतिम तिथि अलग हो सकती है। ऐसे में उम्मीदवारों को बुलंदशहर और बरेली जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी मूल विज्ञापन देखकर ही आवेदन करना चाहिए। उम्मीदवार आवेदन करने से पहले पदवार रिक्तियों, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, वेतन, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी ध्यान से पढ़ें।